NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कटाक्ष: नये इंडिया में पुराने वाली आज़ादी नहीं चलेगी!
बात सिंपल है। नये इंडिया का काम, पुरानी आज़ादी से कैसे चलेगा? और क्यों चलना चाहिए? पुरानी आज़ादी में ऐसा था ही क्या?
राजेंद्र शर्मा
10 Mar 2021
 नये इंडिया में पुराने वाली आज़ादी नहीं चलेगी!
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार : curiouskeeda

बस इसी की कसर बाकी थी। अब बर्तानिया के पीएम जी भी मैदान में कूद पड़े। कहते हैं कि पीएम टु पीएम मुलाकात होगी, तब मोदी से बात करेंगे; किसानों के मुद्दे पर भी और उनके राज में मीडिया की आज़ादी के मुद्दे पर भी।

क्यों भाई क्यों?

क्या यह ब्रिटिश सांसदों के अपनी आज़ादी का दुरुपयोग करके भारत के अंदरूनी मामलों में घुसने का ही मामला नहीं है कि वे भारत के किसानों से लेकर मीडिया की आज़ादी तक के मुद्दे उठा रहे हैं?

खैर, सांसद तो फिर भी अपनी आज़ादी का दुरुपयोग कर ही जाते हैं, न्यू इंडिया तक में सारे इंतजामों के बावजूद विपक्षी सांसद ऐसा करने से बाज नहीं आते हैं। पर ब्रिटिश संसद ने कैसे भारत के अंदरूनी मामलों पर अपने यहां बहस की इजाजत दे दी।

जिन चीजों को इंडिया का अंदरूनी मामला होने के बाद भी, डेढ़ घंटे की और वह भी स्वतंत्र बहस के लायक, न्यू इंडिया की संसद ने ही नहीं समझा, उन पर ब्रिटिश संसद ने डेढ़ घंटे की स्वतंत्र बहस की इजाजत दे दी!

ब्रिटिश संसद के अपनी आज़ादी के इस सरासर दुरुपयोग को, नया इंडिया हर्गिज बर्दाश्त नहीं करेगा। उसके ऊपर से पीएम जॉन्सन की सीधे मोदी जी से बात करने धमकी और? माना कि जॉन्सन साहब मोदी जी के कान में ही बोलेंगे, पर विरोधियों को शोर मचाने का मौका तो मिल ही जाएगा। बाइडेन ने फोन पर कुछ बोला, मोदी जी ने तो नोटिस तक नहीं लिया, पर अमरीका से खबर लेकर विरोधियों ने शोर मचा दिया। जॉन्सन जी कानों-कान कहेंगे, तब भी इंडिया वाले लाउडस्पीकर पर सुनेंगे।

लंदन में भारत के उच्चायोग को तो इस पर विरोध जताना ही था। पर बेचारे विरोध जताकर ही रह गए। लंदन, अपना केंद्र शासित प्रदेश होता, तो शाह जी की पुलिस टूलकिट सेडीशन में ऐसा रगड़ा लगाती कि किसान, मीडिया, सब भूल जाते। पर आज़ादी-आज़ादी का शोर मचाने वालों ने अपने उतावलेपन में पहले ही सारा खेल बिगाड़ दिया था। नेहरू जी ने कुर्सी के लालच में, लंदन पर भारत का दावा छोड़ा सो छोड़ा, लाहौर-करांची-ढाका पर भी दावा छोड़ दिया। काश तब इंडिया वालों ने संघ की बात मान ली होती और आज़ादी-आज़ादी की जल्दी नहीं की होती। संघ ने विशाल भारत से आगे अंगरेजी राज को ही पलट दिया होता और लंदन को विशाल भारत में, संघ शासित प्रदेश कर दिया होता।

खैर! मोदी जी के राज में नहीं है तो क्या हुआ, लंदन में बैठी संसद को इंडिया के अंदरूनी मामलों में टांग अड़ाने की इजाजत थोड़े ही दे देंगे।

वैसे है ये सब मिस-अंडरस्टेंडिंग का मामला ही। देश से लेकर विदेश तक में जो मोदी जी के पिटवाए डंके में से आज़ादी का दी एंड-आज़ादी का दी एंड की आवाज़ सुनाई देने लगी है, सिंपल मिस-अंडरस्टेंडिंग का ही मामला है। इंडिया वाले तो इंडिया वाले, बाहर वाले भी जैसे पुराने इंडिया को ही असली इंडिया मानने लगे थे, वैसे ही पुराने इंडिया की आज़ादी को ही असली आज़ादी मानने लगे थे।

आदत, वाकई ऐसी ही चीज होती है। पर पुराना इंडिया कब तक चलता और मोदी जी कैसे चलने देते?

जिस इंडिया में सेक्युलरिज्म-सेक्युलरिज्म का शोर था और हिंदू धर्म-संस्कृति की रक्षा की कोई बात ही नहीं होती थी; जिस इंडिया में बराबरी के दावे थे, प्राचीन भारतीय परंपराओं के निर्वहन के कर्तव्यों पर कोई ध्यान ही नहीं था; जिस इंडिया में सरकार का काम बांध, कारखाने वगैरह बनाना था, मंदिर बनाना निजी क्षेत्र के भरोसे था; जिस इंडिया में सरकार बिजनस करना चाहती थी और बिजनस करने वालों को देने के बजाए उनसे लेना चाहती थी; ऐसा इंडिया और कितने दिन चल सकता था!

