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रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा
आंदोलनकारियों पर बर्बर पुलिसिया हिंसा के खिलाफ देशभर के छात्र लामबंद हो रहे हैं। इस बीच बुधवार की देर रात पटना के पत्रकार नगर थाने में पुलिस ने इस प्रदर्शन के पीछे कोचिंग संचालकों की भूमिका को मानते हुए खान सर समेत प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराने वाले कई कोचिंग संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
27 Jan 2022
 रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा

रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड(आरआरबी) के एनटीपीसी और ग्रुप डी परीक्षा धांधली को लेकर जारी आंदोलन लगातर व्यापक हो रहा है। खासकर जबसे पुलिस ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जिस तरह से आंदोलनकारियों पर बर्बर पुलिसिया दमन हुआ उसने आंदोलन को और उग्र किया है। पुलिसिया हिंसा के खिलाफ देशभर के छात्र लामबंद हो रहे हैं। आज दिल्ली और उत्तर प्रदेश के छात्रों ने प्रदर्शन किया, तो वही सोशल मी डिया व अन्य माध्यमों से देशभर के युवा और छात्र इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। हालाँकि इस बीच रेलवे ने छात्रों की मांग पर विचार करने के लिए एक कमेटी का गठन किया है। परन्तु छात्र इस पर भी संदेह कर रहे हैं और उन्होंने अपना विरोध जारी रखा है।

इस बीच बुधवार की देर रात पटना के पत्रकार नगर थाने में पुलिस ने इस प्रदर्शन के पीछे कोचिंग संचालकों की भूमिका को मानते हुए खान सर समेत प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराने वाले छह शिक्षक एसके झा, नवीन, अमरनाथ, गगन प्रताप और गोपाल वर्मा समेत कई कोचिंग संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इन पर छात्रों को भड़काने और हिंसा फैलाने की साजिश रचने का आरोप है। 

हालांकि, आज गुरुवार को कई छात्र संगनों ने दिल्ली में रेल भवन पर विरोध प्रदर्शन किया। वहीं छात्र संगठन आइसा व नौजवान संगठन इनौस ने आरआरबी एनटीपीसी की परीक्षा के रिजल्ट में धांधली तथा ग्रुप डी की परीक्षा में एक की जगह दो परीक्षाएं लेने के खिलाफ 28 जनवरी को बिहार बंद का आह्वान किया है। हालंकि सरकार ने फिलहाल ग्रुप डी की परीक्षा को रद्द कर दिया है।

बिहार में जिस तरह आंदोलनरत छात्रों पर पुलिसिया दमन हुआ, उसके खिलाफ क्रांतिकारी युवा संगठन के कार्यकर्ताओं ने बिहार भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।

उन्होंने मांग की है कि छात्रों की सब समस्याओं का निवारण किया जाए, आंदोलनरत छात्रों के खिलाफ किए गए सभी पुलिस केस तुरंत वापस लिए जाएं, परीक्षा अपने नियत समय से कराई जाएं जिससे छात्रों को नुकसान न हो, और आंदोलनकारियों पर हमले करने वाले सभी पुलिस अधिकारियों और अन्य अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

दुनिया में सबसे अधिक युवा आबादी वाला देश भारत है। लेकिन इस युवा आबादी के भविष्य के साथ किस तरह से खिलवाड़ किया जा रहा है, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि रेलवे की एक भर्ती जिसका रजिस्ट्रेशन हुए 3 साल से भी अधिक का वक़्त को चुका है, आज तक उस भर्ती की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है।

 

ध्यान रहे कि लोकसभा 2019 का चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई के बीच सात चरणों मे पूरा हुआ था और इसी चुनाव से ठीक पहले रेलवे में बम्पर भर्ती का ऐलान किया गया, जिसके तहत रेलवे ग्रुप-डी की भर्ती के लिए 12 मार्च 2019 से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू की गई। रजिस्ट्रेशन से लेकर आज तक 3 साल से ज़्यादा हो चुके हैं, परीक्षाओं की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई है जॉइनिंग के क्या ही कहने!

