NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
क्या केंद्र के कृषि कानूनों की काट हैं पंजाब सरकार की ओर से लाए तीन नए कृषि विधेयक?
पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार के कृषि संबंधी क़ानून को खारिज करने के लिए तीन नए विधेयक पारित किए हैं। हालांकि अभी इसे क़ानून बनाने के लिए राज्य के राज्यपाल और देश के राष्ट्रपति की मंजूरी लेनी होगी।
सोनिया यादव
22 Oct 2020
अमरिंदर सिंह
फोटो साभार : ट्विटर

केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों को लेकर बीते कई महीनों से किसान सड़कों पर हैं। देश के कई इलाकों में ज़ोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं। किसान चक्का जाम, रेल रोको और भारत बंद का आह्वान कर रहे हैं तो वहीं केंद्र सरकार अपने फैसले पर अडिग है। लेकिन अब पंजाब सरकार ने केंद्र द्वारा लाए गए तीन कृषि क़ानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए विधानसभा के विशेष सत्र में 20 अक्तूबर को तीन नए कृषि विधेयकों को पारित किया।

पंजाब ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। पंजाब सरकार की ओर से विधानसभा में पारित कराए गए विधेयकों में भी इस बात का खास उल्लेख किया गया है कि कृषि, कृषि बाज़ार और ज़मीन प्राथमिक तौर पर राज्य के विषय हैं। इन तीन विधेयकों के अलावा विधानसभा ने एक प्रस्ताव भी पारित किया, जिसमें केंद्र सरकार से अपील की गई कि वो तीनों विवादास्पद कानूनों को तुरंत रद्द करे। इसके साथ ही एमएसपी को सुरक्षित करने के लिए और खाद्यान्न की सरकारी खरीद को जारी रखने के लिए नए कानून पास करे।

क्या है इन तीन संशोधित विधेयकों में?
 
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा में कहा कि कृषि राज्य का विषय है लेकिन केंद्र सरकार ने इसे नज़रअंदाज किया है। तीनों विधेयकों में पंजाब सरकार ने दावा किया है कि केंद्र सरकार के क़ानून में मौजूद प्रावधानों को "पंजाब कृषि उपज बाज़ार अधिनियम, 1961 के तहत किसानों और खेतिहर-मजदूरों के हित और उनके जीविकोपार्जन को बचाने के लिए" बदल दिया गया है।

Passage of the our 4 Bills today is truly a victory of Punjab. I am happy that all parties came together & supported our Bills for protecting farmers against Anti-Farmer Laws passed by the Centre. I stand committed to my farmers and will not let anyone destroy their livelihoods. pic.twitter.com/qiMiNWEIXA

— Capt.Amarinder Singh (@capt_amarinder) October 20, 2020

* कृषि उत्पादन, व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन बिल 2020 – यह विधेयक राज्य में एपीएमसी अधिनियम 2016 को लेकर यथास्थिति बहाल करने की बात करता है। इस बिल में केंद्रीय कानून की धाराओं में संशोधन करने का प्रयास किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धान या गेहूं एमएसपी से कम कीमत पर न खरीदा जाए। अगर कोई शख्स या कंपनी किसानों को एमएसपी से कम कीमत पर फसल बेचने को बाध्य करती है, तो इसे अपराध माना जाएगा। कम से कम तीन साल की सज़ा और जुर्माना भी लगेगा। विधेयक में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर किसी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

केंद्र सरकार का कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून 2020 इस बात का जिक्र है कि किसान एपीएमसी मंडियों के बाहर भी अपना उत्पाद बेच सकते हैं, वो दूसरे ज़िलों और राज्यों में भी अपनी फसल बेच सकते हैं। इसके लिए उनको या उनके खरीदारों को एपीएमसी मंडियों को कोई फीस भी नहीं देनी होगी। लेकिन पंजाब की ओर से लाया गया बिल कहता है कि मंडियों के बाहर के खरीदारों को भी मंडियों के नियमों के हिसाब से चलना होगा।

