NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
ग्रामीण विकास: तमिलनाडु के दो परिप्रेक्ष्य
लेखक ने हाल ही में राज्य का दौरा किया और ग्रामीण इलाक़ों में दो घटनाओं की जांच की। यह उनके निष्कर्षों की एक रिपोर्ट है।
के एस सुब्रमण्यन
18 Mar 2021
Translated by महेश कुमार
ग्रामीण विकास
प्रतीकात्मक तस्वीर

भाग 1

एक उद्यमी अपनी निजी स्वामित्व वाली भूमि पर एक ग्रामीण विकास परियोजना विकसित करना चाहता था। हालांकि, उसका सामना एक ईर्ष्यालु पड़ोसी से हुआ,  जिसने खुद के स्थानीय आधिकारियों के साथ संबंध होने का फायदा उठाकर परियोजना को विकसित करने के प्रयासों में बाधा डालने की कोशिश की और उनकी जमीन का एक हिस्सा हड़पने की कोशिश भी की। लालची पड़ोसी के जातिगत, वर्गीय नौकरशाही संबंध व्यापारी के ग्रामीण विकास के प्रयासों के आड़े आने लगे। उपरोक्त भूमि गाँव-थेथमपट्टी, वीटी पट्टी डिवीजन, डिंडीगुल पूर्वी तालुक में स्थित है।

पड़ोसी ने उस व्यापारी जो एक दलित है, की भूमि के एक बड़े हिस्से को हड़पने की कोशिश में अपने गुर्गों की हिंसा का सहारा लिया। अक्टूबर 2020 में हुई इस हिंसा में दलित खेतिहर मजदूर और उसके पार्टनर को गंभीर चोटें आईं। दोनों अपराधी वीरप्पन और पंडी, उच्च जाति से संबंधित थे, जिनके ग्रामीण समाज और प्रशासन के संस्थानों में गहरे संबंध थे। 

वीरप्पन ने बिना किसी कानूनी आधार के दावा किया कि कि मदुरै शहर में व्यवसायी की कुल 1.8 एकड़ भूमि में से 27 सेंट ज़मीन उसकी है। वीरप्पन ने भूमि के अपने स्वामित्व के झूठे दावे को मज़बूत बनाने के लिए राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर किया था। वीरप्पन के झूठे दावे को साबित करने के लिए ग्राम प्रशासनिक अधिकारी और पंचायत अध्यक्ष ने कथित तौर पर उसके साथ मिलीभगत की थी। असली मालिक, जो मदुरै में रहता था, को इस पूरे घटनाक्रम के बारे में अंधेरे में रखा गया था।

घटना के दिन, मुख्य अपराधी, वीरप्पन, पंडी के साथ मिलकर सवालों के घेरे वाली भूमि में घुसा और दमन किया जिसमें दोनों ने मिलकर शारीरिक रूप से हमला किया और अनुसूचित जाति के केयरटेकर और उसके पार्टनर को गंभीर रूप से शारीरिक नुकसान पहुंचाया।

खबर सुनते ही व्यापारी दौड़कर घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने कानूनी सलाह ली और दोषियों के खिलाफ एससी/एसटी अत्याचार (रोकथाम) अधिनियम 1989 के  तहत पुलिस केस दर्ज़ कर दिया। भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर और छेदछाड़ राजनीतिक रूप से प्रेरित स्थानीय पंचायत अधिकारियों द्वारा समर्थित राजस्व विभाग के निचले दर्जे के अधिकारियों की मिलीभगत से की गई थी। पुलिस की ओर से त्वरित प्रतिक्रिया में उपरोक्त बातें कही गई लेकिन बाद में इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हमारे दौरे के दौरान, हमने पुलिस के स्थानीय डीआईजी और जांच अधिकारी से मुलाकात की। दुर्भाग्य से, मामले के मूल जांच अधिकारी, जिसे ईमानदार आदमी माना जाता था को प्रशासनिक कारणों से स्थानांतरित कर दिया गया था। दोनों दोषियों की पहचान कर ली गई थी और उन्हें थाने लाया गया और शिकायतकर्ता के आने तक बंद रखा गया। किन्ही कारणों से, दोनो दोषियों, दोषी व्यक्तियों, जिन्होंने भूमि के दलित केयरटेकर और साथी पर हमला किया था और पीड़ितों के खिलाफ गंभीर अपराध किए थे, गिरफ्तार नहीं किया गया।

यह देश के अन्य हिस्सों में देखा जाने वाला भूमि-हड़पने और पुलिस की निष्क्रियता का एक विशिष्ट मामला है।

