NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
कोविड टीकों को लेकर मची अफवाह यूपी की ग्रामीण आबादी को टीकाकरण से रोक रही
टीकाकरण को लेकर समूचे उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में भारी संख्या में भ्रामक सूचनायें फैल रही हैं और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
सौरभ शर्मा
25 May 2021
कोविड

लखनऊ: तीन बच्चों की मां 47 वर्षीया सरिता त्रिपाठी 45 वर्ष से उपर के लोगों के लिए टीकाकरण शुरू होने के बाद से ही कोविड-19 टीकाकरण से बचने की कोशिश कर रही हैं।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के खलीलाबाद जिले के हरिहरपुर की रहने वाली त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने टीकाकरण को लेकर बहुत सी बातें सुनी हैं जिसमें तबीयत ख़राब होने से लेकर मौत तक भी हो रही है।

वह कहती हैं “टीकाकरण को लेकर मेरे मन में बहुत सी आशंकाएं हैं। मैंने सुना है कि इसकी वजह से बहुत से लोगों की या तो मौत हो गई या बुरी तरह से बीमार हैं, इसलिए मैं तो फिलहाल इसे नहीं ले रही हूं। एक बार जब सभी लोग इसे ले लेंगे तो मैं भी अपनी सुई ले लूंगी।”

कोविड-19 टीके के बारे में इस प्रकार की धारणा रखने वालों में त्रिपाठी कोई अकेली नहीं है।

टीका न लगवाने पर अडिग वे कहती हैं “मेरे पड़ोसियों ने भी इंजेक्शन नहीं लिया है। हम इस बारे में बहुत सी ऐसी बातें सुनते आ रहे हैं जो कुछ नहीं बल्कि लोगों की जान लेने वाले टीकों के दुष्प्रभावों के बारे में है। इन दिनों लोगों के पास एकमात्र विकल्प मौत का है, या तो कोरोना से मरो या टीका लेने के बाद अपनी जान गंवाओ।”

मध्य पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सीतापुर में रामशाला गांव के निवासी इंदल कश्यप ने भी टीका नहीं लिया है, उनका कहना है कि इससे उन्हें अपनी जान से हाथ धोने का भय है।

स्नातक द्वितीय वर्ष के छात्र 22 वर्षीय कश्यप का कहना है कि “मुझे लगता है कि ये भारतीय टीके काम के नहीं हैं और टीकाकरण के बाद इनसे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने की संभावना है। मैंने अपने दोस्तों से और सोशल मीडिया के माध्यम से भी सुना है कि टीका लगवाने के बाद भी कुछ लोगों की मौतें हुई हैं।”

उनका कहना है कि उनके गांव में भी लोग इस प्रकार की सूचना (भ्रामक सूचना) के प्रसार के कारण टीका लेने से परहेज कर रहे हैं।

वे कहते है कि “स्पुतनिक या फाइजर जैसे टीकों को भारत में आने दीजिये, तब जाकर मैं टीका लगवा लूंगा। मैंने अपने माता-पिता को भी कुछ दिनों तक इंतजार करने के लिए कहा है और मैंने अखबारों में पढ़ा है कि ये टीके जल्द ही पहुंचने वाले हैं।” वे आगे कहते हैं “इन टीकों के आंकड़ों और परीक्षण को लेकर बहुत से सवाल बने हुए हैं और विदेशी टीकों से अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं, इसलिए बेहतर होगा कि उनके लिए इंतजार किया जाये।”

टीकाकरण को लेकर समूचे ग्रामीण क्षेत्रों में काफी भ्रामक सूचनाएं फैल रही हैं। एक हिंदी दैनिक में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक, बाराबंकी के सिसौदा गांव के 200 से अधिक लोग उस वक्त नदी में कूद गए जब स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम टीकाकरण अभियान के लिए गांव में पहुंची। सिसौदा गांव लखनऊ के प्रदेश मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर पूर्व में स्थित है।

दो सौ से अधिक की संख्या में ग्रामीण सरयू नदी में इस डर से कूद गए कि उन्हें जबरन टीका लगा दिया जायेगा। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ एक लंबी बातचीत के बाद कहीं जाकर ग्रामीण नदी से बाहर निकले, लेकिन इस सबके बावजूद 1500 की कुल आबादी में से मात्र 14 लोगों को ही टीका लगाया जा सका।

