NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
कोरोना की वजह से डर के माहौल में जी रहा ग्रामीण बिहार!
ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग स्थानीय स्व-घोषित डाक्टरों से परामर्श ले रहे हैं, जो कोविड-19 मरीजों को टाइफाइड या वायरल फ्लू से पीड़ित बता रहे हैं।
मो. इमरान खान
01 May 2021
कोरोना की वजह से डर के माहौल में जी रहा ग्रामीण बिहार!
मात्र प्रतीकात्मक उपयोग। चित्र साभार: द इंडियन एक्सप्रेस 

पटना: पिछले साल वाली पहली लहर के उलट इस साल बिहार में शुक्रवार तक एक लाख से अधिक सक्रिय कोविड-19 मामलों के साथ ग्रामीण क्षेत्र पूरी तरह से नोवेल कोरोनावायरस की चपेट में आ चुका है। कोरोनावायरस ने पहले से ही रोजाना के हिसाब से सैकड़ों गांवों में जिंदगियों को छीनने का काम शुरू कर दिया है, लेकिन इन खबरों को या तो दबा दिया जा रहा है या शायद ही इन्हें कोई जगह मिल पा रही है।

मीडिया का सारा ध्यान शहरी क्षेत्रों, उसमें भी विशेषकर पटना पर बना हुआ है, इस तथ्य के बावजूद कि ऑक्सीजन आपूर्ति का संकट लगातार बना हुआ है और अस्पतालों में बेड की कमी के कारण गंभीर हालत वाले मरीजों तक को अपनी जान बचाने के लिए एक जगह से दूसरी जगह भटकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हालाँकि, कुछ ही लोग हैं जो इस मामले में खुशकिस्मत हैं।

इस सप्ताह की शुरुआत से ही बिहार के ग्रामीण हिस्सों में वायरस के तेजी से फैलने से भय का माहौल व्याप्त होता जा रहा था, क्योंकि दिन-ब-दिन कोविड-19 के मामलों में ज्यादा से ज्यादा बढ़ोतरी देखने मिल रही है। राज्य भर के गाँवों में लोग भय के साए में जकड़े हुए हैं और उन्हें अप्रत्याशित परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि सिवाय कुछ मामलों को छोड़कर पिछले वर्ष वायरस ने व्यापक स्तर पर ग्रामीण इलाकों को अछूता छोड़ रखा था।

ग्रामीण क्षेत्रों में परीक्षण सुविधाओं की कमी और बुनियादी स्वास्थ्य ढाँचे के अभाव के कारण ज्यादातर लोग, जिन्हें कोविड-19 के स्पष्ट लक्षण (तेज बुखार, खांसी, कमजोरी और सांस फूलने) की शिकायत है, को लगभग सभी गाँवों में लोकल झोला-छाप डाक्टरों द्वारा टाइफाइड या वायरल फ्लू से पीड़ित बताया जा रहा है।

यही वजह है कि सैकड़ों की संख्या में कोविड-19 मरीज बिना कोई समुचित उपचार को अपनाए, अपने गांवों में कई दिन बर्बाद कर दे रहे हैं। इसका नतीजा यह हो रहा है कि उनकी स्थिति दिन-प्रतिदिन ख़राब होती चली जा रही है और जब तक उन्हें पटना या आसपास के जिला मुख्यालयों के अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है, तब तक उनका ऑक्सीजन सेचुरेसन लेवल गिरकर 70 या 60 तक पहुँच जा रहा है। 

पटना से करीब 95 किमी दूरी पर स्थित, रघुनाथपुर गाँव की निवासी नगमा खातून, जो कि औरंगाबाद के हसपुरा ब्लॉक के अंतर्गत पड़ता है, ने बताया “हम सहमे हुए हैं। गाँव के गाँव में लोगों के घरों में एक से अधिक व्यक्ति बीमार पड़े हैं। डॉक्टर इसे टाइफाइड बता रहे हैं, लेकिन पिछले एक हफ्ते से कई लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले साल ऐसी स्थिति नहीं थी। आसपास के दर्जनों गाँवों में इसी प्रकार की स्थिति बनी हुई है। हम सभी डर के माहौल में जी रहे हैं, क्योंकि ऑक्सीजन आपूर्ति की तो बात ही छोड़ दीजिये, यहाँ पर कोई डॉक्टर या दवाएं तक नहीं हैं।”
उनकी आवाज में जो डर झलक रहा था, वह इन क्षेत्रों में महसूस की जा रही दुखद भावनाओं को प्रतिबम्बित करता है।

