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कृषि बिल से लेकर ट्रनों की आवाजाही पर रोक तक, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने क्या-क्या आरोप लगाए?
कैप्टन अमरिंदर सिंह कृषि बिल के मसले पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलना चाहते थे। लेकिन मंगलवार को राष्ट्रपति ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया था। जिसके बाद जंतर-मंतर पर अमरिंदर सिंह अपने सहयोगियों के साथ धरने पर बैठ गए।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Nov 2020
मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह

पंजाब में बीते कई महीनों से हो रहे नए कृषि कानूनों का विरोध अब दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार पर पंजाब के साथ ‘सौतेला’ व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए बुधवार, 4 नवंबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दिया। इस दौरान अमरिंदर सिंह के साथ पंजाब से कांग्रेस के सभी विधायक और सांसद भी मौजूद रहे।

बता दें कि अमरिंदर सिंह कृषि बिल के मसले पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलना चाहते थे। लेकिन मंगलवार, 3 नवंबर को राष्ट्रपति ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया था। जिसके बाद अमरिंदर सिंह अपने सहयोगियों के साथ धरने पर बैठ गए।

‘कृषि राज्य का विषय है’

मीडिया से बातचीत में अमरिंदर सिंह ने एक बार फिर दोहराया कि कृषि राज्य का विषय है और इसलिए सरकार ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए पंजाब के किसानों के हित के लिए नए कृषि बिल को पास किया। लेकिन ये बिल अभी राज्यपाल के पास पड़े हैं।

उन्होंने पंजाब के राज्यपाल की भूमिका पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “हम 20 तारीख़ को ही राज्यपाल को बिल दे आए थे लेकिन उन्होंने अभी तक उसे राष्ट्रपति के पास नहीं भेजा है। मैं राष्ट्रपति से मिलकर पंजाब की स्थिति से अवगत कराना चाहता था। उम्मीद करता हूं कि राष्ट्रपति इस बिल को स्वीकार करेंगे।”

ट्रेनों की आवाजाही को लेकर केंद्र और पंजाब सरकार में छिड़ी जंग

मालूम हो कि पंजाब में केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध को लेकर पिछले कई महीनों से किसान सड़कों पर हैं। ट्रेनों की आवाजाही निलंबित है, जिसके चलते रेलवे को करोड़ों का नुकसान तो हो ही रहा है साथ ही राज्य में भी जरूरी सामानों की आपूर्ति ठप्प हो गई है।

प्रदर्शन के बीच ट्रेनों को रास्ता देने को लेकर केंद्र और पंजाब सरकार में छिड़ी जंग के चलते भारतीय रेलवे को करीब 12 सौ करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। प्रदर्शन के चलते 2,225 मालगाड़ियों को रद्द करना पड़ा जबकि 1350 पैसेंजर ट्रेनों को या तो रद्द करना पड़ा या फिर उसके रास्ता बदला गया।


इस संबंध में रेलवे मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया को बताया, "प्रदर्शनकारियों का लगातार प्लेटफॉर्म्स या रेलवे पटरी के पास प्रदर्शन जारी है। वे सभी ट्रेने जो पंजाब से होकर गुजरती थीं, उनके ऊपर भी काफी बुरा असर पड़ा है। अभी तक करीब 1350 पैसेंजर ट्रेनों को रद्द, डायवर्ट या उसका रास्ता छोटा करना पड़ा। इसके चलते कोरोना के समय में यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा है।”

केंद्र सरकार पर लगाए कई आरोप!

केंद्र के अनुसार, पंजाब, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में आवश्यक वस्तुओं सहित सभी आवक और जावक माल परिवहन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। रेलवे मंत्रालय के मुताबिक, माल से लदी ट्रेनों समेत कई मालगाड़ियां निलंबन के चलते 15 से 20 दिनों तक फंसी रही।

वहीं इस मसले पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब एक बॉर्डर स्टेट है और हमारी सरकार किसी तरह की परेशानी नहीं चाहती। रेलवे ने सितंबर से ही मालगाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगा रखी है। जबकि किसान सिर्फ़ दो मुख्य सड़कों पर हैं, बाकी जगह ट्रेन चला देनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “मैंने रेल मंत्री से कहा कि आप ट्रेनें चलाओ, मैं ज़िम्मेदारी लेता हूं। हमारे यहां पावर प्लांट में कोयला ख़त्म हो गया। बिजली की समस्या हो गई है, हमारे पास जो पैसा बचा है हम उन पैसों से नेशनल ग्रिड से बिजली खरीद रहे हैं। ट्रेन नहीं चलेगी तो कोयला नहीं आएगा। अनाज के लिए बारदाना नहीं है, आलू के लिए खाद नहीं है। बंपर फ़सल हुई है उसके लिए रेल चाहिए। हमें बारदाना चाहिए, हमारा गोदाम पुराने अनाज से भरे पड़े हैं। बोरे नहीं आएंगे तो हम अनाज कैसे भरेंगे?

उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले तीन महीने से जीएसटी की संवैधानिक गारंटी मिलने की त्रैमासिक गारंटी अभी तक फुलफिल नहीं की गई है। यह मार्च से लंबित है और 10,000 करोड़ रुपये बकाया है। यह सौतेला व्यवहार गलत है।

गौरतलब है कि पिछले महीने पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार के कृषि संबंधी क़ानून को खारिज करने के लिए तीन नए विधेयक पारित किए गए। पंजाब ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। पंजाब सरकार की ओर से विधानसभा में पारित कराए गए विधेयकों में इस बात का खास उल्लेख किया गया कि कृषि, कृषि बाज़ार और ज़मीन प्राथमिक तौर पर राज्य के विषय हैं। हालांकि अभी इसे क़ानून बनाने के लिए राज्य के राज्यपाल और देश के राष्ट्रपति की मंजूरी मिलनी बाकी है।


क्या है इन तीन संशोधित विधेयकों में?

पहला कृषि उत्पादन, व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन बिल 2020 में एपीएमसी अधिनियम 2016 को लेकर यथास्थिति बहाल करने की बात की गई है। इस बिल में केंद्रीय कानून की धाराओं में संशोधन करने का प्रयास किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धान या गेहूं एमएसपी से कम कीमत पर न खरीदा जाए।

दूसरा बिल आवश्यक वस्तु (विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन) बिल 2020 में अनाज की जमाखोरी और कालाबजारी से बचाने का प्रावधान है। विधेयक में इस बात का ज़िक्र किया गया है कि उत्पादन, आपूर्ति और वितरण भी राज्य के विषय हैं। यह बिल पंजाब सरकार को विशेष हालात में कृषि उपज के उत्पादन, वितरण, आपूर्ति और भंडारण का विशेष अधिकार देता है ताकि किसानों और खेत-मजदूरों की रोजी-रोटी सुरक्षित की जा सके।

तीसरा विधेयक किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा (विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन) बिल 2020 में राज्य के किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर बेचने पर मजबूर होने से बचाता है। इसमें कहा गया है कि गेहूँ और धान की बिक्री तभी वैध मानी जाएगी जब केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य के बराबर या उससे अधिक पर उसकी बिक्री हो रही हो।

अगर कोई कंपनी, व्यक्ति और कॉरपोरेट हाउस किसी किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर फ़सल बेचने को मजबूर करता पाया गया तो उसे तीन साल से कम की सज़ा नहीं होगी।

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