NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कोविड-19
भारत
राजनीति
कोविड सेवा जारी रखते हुए रेलवे कर्मचारियों ने किया देशभर में विरोध प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने सभी रेल कर्मचारियों को कोरोना योद्धा घोषित करने और सरकार से रेलवे कर्मचारियों का 50 लाख का बीमा करने की मांग उठाई। इसी के साथ भारतीय रेलवे का निजीकरण बंद करने और तीनों कृषि कानून और 4 श्रमिक कोड बिल वापस लेने की भी मांग की गई।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
25 May 2021
कोविड सेवा जारी रखते हुए रेलवे कर्मचारियों ने किया देशभर में विरोध प्रदर्शन

आज 25 मई को पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन संबद्ध ऐक्टू के आह्वान पर रेलवे कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से रेल मंत्रालय और सरकार द्वारा तय कोविड-19 दिशा निर्देश का पालन करते हुए देश भर के रेलवे स्टेशन, वर्कशॉप, उत्पादन इकाई पर काली पट्टी बांधकर, प्लेकार्ड, झंडे बैनर के साथ विरोध प्रदर्शन किया।

यूनियन द्वारा जारी प्रेस बयान के मुताबिक़ उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज जोन, पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर, मडुआडीह डीज़ल लोकोमोटिव वर्कस वाराणसी, आर सी एफ कपूरथला, एम सी एफ़ पटियाला, गोरखपुर में उत्तर पूर्व रेलवे वर्कर्स यूनियन, पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर,मध्यप्रदेश, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर, छत्तीसगढ़, सी एल डब्ल्यू, चितरंजन, पूर्व रेलवे , हाबड़ा पश्चिम बंगाल, दक्षिण पूर्व रेलवे, हाबड़ा, भुवनेश्वर , उड़ीसा ईस्ट कोस्ट रेलवे इम्प्लाइज यूनियन, कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन मुम्बई प्रशांत, मध्य रेलवे मुंबई, दक्षिण रेलवे में भी विरोध प्रदर्शन किए गए। इस दौरान कर्मचारियों ने यह सुनिश्चित किया की रेलवे के संचालन में कोई बाधा न आए।

विरोध प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन व अर सी एफ़ इम्प्लाइज यूनियन, कपूरथला, पंजाब के महासचिव सर्वजीत सिंह ने कहा कि रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को सबसे पहले टिकट विन्डो पर मिलने वाले बुकिंग क्लर्क, टिकट जांच कर्मियों से लेकर ट्रेनों और स्टेशनों की व्यवस्था संभालने वाले स्टेशन मैनेजर, ट्रैकमैन, ड्राइवर/गार्ड, गैंगमैन, नए डिब्बों व इंजनों के निर्माण व रखरखाव में लगे लगभग दो हज़ार से भी अधिक रेल कर्मचारी अब तक अपनी जान गंवा चुके हैं।

उन्होंने कहा 25 मार्च 2020 में लॉकडाउन के बाद जब पूरा देश थम गया था, तब भी रेलवे कर्मचारी ही दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालकर ऑक्सीजन, दवाएं, जरूरी खाद्य सामग्री एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा रहे हैं, यह सब होने के बावजूद भी रेल कर्मचारियों की अनदेखी हो रही है।

आज के विरोध प्रदर्शन से पूर्व सोमवार को एक प्रेस को बयान जारी करते हुए सर्वजीत सिंह ने कहा था कि भारत सरकार/ रेल प्रशासन के उदासीन रवैये के चलते हमने एक पत्र रेल मंत्री व रेलवे चैयरमैन को भेज कर रेल कर्मचारियों को कोरोना योद्धा घोषित करने सहित अन्य मांगों से रूबरू कराया था, लेकिन रेलवे बोर्ड के उदासीन रवैये के कारण हमने मीटिंग कर उपरोक्त मांगों पर चेतावनी संघर्ष करने का निर्णय लिया है।

सर्वजीत सिंह ने कहा कि आज हम मुख्य रूप से आठ मांगो के समर्थन में विरोध प्रदर्शन कर रहे है, 1- सरकार द्वारा सभी रेल कर्मचारियों को कोरोना योद्धा घोषित किया जाय, 2- सभी रेल कर्मचारियों का 50 लाख रुपये का बीमा किया जाय, 3- मार्च 2020 के बाद मृतक रेल कर्मचारियों के परिवारों को 50 लाख रुपये एक्स-ग्रेसिया का भुगतान किया जाय, 4- NPS को तुरंत रद्द कर पुरानी पेंशन योजना बहाल करके PFRDA के पास जमा राशि कर्मचारी को वापस की जाय, 5-महंगाई भत्ते की बकाया सभी किस्तें जारी किया जाय, 6- रात्रि ड्यूटी भत्ते पर 43600 रुपये की लिमिट को हटाया जाय, 7- भारतीय रेलवे का निजीकरण बंद किया जाय, 8-तीनों कृषि कानून और 4 श्रमिक कोड बिल वापस लिया जाय,