केस में पुलिस की सबसे बड़ी अनियमितता आरोपियों को पुलिस स्टेशन में लंबे समय तक बिना किसी गिरफ्तारी के हिरासत में रखना थी और फिर पुलिस भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच संदिग्ध परिस्थितियों में परिणामस्वरूप उनकी रिहाई थी।  

दलितों के खिलाफ हिंसा करना कानून में निषेध है। इस मामले में व्यापक प्रशासनिक और पुलिस की मिलीभगत, ग्रामीण सत्ता की संरचना और ग्रामीण गरीबों के खिलाफ पुलिस की "संरचनात्मक बातचीत" को दर्शाती है। यह मामला राज्य के पुलिस महानिदेशक के ध्यान में लाया गया, जिन्होंने आवश्यक कार्रवाई का वादा किया है।

ग्रामीण सत्ता की संरचना और स्थानीय पुलिस के बीच इस तरह की संरचनात्मक बातचीत भारत के उत्तरी राज्यों में आम है। इस घटना ने स्थानीय अधिकारियों से बिना लाग-लपेट के प्रतिक्रिया का आह्वान किया था, जो नहीं हुआ।

भाग 2

तमिलनाडु में ग्रामीण विकास पर मेरा दूसरा दृष्टिकोण एक उल्लेखनीय सामाजिक कार्यकर्ता और आयोजक, एम॰ मुथुसामी (1953 में जन्म) की कहानी पर आधारित है, जिन्होंने अक्टूबर 1985 में डिंडीगुल जिले के एम॰ वादीपट्टी गाँव में इको ट्रस्ट (ECHO TRUST) (एजुकेशन एंड कम्यूनिटी हेल्थ ओर्गनाईजेशन ट्रस्ट) नामक एक स्वैच्छिक संगठन की स्थापना की थी। 

इको ट्रस्ट उस क्षेत्र के ग्रामीण गरीबों के जीवन में गुणात्मक अंतर लाने की कोशिश कर रहा था जहां मुथुसामी उसी जिले में रहते हैं: यह एक वस्तुत: शत्रुतापूर्ण सामाजिक वातावरण वाला गाँव है जो उच्च जाति-कुलीन वर्ग के हितों के वर्चस्व को साधता है, यह वर्ग किसी भी उभरते ग्रामीण सामाजिक-राजनीतिक प्रतिरोध या दावे को कुचलने या उसे अपने तहत लाने की कोशिश में रहता है। 

एम॰ मुथुसामी ने जननी प्रकाशन, चेन्नई द्वारा 2020 में प्रकाशित, 'नेन्गा निनिवुहल' (अविस्मरणीय यादें) शीर्षक से तमिल भाषा में एक किताब लिखी थी जो उल्लेखनीय और असामान्य 160-पृष्ठ की आत्मकथा है जिसमें न्याय के प्रति संघर्ष और उनके दावे की कहानी है। 

ऐसा अक्सर पाया नहीं जाता है कि पुस्तक का लेखक जो एक पूर्व ग्रामीण कृषि मजदूर हो वह संगठित शैली में अपने विचारों को लिखे। पुस्तक सभी के लिए गहरी रुचि और प्रासंगिकता रखती है और वर्तमान में इसका अंग्रेजी भाषा में अनुवाद भी किया जा रहा है। यह किताब संभवतः असंख्य पाठकों और व्यापक प्रतिक्रिया को आकर्षित करेगी।

लेखक का जन्म मदुरई जिले के एक छोटे से गाँव में खेतिहर मजदूरों के परिवार में हुआ था। उनकी पुस्तक 13 अध्यायों की पुस्तक है और उनकी गरीबी से त्रस्त पृष्ठभूमि के वर्णन से शुरू होती है। लेखक को अपनी प्राथमिक शिक्षा के शुरुआती दौर में रोजगार का अवसर मिला था, लेकिन हाई स्कूल की शिक्षा के बाद उनकी शैक्षिक प्रक्रिया स्वयं ही समाप्त हो गई। लेखक किसी भी तरह के रोजगार को स्वीकार करने के लिए तैयार था।

भले ही उनका कामकाजी जीवन दुर्गम समस्याओं से भरा हुआ था, लेकिन लेखक ने उन पर काबू पाने में लगन और उनसे लड़ने का का रास्ता अपनाया। 1977 में उन्होने तिलकवती के साथ सफल अंतरजातीय प्रेम विवाह किया था। अध्याय 6 (प्र॰65) में विवाह की कहानी को स्पष्ट रूप से सुनाया गया है। दुर्लभ अंतर-जातीय विवाह को प्रगतिशील राजनीतिक ताकतों का समर्थन मिला, जिसने लेखक को प्रगतिशील मुद्दों से प्रेरित किया।

