NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झारखंड में स्टेन स्वामी की गिरफ़्तारी का विरोध, ज्यां द्रेज ने कहा- ये मनमानी कार्रवाई
रांची में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एनआईए की ओर से की गई इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। मौके पर ज्यां द्रेज ने कहा कि, ‘’ये मनमाना है। सरकार जिसके चाहे उठा ले रही है। इतने उम्रदराज व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार चिंताजनक है।”
आनंद दत्त
09 Oct 2020
झारखंड
रांची में अलबर्ट एक्का चौक पर फादर स्टेन स्वामी की गिरफ़्तारी के विरोध में प्रदर्शन। फोटो : आनंद दत्त

रांची: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) मुंबई की टीम ने 83 साल के सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी को गुरुवार रात झारखंड की राजधानी रांची के नामकुम स्थिति उनके घर से गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी भीमा कोरेगांव हिंसा के मामले में हुई है। उनपर राजद्रोह की धारा लगाई गई है और यूएपीए के तहत कार्रवाई की गई है। आज शुक्रवार सुबह उन्हें विमान से मुंबई ले जाया गया, जहां विशेष एनआईए अदालत ने उन्हें 23 अक्टूबर तक के लिये न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

गिरफ्तारी को लेकर रांची में विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुका है। आज, शुक्रवार शाम चार बजे अलबर्ट एक्का चौक पर बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एनआईए की ओर से की गई इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। मौके पर ज्यां द्रेज ने कहा कि, ‘’ये मनमाना है। सरकार जिसके चाहे उठा ले रही है। इतने उम्रदराज व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार चिंताजनक है। वह कहीं जा नहीं सकते, ऐसे में उनको जेल में रखऩा बहुत ही खतरनाक है। जहां तक यूएपीए की बात है, सरकार इसका बेजा इस्तेमाल कर रही है। किसी के सोशल मीडिया पोस्ट पर यह एक्ट लगा दिया जा रहा है। जो कि संविधान और लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।’’  

image

वहीं दयामनी बारला ने कहा कि, ‘’जिस तरह अर्बन नक्सल के नाम पर देशभर में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, ये उसी की कड़ी है। स्टेन जब से सामाजिक जीवन में आए हैं, तब से जल-जंगल-जमीन के मुद्दे पर संघर्ष करते रहे हैं। उनके ऊपर गलत तरीके से केस हुआ। 2014 के बाद दलित और पिछड़ों के लिए आवाज उठाने वालों को अर्बन नक्सल बताकर जेल में डाला जा रहा है। इसका अब विरोध नहीं होगा तो कब होगा।’’  

image

इधर समर्थन में आए देशभर के दो हजार से अधिक लोग और  सामाजिक संगठनों ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्टेन स्वामी को रिहा करने की अपील की है। सबने एक साथ कहा कि स्टेन की गिरफ्तारी मानवाधिकारों और लोकतांत्रित मूल्यों का व्यापक उल्लंघन है। 

न छापने की शर्त पर मिले एक डॉक्यूमेंट के मुताबिक उनपर आईपीसी की धारा 153 ए, 505(1)(बी), 117, 120(बी), 121, 121(ए), 124(ए) और 34 लगाई गई है। इसके अलावा गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) 1967 एक्ट की धारा 13, 16, 17, 18(बी), 20, 38, 39 और 40 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

झारखंड जनाधिकार महासभा के मुताबिक एनआईए के पास कोई गिरफ्तारी वारंट भी नहीं था। एजेंसी ने उनके साथ बदसलूकी भी की। गिरफ्तारी से पहले एनआईए ने उन्हें पूछताछ के लिए मुंबई बुलाया था। खराब स्वास्थ और कोविड-19 का हवाला देकर स्टेन स्वामी ने जाने से मना किया था।

image

हेमंत सोरेन ने साधी चुप्पी, पहले हुई छापेमारी पर जता चुके हैं विरोध

जानकारी के मुताबिक 12 जुलाई 2019 में भी स्टेन स्वामी के घर में छापेमारी की गई थी। उस वक्त लैपटॉप, हार्ड डिस्क जब्त कर ले गई थी। उनके ईमेल और फेसबुक के पासवर्ड बदल दिए थे। वहीं 28 अगस्त 2018 को भी महाराष्ट्र पुलिस ने उनके कमरे की तलाशी ली थी। जिसका विरोध तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने किया था।

Back in power @BJP4India govt is back to dirty business, stifling all voices of dissent. #FatherStanSwamy has been a leading voice of tribal rights & welfare. I strongly condemn this forceful & unwarranted raids in his house. https://t.co/ZCu6Uq8YQW

— Hemant Soren (घर में रहें - सुरक्षित रहें) (@HemantSorenJMM) June 12, 2019

उन्होंने कहा था कि, “भाजपा सरकार सभी असहमति की आवाजों को दबा रही है। स्टेन स्वामी आदिवासी अधिकारों और कल्याण के एक प्रमुख आवाज रहे हैं। मैं उनके आवास पर जबरदस्ती किए गए बेबुनियाद छापे की कड़ी निंदा करता हूं।’’  

हालांकि अब मुख्यमंत्री होने के बावजूद फिलहाल उन्होंने चुप्पी साध रखी है। इधर गिरफ्तारी का विरोध करनेवालों ने हेमंत सोरेन से अपील की है कि वह इसको लेकर विरोध जताएं। साथ ही केंद्र सरकार से मांग करें कि स्टेन को रिहा करें और इस मामले को बंद करें। हेमंत की इस चुप्पी पर ज्यां द्रेज ने कहा कि ‘’अभी भी समय है, हेमंत सोरेन को इस मामले पर बोलना चाहिए।’’