* आवश्यक वस्तु (विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन) बिल 2020 - इस बिल में अनाज की जमाखोरी और कालाबजारी से बचाने का प्रावधान है। विधेयक में इस बात का ज़िक्र किया गया है कि उत्पादन, आपूर्ति और वितरण भी राज्य के विषय हैं लेकिन केंद्र सरकार की ओर से लाए गए कानून में व्यापारियों को आवश्यक वस्तुओं के स्टॉक की असीमित शक्ति दी गई है। यह बिल पंजाब सरकार को विशेष हालात में कृषि उपज के उत्पादन, वितरण, आपूर्ति और भंडारण का विशेष अधिकार देता है ताकि किसानों और खेत-मजदूरों की रोजी-रोटी सुरक्षित की जा सके।

किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा (विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन) बिल 2020 - यह बिल राज्य के किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर बेचने पर मजबूर होने से बचाता है। इसमें कहा गया है कि गेहूँ और धान की बिक्री तभी वैध मानी जाएगी जब केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य के बराबर या उससे अधिक पर उसकी बिक्री हो रही हो।

अगर कोई कंपनी, व्यक्ति और कॉरपोरेट हाउस किसी किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर फ़सल बेचने को मजबूर करता पाया गया तो उसे तीन साल से कम की सज़ा नहीं होगी।

बिल में किसानों को ये भी अधिकार दिया गया है कि किसी तरह की विवाद की स्थिति में वे सिविल कोर्ट का रुख कर सकते हैं। जबकि केंद्र के बनाए कानून के मुताबिक, किसान को विवाद में राहत के लिए पहले समझौता मंडल के पास जाना होता है, फिर एसडीएम और उसके बाद ज़िला मजिस्ट्रेट के पास।

बता दें कि केंद्र की ओर से लाए गए कृषि कानून में सबसे ज्यादा विवाद एमएसपी को लेकर ही है। पहले सहकारी मंडियों में फसल की एक न्यूनतम कीमत मिलने का प्रावधान था। लेकिन मंडी के बाहर वो न्यूनतम कीमत मिलेगी या नहीं, इसे लेकर कोई नियम केंद्र के बिल में नहीं है। ऐसे में किसानों को डर है कि किसी फसल का उत्पादन ज्यादा होने पर व्यापारी किसानों को अपनी फसल कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर कर सकते हैं।

क्या राज्यों के पास केंद्र के खिलाफ जाने का अधिकार है?

गौरतलब है कि इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी पार्टी के शासन वाले प्रदेश सरकारों से यह कहा था कि वो केंद्र सरकार के कृषि क़ानून को निष्प्रभावी करने वाले क़ानून को लाने की संभावना पर विचार करें।

उन्होंने इसके लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 254 (2) का इस्तेमाल करने की बात कही थी। ये अनुच्छेद समवर्ती सूची में शामिल विषयों से जुड़ा हुआ है। इसमें राज्य विधानसभा की ओर से इस सूची में शामिल विषयों के संबंध में क़ानून बनाया जाता है जो कि संसद द्वारा बनाए गए पहले के क़ानून के प्रावधानों, या उस विषय के संबंध में मौजूदा क़ानून के ख़िलाफ़ हैं।

इसके मुताबिक राज्य विधानसभा में बनाया गया क़ानून राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित किया गया हो और उस पर राष्ट्रपति अपनी सहमति दे दे, ऐसी स्थिति में केंद्रीय क़ानून अप्रभावी होगा और राज्य का क़ानून प्रभावी होगा। लेकिन इस अनुच्छेद के साथ शर्त ये है कि राज्य सरकारों को इन अधिनियमों के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति चाहिए होती है। इसके साथ ही अगर राष्ट्रपति अपनी स्वीकृति दे देते हैं तो भी केंद्रीय क़ानून सिर्फ़ उसी राज्य में प्रभावी नहीं होगा। ऐसे में प्रत्येक राज्य को अपना क़ानून बनाकर राष्ट्रपति की स्वीकृति लेनी होगी। इसके लिए राज्य के राज्यपाल की मंजूरी भी जरूरी है।

