NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
पंजाब चुनाव: क्या चन्नी की 'भैया' वाली टिप्पणी हताशा की निशानी है या...?
पंजाब के मुख्यमंत्री के इस बयान को कांग्रेस की अंदरूनी कलह और मतदाताओं का विकल्प के तौर पर आम आदमी पार्टी की ओर रुख़ करने के सिलसिले में उनके तरकश के आख़िरी तीर के तौर पर देखा जा रहा है।
नीलू व्यास
19 Feb 2022
Channi

हमसे विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुई बातचीत में पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने अपनी ख़ासियत और ताक़त यानी यूएसपी को लेकर पूछे गये एक-एक सवाल का जवाब दिया। उन्होंने खुलकर कहा कि उनकी कोई यूएसपी नहीं है और उन्हें अपने ख़ुद के बनाये रास्ते पर चलना पसंद है।

जिस दिन से चन्नी मुख्यमंत्री बने हैं, तब से उन्हें पता है कि इस सूबे में पार्टी को एकजुट रख पाना उनके लिए एक मुश्किल काम है और उन्हें चुनाव अभियान की अनूठी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। उन्हें पता था कि उनके और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच आंतरिक कलह उनके और पार्टी के लिए ठीक नहीं है।

चन्नी की टीम ने उनकी निम्न दलित पृष्ठभूमि के इर्द-गिर्द बेहतर ताने-बाने में बुनी एक कहानी तैयार कर दी कि वह एक ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो आधी रात को तेल जलाकर भी सुबह 4 बजे तक अपनी फ़ाइलें पलटते रहते हैं।

उनकी इस प्रतिबद्धता के बावजूद ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और भी दिखाती है। मतदाताओं के बीच चन्नी के भाषणों की काफ़ी तारीफ हो रही है। इसके साथ-साथ मतदाता उस आम आदमी पार्टी (AAP) में एक विकल्प की तलाश रहे हैं, जो शिरोमणि अकाली दल (SAD) और कांग्रेस से पैदा हुई ऊब को दिल्ली जैसे विकास के अपने वादों के साथ तोड़ती दिख रही है। 

32% अनुसूचित जाति (SC) आबादी वाले इस सूबे में पहले दलित मुख्यमंत्री के रूप में चन्नी की स्थिति अहम हो जाती है। इस तरह की सामाजिक पूंजी से संपन्न होने के बावजूद चन्नी मतदाताओं को आश्वस्त कर पाने में नाकाम होते दिख रहे हैं। अपने कुछ प्रचारित वादों के बावजूद चन्नी अपनी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में रोजगार सृजन, पलायन पर रोक और कृषि में विकास की संभावनाओं को फिर से जगा पाने असमर्थ दिखायी दे रहे हैं।

निश्चित ही रूप से राजनीतिक सेना के एकलौते सेनापति के रूप में चन्नी के साथ ऐसा नहीं हो सकता। राज्य में कांग्रेस के दूसरे लेफ्टिनेंट अपने सैनिकों में जोश भर पाने में नाकाम हैं, बल्कि वे कहीं दिख भी नहीं रहे हैं और इसका नतीजा यह है कि पार्टी की राज्य इकाई खंडित और बिखरी हुई और अस्त-व्यस्त नज़र आती है।

कांग्रेस के कार्यकर्ता चन्नी, सिद्धू और आलाकमान के विरोधाभासी फ़रमानों के बीच भ्रमित नज़र आ रहे हैं। अगर सिद्धू, सुनील जाखड़ और मनीष तिवारी ने संयुक्त मोर्चा बनाया होता या अमरिंदर सिंह की विदाई को बेहतर तरीके से संभाल लिया गया होता, तो पंजाब में कांग्रेस की जीत का रास्ता निश्चितता की ओर बहुत और ज़्यादा आगे बढ़ गया होता।

