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रिजर्व बैंक ने रेपो दर 5.15 प्रतिशत पर बरकरार रखी
रिजर्व बैंक ने 2019-20 में आर्थिक वृद्धि दर के पांच प्रतिशत रहने के अनुमान को भी बनाये रखा। उसने कहा कि आर्थिक वृद्धि 2020-21 में सुधरकर छह प्रतिशत हो सकती है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
06 Feb 2020
RBI

मुंबई : रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष की अंतिम मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो दर को 5.15 प्रतिशत पर यथावत रखा। लगातार दूसरी बैठक में रेपो दर को स्थिर रखा गया है। रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों की बृहस्पतिवार को घोषणा करते हुए कहा कि जब तक संभव है, वह नीतिगत रुख को उदार बनाये रखेगा।

रिजर्व बैंक ने 2019-20 में आर्थिक वृद्धि दर के पांच प्रतिशत रहने के अनुमान को भी बनाये रखा। उसने कहा कि आर्थिक वृद्धि 2020-21 में सुधरकर छह प्रतिशत हो सकती है। उसने कहा कि आर्थिक वृद्धि दर अभी भी अपनी संभावित क्षमता से कम है।

उसने कहा, ‘आर्थिक गतिविधियां नरम बनी हुई हैं। जिन चुनिंदा संकेतकों में हालिया समय में सुधार देखने को मिला है, व्यापक स्तर पर इनमें भी अभी तेजी आनी शेष है। वृद्धि दर की तुलना में मुद्रास्फीति की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए मौद्रिक नीति समिति को लगता है कि स्थिति को यथावत रखा जाना चाहिये।’

उसने कहा कि निकट भविष्य में मुद्रास्फीति के उच्च बने रहने की आशंका है। उसने मुद्रास्फीति के परिदृश्य को बेहद अनिश्चित बताया। रिजर्व बैंक ने बताया कि मौद्रिक नीति समिति के सभी छह सदस्यों ने रेपो दर यथावत रखने का पक्ष लिया। उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने फरवरी 2019 से अक्टूबर 2019 के दौरान रेपो दर में 1.35 प्रतिशत की कटौती की थी।

मार्च तिमाही के लिये खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत

रिजर्व बैंक ने कच्चे तेल की कीमतों में उथल-पुथल जारी रहने के बीच दूध व दालों के भाव बढ़ने की आशंका को देखते हुये बृहस्पतिवार को चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया। रिजर्व बैंक ने कहा कि आने वाले समय में मुद्रास्फीति पर खाद्य मुद्रास्फीति, कच्चे तेल की कीमतों और सेवाओं की लागत जैसे कई कारकों का असर होगा।

रिजर्व बैंक ने खाद्य मुद्रास्फीति को लेकर कहा है कि दिसंबर के उच्च स्तर की तुलना में इसमें नरमी आने का अनुमान है। खरीफ की देरी से आने वाली फसल तथा रबी फसल की आवक के कारण प्याज की कीमतें सुधर रही हैं, अत: चौथी तिमाही में खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी अधिक स्पष्ट दिखेगी।

केंद्रीय बैंक ने एक तरफ पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनावों तथा दूसरी तरफ अनिश्चित वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के कारण कच्चा तेल में उथल-पुथल बने रहने की आशंका व्यक्त की। उसने कहा कि हालिया महीनों में सेवा लागत में वृद्धि देखने को मिली है।

रिजर्व बैंक ने इस बैठक में रेपो दर को 5.15 प्रतिशत पर यथावत रखा है। उसने कहा, ‘इन कारकों को ध्यान में रखते हुए तथा 2020-21 में उत्तरी-पश्चिमी मानसून के सामान्य रहने के अनुमान के मद्देनजर खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर 2019-20 की मार्च तिमाही में 6.5 प्रतिशत, 2020-21 की पहली दो तिमाहियों में 5.4-5 प्रतिशत और 2020-21 की तीसरी तिमाही में 3.2 प्रतिशत किया गया है।’

रिजर्व बैंक ने कहा कि सब्जियों को छोड़ अन्य खाद्य पदार्थों विशेषकर लागत बढ़ने से दूध की कीमतें तथा खरीफ उत्पादन कम रहने से दालों के दाम बढ़ते रहने का अनुमान है।

2020-21 में आर्थिक वृद्धि दर छह प्रतिशत रहने का अनुमान

रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर छह प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया। रिजर्व बैंक ने आर्थिक समीक्षा में दिये गये आर्थिक वृद्धि के अनुमान के निचले स्तर पर अगले वित्त वर्ष की वृद्धि का अनुमान लगाया है।  संसद में 31 जनवरी को पेश आर्थिक समीक्षा में 2020-21 में आर्थिक वृद्धि दर छह से 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में यहां हुई तीन दिवसीय बैठक के बाद मौद्रिक नीति समिति ने पाया कि अर्थव्यवस्था में नरमी अभी भी बरकरार है और आर्थिक वृद्धि की गति क्षमता से कमजोर बनी हुई है। रिजर्व बैंक ने दिसंबर में पेश मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में 2019-20 के लिये आर्थिक वृद्धि दर पांच प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया था।

रिजर्व बैंक ने कहा कि 2020-21 में आर्थिक वृद्धि परिदृश्य को निजी उपभोग का स्तर तथा बाह्य कारकों समेत विभिन्न कारक प्रभावित करेंगे। उसने कहा कि निजी उपभोग में, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में रबी फसल की बेहतर संभावनाओं के मद्देनजर सुधार होने की उम्मीद है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में हालिया तेजी ने व्यापार संतुलन कृषि के पक्ष में किया है, इससे ग्रामीण आय को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

उसने कहा कि वैश्विक व्यापार की अनिश्चितताओं में नरमी आने से निर्यात को प्रोत्साहन मिलने तथा निवेश गतिविधियों में तेजी आने का अनुमान है। रिजर्व बैंक ने कहा, ‘हालांकि कोरोना वायरस के फैले संक्रमण से पर्यटकों की आवक तथा वैश्विक व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।’

रिजर्व बैंक ने कहा कि ग्रामीण व बुनियादी संरचना खर्च बढ़ाने के उपायों के साथ ही आम बजट में व्यक्तिगत आयकर को तार्किक बनाये जाने से घरेलू मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद है।रिजर्व बैंक ने विभिन्न कारकों का संज्ञान लेते हुए आर्थिक वृद्धि दर के 2020-21 में छह प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया। उसने कहा कि आर्थिक वृद्धि दर 2020-21 की पहली छमाही में 5.5 से छह प्रतिशत तथा तीसरी तिमाही में 6.2 प्रतिशत रह सकती है।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

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Shaktikanta Das
Reserve Bank of India
Monetary policy

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