क्या है पूरा मामला?

साल 2019 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड(आरआरबी) की तरफ से रेलवे में एक लाख से अधिक पदों के वायदे के साथ बंपर भर्ती की घोषणा की गई, जिसके बाद हज़ारों-लाखों बेरोज़गार युवाओं को अपने भविष्य को लेकर एक उम्मीद की किरण दिखाई दी, क्योंकि घनघोर बेरोज़गारी के दौर में इस तरह का ऐलान अपने आप में ही उम्मीदों का एक बड़ा पुलिंदा था।

उपरोक्त सभी हालातों के बाद रेलवे ने एनटीपीसी और ग्रुप-डी की भर्ती के लिए 1 मार्च 2019 और 12 मार्च 2019 को रजिस्ट्रेशन चालू किए, जिसके बाद करीब 1.4 लाख पदों के लिए 2.4 करोड़ से भी अधिक आवेदन प्राप्त किए गए, जो हिंदुस्तान में रोज़गार और नौकरी के सूरत-ऐ-हाल को बखूबी बयां करता है।

इसका एग्जाम 2021 में संपन्न हुआ और इसका परिणाम हाल ही में 15 जनवरी को घोषित हुआ है। एनटीपीसी परीक्षा के जारी परिणाम में भारी धांधली की आशंका जाहिर करते हुए आक्रोशित छात्र-छात्राओं ने 24 जनवरी, 2022 को बिहार के पटना और आरा रेलवे ट्रैक पर इकट्ठा होकर ट्रेनों की आवाजाही को ठप कर दिया। छात्रों का कहना था कि रेलवे ग्रुप डी की भर्ती के लिए केवल एक परीक्षा करवाने की बात कही थी, लेकिन जब परीक्षा शुरू होने की बारी आयी तो उस परीक्षा को प्री-मेंस में तब्दील कर दिया गया है, जो छात्रों के हित में कतई नहीं है; बल्कि इसे संज्ञेय अपराध की श्रेणी में गिना जाए। उक्त प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में बिहार के बक्सर, मोतीहारी, गया सहित कई जिलों में आज भी प्रतियोगी छात्र-छात्राओं का विरोध प्रदर्शन जारी है।

आज के दौर में सरकारों की बेशर्मी और लापरवाही के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के जीवन का दूसरा नाम ही संघर्ष हो गया है। प्रतिकूल परिस्थितियों में तैयारी का संघर्ष, अधिसूचना जारी होने के बाद परीक्षा तारीखों के लिए संघर्ष, परीक्षा हो जाने के बाद परिणामों के लिए संघर्ष, फिर जॉइनिंग के लिए संघर्ष और ना जाने कितने ही ऐसे संघर्ष। संघर्ष की इसी कड़ी में छात्रों ने एक 'डिजिटल आंदोलन' किया था लेकिन इससे सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी थी।

RRB-NTPC परीक्षा धांधली को लेकर जारी आंदोलन के पक्ष में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने भी आवाज़ बुलंद की

भारतीय रेलवे के एनटीपीसी के परीक्षा परिणाम में धांधली और भ्रष्टाचार को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वाले प्रतियोगी छात्रों के साथ पटना (बिहार) एवं इलाहाबाद (प्रयागराज) में हुई बर्बरता के खिलाफ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के छात्र भी मजबूती से खड़े हैं। उक्त दोनों स्थानों पर छात्रों के साथ हुई बर्बरता के खिलाफ कल मंगलवार को भी बीएचयू के आक्रोशित छात्रों ने विरोध सभा का आयोजन किया था। 26 जनवरी,2022 बुधवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर बीएचयू विश्वनाथ मंदिर से लंका गेट तक निकाले गये पैदल मार्च एवं सभा में शामिल छात्रों ने एक स्वर में कहा कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और यहां अध्ययनरत छात्र इलाहाबाद-पटना ही नहीं बल्कि देशभर के उन छात्रों के साथ खड़े हैं, जो रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर सत्ता को घेरने का काम करते हैं। आमजन से जुड़े हुए मुद्दे पर सवाल उठाने का काम करते हैं।

