NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
रूस ने पश्चिम के आर्थिक प्रतिबंधों का दिया करारा जवाब 
पश्चिम की धमकियों से बेपरवाह पुतिन ने पूर्वी यूक्रेन ऑपरेशन को फिर से शुरू कर दिया है क्योंकि रूबल वापस दौड़ में आ गया है और मास्को को 'मज़बूत व्यापार विकल्प' आता दिख रहा है।
एम. के. भद्रकुमार
21 Apr 2022
Translated by महेश कुमार
Russia

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को कहा कि पश्चिमी प्रतिबंध अपने उद्देश्य को पूरा करने में "निष्प्रभावी" साबित हुए हैं। उनके शब्दों में कहें तो, "अमेरिका और यूरोपीय यूनियन को उम्मीद थी कि ये प्रतिबंध रूस के वित्त और अर्थव्यवस्था पर तेजी से विनाशकारी प्रभाव डालेंगे,  बाजारों में दहशत पैदा करेंगे, बैंकिंग प्रणाली को तहस-नहस कर देंगे और दुकानों में सामानों की बड़ी कमी पैदा हो जाएगी।"

"हालांकि, हम पहले से ही पूरे विश्वास के साथ कह रहे थे कि रूस के मामले में पश्चिम की यह नीति विफल होगी। उनकी आर्थिक हमले करने की रणनीति अप्रभावी साबित हो गई है। इसके अलावा, कटु सत्य यह है कि, प्रतिबंधों ने उन ही लोगों को अधिक प्रभावित किया जिन्होंने इन्हे हम पर थोपा था। मैं यहाँ संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देशों में उच्च मुद्रास्फीति और बढ़ती बेरोजगारी और बिगड़ते आर्थिक हालात के साथ-साथ यूरोपीय लोगों के गिरते जीवन स्तर और उनकी बचत के होते मूल्यह्रास का उल्लेख कर रहा हूं। (सौजन्य:क्रेमलिन वेबसाइट)

सभी संकेत इस बात के मिल रहे हैं कि रूस ने कड़े प्रतिबंध लगाने के खिलाफ जिस आकस्मिक योजना पर काम किया था, वह अब रंग ला रही है। रूबल की रिकवरी बिल्कुल आश्चर्यजनक है। अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने शेखी बघारते हुए कहा था कि वह रूबल को "मलबे" में तब्दील कर देंगे, लेकिन हुआ ठीक इसके उल्टा। प्रतिबंधों के तत्काल बाद, रूसी मुद्रा 121.5 रूबल प्रति डॉलर तक गिर गई थी और स्थिति काफी गंभीर दिख रही थी। लेकिन रूबल तब से वापस उसी रफ्तार से बढ़ रहा है, जहां यह यूक्रेन में रूस के विशेष अभियान शुरू होने से पहले था - अप्रैल के मध्य में लगभग 80 रूबल प्रति अमेरिकी डॉलर था। विडंबना यह है कि मार्च में रूबल सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गई है!

पुतिन ने कहा कि उपभोक्ता कीमतों में "पिछले छह हफ्तों में रूस में 9.4 प्रतिशत की बड़ी  वृद्धि हुई है," और लोगों ने "अपने परिवार की आय पर इसका प्रभाव महसूस किया है।" उन्होंने "मुद्रास्फीति के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र में सभी सामाजिक लाभों, पेंशन और मजदूरी को समायोजित करने" के निर्णय की घोषणा की है। रूस इसे वहन कर सकता है, क्योंकि इस वर्ष की पहली तिमाही में, "हम बजट अतिरिक्त या अधिशेष का रिकॉर्ड स्तर देख रहे हैं।"

रूस की तुलना में, अमेरिका में नज़ारा निराशाजनक है, जहां मुद्रास्फीति 40 साल के उच्च स्तर पर पहुँच गई है और मार्च में यह 8.54 प्रतिशत को छू गई है - जो यदि यूक्रेन में संघर्ष जारी रहा तो और बदतर होने वाली है। इससे भी बुरी बात यह है कि यह परिदृश्य बाइडेन की हरित ऊर्जा योजना को बिगाड़ सकता है। जहां तक यूरोपीयन यूनियन की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी का सवाल है, तो उसके इस साल मुद्रास्फीति के दोहरे आंकड़े को छूने की उम्मीद है।

दिलचस्प बात यह है कि रूस "मजबूत व्यापार अतिरिक्त" का आनंद उठा रहा है और वर्ष की पहली तिमाही में, चालू खाता अतिरिक्त राशि के साथ 58 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया है, "जोकि एक ऐतिहासिक उच्च स्तर हासिल करना है। बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी नकदी लौट रही है और घरेलू जमाखाता बढ़ रहा है। दरअसल, रूबल की वापस गर्जन के पीछे के कारक स्वयं स्पष्ट हैं।