बता दें कि पंजाब के बाद राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की कोशिश चल रही है। ऐसे में पंजाब के इन तीन नए विधेयकों को आंदोलनरत किसानों ने आंशिक जीत बताया है। उनका कहना है कि उनकी लड़ाई जारी रहेगी। तो वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का कहना है कि अगर इन विधेयकों मंज़ूरी नहीं मिली, तो वो अदालत जाएंगे। साथ में उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें बर्खास्तगी का डर नहीं है, वो इस्तीफा साथ ही रखते हैं।

punjab
Farm Bills
Farm bills 2020
Captain Amarinder Singh
Congress
BJP
Narendra modi
modi sarkar
farmer crises

Related Stories

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

ग्राउंड रिपोर्टः डीज़ल-पेट्रोल की महंगी डोज से मुश्किल में पूर्वांचल के किसानों की ज़िंदगी

सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित

राजस्थान: अलग कृषि बजट किसानों के संघर्ष की जीत है या फिर चुनावी हथियार?

उप्र चुनाव: उर्वरकों की कमी, एमएसपी पर 'खोखला' वादा घटा सकता है भाजपा का जनाधार


बाकी खबरें

  • job advertisement
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड: असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती की शर्तों का विरोध, इंटरव्यू के 100 नंबर पर न हो जाए खेल!
    21 Dec 2021
    इन पदों के लिए आवेदन करने वाले सैकड़ों अभ्यर्थियों ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को एक ज्ञापन भेजा है। इसमें नियुक्ति का आधार एपीआई और साक्षात्कार बनाए जाने को नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के…
  •  Jayant and Akhilesh
    असद शेख़
    मुज़फ़्फ़रनगर: क्या सपा-रालोद गठबंधन किसी भी सीट से मुस्लिम उम्मीदवार नहीं देगा?
    21 Dec 2021
    चुनाव विश्लेषण: सपा-रालोद गठबंधन की ओर से ज़िले में एक भी मुस्लिम उम्मीदवार के चुनाव लड़ने की फिलहाल में कोई स्थिति बनती हुई नज़र नहीं रही है। हालांकि किसी भी पार्टी ने अपने टिकट फाइनल नहीं किए हैं,…
  • Tamil Nadu
    नीलाबंरन ए
    कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि से एमएसएमई क्षेत्र प्रभावित, विरोध में उद्यमियों ने बंद किये शटर
    21 Dec 2021
    विमुद्रीकरण, जीएसटी के हड़बड़ी में क्रियान्वयन, और बिना सोचे-विचारे कोविड-19 लॉकडाउन को लागू करने के कारण गंभीर झटके झेलने के बाद अब कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि के चलते एमएसएमई उद्योग का साँस…
  • covid
    एपी/भाषा
    अमेरिका में कोविड-19 के 75 प्रतिशत मामले ओमीक्रॉन स्वरूप के, ऑस्ट्रेलिया में भी मामले बढ़े
    21 Dec 2021
    अमेरिका के टेक्सास राज्य में ओमीक्रॉन से एक मरीज की मौत भी हो गयी है। अमेरिका में ओमीक्रॉन से से मौत का यह पहला मामला है। 
  • LIC
    गौरव गुलमोहर
    बुंदेलखंड में LIC के नाम पर घोटाला, अपने पैसों के लिए भटक रहे हैं ग्रामीण
    21 Dec 2021
    एलआईसी एजेंट गिरोह द्वारा हजारों लोगों का बीमा किया गया और उस बीमा को बिना ग्राहक की अनुमति के बीच में ही लोन में बदल दिया गया। इस तरह यह काम बांदा जिले में एलआईसी के अंतर्गत लम्बे समय से हो रहा है।…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License