NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
तेल की कीमतों में कमी लेकिन लोगों को फायदा क्यों नहीं?
सऊदी अरब से लेकर भारत सरकार की तेल की नीतियां ऐसी हैं, जो गुपचुप तरीके से सरकारों के फायदे के लिए ही काम करती है। जनता को तो पता भी नहीं चलता कि उनके पैसे का कैसा इस्तेमाल हो रहा है?
अजय कुमार
16 Mar 2020
तेल की कीमतों में कमी लेकिन लोगों को फायदा क्यों नहीं?

सऊदी अरब ने तेल की कीमतों को लेकर एक तरह की जंग छेड़ दी है। वह तेल का उत्पादन बढ़ाने लगा है और कीमत कम करने लगा है। तेल कीमतों को ऑयल प्रोड्यूसिंग एक्सपोर्टिंग कंट्री यानी (ओपेक) का समूह तय करता है। इसकी अगुवाई सऊदी अरब करता है। रूस भी इसका सदस्य है। रूस ने सऊदी अरब द्वारा कीमतों को कम करने पर ओपेक में कड़ा विरोध दर्ज किया। लेकिन सऊदी अरब ने अपने कदम पीछे नहीं किए।  

सऊदी अरब ने कीमतों को बहुत अधिक कम कर दिया है। जानकारों का कहना है कि सऊदी अरब की तरफ से कच्चे तेल की कीमत पिछले 30 सालों में इतनी कम नहीं की गयी थी। सऊदी अरब में 6 मार्च से पहले प्रति बैरल कच्चे तेल की कीमत तकरीबन 52 डॉलर थी। 6 मार्च को सऊदी अरब ने तेल की कीमत कम करके 31.49 डॉलर कर दिया।

अगर बाजार में कोई भी विक्रेता कीमतों के साथ ऐसी छेड़छाड़ करता है तो इसका सीधा मतलब होता है कि बाजर के कायदे कानूनों को तहस-नहस कर रहा है। और पूरे बाजार को अपनी तरफ मोड़ रहा है। यानी सारे ग्राहकों को अपनी तरफ लाने की कोशिश कर रहा है। जैसे अमेरिका की तरफ से कच्चे तेल की कीमत इस समय 50 डॉलर प्रति बैरल है। रूस तकरीबन 40-50 रुपये प्रति बैरल के हिसाब से बेच रहा है। इससे साफ है कि ग्राहक सऊदी अरब की तरफ ही बढ़ेंगे।

जानकारों का कहना है कि सऊदी अमेरिका और रूस के तेल बाजार पर सीधा हमला कर रहा है। इससे रूस और अमेरिका को भले ही थोड़े समय के लिए नुकसान हो लेकिन सऊदी इस रणनीति को बहुत लंबे समय तक नहीं अपना पाएगा।  

लेकिन क्या इससे सऊदी अरब को फायदा पहुंचेगा? इसका जवाब बहुत मुश्किल है। पीपल्स डिस्पैच के अब्दुल रहमान कहते हैं कि सऊदी अरब के कुल सरकारी खर्च का तकरीबन सत्तर फीसदी सोर्स  सऊदी अरब की तेल की बिक्री है।

आईएमएफ की रिपोर्ट कहती है कि अगर तेल 83.6 डॉलर से कम में बेचा जाएगा तो सऊदी अरब को नुकसान सहना पड़ेगा। फिर भी सऊदी अरब कीमतों को कम करते जा रहा है। खबर आ रही है कि सऊदी अरब में कई सारे सेक्टरों का बजट कम कर दिया गया है। जरा ठहरकर यह भी सोचिये कि क्या आने वाले सौ-दो सौ सालों में जब तेल खत्म हो जाएगा तब क्या सऊदी इसी तरह से चल पाएगा।  

अब सवाल यह उठता है कि क्या कच्चे तेल में हुए कम कीमतों का फायदा भारत सरकार अपनी जनता को देगी? नहीं, बिल्कुल नहीं देगी। ऐसा इसलिए क्योंकि चार मार्च को सऊदी अरब द्वारा तेल की कीमत कम किये जाने के बाद चौदह मार्च को सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर 3 रुपये प्रति लीटर की दर से एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी है। सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर की स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लगाई है जबकि 1 रुपए प्रति लीटर का रोड, इंफ्रा सेस लगाया है।

यह बढ़ोतरी 14 मार्च से लागू हो गई है। यानी कच्चे तेल की कीमतों का फायदा फिलहाल आम लोगों को होने नहीं जा रहा है। सरकार ऐसा क्यों कर रही है, इसका जवाब ढूढ़ने के लिए ज्यादा गणित लगाने की जरुरत नहीं है।

सभ्य भाषा में कहें तो केंद्र सरकार ने मौजूदा वित्तीय हालातों में इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य विकास कार्यों के लिए जरूरी फंड जुटाने के मकसद से पेट्रोल-डीजल पर यह एक्स्ट्रा एक्साइज ड्यूटी लगाई है। लेकिन सही शब्द में कहा जाए तो सरकार के क़दमों ने अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। इस बर्बाद अर्थव्यवस्था में सरकार को जनता से ज्यादा खुद के खर्चे भी पूरे करने है। इसकी भरपाई सरकार कच्चे तेल की कीमतों में हुई कमी से करेगी।

