NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
लॉकडाउन से परेशान किसानों पर बारिश का क़हर
लॉकडाउन के कारण खेतों में खड़ी फसलों को काटने में देरी हो रही है और खेतों में कटी फसलों के पड़े रहने के दरम्यान मध्यप्रदेश के अधिकांश जिलों में तेज आंधी और बारिश हुई है।
राजु कुमार
28 Mar 2020
किसानों पर बारिश का क़हर

मध्यप्रदेश के किसानों के लिए यह सबसे बुरा समय है। पिछले साल अतिवर्षा से मध्यप्रदेश की खरीफ फसलों का भारी नुकसान हुआ था। इस साल रबी सीजन में किसानों को उम्मीद थी कि पिछले साल हुए नुकसान की कुछ भरपाई हो जाएगी, लेकिन कोरोना के कारण देशव्यापी लॉकडाउन और बेमौसम आंधी-बारिश के बाद किसानों के हालात बिगड़ गए हैं। इस दुःख की घड़ी में उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। खेतों में बारिश से गिर गई फसलों और भींग चुकी कटी फसलों को देखने के सिवा उन्हें फिलहाल कुछ सूझ नहीं रहा है।

मौसम विभाग के अनुसार मध्यप्रदेश में बुधवार और गुरूवार-शुक्रवार रात को हुई बारिश 2006 के बाद मार्च में हुई सबसे ज्यादा बारिश है। बारिश का सबसे ज्यादा असर पश्चिमी मध्यप्रदेश में पड़ा है। कई जगहों पर ओले भी गिरे हैं। पिछले साल मध्यप्रदेश में मानसून लंबे समय तक सक्रिय था, जिसकी वजह से पूरी फसलें बर्बाद हो गई थी। मानसून का लंबा चलने की वजह से किसानों को रबी फसल की बुवाई में देरी करनी पड़ी। अक्टूबर के बजाय अधिकांश किसानों ने नवंबर और दिसंबर के शुरुआती समय में रबी की फसलों की बुवाई की। इस वजह से मार्च के शुरुआत में फसल कटने के बजाय अधिकांश किसानों की फसलें अभी खेतों में ही खड़ी हैं।

होली बाद कई जगहों पर कटाई शुरू हो गई थी। लेकिन 20 मार्च की जनता कर्फ्यू के बाद से ही प्रदेश में सारे काम ठप्प पड़ गए। इसका बड़ा असर खेती-किसानी पर भी पड़ा। प्रदेश में फसलों की कटाई हार्वेस्टर से होती है। पंजाब और हरियाणा से वाले हार्वेस्टर रास्ते में ही रोक दिए गए, यद्यपि बाद में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हार्वेस्टरों को नहीं रोका जाए। लेकिन स्थिति संभलने से पहले बेमौसम बारिश ने फसलों को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा दिया। कई किसानों के गहाई के लिए रखी हुई फसलें भींग गई हैं। खड़ी फसलें बारिश व हवाओं से गिर गई हैं।

Crop at Farm 1.jpeg

सीहोर जिले के मुंगावली गांव के छोटे किसान कमलेश राठौर का कहना है, ‘‘दो दिनों की बारिश ने खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया है। हमारे जैसे छोटे किसान फसलों की गहाई मशीनों से नहीं करवा पाते। कोरोना के कारण मजदूर नहीं मिल रहे हैं, जिससे फसल न कट रही है और न ही उसकी गहाई हो रही है। फसलों से हुए नुकसान को देखने के लिए कोई सरकारी कर्मचारी गांव में नहीं आया। पूरे इलाके के किसान परेशान हैं।’’ सीहोर और रायसेन जिले में कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ता राकेश रतन सिंह का कहना है, ‘‘भोपाल से होशंगाबाद के बीच के इलाके में बारिश के बाद किसान अपने खेतों की भीगी फसलों को देख रहे हैं। उन्हें अभी यह सूझ नहीं रहा है कि वे क्या करें? न मशीनें हैं और न ही मजदूर। सभी घरों में बंद हैं। किसानों को यह चिंता सता रही है कि वे कर्ज किस तरह चुकाएंगे। फसलों की गुणवत्ता खराब होने से उनकी फसलों की कीमत भी नहीं मिलेगी।’’