चंद महीनों में ही चन्नी को काम को अंजाम तक पहुंचाने वाले आदमी के तौर पर देखा जाने लगा है। चन्नी ने 111 दिनों में ख़ुद को साबित कर दिया है और इस तरह, चन्नी के लिए ‘चन्नी करता मसले हल’ (चन्नी समस्याओं को हल कर देते हैं) जैसे मुहावरों का इस्तेमाल होने लगा है। इसके बावजूद, वह अपनी सीमाओं से भी अच्छी तरह वाकिफ़ है। जब इस रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि उनका दुश्मन कौन है, तो उन्होंने कहा कि वह ख़ुद से ही मुक़ाबला कर रहे है; चन्नी के मुताबिक़, वह अपना प्रतिद्वंद्वी ख़ुद ही हैं।

बहुत देर से राजनीतिक मैदान में उतारे जाने के बावजूद चन्नी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है, लेकिन ऐसा उन्होंने बिना किसी के समर्थन के किया है। पिछले 48 घंटों में चुनाव प्रचार ख़त्म हो जाने के साथ ही उन्होंने 'अंदरूनी-बाहरी' बहस को पुनर्जीवित करने में कामयाबी हासिल की है, जिसे एक ऐसी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसे पंजाब में कभी भी आज़माया नहीं गया है, लेकिन, यह रणनीति तरकश के शायद आख़िरी तीर की तरह साबित हो। 

चन्नी ने प्रियंका गांधी की मौजूदगी में पंजाब के लोगों से पंजाब में उत्तर प्रदेश और बिहार के भैयाओं को नामंज़ूर करने की अपील की (उन्होंने बाद में साफ़ किया कि उनका मतलब बाहरी राजनेताओं और उन लोगों से है, जो अड़ंगा डालने आये हैं) और उन्हें शासन नहीं करने देने की अपील की, उन्हें बहुत अच्छी तरह से पता है कि यह दांव राजनीतिक रूप से उल्टा भी पड़ सकता है। उनके विरोधियों को फ़ायदा मिल सकता है; वह शायद इस बयान के राजनीतिक रूप से ग़लत होने की सचाई और उसके नतीजों को भी अच्छी तरह जानते थे, लेकिन, उनके तरकश से तीर चल चुका है।

जिस बात की आलोचना एक मुख्यमंत्री की बेतुकी टिप्पणी कहकर की जा रही है, वह पंजाब के लोगों का दिल जीतने के लिए एक मास्टरस्ट्रोक की तरह दिख रही है। कुछ लोग कहेंगे कि यह शिवसेना की किताब से कॉपी की गयी रणनीति है, लेकिन चन्नी के इस बयान ने पंजाब में उनकी स्थिति को और मज़बूत कर दिया है। यह सांस्कृतिक भिन्नता की शत्रुतापूर्ण चाल मालवा, दोआबा और माझा के तीनों क्षेत्रों में गूंज सकती है।

ज़्यादातर राजनीतिक पंडित भैया वाली इस टिप्पणी को हताशा के संकेत के तौर पर देखते हैं और जब कांग्रेस के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा हो, तो ऐसे में यह बयान चन्नी का आख़िरी दांव या जीत की उनकी आख़िरी चाल भी हो सकती है। मुख्यमंत्री बनने के बाद से अपने आस-पास के विरोधियों से घिरे एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा जाता है,जो अपने विरोधियों को कड़ी कट्टर देता रहा है।

सवाल है कि क्या वह मैदान में टिक नहीं पायेंगे या फिर बाज़ी मारेंगे? बहरहाल, बड़े शो का इंतज़ार है। लेकिन, कांग्रेस को इस जोशीले नेता से बहुत कुछ सीखना अभी बाक़ी है और कांग्रेस को यह महसूस करने की भी ज़रूरत है कि पार्टी के पास इस तरह के जोशीले नेता हैं, जो पार्टी की क़िस्मत को आगे ले जा सकते हैं,लेकिन अगर सचमुच लक्ष्य अगर जीतने का है,तो फिर केंद्रीय नेतृत्व की ओर से इस तरह के नेताओं को पूरी ताक़त के साथ समर्थन देने की ज़रूरत है।

(लेखक दिल्ली स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें:-

Punjab Elections: Is Channi's 'Bhaiya' Comment a Sign of Desperation or...?

