NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
फिल्में
भारत
राजनीति
रश्मि रॉकेट : महिला खिलाड़ियों के साथ होने वाले अपमानजनक जेंडर टेस्ट का खुलासा
फ़िल्म समीक्षा: किसी धाविका से यह कहना कि वह स्त्री तो है, लेकिन उसके शरीर में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा अधिक होने के कारण वह स्त्री वर्ग में नहीं आ सकती अपने आप में उसके लिए असहनीय मानसिक यातना देने वाला है।
रचना अग्रवाल
24 Oct 2021
Rashmi Rocket

ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म ज़ी5 पर रिलीज हुई रश्मि रॉकेट एक महिला खिलाड़ी के संघर्षों की बात करती है जिसे जेंडर वेरिफिकेशन जैसे मुश्किल और अपमानजनक टेस्ट से होकर गुजरना पड़ता है। कहानी भुज की रश्मि वीरा (तापसी पन्नू) की है जो कि बचपन से ही एक तेज धावक है और उसके टैलेंट से प्रभावित होकर आर्मी कैप्टन गगन ठाकुर उसे एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में शामिल होने का न्योता देता है। गगन खुद एक पदक विजेता एथलीट रहा है व आर्मी में एथलीटों को ट्रेन करता है। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद रश्मि राज्यस्तरीय प्रतियोगिताएं जीत जाती है और प्रोत्साहित होकर नेशनल स्तर पर ट्रेनिंग के लिए पुणे  पहुंचती है और अपनी काबिलियत की वजह से देश की स्टार बन जाती है।  2004 के एशियाई खेलों में रश्मि की शानदार जीत पर जहां देश जश्न मना रहा होता है वहीं दूसरी तरफ एथलेटिक एसोसिएशन के कहने पर जबरन उसका जेंडर टेस्ट कराया जाता है और उसमें टेस्टोस्टेरोन हार्मोन अधिक होने की वजह से उसके टैलेंट को नकार कर दौड़ प्रतियोगिताओं से उसे बहिष्कृत कर दिया जाता है।

इसके बाद रश्मि इंसाफ के लिए अपनी लड़ाई शुरू करती है। हाईकोर्ट में मानव अधिकार उल्लंघन के तहत एक पेटीशन  दायर करती है। इस केस की सुनवाई के दौरान तमाम दलीलें सुनने के बाद आखिरकार कोर्ट रश्मि को तमाम पाबंदियों से आजाद करने का आदेश देता है।

फिल्म की कहानी हमें भारत की तेज धावक दुती चंद की याद दिलाती है, जिन्हें जेंडर टेस्ट में फेल होने के बाद एशियन गेम्स में खेलने का मौका नहीं मिला। कुछ साल पहले दुती इस बात के लिए विवादों में आई थी कि उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन (वह हार्मोन जो पुरुष के शरीर में अधिक पाया जाता है) की मात्रा सामान्य महिला से अधिक है और जिस कारण उन्हें कुछ समय के लिए एथलेटिक्स फेडरेशन ने प्रतिबंधित कर दिया था। दुती ने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा लिए गए फैसले को चुनौती देते हुए कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में अपील की। अदालत ने एक ऐतिहासिक जजमेंट में उनके पक्ष में फैसला सुनाया और वह मुकदमा जीत गई।

आज भी हमारे देश में एक सदियों पुरानी प्रणाली के तहत जेंडर टेस्टिंग के नाम पर महिला एथलीट को शोषण का सामना करना पड़ता है। किसी धाविका से यह कहना कि वह स्त्री तो है, लेकिन उसके शरीर में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा अधिक होने के कारण वह स्त्री वर्ग में नहीं आ सकती अपने आप में उसके लिए असहनीय मानसिक यातना देने वाला है। दुती चंद को तो आईएएफ (इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ एथलेटिक्स फेडरेशन) से राहत मिल गई थी और वह मुकदमा जीत गई थी लेकिन जेंडर टेस्ट के नाम पर महिला एथलीटों के साथ हुए भेदभाव से जुड़े कई सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं।

पिंकी प्रमाणिक और शांति सुंदराजन को भी जेंडर टेस्ट से होकर गुजरना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय और 50 राष्ट्रीय पदक जीतने वाली तमिलनाडु के दलित तबके से आई शांति सुंदराजन पहली भारतीय धाविका है जिन्हें जेंडर टेस्ट मे  फेल होने के कारण सन 2006 में हुए एशियाई खेलों में 400 मीटर की रेस में जीते कांस्य पदक को लौटाना पड़ा था। इस वजह से उनका करियर तबाह हो गया और वह काफी विवादों में आ गई। अत्यधिक अपमान झेलने की वजह से उन्होंने डिप्रेशन में आकर आत्महत्या तक का प्रयास किया। पदक छिनने और जेंडर टेस्ट से हुए सामाजिक अपमान के बाद लोग उन्हें अजीब  नजरों से देखने लगे जैसे पूछ रहे हो कि  क्या वो लड़का है जिस वजह से उनका और उनके परिवार का जीवन तबाह हो गया।

दूसरी महिला धाविका जिन्हें इस टेस्ट से गुजरना पड़ा वह पश्चिम बंगाल की पिंकी प्रमाणिक है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय खेलों में पांच स्वर्ण पदक सहित कुल 6 पदक जीते। पिंकी की महिला मित्र ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया। इस आरोप के चलते उनका जेंडर टेस्ट करवाया गया। आखिर में वे भी इस टेस्ट को पास करके पूर्ण रूप से स्त्री घोषित हुई। साल 2001 में गोवा की एक युवा तैराक प्रतिमा गोकर ने जेंडर टेस्ट में फेल होने के बाद अपनी जान लेने की कोशिश की थी

