NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
कश्मीर में प्रवासी मज़दूरों की हत्या के ख़िलाफ़ 20 अक्टूबर को बिहार में विरोध प्रदर्शन
"अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद घाटी की स्थिति और खराब हुई है। इससे अविश्वास का माहौल कायम हुआ है, इसलिए इन हत्याओं की जिम्मेवारी सीधे केंद्र सरकार की बनती है।”
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
19 Oct 2021
migrant worker

जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ दिनों में बाहरी लोगों पर टार्गेटेट हमले हो रहे हैं। इसमें खासकर बिहार से आए प्रवासी मज़दूर या रेहड़ी पटरी लगाने वाले इस हमले का शिकार हो रहे हैं। अभी तक कम से कम पांच प्रवासियों की हत्या हो चुकी है। जिसमें बिहार के चार और उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम कारपेंटर भी शामिल है। हालांकि इस दौरान एक स्थानीय सिख और शिक्षक की हत्या कर दी गई थी। मशहूर दवा कारोबारी कश्मीरी पंडित मक्खनलाल बिंद्रू भी हमले का शिकार हुए। लगातार हो रहे टारगेट किलिंग से वहां बाहरी लोगों और प्रवासी मजदूरों में डर का माहौल है।

इस बीच बहुत से प्रवासी, कश्मीर से बाहर निकलना चाहा रहे हैं लेकिन आज भी सरकार मामले में कुछ भी खुलकर बताने बोलने से बच रही है। इस पूरे घटनाक्रम और कश्मीर में इस हिंसा को सरकार द्वारा रोकने में विफल होने पर बिहार के विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हैं। इन हमलो के खिलाफ वामपंथी दल भाकपा-माले ने 20 नवम्बर को राज्यभर में विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। जबकि मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने सभी प्रवासियों की सकुशल घर वापसी के लिए सरकार को पुख़्ता इंतेज़ाम करने को कहा है।

खबरों के मुताबिक़ बड़ी संख्या में जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे प्रवासी मजदूर राज्य से पलायन कर रहे हैं। हालांकि सामान्य तौर पर भी मजदूर सर्दियां शुरू होने और दीपावली के त्योहार पर अपने घर लौटते हैं लेकिन राज्य में हिंसा बढ़ जाने से वे पहले ही वहां से निकलने की कोशिश में हैं। इस दौरान रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर इनकी भारी संख्या देखी जा सकती है।

हिंदी समाचार पत्र दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक़ बिहार के रहने वाले प्रवासी मजदूर पंकज पासवान ने कहा कि वो गाड़ी पर बैठ गए है । श्रीनगर से निकल चुके हैं। उन्हें 25 अक्टूबर को घर जाना था, लेकिन पहले ही निकल गए। उन्होंने कहा कि कई लोग तो पहले ही जा चुके हैं। टीवी पर हमले की खबरें देखकर लोग डर गए हैं और अपने घर जा रहे हैं।

आपको बता दें कि शनिवार को बांका जिले के बाराहाट प्रखंड के रहने वाले अरविंद कुमार साह आतंकियों का निशाना बन गए। रविवार को बिहार के सीमांचल क्षेत्र अररिया के रहने वाले राजा ऋषिदेव और योगेंद्र ऋषिदेव की आतंकियों ने हत्या कर दी।

राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश समेत दूसरे राज्यों के लोगों की भीड़ पलायन कर रही है। इस बीच मीडिया खबरों के मुताबिक़ केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पेशल ऑपरेशन के लिए एक टीम कश्मीर भेजी है। स्पेशल टीम यहां पर आतंक फैला रहे आतंकियों का खात्मा करेगी। यह टीम दिल्ली से कश्मीर पहुंच चुकी है। हालांकि इन सबके बीच विस्तृत और औपचारिक जानकारीपूर्ण बयान नहीं आया है ,जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

कश्मीर में प्रवासी बिहारी मजदूरों की लगातार हो रही हत्या के लिए केंद्र व राज्य जिम्मेवार: माले

माले राज्य सचिव कुणाल और खेग्रामस महासचिव धीरेन्द्र झा ने संयुक्त बयान जारी करके जम्मू-कश्मीर में प्रवासी बिहारी मजदूरों की लगातार हो रही हत्याओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है और इसके लिए केंद्र व बिहार सरकार को जिम्मेवार ठहराया है।