Punjab Elections
sad
Congress
AAP
Assembly elections
Dalit CM
Insider-Outsider
Sidhu
Amrinder Singh
High Command
Charanjit Channi

Related Stories

हार्दिक पटेल का अगला राजनीतिक ठिकाना... भाजपा या AAP?

पांचों राज्य में मुंह के बल गिरी कांग्रेस अब कैसे उठेगी?

विचार: क्या हम 2 पार्टी सिस्टम के पैरोकार होते जा रहे हैं?

विधानसभा चुनाव: एक ख़ास विचारधारा के ‘मानसिक कब्ज़े’ की पुष्टि करते परिणाम 

उत्तराखंडः 5 सीटें ऐसी जिन पर 1 हज़ार से कम वोटों से हुई हार-जीत

उत्तराखंड में भाजपा को पूर्ण बहुमत के बीच कुछ ज़रूरी सवाल

गोवा में फिर से भाजपा सरकार

त्वरित टिप्पणी: जनता के मुद्दों पर राजनीति करना और जीतना होता जा रहा है मुश्किल

गोवाः बहुमत के आंकड़े से पिछड़ी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी

गोवा : रुझानों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं


बाकी खबरें

  • hapur
    न्यूज़क्लिक टीम
    हापुड़ः चौधरी चरण सिंह के गांव नूरपुर ने भाजपा के ख़िलाफ़ कसी कमर, कहा, सुधारेंगे ग़लती
    03 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह पहुंची हापुड़ में नूरपुर गांव, जो पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का गांव है। यहां के लोगों ने भाजपा प्रचारकों को भगा दिया, उन पर FIR हुई, लेकिन वह…
  •  farm
    सुजॉय तरफ़दार
    उत्तर प्रदेश: मजबूर हैं दूसरे धंधों को अपनाने के लिए ढीमरपुरा के किसान
    03 Feb 2022
    झांसी में पाहुज इलाके के ज़्यादातर गांव वाले प्रवासी मज़दूरों में बदल गए हैं। क्योंकि उनकी ज़मीन साल के ज़्यादातर वक़्त पानी के भीतर रहती है। ऊपर से उनके पास यहां संचालित मत्स्य आखेटन का ठेका हासिल…
  • Aadiwasi
    राज वाल्मीकि
    केंद्रीय बजट में दलित-आदिवासी के लिए प्रत्यक्ष लाभ कम, दिखावा अधिक
    03 Feb 2022
    दलितों और आदिवासियों के विकास के सम्बन्ध में  सरकार की बातों में जो उत्सुकता दिखाई देती है, वह 2022-23 वित्तीय वर्ष के दलितों और आदिवासियों से सम्बंधित बजट में नदारद है।  
  • Goa election
    राज कुमार
    गोवा चुनाव: विधायकों पर दल-बदल न करने का दबाव बना रही जनता, पार्टियां भी दिला रहीं शपथ
    03 Feb 2022
    पिछले विधानसभा चुनाव में 17 सीटें जीतने के बावजूद कांग्रेस सरकार नहीं बना पाई थी। जबकि भाजपा ने 13 सीटें जीतकर भी सरकार बना ली थी। अंत तक आते-आते कांग्रेस के 12 विधायक भाजपा में ही शामिल हो गये। इस…
  • union budget
    नेसार अहमद
    केंद्रीय बजट: SDG लक्ष्यों में पिछड़ने के बावजूद वंचित समुदायों के लिए आवंटन में कोई वृद्धि नहीं
    03 Feb 2022
    कुछ क्षेत्रों में मामूली वृद्धि को छोड़कर, कुल मिलाकर, बजट में वंचित समुदायों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित योजनाओं और व्यापक (अम्ब्रेला) कार्यक्रमों के लिए आवंटन में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं की गई है…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License