NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
प्रगतिशील शक्तियों ने चिली के कंस्टिट्यूशनल कन्वेंशन में अधिकांश सीटें जीतीं
विभिन्न सामाजिक संगठनों, ट्रेड यूनियनों और अन्य संगठनों के स्वतंत्र उम्मीदवारों ने कंस्टिच्यूशनल कन्वेंशन में दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया।
पीपल्स डिस्पैच
18 May 2021
प्रगतिशील शक्तियों ने चिली के कंस्टिट्यूशनल कन्वेंशन में अधिकांश सीटें जीतीं

देश का नया संविधान लिखने का उत्तरदायित्व निभाने वाली संस्था कंस्टिच्यूशनल कन्वेंशन के 155 सदस्यों का चुनाव करने के लिए 15 और 16 मई को 6 मिलियन से अधिक चिलीवासियों ने मतदान में भाग लिया। कल देर रात चिली की एलेक्टोरल सर्विस (एसईआरवीईएल) ने प्रारंभिक परिणाम प्रकाशित कर दिया, जिसके अनुसार स्वतंत्र और वामपंथी गुटों ने शानदार जीत हासिल की और कंस्टिच्यूशनल कन्वेंशन में अधिकांश सीटें जीतीं।

इस बीच, संविधान लेखन प्रक्रिया में किसी भी सामाजिक सुधार को रोकने का संकल्प लेने वाली और स्पष्ट रूप से नए संविधान के बिल्कुल खिलाफ दक्षिणपंथी गुटों को बड़ी हार का सामना करना पड़ा।

99.13% मतों की गिनती के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों, ट्रेड यूनियनों और अन्य संगठनों के स्वतंत्र उम्मीदवार जो अक्टूबर 2019 के सामाजिक विद्रोह के दौरान उभरे थें उन्होंने 48 सीटें जीतीं। अन्य नवउदारवादी पार्टियों के बीच कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चिली, ब्रॉड फ्रंट जैसे वामपंथी राजनीतिक दलों से बनी "आई अप्रूव डिग्निटी" लिस्ट ने 28 सीटें जीती हैं। सेंटर-लेफ्ट, सोशियली डेमोक्रेटिक पार्टियों से बनी "अप्रूवल" लिस्ट ने 25 सीटें हासिल कीं।

सत्तारूढ़ गठबंधन सहित दक्षिणपंथी दलों के गठबंधन "लेट्स गो फॉर चिली" लिस्ट को सिर्फ 37 सीटें मिलीं।

इन चुनावों के साथ साथ 2021-2025 की अवधि के लिए 16 क्षेत्रीय गवर्नरों, 345 महापौरों और 2,240 नगर पार्षदों का चुनाव करने के लिए क्षेत्रीय और नगरपालिका चुनाव हुए। हालांकि इन चुनावों के अंतिम परिणाम सप्ताह के अंत तक सामने नहीं आएंगे। प्रारंभिक परिणाम से सत्ताधारी गठबंधन को इसी तरह का झटका लगता हुआ दिख रहा है। इस गठबंधन ने महत्वपूर्ण महापौर कार्यालयों और क्षेत्रीय गवर्नरों को गंवा दिया है। इस बीच, वामपंथी दलों ने अपनी नगरपालिकाओं पर जीत को बरकरार रखा और राजधानी सैंटियागो सहित देश भर में कई अन्य नगरपालिकाओं पर कब्जा जमा लिया है।

चिली के राष्ट्रपति सेबेस्टियन पिनेरा ने भी चुनावों में सत्तारूढ़ दल और पारंपरिक दलों की भारी हार और उनके प्रति लोगों के असंतोष को स्वीकार कर लिया है।

अधिकांश घटक स्पष्ट रूप से संरचनात्मक परिवर्तनों के पक्ष में हैं और पिछले पांच दशकों से मौजूद आर्थिक और राजनीतिक मॉडल के खिलाफ हैं। ऐसा लगता है कि चिली का समाज वर्तमान संविधान में प्रगतिशील परिवर्तनों को प्राप्त करने के बिल्कुल करीब है जो सामाजिक आर्थिक असमानता को बढ़ावा देता है और जिसे 1980 में जनरल ऑगस्टो पिनोशे (1973-1990) की सैन्य तानाशाही के अधीन तैयार किया गया और लागू किया गया था।

Chile
Social organizations
trade unions
SERVEL
Sebastian Piñera

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

क्या चिली की प्रगतिशील सरकार बोलीविया की समुद्री पहुंच के रास्ते खोलेगी?