।AAF द्वारा  हाइपरएंड्रोजेनिज्म की स्थिति में महिला धावकों के अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। IAAF का तर्क है कि हाइपरएंड्रोजेनिज्म के कारण महिला धावक में अपनी अन्य प्रतिद्वंदियों से ज्यादा क्षमता आ जाती है इसलिए महिला धावक सिर्फ उसी स्थिति में किसी खेल-प्रतियोगिता में भाग ले सकती है जब वह अपने टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम कर दे जोकि दवाई व सर्जरी द्वारा किया जाता है। इस मुद्दे को मानवाधिकार के मुद्दे से जोड़ा जाता है। कई दिग्गजों और खेल जानकारों का मानना है कि किसी महिला खिलाड़ी को शरीर में बदलाव करने के लिए मजबूर करना उनके मानवाधिकारों का हनन है, अधिकारों को अगर छोड़ भी दिया जाए तो भी जब किसी महिला खिलाड़ी से उनके महिला होने का सबूत मांगा जाता है और उनसे टेस्ट कराने को कहा जाता है यह पूरी दुनिया के सामने उन्हें शर्मिंदा तो करता ही है साथ में उनके आत्मविश्वास पर भी काफी गलत प्रभाव डालता है।

निर्देशक आकाश खुराना ने फिल्म रश्मि राकेट के जरिए खेलों में महिला खिलाड़ियों का जबरन लिंग परीक्षण और हाइपरएंड्रोजेनिज्म की तरफ लोगों का ध्यान खींचा है जो कि एक गहन विषय है। यह फिल्म महिला एथलीटों के प्रति समाज की धारणा और खेल जगत की राजनीति से पर्दा उठाती है खासतौर पर तब जब महज एक टेस्ट के बाद न सिर्फ उनका कैरियर खत्म हो जाता है, बल्कि जो महिला खिलाड़ी इसका शिकार होती हैं उनके सम्मान को काफी ठेस पहुंचती है और वे अवसाद का शिकार होकर कई बार अपनी जान तक देने के लिए अमादा हो जाती हैं।

मानव अधिकार और संविधान के अनुच्छेदों को ध्यान में रखते हुए इस फिल्म के जरिए उन कानूनों पर भी चोट करने की कोशिश की गई है जो आज के वक्त के लिए गैरजरूरी है। एक ऐसी प्रथा जो एथलेटिक्स में आज भी  जारी है व जिसने महिला खिलाड़ियों को वर्षों से परेशान कर रखा है और जेंडर टेस्टिंग के नाम पर उनको शोषित एवं उतपीड़ित कर रखा है उसके खिलाफ यह फिल्म जोरदार आवाज उठाती है।

(रचना अग्रवाल स्वतंत्र लेखक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Rashmi Rocket
Zee5
Rashmi Rocket Review
gender discrimination
female players
Taapsee Pannu
patriarchal society
male dominant society

Related Stories

शेरनी : दो मादाओं की एक-सी नियति की कहानी

बॉम्बे बेगम्स और स्त्रीपन का चित्रण

क्या पुरुषों का स्त्रियों पर अधिकार जताना ही उनके शोषण का मूल कारण है?

‘गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल’ सेना में महिलाओं के संघर्ष की कहानी!

इंडियन मैचमेकिंग पर सवाल कीजिए लेकिन अपने गिरेबान में भी झांक लीजिए!

फिल्म रिव्यू: हॉरर ड्रामा 'बुलबुल' में चुड़ैल से नहीं, नारी की प्रताड़ना से डर लगता है

थप्पड़ फ़िल्म रिव्यू : यह फ़िल्म पितृसत्तात्मक सोच पर एक करारा थप्पड़ है!


बाकी खबरें

  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    यूक्रेन की बर्बादी का कारण रूस नहीं अमेरिका है!
    24 Feb 2022
    तमाम आशंकाओं के बाद रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए युद्ध की शुरुआत कर दी है। इस युद्ध के लिए कौन ज़िम्मेदार है? कौन से कारण इसके पीछे हैं? आइए इसे समझते हैं। 
  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश चुनाव: ज़मीन का मालिकाना हक़ पाने के लिए जूझ रहे वनटांगिया मतदाता अब भी मुख्यधारा से कोसों दूर
    24 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान इस इलाक़े में होना है। ज़मीन के मालिकाना हक़, बेरोज़गारी और महंगाई इस क्षेत्र के कुछ अहम चुनावी मुद्दे हैं।
  • ayodhya
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    यूपी चुनाव: अयोध्यावादियों के विरुद्ध फिर खड़े हैं अयोध्यावासी
    24 Feb 2022
    अयोध्या में पांचवे दौर में 27 फरवरी को मतदान होना है। लंबे समय बाद यहां अयोध्यावादी और अयोध्यावासी का विभाजन साफ तौर पर दिख रहा है और धर्म केंद्रित विकास की जगह आजीविका केंद्रित विकास की मांग हो रही…
  • mali
    पवन कुलकर्णी
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है
    24 Feb 2022
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों को हटाने की मांग करने वाले बड़े पैमाने के जन-आंदोलनों का उभार 2020 से जारी है। इन आंदोलनों की पृष्ठभूमि में, माली की संक्रमणकालीन सरकार ने फ़्रांस के खिलाफ़ लगातार विद्रोही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License