गिरफ्तारी से दो दिन पहले जारी एक संदेश में स्टेन स्वामी ने कहा था कि, ‘’मुझसे एनआईए ने पांच दिनों (27-30 जुलाई व 6 अगस्त) में कुल 15 घंटे पूछताछ की। मेरे सामने उन्होंने मेरे बायोडेटा और कुछ तथ्यात्मक जानकारी के अलावा अनेक दस्तावेज़ व जानकारी रखी जो कथित तौर पर मेरे कंप्यूटर से मिली। जो कथित तौर पर माओवादियों के साथ मेरे जुड़ाव का खुलासा करते हैं। मैंने उन्हें स्पष्ट कहा कि ये छल-रचना है एवं ऐसी दस्तावेज़ और जानकारी चोरी से मेरे कंप्यूटर में डाले गए हैं। इन्हें मैं अस्वीकृत करता हूँ।’’

उन्होंने यह भी कहा था कि ‘’मेरा सिर्फ इतना कहना है कि जो आज मेरे साथ हो रहा है वैसा कई और लोगों के साथ भी हो रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता, वकील, लेखक, पत्रकार, छात्र नेता, कवि, बुद्धिजीवी और अन्य अनेक लोग, जो आदिवासियों, दलितों और वंचितों के लिए आवाज उठाते हैं और देश की वर्तमान सत्तारुढ़ ताकतों की विचारधाराओं से असहमति जताते हैं, उन्हें विभिन्न तरीकों से परेशान किया जा रहा है।’’

इस मामले में अब तक प्रसिद्ध कवि वरवरा राव, सुरेंद्र गाडलिंग, सुधीर धावले, महेश राउत, शोमा सेन, रोना विल्सन, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा, गोंजाल्विस, गौतम नवलखा को गिरफ्तार किया जा चुका है। स्टेन स्वामी इस मामले में गिरफ्तार किये गये 16वें व्यक्ति हैं।

उल्लेखनीय है कि पुणे के पास भीमा कोरेगांव में एक युद्ध स्मारक के पास एक जनवरी 2018 को हिंसा भड़क गई थी। इसके एक दिन पहले ही पुणे शहर में एल्गार परिषद का सम्मेलन हुआ था। एनआईए का आरोप है कि इसी दौरान उकसाने वाले भाषण दिये गये थे, जिसके बाद हिंसा भड़की।

एनआईए अधिकारियों का दावा है कि जांच में यह स्थापित हुआ है कि स्वामी भाकपा (माओवादी) की गतिविधियों में सक्रिय रूप से संलिप्त थे।

image

कौन हैं फादर स्टेन स्वामी

स्टेन झारखंड के जाने–माने सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह बीते कई दशक से राज्य के आदिवासियों-वंचितों के लिए काम करते रहे हैं। मूल रूप से तमिलनाडु के रहनेवाले स्टेन शुरूआत में पादरी थे। बाद में आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई के क्रम में पादरी का काम छोड़ दिया। इस दौरान उन्होंने संविधान के पांचवी अनुसूची के सही से काम न करने, पेसा कानून, वनाधिकार कानून को सही से लागू करवाने को लेकर लंबी लड़ाई लड़ी।  

इसके साथ ही झारखंड के जेलों में बंद दस हजार से अधिक विचाराधीन कैदियों को लेकर सर्वे तैयार किया। फिर इसे लेकर कोर्ट गए। राज्यभर में हुए विस्थापनों के खिलाफ लगातार आंदोलन करते रहे। इनके ऊपर पत्थलगड़ी आंदोलन के दौरान भी मुकदमा दर्ज किया गया था।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Jharkhand
Stan Swamy
National Investigation Agency
NIA
Social Worker
Koregaon-Bhima case
Supreme Court
Narendra modi
BJP
Hemant Soren

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट


बाकी खबरें

  • Sitaram Yechury
    संदीप चक्रवर्ती
    स्वतंत्रता दिवस को कमज़ोर करने एवं हिंदू राष्ट्र को नए सिरे से आगे बढ़ाने की संघ परिवार की योजना को विफल करें: येचुरी 
    25 Feb 2022
    माकपा महासचिव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का “फोकस 5 अगस्त को देश की वास्तविक स्वतंत्रता की तारीख के रूप में बढ़ावा देने पर है।"  
  • russia ukrain
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूक्रेन पर रूस के हमले से जुड़ा अहम घटनाक्रम
    25 Feb 2022
    यूरोपीय संघ रूस पर और आर्थिक एवं वित्तीय प्रतिबंध लगाने को सहमत। तो वहीं संयुक्त राष्ट्र ने यूक्रेन में मानवीय सहायता के लिए दो करोड़ डॉलर देने की घोषणा की।
  • ASHA Workers
    अनिल अंशुमन
    बिहार : आशा वर्कर्स 11 मार्च को विधानसभा के बाहर करेंगी प्रदर्शन
    25 Feb 2022
    आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिहार सरकार हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने में भी टाल मटोल कर रही है। कार्यकर्ताओं ने ‘भूखे रहकर अब और नहीं करेंगी बेगारी’ का ऐलान किया है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 13 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 302 मरीज़ों की मौत
    25 Feb 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 28 लाख 94 हज़ार 345 हो गयी है।
  • up elections
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव : अयोध्या के प्रस्तावित  सौंदर्यीकरण में छोटे व्यापारियों की नहीं है कोई जगह
    25 Feb 2022
    अयोध्या के व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि प्रस्तावित लेआउट के परिणामस्वरूप दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़े पैमाने पर ध्वस्त या उन दुकानों का ज़्यादातर हिस्सा तोड़ दिया जाएगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License