वैशाली जिले के एक गाँव में रहने वाले विकास चौधरी का शुरू में एक स्थानीय डॉक्टर द्वारा इलाज कराया जा रहा था, जिसने उन्हें टाइफाइड से पीड़ित बताया था। लेकिन जब उनकी हालत अचानक से बिगड़ने लगी और बुधवार की रात को उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी तो उनकी पत्नी, युवा बेटे और एक नजदीकी रिश्तेदार ने उन्हें आनन-फानन में वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करा दिया। कुछ घंटों के उपचार के बाद अस्पताल प्रशासन ने उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में भर्ती कराने के लिए निर्देशित कर दिया, क्योंकि उन्हें वेंटीलेटर पर रखे जाने की जरूरत थी। चौधरी को अंततः गुरुवार को पीएमसीएच में भर्ती कर लिया गया था, लेकिन वे अभी तक अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
।
एक अन्य मामले में औरंगाबाद जिले के एक गाँव में रहने वाले वरिष्ठ नागरिक, जैनुल हक़ की जब हालत बिगड़ने लगी तो उन्हें शुक्रवार को तत्काल पटना के एक प्राइवेट अस्पताल में ले जाया गया। वे पिछले पांच दिनों से बुखार, खांसी और कमजोरी के शिकार थे। उनका भी अभी तक टाइफाइड और वायरल फ्लू का इलाज चल रहा था।
बिहार में 29 अप्रैल को कोविड-19 के कुल 13,098 मामले दर्ज किये गए थे, और राज्य में कुल सक्रिय मामलों की संख्या एक लाख से अधिक जा पहुंची है। 28 अप्रैल तक राज्य में कुल 98,747 सक्रिय मामले थे। इस साल राज्य में 30 मार्च को सिर्फ 74 मामले दर्ज किये गए थे, लेकिन पिछले एक महीने से इसमें कई गुना इजाफा हो चुका है।

29 अप्रैल को कोरोनावायरस संक्रमण से तकरीबन 89 लोगों की मौत हुई हैं, जो राज्य में एक दिन में सर्वाधिक आधिकारिक मौतें हैं।

आने वाले समय में और भी अधिक चुनौतीपूर्ण समय को भांपते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब अधिकारियों को परीक्षण की संख्या को बढ़ाने, रैपिड एंटीजन टेस्ट्स के बजाय आरटी-पीसीआर टेस्ट पर जोर दिए जाने के निर्देश दिए हैं, ताकि उचित उपचार के लिए मामलों का पता लगाया जा सके। 

वहीँ स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, जिला मुख्यालयों में आरटी-पीसीआर सुविधायें काफी सीमित हैं और कई जगहों पर तो खराब पड़ी हैं। सभी टेस्टिंग की तुलना करें तो 60% से 70% के बीच में रैपिड एंटीजन टेस्टिंग की जा रही हैं, जबकि आरटी-पीसीआर के जरिये मात्र 25% से 30% के बीच टेस्टिंग ही हो पा रही है।

चिंताजनक पहलू यह है कि ऐसे समय में जब कोविड-19 के मामले ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ते जा रहे हैं और इसका लगातार विस्तार होता जा रहा है, राज्य सरकार ने उन हजारों की संख्या में अपने-अपने पैतृक गाँवों में लौटकर आने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए विशेष उपायों को शुरू नहीं किया है। 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Rural Bihar Lives in Fear as COVID-19 Spreads to Villages, Claiming Lives

Bihar
aurangabad
COVID-19
Bihar COVID
Rural Healthcare
Bihar Healthcare

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • global
    संदीपन तालुकदार
    मौसम परिवर्तन: वैश्विक कार्बन उत्सर्जन पूर्व महामारी स्तर पर पहुंचने के करीब
    06 Nov 2021
    एक रिपोर्ट बताती है कि इस साल कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में 4.9 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा होगा। इससे 2020 में महामारी के दौरान उत्सर्जन में आई 5.4 फ़ीसदी की कमी वापस अपने पुराने स्तर पर पहुंच जाएगी। 
  • Moscow
    एम. के. भद्रकुमार
    भारत ने खेला रूसी कार्ड
    06 Nov 2021
    पुतिन की दिल्ली यात्रा से कुछ हफ्ते पहले इस महीने के अंत में मास्को में रूसी-भारतीय "2+2" मंत्रिस्तरीय की पहली बैठक घटनापूर्ण या महत्वपूर्ण होने वाली है क्योंकि यह वाशिंगटन में मंत्रिस्तरीय यूएस-…
  • Dalit-Adivasi education
    राज वाल्मीकि
    महामारी से कितनी प्रभावित हुई दलित-आदिवासी शिक्षा?
    06 Nov 2021
    हाल ही में नेशनल कैंपेन ऑन दलित ह्यूमन राइट्स  ने दलित आदिवासियों की शिक्षा पर एक अध्ययन किया। इस अध्ययन में अपेक्षा से अधिक दुखद तथ्य सामने आए हैं।
  • lakshwdeep
    अयस्कांत दास
    भारत में सबसे कम जेल में रहने की दर होने के बावजूद लक्षद्वीप को पांचवीं जेल की आवश्यकता क्यों है?
    06 Nov 2021
    पूरे देश में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में लक्षद्वीप में जेल में रह रहे कैदियों की तादाद सबसे कम 6 फीसदी है। इसकी तुलना में दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश में जेल अधिभोग दर क्रमशः 174.9…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 10,929 नए मामले, 392 मरीज़ों की मौत
    06 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.43 फ़ीसदी यानी 1 लाख 46 हज़ार 950 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License