नेताओं ने कहा कि अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद घाटी की स्थिति और खराब हुई है। इससे अविश्वास का माहौल कायम हुआ है, इसलिए इन हत्याओं की जिम्मेवारी सीधे केंद्र सरकार की बनती है।बिहार के मजदूरों पर हमला कोई नई बात नहीं है। नीतीश जी ने कोविड काल में सभी प्रवासी मजदूरों को राज्य के अंदर ही रोजगार उपलब्ध कराने का वादा किया था, वे ऐसा तो नहीं कर सके, बिहार के बाहर काम रहे मजदूरों की सुरक्षा के प्रति भी तनिक चिंतित नहीं हैं। नतीजा यह है कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक बिहारी मजदूरों के ऊपर तरह-तरह के हमले लगातार हो रहे हैं।

भाकपा-माले व खेग्रामस केंद्र व राज्य सरकार से सबसे पहले प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा की गारंटी की मांग करती है। ऐसे मजदूरों की सुरक्षा के लिए एक कानून बनाने की मांग लंबे समय से हो रही है, लेकिन सरकार उसे लगातार अनसुनी कर रही है। माले के मुताबिक बिहार सरकार ने मृतक परिजनों को 2-2 लाख रुपये की राशि देने की घोषणा की है, यह बेहद अपर्याप्त है। हमारी मांग है कि मृतक परिजनों के आश्रितों को कम से कम 20-20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए तथा परिवार में एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाए।
नेताओं ने कहा कि इन मांगों पर बुधवार 20 अक्टूबर को राज्यव्यापी प्रतिवाद आयोजित किया जाएगा।

Bihar
Bihar Protests
Jammu and Kashmir
Article 370
militants
Srinagar
Extremism

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

पटना : जीएनएम विरोध को लेकर दो नर्सों का तबादला, हॉस्टल ख़ाली करने के आदेश

बिहार: 6 दलित बच्चियों के ज़हर खाने का मुद्दा ऐपवा ने उठाया, अंबेडकर जयंती पर राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया

बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता

पटना: विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त सीटों को भरने के लिए 'रोज़गार अधिकार महासम्मेलन'

बिहार बजट सत्र: विधानसभा में उठा शिक्षकों और अन्य सरकारी पदों पर भर्ती का मामला 

बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन

बिहार : आशा वर्कर्स 11 मार्च को विधानसभा के बाहर करेंगी प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Goa
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोवा चुनावः क्या है मछली बेचने वालों के मुद्दे और भाजपा का रिपोर्ट कार्ड?
    04 Feb 2022
    गोवा एक तटीय प्रदेश है। बड़ी आबादी मछली कारोबार से जुड़ी हैं। लेकिन बावजूद इसके इनके मुद्दे पूरी चुनाव चर्चा से गायब हैं। हमने मापसा की मछली मार्केट में कुछ मछली बेचने वालों के साथ बात की है कि उनके…
  • journalist bodies
    ऋत्विका मित्रा
    प्रेस की आजादी खतरे में है, 2021 में 6 पत्रकार मारे गए: रिपोर्ट 
    04 Feb 2022
    छह पत्रकारों में से कम से कम चार की कथित तौर पर उनकी पत्रकारिता से संबंधित कार्यों की वजह से हत्या कर दी गई थी। 
  • Modi
    नीलांजन मुखोपाध्याय
    उत्तर प्रदेश चुनाव: बिना अपवाद मोदी ने फिर चुनावी अभियान धार्मिक ध्रुवीकरण पर केंद्रित किया
    04 Feb 2022
    31 जनवरी को अपनी "आभासी रैली" में प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश में पिछले समाजवादी पार्टी के "शासनकाल के डर का जिक्र" छेड़ा, जिसके ज़रिए कुछ जातियों और उपजातियों को मुस्लिमों के साथ मिलने से…
  • russia china
    एम. के. भद्रकुमार
    रुस-चीन साझेदारी क्यों प्रभावी है
    04 Feb 2022
    व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के बीच शुक्रवार को होने वाली मुलाक़ात विश्व राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने जा रही है।
  •  Lucknow
    असद रिज़वी
    यूपी चुनाव: लखनऊ में इस बार आसान नहीं है भाजपा की राह...
    04 Feb 2022
    वैसे तो लखनऊ काफ़ी समय से भगवा पार्टी का गढ़ रहा है, लेकिन 2012 में सपा की लहर में उसको काफ़ी नुक़सान भी हुआ था। इस बार भी माना जा रहा है, भाजपा को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License