पैदल मार्च एवं सभा में शामिल छात्रों का स्पष्ट कहना था कि जब गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देशभर में आमजन से लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री एक-दूसरे को बधाई और शुभकामनाएं दे रहे थे; ईमानदारी और निस्वार्थ भाव से वोट डालने-डलवाने की कसमें खा रहे थे, ठीक उसी समय यूपी के मुख्यमंत्री योगी जी ने अपने आका मोदी के चेहरे का चमक बनाए रखने के लिए इलाहाबाद (प्रयागराज) के छोटा बघाड़ा-सलोरी के करीब आधे दर्जन से अधिक प्राइवेट लॉजों में पुलिस को घुसवाकर प्रतियोगी छात्रों के ऊपर लाठियां बरसाई हैं। इलाहाबाद की घटना के ठीक एक दिन पहले पटना (बिहार) में भी नितीश कुमार ने भी वही किया, जो यूपी की तानाशाही सरकार ने की है। भाजपा और उसकी समर्थक पार्टियां एवं नेता नहीं चाहते हैं कि किसी प्रकार का चुनाव जनता के मुद्दे- शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा पर हो; इसलिए भाजपा और एनडीए सरकार बार-बार जनता के मुद्दे को गायब करने के लिए चाल रही है। वह कभी आपके बहस को हिन्दू-मुस्लिम/मंदिर-मस्जिद के इर्द-गिर्द केन्द्रित करना चाहती है तो कभी हमारी मांग को कुचलने के लिए तानाशाही रवैए अपना लेती है। यूपी-बिहार में डबल इंजन की सरकार होने के बाद भी बेरोजगारी का आलम आजादी के बाद से सबसे अधिक है, जबकि इसी भाजपा ने सालाना दो करोड़ सरकारी नौकरियां देने की बात कही थी। इलाहाबाद और पटना में प्रतियोगी छात्रों के साथ हुई बर्बरता भी रोजगार और भ्रष्टाचार से जुड़ी हुई घटना है। इसलिए अंग्रेजों से लड़कर मिले लोकतंत्र के गणतंत्र दिवस पर अपने हक़-हकूक की लड़ाई और इलाहाबाद-पटना में रहने वाले प्रतियोगी छात्रों के साथ हुई बर्बरता के खिलाफ आज काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के आक्रोशित छात्रों ने पैदल मार्च निकालकर सभा का आयोजन किया और सत्ता के समक्ष विरोध जताकर अपनी बातें रखी।

जांच कमिटी बनाने का प्रस्ताव झांसा, 28 जनवरी को होगा बिहार बंद

छात्र संगठन आइसा व नौजवान संगठन इनौस ने आरआरबी एनटीपीसी की परीक्षा के रिजल्ट में धांधली तथा ग्रुप डी की परीक्षा में एक की जगह दो परीक्षाएं आयोजित करने के तुगलकी फरमान के खिलाफ चल रहे छात्र-युवा आंदोलन के दबाव में रेलवे प्रशासन द्वारा पहले मामले में जांच कमिटी बनाने और ग्रुप डी की परीक्षा को स्थगित करने के दिए गए आश्वासन को झांसा बताते हुए 28 जनवरी के बिहार बंद को जारी रखने का आह्वान किया है।