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल कहता है कि साल 2014 में भारत प्रति लीटर कच्चे तेल की खरीद पर तकरीबन 47.12 रुपये खर्च करता था। कच्चे तेल की यह कीमत मार्च 2020 में घटकर तकरीबन 32.93 पैसे हो गयी है। लेकिन आम जनता तेल तब भी औसतन 71.41 रुपये प्रति लीटर में खरीदती थी और अब भी औसतन 71.71 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदती है। तब एक्साइज ड्यूटी से केंद्र सरकार की कमाई तकरीबन 10.39 लीटर प्रति लीटर थी।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के तहत राजधानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल पर 19.98 रुपये की एक्साइज ड्यूटी लग रही थी। 14 मार्च से इसमें तीन रुपये की बढ़ोतरी हुई है। यानी पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी से सरकार प्रति लीटर 22.98 रुपये कमा रही है। एक्साइज ड्यूटी में इस बढ़ोतरी से सरकार को करीब 39 हजार करोड़ रुपये की कमाई की उम्मीद है।

कहने का मतलब है कि अरब से लेकर भारत सरकार की तेल की नीतियां ऐसी हैं, जो गुपचुप तरीके से सरकारों के फायदे के लिए ही काम करती है। जनता को तो पता भी नहीं चलता कि उनके पैसे का कैसा इस्तेमाल हो रहा है? क्या सरकारें कभी अपने से पहले आम जनता के बारे में सोचती भी है कि नहीं।  

आप कह सकते हैं कि सरकार को यह कदम उचित है कि वह पेट्रोल, डीजल से होने वाली कमाई से अपना राजकोषीय घाटा भरे। लेकिन तब आपको सरकार से यह भी पूछना चाहिए कि आम आदमी गरीब से गरीब होते जा रहा हैं, सरकार के इर्द गिर्द रहने वाले आदमी अमीर से अमीर,  ऐसा कैसे? क्या सचमुच राजकोष में जमा पैसा आम आदमी पर खर्च किया जाता है? या इसका इस्तेमाल कहीं और हो रहा है। 

crude oil prices
Crude oil Price hike
Hindustan Petroleum
Ministry of petroleum and gas
Indian Oil Corporation Limited
Saudi Arabia
America
Russia
International Market
prices of oil in International market

Related Stories

रूस की नए बाज़ारों की तलाश, भारत और चीन को दे सकती  है सबसे अधिक लाभ

गुटनिरपेक्षता आर्थिक रूप से कम विकसित देशों की एक फ़ौरी ज़रूरत

रूस पर बाइडेन के युद्ध की एशियाई दोष रेखाएं

पश्चिम बनाम रूस मसले पर भारत की दुविधा

कच्चे तेल की तलाश की संभावनाओं पर सरकार ने उचित ख़र्च किया है?

रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध का भारत के आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

यूक्रेन संकट : वतन वापसी की जद्दोजहद करते छात्र की आपबीती

लखनऊ में नागरिक प्रदर्शन: रूस युद्ध रोके और नेटो-अमेरिका अपनी दख़लअंदाज़ी बंद करें

यूक्रेन संकट, भारतीय छात्र और मानवीय सहायता

यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए


बाकी खबरें

  • yogi bulldozer
    सत्यम श्रीवास्तव
    यूपी चुनाव: भाजपा को अब 'बाबा के बुलडोज़र' का ही सहारा!
    26 Feb 2022
    “इस मशीन का ज़िक्र जिस तरह से उत्तर प्रदेश के चुनावी अभियानों में हो रहा है उसे देखकर लगता है कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से इसे स्टार प्रचारक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।”
  • Nagaland
    अजय सिंह
    नगालैंडः “…हमें चाहिए आज़ादी”
    26 Feb 2022
    आफ़्सपा और कोरोना टीकाकरण को नगालैंड के लिए बाध्यकारी बना दिया गया है, जिसके ख़िलाफ़ लोगों में गहरा आक्रोश है।
  • women in politics
    नाइश हसन
    पैसे के दम पर चल रही चुनावी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी नामुमकिन
    26 Feb 2022
    चुनावी राजनीति में झोंका जा रहा अकूत पैसा हर तरह की वंचना से पीड़ित समुदायों के प्रतिनिधित्व को कम कर देता है। महिलाओं का प्रतिनिधित्व नामुमकिन बन जाता है।
  • Volodymyr Zelensky
    एम. के. भद्रकुमार
    रंग बदलती रूस-यूक्रेन की हाइब्रिड जंग
    26 Feb 2022
    दिलचस्प पहलू यह है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने ख़ुद भी फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से सीधे पुतिन को संदेश देने का अनुरोध किया है।
  • UNI
    रवि कौशल
    UNI कर्मचारियों का प्रदर्शन: “लंबित वेतन का भुगतान कर आप कई 'कुमारों' को बचा सकते हैं”
    26 Feb 2022
    यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया ने अपने फोटोग्राफर टी कुमार को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान कई पत्रकार संगठनों के कर्मचारी भी मौजूद थे। कुमार ने चेन्नई में अपने दफ्तर में ही वर्षों से वेतन न मिलने से तंग आकर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License