NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
कोविड-19 : एनबीएफ़सी के लिए आरबीआई के राहत उपायों में एनपीए का इलाज नहीं है
केंद्रीय बैंक इस बात पर फिर से चुप है कि क्या अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक एनबीएफ़सी को मोरीटेरियम दे सकते हैं जिनका 1.7 लाख करोड़ रुपये का संयुक्त क़र्ज़ जून 2020 में मैच्योर हो रहा है।
पृध्वीराज रूपावत
18 Apr 2020
Translated by महेश कुमार
RBI

नई दिल्ली: ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) की नकदी संबंधी चिंताओं के कई हलकों में जिक्र के बाद और कोविड-19 महामारी के प्रकोप और कोरोनावायरस की रोकथाम के लिए आगामी लॉकडाउन के बीच कई तिमाहियों से उठे थे, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को कहा कि वह एक और लक्षित दीर्घकालिक रेपो परिचालन (टीएलटीआरओ 2.0) करेगा जो 50,000 करोड़ रुपये की राशि के लिए किया जाएगा ताकि बैंक एनबीएफसी को कर्ज़ के प्रवाह की सुविधा को प्रदान कर सकें।

आरबीआई द्वारा घोषित अन्य उपायों में कोविड़-19 संबंधित वित्तीय तनाव को कम करने और बाजारों के सामान्य कामकाज को सरल बनाने के लिए पर्याप्त नकदी और इसके घटकों को बनाए रखना शामिल है।

टीएलटीआरओ 2.0 योजना के तहत, बैंकों को एनबीएफसी से प्रतिभूतियों के नए अधिग्रहण के मामले में योजना के तहत उधार ली गई राशि का कम से कम 50% रकम का निवेश करना होगा।

शुक्रवार को आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, “टीएलटीआरओ 2.0 के तहत बैंकों द्वारा प्राप्त धन को निवेश ग्रेड बांड, वाणिज्यिक पत्र और एनबीएफसी के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर में निवेश करना होगा, जिसमें कुल राशि का कम से कम 50% लाभ छोटे और मध्यम आकार के एनबीएफसी और एमएफआई को जाएगा।”

आरबीआई ने कहा कि इस सुविधा के तहत एक्सपोज़र को इस शर्त के तहत उस बड़े जोखिम ढांचे के तहत भी नहीं माना जाएगा जिसमें आरबीआई से नकदी प्राप्त करने के एक महीने के भीतर इसे निवेश करना होगा।

हालांकि पहले संघर्षरत एनबीएफसी क्षेत्र के लिए किए उपाय एक राहत के रूप में है, जो महामारी फैलने से पहले से नकदी के संकट का सामना कर रहै है, केंद्रीय बैंक इस बात पर फिर से चुप है कि क्या अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक उन एनबीएफसी को मोरेटेरियम दे सकते हैं जिन पर पहले से 1.7 लाख रुपये का संयुक्त ऋण है और जो जून 2020 तक परिपक्व हो जाएगा, जिसके अदा न किए जाने का जोखिम है, इसका अनुमान रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने दिया है।

इसके अतिरिक्त, आरबीआई ने एनबीएफसी को पुनर्गठन करने पर विचार किए बिना एक अतिरिक्त वर्ष तक वाणिज्यिक रियल स्टेट को दिए गए ऋणों के लिए वाणिज्यिक परिचालन शुरू करने की तारीख बढ़ाने की अनुमति दे दी है।

एनपीए का संकट 

बढ़ते एनपीए से जो वित्तीय संस्थानों दबाव में है उनको संबोधित करने के लिए आरबीआई ने दो विशिष्ट उपाय किए है। सबसे पहले, 27 मार्च को, आरबीआई ने ऋण देने वाले संस्थानों को 1 मार्च और 31 मई, 2020 के बीच पड़ने वाले वर्तमान बकाया के भुगतान पर तीन महीने की मोहलत देने की अनुमति दी है, इसने बैंकों को इस अवधि के दौरान परिसंपत्ति वर्गीकरण को स्थिर करने की बी अनुमति दे दी है।

दूसरे उपाय के रूप में, बड़े खातों के डिफ़ॉल्ट करने वाले मामलों के तहत, उधार लेने वालों के लिए वर्तमान में 20% का एक अतिरिक्त प्रावधान रखने की आवश्यकता होती है, यदि इस तरह के कर्ज़ को डिफ़ॉल्ट की तारीख से 210 दिनों के भीतर निपटाया नहीं जाता है तो, आरबीआई इसका समय अतिरिक्त बढ़ा कर 90 दिन कर दिया है। यह बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को राहत प्रदान करेगा जो इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन से गुजरने वाली संस्थाओं के लेनदार हैं।

इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ़ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, 1,961 मामले विभिन्न नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में समाधान प्रक्रिया या दिवालियापन के समाधान के लिए लंबित हैं। इसमें से 635 मामले 270 दिनों से अधिक के समाधान की प्रक्रिया के हैं और 247 मामले 180 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं।

प्रभावी रूप से, आरबीआई ने अपने ताज़ा उपायों में एनबीएफसी से पैदा एनपीए के जोखिम को संबोधित करने से परहेज किया है।

अंग्रेज़ी में लिखे मूल आलेख को आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

RBI’s COVID-19 Relief Measures for NBFCs Do Not Address NPA Concerns

NBFCs
Moratorium
Non performing assets
Resolution Plan
NPA
Liquidity Crisis
TLTRO 2.0
RBI

Related Stories

लंबे समय के बाद RBI द्वारा की गई रेपो रेट में बढ़ोतरी का क्या मतलब है?

आम आदमी जाए तो कहाँ जाए!

महंगाई 17 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर, लगातार तीसरे महीने पार हुई RBI की ऊपरी सीमा

रिपोर्टर्स कलेक्टिव का खुलासा: कैसे उद्योगपतियों के फ़ायदे के लिए RBI के काम में हस्तक्षेप करती रही सरकार, बढ़ती गई महंगाई 

आज़ादी के बाद पहली बार RBI पर लगा दूसरे देशों को फायदा पहुंचाने का आरोप: रिपोर्टर्स कलेक्टिव

RBI कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे: अर्थव्यवस्था से टूटता उपभोक्ताओं का भरोसा

बैंक निजीकरण का खेल

नोटबंदी: पांच साल में इस 'मास्टर स्ट्रोक’ ने अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया

तबाही मचाने वाली नोटबंदी के पांच साल बाद भी परेशान है जनता

नोटबंदी की मार


बाकी खबरें

  • Ukraine
    स्टुअर्ट ब्राउन
    यूक्रेन: एक परमाणु संपन्न राज्य में युद्ध के खतरे
    03 Mar 2022
    यूक्रेन के ऊपर रूस के आक्रमण से परमाणु युद्ध का खतरा वास्तविक बन गया है। लेकिन क्या होगा यदि देश के 15 परमाणु उर्जा रिएक्टरों में से एक भी यदि गोलीबारी की चपेट में आ जाए?
  • banaras
    विजय विनीत
    यूपी का रणः मोदी के खिलाफ बगावत पर उतरे बनारस के अधिवक्ता, किसानों ने भी खोल दिया मोर्चा
    03 Mar 2022
    बनारस में ऐन चुनाव के वक्त पर मोदी के खिलाफ आंदोलन खड़ा होना भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं है। इसके तात्कालिक और दीर्घकालिक नतीजे देखने को मिल सकते हैं। तात्कालिक तो यह कि भाजपा के खिलाफ मतदान को बल…
  • Varanasi District
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव : बनारस की मशहूर और अनोखी पीतल पिचकारी का कारोबार पड़ रहा है फीका
    03 Mar 2022
    बढ़ती लागत और कारीगरों की घटती संख्या के कारण पिचकारी बनाने की पारंपरिक कला मर रही है, जिसके चलते यह छोटा उद्योग ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष रहा है।
  • migrants
    एपी
    एक सप्ताह में 10 लाख लोगों ने किया यूक्रेन से पलायन: संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी
    03 Mar 2022
    संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (यूएनएचसीआर) के आंकड़ों के अनुसार, पलायन करने वाले लोगों की संख्या यूक्रेन की आबादी के दो प्रतिशत से अधिक है। विश्व बैंक के अनुसार 2020 के अंत में यूक्रेन की आबादी…
  • medical student
    एम.ओबैद
    सीटों की कमी और मोटी फीस के कारण मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं छात्र !
    03 Mar 2022
    विशेषज्ञों की मानें तो विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए जाने की दो मुख्य वजहें हैं। पहली वजह है यहां के सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में सीटों की संख्या में कमी और दूसरी वजह है प्राइवेट कॉलेजों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License