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्य सचिव जसविंदर सिंह का कहना है, ‘‘किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर कटाई के लिए खेत मजदूर नहीं मिल रहे हैं, तो दूसरी ओर लॉकडाउन के कारण खेत मजदूर घरों में कैद हैं व मजदूरी के लिए तरस रहे हैं। प्रदेश में सत्ता पर कब्जा के लिए चली उठापटक के कारण पूरी तरह से सरकार का गठन नहीं हो पाया है। प्रदेश में न तो राजस्व मंत्री है और न ही कृषि मंत्री, ऐसे में खेती-किसानी के मसले को देखने का ध्यान प्रशासन को नहीं है। कोरोना के कारण प्रदेश की दूसरी समस्याएं विकराल होती जा रही हैं। बर्बाद फसलों के सर्वे एवं मुआवजे की कोई घोषणा नहीं हुई हैं। सर्वे नहीं होने से किसानों को बीमा का लाभ भी नहीं मिल पाएगा।

लॉकडाउन के कारण खेतों में चार से ज्यादा मजदूर लगाने की अनुमति नहीं है, ऐसे ऊहापोह में किसानी ठप्प है। जिन किसानों की फसलें कट गई हैं, उनके साथ मंडियों में लूट हो रही है। चना, मसूर और गेहूं के लिए तय न्यूनतम समर्थन मूल्य से 30-40 फीसदी कम कीमत किसानों को दी जा रही है।’’

इस संदर्भ में किसान संघर्ष समिति के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सुनीलम् ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को एक खुला पत्र लिखा है। पत्र में लिखा है, ‘‘जब कांग्रेस की सरकार थी और प्रदेश में अतिवृष्टि हुई थी तब आपने घुटने तक पानी में खड़े होकर फसलों का मुआवजा तथा फसल बीमा देने की मांग मुख्यमंत्री कमलनाथ से की थी। अब फिर रबी की खड़ी फसल अतिवृष्टि से बर्बाद हो रही है। ऐसी स्थिति में सभी पीड़ित किसानों को 10 हज़ार रुपए की अंतरिम राहत राशि प्रदान की जाए। क्रॉप-कटिंग सर्वे किसानों के परामर्श से किया जाए। सर्वे की रिपोर्ट बनने के तुरंत बाद किसान को (व्हाट्सअप के माध्यम से) उपलब्ध कराई जाए।

फसल बीमा के क्लेम को प्रोसेस करने वाले कर्मचारी का फोन नंबर संबंधित किसान को मैसेज के जरिये उपलब्ध कराई जाए। आप यह सुनिश्चित करें कि एक माह के भीतर फसल बीमा कंपनी द्वारा मुआवजा राशि किसान के खाते में डाल दिया जाए। बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं जिनका फसल बीमा नहीं हैं। ऐसे किसानों को भी फसल खराब होने के कारण एक मुश्त मुआवजा दी जानी चाहिए। किसानों का कर्ज माफ कर उन्हें नए कर्जे लेने की सुविधा तुरंत उपलब्ध करानी चाहिए।’’ इसके साथ ही उन्होंने खेतीहर मजदूरों को भी राहत दिए जाने की मांग की है।