बाराबंकी जिले में जरवल प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक, डॉ. निखिल सिंह कहते हैं “विभाग इस बारे में कड़ी मेहनत कर रहा है, लेकिन ग्रामीणों के बीच इसको लेकर कुछ भ्रांतियां बनी हुई हैं। इसी के चलते लोगों को टीका लगाने का कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।”

डिजिटल विभाजन

जहां एक ओर ग्रामीण भारत में टीकाकरण कराये जाने के विरोध में खड़े हैं, वहीँ स्मार्टफोन के प्रति मामूली जानकारी रखने वाले नागरिकों के लिए डिजिटल विभाजन भी एक बड़ी समस्या बन गई है।

लखनऊ में देवा रोड निवासी सुभाष तिवारी इस डिजिटल विभाजन के भुक्तभोगी बन चुके हैं, क्योंकि वे अभी तक अपने टीकाकरण के लिए स्लॉट बुक नहीं कर सके हैं। 38 वर्षीय तिवारी का कहना है कि उन्हें कोविन एप्लीकेशन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है और यही वजह है कि उनको टीका नहीं लग सका। सरकार ने टीकाकरण के लिए कोविन पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण को अनिवार्य कर दिया है और वैक्सीन प्रमाण पत्र भी ऑनलाइन ही जारी किये जाते हैं।

तिवारी बताते हैं “मैं चिनहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर गया था लेकिन उन्होंने मुझसे मेरे पंजीकरण के बारे में पूछा और मेरा टीकाकरण नहीं हो सका। इसके बाद से मैं एक स्लॉट बुक करने की कोशिश में लगा हुआ हूं, लेकिन मुझे नहीं पता कि इसे कैसे करना है।”

उन्होंने बताया “पेशे से मैं एक वाहन चालक हूं। मुझे मोबाइल की जानकारी ज्यादा नहीं है और मुझे इन एप्लीकेशन्स को कैसे चलाया जाता है इसके बारे में जानकारी नहीं है। यदि यह कोई हाथ से काम की बात होती तो मेरे जैसे लोगों के लिए यह आसान हो जाता। अन्यथा हमें ताउम्र इन टीकों के बिना ही जीना पड़ेगा।”

इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने फोन पर न्यूज़क्लिक को बताया कि सरकार की ओर से सुविधा केंद्र स्थापित किये जाने के बारे में एक आदेश पारित हुआ है, जहां पर लोग निःशुल्क टीकाकरण के लिए खुद को पंजीकृत करा सकते हैं।

टीके को लेकर अफवाह और डर

एक आशा कर्मी रेनू सिंह जिनकी लखनऊ के बक्शी का तालाब इलाके में तैनाती है, उनका कहना है कि आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उन ग्रामीणों के काफी विरोध और गुस्से का सामना करना पड़ रहा है, जो टीका लगाने के बिल्कुल भी मूड में नहीं हैं।

सिंह ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में बताया “हम सभी लोग स्वास्थ्य विभाग के पैदल सैनिक हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को टीका लगवाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं, लेकिन टीके को लेकर यहां पर अनेकों भ्रांतियां बनी हुई हैं। लोगों के विचार में इंजेक्शन लेने के बाद उनकी मौत हो सकती है। टीके की खुराक लेने के बाद जो बुखार आ रहा है, उसने इस आग में ईंधन डालने का काम किया है। यह काफी कठिन है। हमें यह भी पता चला है कि आशा कर्मियों को, विशेषकर बुंदेलखंड के क्षेत्र में ग्रामीणों द्वारा डराया-धमकाया जा रहा है।”

भारत के सबसे पिछड़े जिलों में से एक बहराइच के एक वरिष्ठ पत्रकार, अज़ीम मिर्ज़ा इस स्थिति के लिए जागरूकता अभियान की कमी को दोष देते हैं। वे कहते हैं “सरकार की ओर से संवादहीनता के चलते ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। लोग टीकाकरण से आतंकित हैं। सिर्फ मौत हो जाने जैसी अफवाहों से ही नहीं बल्कि टीकाकरण के जरिये शरीर में माइक्रोचिप फिट करने जैसी अफवाहों ने भी टीकाकरण अभियान को भारी नुकसान पहुंचाने का काम किया है और इसे स्वास्थ्य विभाग के लिए दुष्कर कार्यभार बना दिया है।”

लखनऊ में लोक भवन (मुख्यमंत्री के कार्यालय) में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज़क्लिक को बताया कि जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने का निर्णय लिए जाने की उम्मीद है क्योंकि कुछ जिलों से टीकाकरण को लेकर अफवाहों की समस्या देखने को मिल रही है।