ऐसा लगता है कि यूरोपीयन यूनियन ने महसूस कर लिया है कि रूस पश्चिम से अत्यधिक अलगाव के वातावरण में अपने जीवन के टुकड़ों को आश्चर्यजनक रूप से अच्छी तरह से समेट रहा है। यूरोपीयन यूनियन की विदेश नीति के प्रमुख जोसेप बोरेल ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि "वित्तीय प्रतिबंधों के संबंध में, निश्चित रूप से, आप हमेशा आगे बढ़ सकते हैं, लेकिन हम पहले ही उस सीमा तक पहुंच चुके हैं जो हम कर सकते हैं। हमने वह सब कुछ किया जो हम कर सकते थे।"

दरअसल, ब्रसेल्स और वाशिंगटन दोनों में प्रतिबंधों पर जोर दिया गया है। जबकि ब्रुसेल्स अब रूस की छवि को धूमिल करने के लिए यूक्रेन संकट के मानवीय पहलुओं पर अधिक ज़ोर दे रहा है, वाशिंगटन रूस को सैन्य रूप से हराने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है या कम से कम संघर्ष को तब तक लंबा कर सकता है जब तक वह कर सकता है। इसके मुताल्लीक बयानबाजी अपने चरम पर पहुंच गई है।

यूरोपीय मन में गुस्सा और हताशा जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ के अनैच्छिक बयानबाज़ी से स्पष्ट हो जाती है कि "रूस को यह युद्ध नहीं जीतना चाहिए।" लेकिन यह भी स्पष्ट है कि रूस पर तेल प्रतिबंध लगाने के यूरोपीयन यूनियन के भीतर कोई सहमति नहीं है। हंगरी ने खुले तौर पर चेतावनी दी है कि वह रूसी तेल या गैस पर यूरोपीयन यूनियन के किसी भी प्रतिबंध का विरोध करेगा। सीधे शब्दों में कहें तो पश्चिम के पास रूस को उसकी पटरियों पर रोकने का कोई विकल्प नहीं हैं।

वाशिंगटन की अधिकांश बयानबाजी और भव्यता का वास्तविक उद्देश्य मारियुपोल में करारी हार से ध्यान हटाना है, जहां धैर्य और परिश्रम से, रूसी सेना ने नाटो देशों से नव-नाजी बटालियन और उसके पश्चिमी सलाहकारों (अमेरिकियों सहित) को फंसा दिया है। विशाल अज़ोवस्टल परिसर को अपने नियंत्रण में लेने के लिए अंतिम अभियान आज से शुरू हो गया है जहां आतंकवादी और विदेशी फंस गए हैं (जो लगभग 11 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है)। (इस संबंध में मेरा ब्लॉग देखें मारियुपोल की लड़ाई समाप्त हो रही है, न्यूज़क्लिक में देखे)

यदि पश्चिमी सैन्य अधिकारियों को पकड़ लिया जाता है और उन्हे पेश किया जाता है तो नाटो देश बेनकाब हो जाएंगे। रूस ने चेतावनी दी है कि उन्हें युद्धबंदी के रूप में नहीं माना जाएगा और उन पर मुकदमा चलाया जा सकता है। निश्चित रूप से, "बुचा हत्याएं" और रूसी ध्वज जहाज मोस्कवा के काला सागर में डूबने जैसे प्रकरणों को ध्यान भटकाने के लिए इसे दोहराया जा सकता है।

आगे जाकर, निर्णायक कदम तो डोनबास की लड़ाई में होगा, जो अभी शुरू हुई है। इसका नतीजा किसी भी शांति समझौते की रूपरेखा तय करेगा। इस स्टैंड में देखें तो, रूसी सेनाओं के पास उनकी संख्यात्मक ताकत और अत्यधिक बेहतर मारक क्षमता के साथ-साथ इलाके के लाभ के मामले में रूस बढ़त में है - बड़े पैमाने पर खुले स्थान जहां टैंक और भारी कवच तैनात किए जा सकते हैं और बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास संभव है, जो रूसी सेना का पारंपरिक रूप से एक मजबूत बिंदु है। फिर से, रूसी अभियान के पहले भाग की तुलना में, रसद को रूस के भीतरी इलाकों में आपूर्ति लाइनों के मामले में और यूक्रेनी बलों तक पहुंचने से बाधित करने की उनकी क्षमता उनके पक्ष में है।

जबकि डोनबास में ऑपरेशन चल रहा है, यह पूरी तरह से मानने योग्य है कि रूसी सेना ओडेसा पर नियंत्रण करने की तैयारी शुरू कर सकती है, जो नाटो के युद्धपोतों को यूक्रेन तक पहुंचने से रोकने और काला सागर के पूरे उत्तरी तट को सुरक्षित करने के लिए जरूरी है। इस संबंध में, मायकोलाइव और खेरसॉन दक्षिणी अक्ष में मारियुपोल के बाद नए केंद्र बिंदु हैं।