Wet Crop at Farm 2.jpeg

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी एक ट्विट कर मुख्यमंत्री से किसानों को राहत दिए जाने की मांग की है। उन्होंने लिखा है, ‘‘प्रदेश के कई हिस्सों में अचानक हुई बारिश व आंधी से किसान भाइयों की फ़सलों को काफ़ी नुक़सान हुआ है। यह उन पर दोहरी मार है। मैं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से मांग करता हूं कि संकट के इस दौर में किसान भाइयों के हित में तत्काल आवश्यक निर्णय ले व उनकी हरसंभव मदद करें।’’ किसानों के लिए इस दुःख की घड़ी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से किसी राहत के बजाय सिर्फ आश्वासन ही मिल पाया है। मुख्यमंत्री ने कहा है, ‘‘कोरोना संकट के साथ ही इन दिनों हुई बारिश तथा कहीं-कहीं ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान से किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। मैं तुरंत आपके बीच नहीं पहुंच पा रहा हूं, परंतु सरकार आपके साथ है। संकट की इस घड़ी में सरकार आपकी हरसंभव मदद करेगी।’’

इस मुश्किल घड़ी में किसान अकेले पड़ गए हैं। हर सरकार खेती को लाभ का धंधा बनाने का नारा देती आ रही है, लेकिन किसान लगातार कर्ज में फंसते जा रहे हैं। उन्हें न तो उचित मुआवजा मिल पा रहा है और न ही फसलों की सही कीमत। प्रकृति की इस मार के बाद अंततः किसानों की उम्मीद भरी निगाहें सरकार की ओर ही हैं।

COVID-19
Coronavirus
India Lockdown
farmer
farmer crises
Heavy rain and storm
agricultural crises
Madhya Pradesh
CPI
CPIM
Congress
BJP

Related Stories

कड़ी मेहनत से तेंदूपत्ता तोड़ने के बावजूद नहीं मिलता वाजिब दाम!  

कार्टून क्लिक: किसानों की दुर्दशा बताने को क्या अब भी फ़िल्म की ज़रूरत है!

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध
    02 Feb 2022
    पिछले दिनों झारखंड सरकार के कर्मचारी चयन आयोग द्वारा प्रदेश के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों की नियुक्तियों के लिए भोजपुरी, मगही व अंगिका भाषा को धनबाद और बोकारो जिला की स्थानीय भाषा का दर्जा…
  • ukraine
    पीपल्स डिस्पैच
    युद्धोन्माद फैलाना बंद करो कि यूक्रेन बारूद के ढेर पर बैठा है
    02 Feb 2022
    मॉर्निंग स्टार के संपादक बेन चाकों लिखते हैं सैन्य अस्थिरता बेहद जोखिम भरी होती है। डोंबास में नव-नाजियों, भाड़े के लड़ाकों और बंदूक का मनोरंजन पसंद करने वाले युद्ध पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ है।…
  • left candidates
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: मज़बूत विपक्ष के उद्देश्य से चुनावी रण में डटे हैं वामदल
    02 Feb 2022
    “…वामदलों ने ये चुनौती ली है कि लूट-खसोट और उन्माद की राजनीति के खिलाफ एक ध्रुव बनना चाहिए। ये ध्रुव भले ही छोटा ही क्यों न हो, लेकिन इस राजनीतिक शून्यता को खत्म करना चाहिए। इस लिहाज से वामदलों का…
  • health budget
    विकास भदौरिया
    महामारी से नहीं ली सीख, दावों के विपरीत स्वास्थ्य बजट में कटौती नज़र आ रही है
    02 Feb 2022
    कल से पूरे देश में लोकसभा में पेश हुए 2022-2023 बजट की चर्चा हो रही है। एक ओर बेरोज़गारी और गरीबी से त्रस्त देश की आम जनता की सारी उम्मीदें धराशायी हो गईं हैं, तो
  • 5 election state
    रवि शंकर दुबे
    बजट 2022: क्या मिला चुनावी राज्यों को, क्यों खुश नहीं हैं आम जन
    02 Feb 2022
    पूरा देश भारत सरकार के आम बजट पर ध्यान लगाए बैठा था, खास कर चुनावी राज्यों के लोग। लेकिन सरकार का ये बजट कल्पना मात्र से ज्यादा नहीं दिखता।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License