NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कटाक्ष: थैंक यू तालिबान जी
सस्ता तेल चाहिए, अफ़ग़ानिस्तान चला जा! मोदी जी नये इंडिया में पब्लिक के लिए हर चीज में च्वाइस है। बेकारी और तालिबान में से कोई एक चुन लो। चुनावी तानाशाही और तालिबान में से कोई एक चुन लो।
राजेंद्र शर्मा
23 Aug 2021
Modi
Image courtesy : India Today

थैंक यू तालिबान जी। बहुत-बहुत शुक्रिया। आपने एकदम मौके पर काबुल की गद्दी संभाली है। अफगानिस्तान की तो हम नहीं कहते, पर यहां नये इंडिया में ईज ऑफ डुइंग बिजनस से लेकर ईज ऑफ लिविंग तक सब इतना बढ़ गया है कि पूछिए ही मत। अब न कोई पेट्रोल-डीजल-रसोई गैस के बढ़ते दाम को रोने वाला है, न सरसों के तेल के बढ़ते दाम को। न कोई महंगे राशन की कांय-कांय कर रहा है, न महंगे फल-तरकारी की। सब समझ गए हैं कि जब तक सब कुछ महंगा-महंगा है, तभी तक बाकी सब चंगा है। वर्ना महंगाई हटी कि अफगानिस्तान वाली दुर्घटना घटी। देखा नहीं, वहां तेल, राशन, सब सस्ता था, सो तालिबान आ गए कि नहीं। सिंपल है--सस्ता तेल चाहिए, अफगानिस्तान चला जा! मोदी जी नये इंडिया में पब्लिक के लिए हर चीज में च्वाइस है। बेकारी और तालिबान में से कोई एक चुन लो।

चुनावी तानाशाही और तालिबान में से कोई एक चुन लो। बहुसंख्यकवाद और तालिबान में से, कोरोना के टीके और तालिबान में से, महंगाई और तालिबान में से, कोई एक चुन लो। फिर भी महंगाई वगैरह की हाय-हाय मचाना चुनने वालों के लिए भी दो ऑप्शन हैं। या तो अफगानिस्तान चले जाओ या फिर यूएपीए, सिडीशन वगैरह-वगैरह में नये इंडिया में जेल जाओ, जैसे यूपी से असम तक परंपरागत मीडिया तो मीडिया, सोशल मीडिया तक में तालिबान का नाम लेने वालों के ठट्ठ के ठट्ठ भेजे जा रहे हैं।

और यूपी में अभी तो शुरूआत है। आगे-आगे देखिए, तालिबान-हमदर्द के नाम पर जेल जाता है, कौन-कौन? यूपी में योगी जी को चुनाव भी तो जिताना है। मंदिर-वंदिर खास चल नहीं रहे, फिर लव जेहाद से लेकर पॉपूलेशन पॉलिसी तक के इशारों की तो बात ही क्या है। मीडिया में पहले वाली बात नहीं रही, न आइटी सैल के झूठ में, न टीवी वाली पेड न्यूज में। ऊपर से किसानों का मिशन यूपी-उत्तराखंड और। तालिबान जी की एंट्री की इससे अच्छी टाइमिंग हो नहीं सकती थी। सच पूछिए तो योगी जी की तरफ से तो स्पेशल थैंक यू बनता है! प्रचार युद्ध के लिए, वह चाहे चुनाव के लिए हो या शांतिकाल के लिए, प्रिय शत्रु से ज्यादा प्रिय कोई नहीं होता है। पर, सीधे थैंक यू नहीं कह सकते। पर तालिबान जी की काबुल में एंट्री की टाइमिंग के लिए, ऑफीशियली अमरीका का तो थैंक यू कर ही सकते हैं। न अमरीकी, अफगानिस्तान से हटने के अपने शेड्यूल पर कायम रहते और न तालिबान जी इसी टैम पर काबुल की गद्दी पर पहुंचते। फिर योगी जी किस पर तलवार चलाने का स्वांग रचकर, सांसद बर्क से लेकर शायर राणा तक पर मुकद्दमे करते। अफगानिस्तान में तालिबान तो पहले भी थे, तब तो तालिबान-हमदर्द होने के शक में किसी पर मुकद्दमा नहीं किया, खुद योगी जी ने भी नहीं। टाइमिंग असली चीज है। उधर, योगी जी के पंचायती राज मंत्री ने किसानों की हरी टोपी का तो तालिबानी बताए जाने के लिए नंबर भी लगा दिया है। पहले पढ़ा-लिखा मुसलमान, फिर किसान; तालिबानी कहलाने के लिए अगला नंबर किस का होगा।