मारियुपोल के रणनीतिक महत्व को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए - इसके अलावा यह पोर्ट-हेड है जो संसाधन-समृद्ध डोनबास को विश्व बाजार से जोड़ता है। मारियुपोल दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक बंदरगाहों में से एक है। रूस के काला सागर बेड़े के लिए, अज़ोव का सागर निर्बाध आधार सुविधा प्रदान करता है। मारियुपोल के डोनबास में फिर से शामिल हुए बिना क्रीमिया की सुरक्षा कभी भी सुनिश्चित नहीं होगी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यूक्रेन के सबसे अमीर व्यक्ति, जो कि अज़ोवस्टल के मालिक हैं, यूक्रेनी कुलीन रिनत अखमेतोव ने कल रॉयटर्स को बताया कि वह मारियुपोल के पुनर्निर्माण का इरादा रखता है। कुलीन वर्ग (प्रति ब्लूमबर्ग की व्यक्तिगत संपत्ति में 10 बिलियन डॉलर की कीमत की है) जो उनके इरादे की पुष्टि करता है। उनकी इच्छाधारी सोच का रहस्य यह है कि राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने हाल ही में एक बार उनकी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए कथित रूसी समर्थित तख्तापलट में शामिल होने का संदेह किया था।

बेशक, यूक्रेन के अभिजात वर्ग के साथ रूस का व्यापक नेटवर्क रहा है, वास्तव में, लगभग सभी यूक्रेनी कुलीन वर्गों का मॉस्को अभिजात वर्ग के साथ व्यावसायिक और व्यक्तिगत संबंध रहा है। अधिकांश विदेशी पर्यवेक्षक जो अभी इस म्मले में बच्चे हैं, इस बात से अनजान हैं कि संघर्ष खत्म होने के बाद मास्को कितनी तेजी से और आसानी से उन निष्क्रिय संपर्कों को सक्रिय कर देगा और एक राजनीतिक संक्रमण निश्चित रूप से एक लंबी भयानक रात के बाद के दिन के उजाले में प्रकट होगा।

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे गए लेख को पढ़ने के लिए नीचे के लिंक पर क्लिक करें

Russia Pushes Back Western Sanctions

ukrain
Russia
NATO

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

डेनमार्क: प्रगतिशील ताकतों का आगामी यूरोपीय संघ के सैन्य गठबंधन से बाहर बने रहने पर जनमत संग्रह में ‘न’ के पक्ष में वोट का आह्वान

रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के समझौते पर पहुंचा यूरोपीय संघ

यूक्रेन: यूरोप द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाना इसलिए आसान नहीं है! 

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन


बाकी खबरें

  • गुजरात: धर्म-परिवर्तन क़ानून को लेकर हाईकोर्ट और सरकार के बीच क्या विवाद है?
    सोनिया यादव
    गुजरात: धर्म-परिवर्तन क़ानून को लेकर हाईकोर्ट और सरकार के बीच क्या विवाद है?
    29 Aug 2021
    धर्म-परिवर्तन के नए क़ानून पर हाईकोर्ट की सख़्ती से गुजरात सरकार सकते में है। कानून के कई प्रावधानों पर हाईकोर्ट की रोक के ख़िलाफ़ राज्य की विजय रुपाणी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा की है।
  • 200 हल्ला हो: अत्याचार के ख़िलाफ़ दलित महिलाओं का हल्ला बोल
    रचना अग्रवाल
    200 हल्ला हो: अत्याचार के ख़िलाफ़ दलित महिलाओं का हल्ला बोल
    29 Aug 2021
    "जाति के बारे में क्यों ना बोलूं सर जब हर पल हमें हमारी औक़ात याद दिलाई जाती है..."
  • रोटी के लिए जद्दोजहद करते खाना पहुंचाने वाले हाथ
    समृद्धि साकुनिया
    रोटी के लिए जद्दोजहद करते खाना पहुंचाने वाले हाथ
    29 Aug 2021
    नई श्रम सुधार संहिता के दायरे में गिग वर्कर्स को लाए जाने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा के लाभ प्रदान करने के बावजूद फुड डिलीवरी कर्मचारियों का शोषण बदस्तूर है, खासकर महामारी के बाद से। समृद्धि साकुनिया…
  • अफ़गानिस्तान: ‘ग्रेट गेम’  खेलने की सनक में अमेरिका ने एक देश को तबाह कर दिया
    जॉन पिलगर
    अफ़गानिस्तान: ‘ग्रेट गेम’  खेलने की सनक में अमेरिका ने एक देश को तबाह कर दिया
    29 Aug 2021
    कुछ दशक पहले अफ़गानिस्तान की अवाम ने अपनी आज़ादी ली थी, लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देशों की महत्वाकांक्षाओं ने उसे तबाह कर दिया
  • अन्न महोत्सव: मुफ़लिसी का मंगलगान, सरकारी खर्च पर हिंदुत्व प्रचार
    असद रिज़वी
    अन्न महोत्सव: मुफ़लिसी का मंगलगान, सरकारी खर्च पर हिंदुत्व प्रचार
    29 Aug 2021
    “उतना ही खाद्यान्न मुफ़्त मिला जितना पहले मिलता आ रहा था। मुफ़्त सिर्फ़ एक थैला मिला है, जो पहले नहीं मिला था। थैला देने के बदले सरकार अगर मुफ़्त खाद्यान्न बढ़ा कर देती तो ज़्यादा अच्छा होता।”
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License