ट्रेड यूनियनों की 28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, पंजाब, यूपी, बिहार-झारखंड में प्रचार-प्रसार 

यूक्रेन पर रूसी हमला जारी, क्या निकलेगी शांति की राह, चिली-कोलंबिया ने ली लाल करवट

दुनिया भर की: दक्षिण अमेरिका में वाम के भविष्य की दिशा भी तय करेंगे बोरिक

केंद्रीय बजट-2022: मजदूर संगठनों ने कहा- ये कॉर्पोरेटों के लिए तोहफ़ा है

2021 : जन प्रतिरोध और जीत का साल

2.2 करोड़ अफ़ग़ानियों को भीषण भुखमरी में धकेला अमेरिका ने, चिले में वाम की ऐतिहासिक जीत

नज़रिया : ग्रेबिएल बोरिक की जीत चिली के वामपंथ के लिए बड़ा मौक़ा

लैटिन अमेरिका दर्शा रहा है कि दक्षिणपंथी उभार स्थायी नहीं है


बाकी खबरें

  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    दूसरी लहर में 1 करोड़ भारतीय बेरोज़गार, दिल्ली के प्रवासी मज़दूरों को नहीं मिल रहा राशन और अन्य ख़बरें
    01 Jun 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हम बात करेंगे सीएमआईई के आंकड़े के अनुसार 1 करोड़ भारतीय हुए बेरोज़गार, दिल्ली में मज़दूरों को राशन नहीं और अन्य ख़बरों के बारे में।
  • छत्तीसगढ़ : “विकास के नाम पर पुनर्वास बिना दोबारा विस्थापन स्वीकार नहीं”
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    छत्तीसगढ़ : “विकास के नाम पर पुनर्वास बिना दोबारा विस्थापन स्वीकार नहीं”
    01 Jun 2021
    छत्तीसगढ़ किसान सभा ने कहा राज्य सरकार की पुनर्वास नीति लागू करे एसईसीएल
  • पिता की सैलरी रोके जाने पर कश्मीरी युवा ने खुदकुशी की, राजनीतिक पार्टियों की तरफ से जांच की अपील 
    अनीस ज़रगर
    पिता की सैलरी रोके जाने पर कश्मीरी युवा ने खुदकुशी की, राजनीतिक पार्टियों की तरफ से जांच की अपील 
    01 Jun 2021
    एक वीडियो में, 24 वर्षीय युवक ने दावा किया कि उसका परिवार अत्यधिक संकट में है, क्योंकि प्रशासन ने उसके पिता की दो वर्षों से सैलरी रोक रखी है, जो एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। 
  • वॉरियर मेट में कोयला कर्मचारियों की हड़ताल को 2 महीने पूरे हुए
    पीपल्स डिस्पैच
    वॉरियर मेट में कोयला कर्मचारियों की हड़ताल को 2 महीने पूरे हुए
    01 Jun 2021
    वॉरियर मेट कोल द्वारा सामना किए जाने वाले विरोध और कठिनाइयों के बावजूद अलबामा के सबसे बड़े मेटालर्जिकल कोल प्रोड्यूसर में लगभग 1,100 कर्मचारियों ने उचित अनुबंध के लिए अपनी हड़ताल जारी रखी है।
  • सीनियर एडवोकेट की पदवी देने में हाईकोर्ट कर रहे हैं सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा जयसिंह केस में दिए गए फ़ैसले की अवहेलना
    इंदिरा जयसिंह
    सीनियर एडवोकेट की पदवी देने में हाईकोर्ट कर रहे हैं सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा जयसिंह केस में दिए गए फ़ैसले की अवहेलना
    01 Jun 2021
    दिल्ली हाईकोर्ट, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा हाल में ‘सीनियर एडवोकेट’ की पदवी दिए जाने के लिए जो व्यक्तिनिष्ठ प्रक्रिया अपनाई गई, उस पर प्रतिक्रिया देते हुए इंदिरा जयसिंह, न्यायपालिका से उन दिशा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License