वैसे तालिबान जी के आने से, योगी जी समेत जी लोगों के चुनाव के बिजनस की डुइंग में ही ईज नहीं आयी है। पूरी भगवा पलटन के ईज ऑफ डुइंग पालिटिक्स में भी भारी विकास हुआ है। अब नये इंडिया में जिसने भी ज्यादा चूं-चपड़ की, उसे भेजने के लिए एक नया ठिकाना खुल गया है--अफगानिस्तान। मोदी जी के राज के सात साल में बेचारे विरोधियों/आलोचकों/ आंदोलनजीवियों को पाकिस्तान भेज-भेजकर बोर हो गए थे। लोगों ने भी मजाक बनाना शुरू कर दिया था कि भगवाइयों को पाकिस्तान से खास प्यार है--जिसे देखो, उसे पाकिस्तान भेजते रहते हैं! ऐसा भी नहीं है कि भगवाइयों ने अपने ‘भारत छुड़ाओ’ मिशन में वैराइटी लाने की कोशिश ही नहीं की। बांग्लादेश, चीन वगैरह को भी ट्राई किया, पर बात नहीं बनी। लेकिन, अब और नहीं। सिर्फ पाकिस्तान ही पाकिस्तान और नहीं। अब भेजने के लिए अफगानिस्तान भी है। यानी अब भारत छुड़ाओ मिशन के ठिकानों में भी सिर्फ नाम को ही नहीं, सचमुच वैराइटी है। विरोधी/आलोचक/ आंदोलनजीवियों को भी च्वाइस मिलेगी--पाकिस्तान जाना है या अफगानिस्तान। इसके  लिए मोदी जी का एक थैंक यू तो बनता है। पर विरोधी/आलोचक, मोदी जी को थैंक यू कहेंगे, हमें नहीं लगता है। खैर! आलोचक मानें न मानें, मोदी जी उनके लिए भी नयी-नयी च्वाइसें पैदा करते रहेंगे। मोदी जी दिल से हैं ही इतने डेमोक्रेटिक । वह तो दिल से अभी तक प्रज्ञा ठाकुर को माफ तक नहीं कर पाए हैं। तभी तो बेचारी पिछले मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भी कोरी एमपी की एमपी ही बनी रही हैं, जबकि मोदी जी जानते थे कि गृह मंत्रालय में कम से कम आतंकवाद से लडऩे के लिए, उनके अनुभव तथा विशेषज्ञता का बखूबी इस्तेमाल हो सकता है।