उत्तरप्रदेश में सूचना विभाग के निदेशक, शिशिर सिंह के मुताबिक, अभी तक 1,29,28,280 लोगों को टीके की पहली खुराक और 33,47,533 लोगों को दूसरी खुराक दी जा चुकी है। कुल मिलाकर अब तक 1,62,75,813 लोगों को टीके लग चुके हैं। हालांकि अधिकारी ने फोन पर पूछे गए टीकाकरण के प्रयासों को लेकर अफवाहों पर लगाम लगाने के सरकार के प्रयासों का जवाब नहीं दिया।

अतिरिक्त मुख्य सचिव नवनीत सहगल के अनुसार “यूपी में रविवार के दिन कोविड-19 के 4,800 नए मामले दर्ज किये गए। सक्रिय मामले सोमवार को लगभग 84,800 रहे, जो पिछले 20 दिनों में सबसे अधिक लगभग 2,26,000 की तुलना में कम है। 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Raging Rumours over Covid Vaccines Stopping UP’s Rural Population from Getting Inoculated

Uttar pradesh
Vaccine Rumours
COVID19 Vaccine
Vaccination Drive

Related Stories

क्या कोविड के पुराने वेरिएंट से बने टीके अब भी कारगर हैं?

यूपी चुनाव : योगी काल में नहीं थमा 'इलाज के अभाव में मौत' का सिलसिला

यूपी चुनाव: बग़ैर किसी सरकारी मदद के अपने वजूद के लिए लड़तीं कोविड विधवाएं

लखनऊ: साढ़ामऊ अस्पताल को बना दिया कोविड अस्पताल, इलाज के लिए भटकते सामान्य मरीज़

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण तनाव और कोविड संकट में सरकार से छूटा मौका, कमज़ोर रही मनरेगा की प्रतिक्रिया

अब यूपी सरकार ने कहा,''ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई कोई मौत'’, लोगों ने कहा- ज़ख़्मों पर नमक छिड़कने जैसा!

यूपी: कोविड-19 के असली आंकड़े छुपाकर, नंबर-1 दिखने का प्रचार करती योगी सरकार  

उत्तर प्रदेश : बिजनौर के निज़ामतपुरा गांव में कोविड-19 ने जीवन को पीछे ढकेला

प्रयागराज: गंगा के तट पर फिर से देखने को मिले 100 से अधिक संदिग्ध कोविड पीड़ितों के शव  

यूपी में कोरोनावायरस की दूसरी लहर प्रवासी मजदूरों पर कहर बनकर टूटी


बाकी खबरें

  • प्रियंका शंकर
    रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच, नॉर्वे में नाटो का सैन्य अभ्यास कितना महत्वपूर्ण?
    19 Mar 2022
    हालांकि यूक्रेन में युद्ध जारी है, और नाटो ने नॉर्वे में बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जो अभ्यास ठंडे इलाके में नाटो सैनिकों के युद्ध कौशल और नॉर्वे के सैन्य सुदृढीकरण के प्रबंधन की जांच करने के…
  • हर्षवर्धन
    क्रांतिदूत अज़ीमुल्ला जिन्होंने 'मादरे वतन भारत की जय' का नारा बुलंद किया था
    19 Mar 2022
    अज़ीमुल्ला ख़ान की 1857 के विद्रोह में भूमिका मात्र सैन्य और राजनीतिक मामलों तक ही सिमित नहीं थी, वो उस विद्रोह के एक महत्वपूर्ण विचारक भी थे।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: महंगाई-बेरोजगारी पर भारी पड़ी ‘नमक पॉलिटिक्स’
    19 Mar 2022
    तारा को महंगाई परेशान कर रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल…
  • इंदिरा जयसिंह
    नारीवादी वकालत: स्वतंत्रता आंदोलन का दूसरा पहलू
    19 Mar 2022
    हो सकता है कि भारत में वकालत का पेशा एक ऐसी पितृसत्तात्मक संस्कृति में डूबा हुआ हो, जिसमें महिलाओं को बाहर रखा जाता है, लेकिन संवैधानिक अदालतें एक ऐसी जगह होने की गुंज़ाइश बनाती हैं, जहां क़ानून को…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश विधानसभा निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित, उठे सवाल!
    19 Mar 2022
    मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित कर दिया गया। माकपा ने इसके लिए शिवराज सरकार के साथ ही नेता प्रतिपक्ष को भी जिम्मेदार ठहराया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License