इनौस के राष्ट्रीय अध्यक्ष व अगिआंव विधायक मनोज मंजिल, आइसा के महासचिव व विधायक संदीप सौरभ, इनौस के मानद राज्य अध्यक्ष व विधायक अजीत कुशवाहा, इनौस के राज्य अध्यक्ष आफताब आलम, आइसा के राज्य अध्यक्ष विकास यादव, इनौस के राज्य सचिव शिवप्रकाश रंजन व आइसा के राज्य सचिव सब्बीर कुमार ने आज फिर से संयुक्त प्रेस बयान जारी करके कहा है कि अभ्यर्थियों द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर किसी भी प्रकार का संदेह नहीं है। चरम बेरोजगारी की मार झेल रहे छात्र-युवाओं का यह व्यापक आंदोलन ऐसे वक्त खड़ा हुआ है, जब यूपी में चुनाव है। इसी के दबाव में सरकार व रेलवे का यह प्रस्ताव आया है और चुनाव तक इस मामले को टालने की साजिश रची जा रही है। लेकिन विगत 7 वर्षों से देश के युवा मोदी सरकार के छलावे को ही देखते आए हैं और यही वजह है कि उनका गुस्सा इस स्तर पर विस्फोटक हुआ है।

आइसा-इनौस नेताओं की मांग है कि रेल मंत्रालय 7 लाख संशोधित रिजल्ट फिर से प्रकाशित करे।

संयुक्त बयान में कहा गया कि जहां तक ग्रुप डी का मामला है, उसमें परीक्षा स्थगित की गई है. यह समझ से परे है कि ग्रुप डी तक की नौकरियों के लिए दो परीक्षा क्यों होगी? इसमें भी अभ्यर्थियों की साफ मांग है कि पहले के नोटिफिकेशन के आधार पर केवल एक परीक्षा ली जाए और दूसरे नोटिफिकेशन को रद्द किया जाए. इसमें भी कोई कन्फयूजन नहीं है. रेलवे जानबूझकर मामले को उलझा रहा है. छात्र-युवा इस बार सरकार के झांसे में नहीं आने वाले हैं.

आइसा-इनौस नेताओं ने तमाम अभ्यर्थियों से सरकार की असली मंशा को बेनकाब करने तथा 28 जनवरी के बिहार बंद को जोरदार ढंग से सफल बनाने का आह्वान किया।

डिजिटल इंडिया के क्या यही मायने हैं?

सरकारी दावों से परे मोदी दौर में रिकॉर्ड बेरोज़गारी एक जगजाहिर फैक्ट है, जिस बात से खुद मोदी समर्थक भी खुलकर इंकार नहीं कर पाते हैं। ऐसे में सवाल यही है कि युवा शक्ति और युवा जोश की बातें क्या नेता जी के लच्छेदार भाषणों के लिए महज़ अलंकार बनकर रह गयी हैं या असल जिंदगी में भी इसके कोई मायने हैं? क्योंकि एक ओर तो युवाओं के बारे में बड़ी-बड़ी बातें कही जाती हैं, वहीं दूसरी ओर इन्हीं युवाओं को 3-3 साल की भर्ती प्रक्रिया में झोंक कर उनका कीमती वक़्त जो देश के काम आ सकता था, उसे बर्बाद किया जाता है।

रेलवे ग्रुप-डी की अधिसूचना मार्च 2019 में आई थी तब से लेकर आज तक 3 साल से ज़्यादा का वक़्त पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक पहले चरण की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई है। अगर यही हाल रहा तो अधिसूचना जारी होने से फाइनल जॉइनिंग तक 5 साल या इससे ज़्यादा का समय हो जाएगा।

अगर एक भर्ती प्रक्रिया में 3-3 साल का वक़्त लग रहा है, तो ये सोचने की बात है कि ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली के क्या मायने हैं? डिजिटल इंडिया के क्या मायने हैं? क्यों एक भर्ती की प्रक्रिया एक साल की साईकल में पूरी नहीं की जा सकती? ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब और समाधान सरकार को तलाशने होंगे और गम्भीरता से इस पर संज्ञान लेना होगा, क्योंकि युवाओं के कीमती वक़्त और उत्साह को यू हीं ज़ाया नही किया जा सकता।

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