तालिबान के आने से, भगवा पलटन का ईज ऑफ डुइंग बिजनस इसलिए भी बढ़ गया है कि तालिबान ने अपनी बड़ी रेखा खींचकर, उनके बिना कुछ किए ही उनकी रेखा छोटी कर दी है। अब हमारे देसी तालिबान अपनी भीड़ लिंचिंग को भी दयालुतापूर्ण सिद्ध कर सकते हैं। हमारी देसी भीड़ लिंचिंग में हाथों-लातों और ज्यादा से ज्यादा डंडों-पत्थरों के उपयोग में जो पर्सनल टच है, जो सामूहिकता तथा एकता की भावना है, एके-47 धारी अफगानी तालिबानों की निर्मम भीड़ लिंचिंग में कहां? और औरतों के मामले में तो हमारे देसी तालिबान की उदारता के कहने ही क्या? जीवित-दाह कर देना या पर्दे की संस्कृति की रखवाली करने के लिए तेजाब-वेजाब डाल देना तो फिर भी चल जाता है, पर हमारे यहां पत्थरों से मार-मार कर मारने की हर्गिज इजाजत नहीं है। बाकी जीवित-दाह की भी इजाजत अपवाद स्वरूप ही दी जाती है, जैसे औरत दलित-वलित हो तभी। वर्ना देसी तालिबान, चार-छ: डंडे लगाने या बहुत हुआ तो नंगा कर के घुमाने से आगे नहीं जाते हैं। सेकुलरिज्म का तो खैर देसी तालिबान पूरा ही पालन करते हैं। मस्जिद-वस्जिद पर कब्जा करते भी हैं तो, दूसरी जगह मस्जिद बनाने के लिए जमीन दे भी जाए तो उसका विरोध तक नहीं करते हैं। और डैमोक्रेसी में तो हमारे देसी तालिबान का इतना विश्वास है कि पूछो ही मत। विरोधियों को डराना हो, जबर्दस्ती सरकार बनाना हो, सारी संस्थाओं को ढहाना हो, संसद को बेकार बनाना हो, सब काम पूरे कायदे-कानून से सरकार के बल पर करते हैं, अफगानिस्तान वालों की तरह बंदूक के बल पर नहीं। सो थैंक यू तालिबान जी, हमारे देसी तालिबान को तालिबान-लाइट कहलवाने के लिए।

इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोक लहर के संपादक हैं।

sarcasm
Satire
TALIBAN
Narendra modi
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • CDSCO
    भाषा
    CDSCO ने कोवोवैक्स, कोर्बेवैक्स और मोलनुपिराविर के आपात इस्तेमाल को स्वीकृति दी
    28 Dec 2021
    सीडीएससीओ की कोविड-19 संबंधी विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने ‘कोवोवैक्स’ और ‘कोर्बेवैक्स’ को कुछ शर्तों के साथ आपात स्थिति में उपयोग की अनुमति देने की सिफारिश की है। कोविड-19 रोधी दवा ‘मोलनुपिराविर’ (…
  • sunil
    भाषा
    पेले से आगे निकले छेत्री, भारत ने आठवां सैफ ख़िताब जीता, महिला टीम भी चमकी
    28 Dec 2021
    भारतीय फुटबॉल को वर्ष 2021 में कोई बड़ी सफलता नहीं मिली । पचास और साठ के दशक का अपना खोया गौरव लौटाने की कोशिश में जुटी टीम उस पल का इंतजार ही करती रही जो देश में इस खेल की दशा और दिशा बदल सके।
  • UP Elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: किसानों की आय दोगुनी होने का टूटता वादा, आत्महत्या का सिलसिला जारी
    28 Dec 2021
    बुंदेलखंड के बाँदा ज़िले में युवा किसान राम रुचि और प्रमोद पटेल ने इसी साल क़र्ज़ के दबाव में आत्महत्या कर ली। न्यूज़क्लिक ने दोनों परिवारों से मिल कर बात की और जानने की कोशिश की कि सरकार का किसानों…
  • officers of Edu dept eating MDM with students
    राजेश डोबरियाल
    उत्तराखंड: 'अपने हक़ की' लड़ाई अंजाम तक पहुंचाने को तैयार हैं दलित भोजन माता सुनीता देवी
    28 Dec 2021
    “...चूंकि क्रिसमस की बैठक में सभी पक्ष अभी क्षेत्र का माहौल सौहार्दपूर्ण बनाए रखने पर सहमत हुए हैं इसलिए वे जांच कमेटी की रिपोर्ट आने का इंतज़ार कर रहे हैं। नियमानुसार तो सुनीता देवी की ही भोजनमाता…
  • UP Election 2022
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव 2022: बेरोज़गार युवा इस चुनाव में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं
    28 Dec 2021
    मोदी-योगी से नाउम्मीद युवाओं को विपक्ष से चाहिए रोजगार का भरोसा
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License