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सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री को निलंबित करने के लिए ब्रिटेन पर दबाव बढ़ा
पिछले सप्ताह सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री को निलंबित करने को लेकर जो बाइडन प्रशासन के फैसले के बाद यूके में भी संसद में विभिन्न पार्टियों के सांसद और आम लोग सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री निलंबित करने की मांग कर रहे हैं।
पीपल्स डिस्पैच
09 Feb 2021
सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री को निलंबित करने के लिए ब्रिटेन पर दबाव बढ़ा

जो बाइडन प्रशासन ने पिछले सप्ताह जब से सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री निलंबित करने का निर्णय लिया है तब से यूके की कंजर्वेटिव गवर्नमेंट पर भी सऊदी अरब को हथियार बेचने को रोकने का दबाव बढ़ने लगा है। सोमवार 8 फरवरी को संसद के कई सदस्य इस मांग में शामिल हो गए कि सरकार सऊदी अरब को अपनी हथियारों की बिक्री निलंबित कर दे।

हाउस ऑफ कॉमन्स में बोलते हुए विपक्षी विदेश सचिव (shadow foreign secretary) लिसा नंडी ने कहा कि "यूके का हथियार व्यापार और तकनीकी समर्थन यमन में युद्ध का समर्थन करता है"। उन्होंने जोर देकर कहा कि हथियारों की बिक्री को लेकर अमेरिका के फैसले के बाद ब्रिटेन का सऊदी अरब के साथ हथियारों का व्यापार जारी है जो "यूके को हमारे सहयोगियों के साथ खतरनाक स्थिति में छोड़ देता है और तेजी से अलग-थलग करता है।” द गार्डियन ने इसे प्रकाशित किया है।

इसी तरह के विचार लेबर पार्टी के पूर्व प्रमुख और अब एक स्वतंत्र सांसद जेरेमी कोर्बिन द्वारा व्यक्त किए गए थे। यहां तक कि कन्जर्वेटिव पार्टी के सांसद भी इस मांग में शामिल हो गए।

इस बीच, 25 जनवरी को स्टॉप द वॉर गठबंधन ने हस्ताक्षर अभियान शुरु किया और शुरुआती दिनों में ही प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री को निलंबित करने की मांग की। अब तक, ग्रीन पार्टी के जेरेमी कॉर्बिन, कैरोलिन लुकास, लेबर पार्टी के ग्रेहामे हैरिस और स्कॉटिश नेशनल पार्टी के कुछ सांसदों सहित 20 सांसदों ने इस याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं। इसने 5 फरवरी को एक अभियान भी शुरू किया जिसमें लोगों से संसद में इस मुद्दे को उठाने के लिए अपने सांसदों को पत्र लिखने के लिए कहा गया।

हालांकि सरकार अब तक उपेक्षा करती रही है। सोमवार को कन्जर्वेटिव सरकार के मध्य पूर्व व उत्तरी अफ्रीका के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने कहा कि हालांकि उन्होंने अमेरिका के फैसले पर ध्यान दिया था लेकिन सऊदी अरब को ब्रिटेन की हथियारों की बिक्री बंद नहीं की जाएगी क्योंकि इसका दुरुपयोग रोकने के लिए सावधानीपूर्वक जांच के बाद बेचा जाता है।

एसआईपीआरआई के अनुमान के अनुसार यूके (13%) अमेरिका (73%) के बाद सऊदी अरब का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है। 2015 और 2019 के बीच यूके ने सऊदी अरब को 7 बिलियन अमेरीकी डॉलर से अधिक के हथियार बेचा जो 2010 से 2019 के बीच इसकी कुल हथियारों की बिक्री का लगभग 40% हिस्सा है।

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