1976 में, लेखक ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में जीवन का नया कदम रखा और रुषा  (हेल्थ एंड सोशल अफेयर्स की ग्रामीण यूनिट) में काम करने के लिए शामिल हो गए, जो कि क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर के करीब था। 1981 में, वे रियल (रूरल एजुकेशन एंड एक्शन फ़ॉर लिबरेशन) नामक एक संगठन में शामिल हो गए और एक लेखक भी बन गए। तब तक, लेखक दो बेटों के पिता बन चुके थे।

1985 में, लेखक ने इको ट्रस्ट (ECHO TRUST) नाम से अपना ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य संगठन स्थापित करके एक नया रास्ता निकाला, जिसका वर्णन अध्याय 10 में किया गया है।

शेष तीन अध्याय इको ट्रस्ट की हाल की गतिविधियों पर केन्द्रित हैं और लोगों के मुद्दों पर लड़ने के उद्देश्य को बताते हैं।

1987 में, ट्रस्ट ने कपार्ट (CAPART) जो ग्रामीण विकास की केंद्र सरकार द्वारा  वित्त पोषित एजेंसी है से धन प्राप्त हुआ। लेखक एम॰ वाडीपट्टी गाँव में चले गए, जो इको ट्रस्ट का वर्तमान स्थान है।

इस लेख के लेखक 1990 के दशक की शुरुआत में तमिलनाडु में ग्रामीण गरीबों के जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने में उनकी गतिविधियों का समर्थन करने वाले लेखक और उनके प्रतिभाशाली साथियों से मिले थे। 

इको ट्रस्ट एक जन-केंद्रित और गांधीवादी विकास के नजरिए वाली परियोजनाओं पर काम कर रहा है। मुथुसामी द्वारा पेश उदाहरण को तमिलनाडु में ग्रामीण विकास की संभावनाओं का विस्तार करने के लिए आगे बढ़ाने की जरूरत है।

लेखक त्रिपुरा के सार्वजनिक प्रशासन और ग्रामीण विकास संस्थान के महानिदेशक थे। व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Rural Development: Two Perspectives from Tamil Nadu

Rural Tamil Nadu
Tamil Nadu police
anti-Dalit violence
Dalit land grab
Atrocities Act
Rural power structure

Related Stories

जम्मू: सार्वजनिक कुएं से पानी निकालने पर ऊंची जातियों के लोगों पर दलित परिवार की पिटाई करने का आरोप


बाकी खबरें

  • Supreme Court
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश ओबीसी सीट मामला: सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला अप्रत्याशित; पुनर्विचार की मांग करेगी माकपा
    20 Dec 2021
    मध्य प्रदेश पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण समाप्त करने, अन्य पिछड़े समुदायों के लिए निर्धारित और आरक्षित पदों पर चुनाव रोकने, उनकी बहुसंख्या को सामान्य सीटों में परिवर्तित करने का निर्देश देने वाले…
  • CAA
    ज़ाकिर अली त्यागी
    CAA हिंसा के 2 साल: मायूसियों के बीच इंसाफ़ की जद्दोजहद करते मृतकों के परिजन!
    20 Dec 2021
    20 दिसंबर 2019 को पूरे देश मे CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए, उसी प्रदर्शन के दौरान उत्तर प्रदेश में 23 लोगों की जान गई। आज 2 साल बाद मृतकों के परिवारों का क्या हाल है, कैसे जी रहे हैं वो, उनकी न्याय की…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 6,563 नए मामले, ओमिक्रॉन के मामले बढ़कर 157 हुए
    20 Dec 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 47 लाख 46 हज़ार 838 हो गयी है। देश में ओमिक्रॉन के मामलों की संख्या भी तेजी से बढ़ती जा रही है। ओमिक्रॉन अब तक 12 राज्यों में फैल चुका है।
  • Modi rally
    राज कुमार
    दो टूक: ओमिक्रॉन का ख़तरा लेकिन प्रधानमंत्री रैलियों में व्यस्त
    20 Dec 2021
    जैसे ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया को ओमिक्रॉन के ख़तरे से सावधान किया तो प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट करके लोगों को शारीरिक दूरी बनाए रखने और मास्क पहनने की सीख दे डाली। लेकिन अगले ही पल विशाल…
  • agri
    डॉ सुखबिलास बर्मा
    कृषि उत्पाद की बिक़्री और एमएसपी की भूमिका
    20 Dec 2021
    भारत सरकार ने 2000 के दशक की शुरुआत में किसानों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए एमएसपी तय करके बाज़ार हस्तक्षेप नीति का पालन किया था। इस तरह,एमएसपी सरकार की परिकल्पित मूल्य नीति का प्रमुख घटक बन गयी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License