प्रयागराज (इलाहाबाद) मे ऐक्टू राष्ट्रीय सचिव डॉ. कमल उसरी, ने विरोध प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी ने कई बार स्वयं अपने भाषण में रेल कर्मचारियों को कोरोना योद्धा कहा है लेकिन हमारे फेडरेशन ने रेल मंत्रालय को पत्र लिखकर सचमुच में रेल कर्मचारियों को कोरोना वॉरियर्स घोषित करते हुए सुविधाएं देने की मांग की तो सरकार ने कुछ नहीं किया, रेल कर्मचारी रात दिन कोरोना वॉरियर्स के रूप में काम रहे हैं, लेकिन अभी तक सभी रेल कर्मचारियों और उनके परिवार को कोविड वैक्सीन की पहली डोज तक नही मिल पाई है, रेलवे की अस्पताल को राज्य सरकारों के हवाले कर दिया गया है, रेलवे कर्मचारी दर दर की ठोकरें खा रहे हैं।

इसके अलावा रेलवे कर्मचारी यूनियन ने कहा कि 6 महीनों से दिल्ली के बॉर्डर पर तीन कृषि विरोधी कानूनों को रद्द करवाने व MSP पर कानून बनाने के लिए संघर्ष कर रहे अन्नदाताओं द्वारा 26 मई को "लोकतंत्र का काला दिवस" का जोरदार तरीके से समर्थन करते हुए 26 मई 2021 को समस्त रेलवे में "ब्लैक-डे (काला दिवस)" मनाया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि किसान आंदोलन के 6 महीने पूरा होने और केंद्र की मोदी सरकार के 7 साल पूरे होने पर सयुंक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर अनेक मजदूर संगठन लोकतांत्रिक जनवादी संगठन एवं कई दलों ने विरोध दिवस का समर्थन किया है। 26 मई का विरोध दिवस सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज तेज करेगा। जहां एक तरफ किसान हर मौसम में हर स्थिति में अपने आप को मजबूत रखते हुए दिल्ली की सीमाओं पर 6 महीनों से संघर्ष कर रहे हैं, उसके विपरीत केंद्र की मोदी सरकार पिछले 7 सालों से किसानों समेत समाज के हर वर्ग का गहरा शोषण कर रही है। 26 मई का दिन देश के तमाम जनवादी संगठन विरोध दिवस के तौर पर मनाएंगे व केंद्र सरकार को एक सीधा संदेश देंगे कि लोकतंत्र में लोक बड़े होते हैं तंत्र नहीं।

Indian Railway
Indian Railway Employees Federation
AICCTU
COVID-19
Modi government
Narendra modi
indian railways protest

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल


बाकी खबरें

  • omicron
    भाषा
    दिल्ली में कोविड-19 की तीसरी लहर आ गई है : स्वास्थ्य मंत्री
    05 Jan 2022
    ‘‘ दिल्ली में 10 हजार के करीब नए मामले आ सकते हैं और संक्रमण दर 10 प्रतिशत पर पहुंच सकती है.... शहर में तीसरी लहर शुरू हो चुकी है।’’
  • mob lynching
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: बेसराजारा कांड के बहाने मीडिया ने साधा आदिवासी समुदाय के ‘खुंटकट्टी व्यवस्था’ पर निशाना
    05 Jan 2022
    निस्संदेह यह घटना हर लिहाज से अमानवीय और निंदनीय है, जिसके दोषियों को सज़ा दी जानी चाहिए। लेकिन इस प्रकरण में आदिवासियों के अपने परम्परागत ‘स्वशासन व्यवस्था’ को खलनायक बनाकर घसीटा जाना कहीं से भी…
  • TMC
    राज कुमार
    गोवा चुनावः क्या तृणमूल के लिये धर्मनिरपेक्षता मात्र एक दिखावा है?
    05 Jan 2022
    ममता बनर्जी धार्मिक उन्माद के खिलाफ भाजपा और नरेंद्र मोदी को घेरती रही हैं। लेकिन गोवा में महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी के साथ गठबंधन करती हैं। जिससे उनकी धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर सवाल खड़े हो…
  • सोनिया यादव
    यूपी: चुनावी समर में प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री का महिला सुरक्षा का दावा कितना सही?
    05 Jan 2022
    सीएम योगी के साथ-साथ पीएम नरेंद्र मोदी भी आए दिन अपनी रैलियों में महिला सुरक्षा के कसीदे पढ़ते नज़र आ रहे हैं। हालांकि ज़मीनी हक़ीक़त की बात करें तो आज भी महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में उत्तर…
  • मुंबईः दो साल से वेतन न मिलने से परेशान सफाईकर्मी ने ज़हर खाकर दी जान
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मुंबईः दो साल से वेतन न मिलने से परेशान सफाईकर्मी ने ज़हर खाकर दी जान
    05 Jan 2022
    “बीएमसी के अधिकारियों ने उन्हें परेशान किया, उनके साथ बुरा व्यवहार किया। वेतन मांगने पर भी वे उस पर चिल्लाते थे।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License