और ऐसे पुराने इंडिया की आज़ादी? उसका हाल तो पूछो ही मत। जिसका जब जी करता था, और आज़ादी मांगने खड़ा हो जाता था। इसकी आज़ादी मिल गयी, तो उसकी आज़ादी मांगने आ गए। कभी भूख से आज़ादी, तो कभी अशिक्षा से आज़ादी, कभी बेकारी से आज़ादी, तो कभी बीमारी से आज़ादी, कभी भेदभाव से आज़ादी, तो कभी नाबराबरी से आज़ादी। यानी टू मच आज़ादी हो रखी थी। और प्रेस की आज़ादी तो खैर, मैडम इंदिरा गांधी की इमर्जेंसी तक में मांगने वाले निकल आए थे।

जेएनयू वालों और उनकी देखा-देखी बहुत सी यूनिवर्सिटी वालों ने तो हद्द ही कर दी। उन्हें हर चीज से आज़ादी चाहिए थी--साम्राज्यवाद से लेकर जात-पांत तक से। लड़कियों के लिए रोक-टोक से भी। और तो और सांप्रदायिकता से भी आज़ादी। बहुत से लोगों का तो आज़ादी मांगने का ही स्पेशलाइजेशन हो गया था। मोदी जी ने अब जाकर बीमारी को पहचनवाया है, तब देश की समझ में आया है; ये आंदोलनजीवी हैं।

कोई अपनी मेहनत-मजदूरी पर जीता है, कोई दूसरों की मेहनत की चोरी पर जीता है, कोई शुद्घ चोरी पर जीता है, कोई मांग-मांग कर जीता है; पर ये आंदोलन पर जीते हैं। आंदोलन खत्म, तो आंदोलनजीवी भी खत्म। आंदोलनजीवी खत्म, तो पुराने इंडिया के आज़ादी-आज़ादी के नारे खत्म। आज़ादी के नारे खत्म होंगे, तभी इंडिया फिर से पुराना-नया महान बनेगा। जब तक आज़ादी के नारे, हमें अपनी गुलामी की याद दिलाते रहेंगे, तब तक नया इंडिया क्या खाक बनेगा? नये इंडिया में आज़ादी का पुराना शोर नहीं चलेगा!

बात सिंपल है। नये इंडिया का काम, पुरानी आज़ादी से कैसे चलेगा? और क्यों चलना चाहिए? पुरानी आज़ादी में ऐसा था ही क्या? जिसका भी मन किया, कुछ भी बोल दिया। कुछ भी लिख दिया। कोई भी फिल्म बना दी, कोई भी चित्र बना दिया। किसी का भी मज़ाक उड़ा दिया। किसी की भी भावनाओं को आहत कर दिया। और तो और कुछ नहीं कर के, अपनी मौजूदगी से ही भावनाओं को आहत कर दिया! टीवी पर कुछ भी दिखा दिया। अख़बार ने नहीं छापा, टीवी ने नहीं दिखाया, तो सोशल मीडिया पर पढ़ा-दिखा दिया। और तो और विदेश में रहने वाले भारतीयों को भी भाई लोगों ने यही सब करने का चस्का लगा दिया। पर इस सब का नये इंडिया में क्या काम है? यह सब तो यही बताता है कि मेरे भारत का महान बनना अभी बाकी है। यह भारत का नाम करना है या उसे बदनाम करना!

नये इंडिया में पुराने वाली आज़ादी नहीं चलेगी। बात सिर्फ इतनी है जिसे भाई लोगों ने राई का पहाड़ बना दिया है और फ्रीडम हाउस ने भारत को आजाद से आंशिक आजाद हो गया बता दिया है। टीवी-अखबार के बाद अब ओटीटी वाले, सोशल मीडिया प्लेटफार्म वाले, डिजिटल मीडिया वाले और अब तो विदेश में बैठे ओसीआइ तक, आज़ादी छिनने का शोर मचा रहे हैं।

पर है सब मिस-अंडरस्टेंडिंग का मामला ही। वर्ना आज़ादी पूरी है। मोदी की कितनी भी तारीफ करो, भारत की कितनी भी कीर्तिगाथा गाओ, हिंदू कितना भी खतरे में बताओ, कहां कोई रोकने-टोकने वाला है!

पता नहीं क्यों मोदी जी जो भी करते हैं, मिस-अंडरस्टेंड हो जाते हैं। सीएए लाए--मिस-अंडरस्टेंड। कश्मीर को आज़ादी दी--मिसअंडरस्टेंड। लॉकडाउन--मिस-अंडरस्टेंड। मजदूरों के फायदे के कानून-मिस-अंडरस्टेंड। किसान कानून-मिस-अंडरस्टेंड। मीडिया कानून--मिस -अंडरस्टेंड। ओसीआइ नियम--मिस-अंडरस्टेंड। पर मोदी जी भी नये इंडिया को बनाना भी छोडऩे वाले नहीं हैं। उन्हें पता है कि लोग अभी चाहे जितना विरोध करें, बाद में उनकी नयी आज़ादी को भी मंजूर कर ही लेंगे। जो नये इंडिया से करते हैं प्यार, नयी आज़ादी से कैसे करेंगे इंकार!

(यह एक व्यंग्य आलेख है। लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)

sarcasm
new india
new india reality
Religion Politics
Secularism

Related Stories

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

ज्ञानवापी कांड एडीएम जबलपुर की याद क्यों दिलाता है

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

पीएम मोदी को नेहरू से इतनी दिक़्क़त क्यों है?

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

लता के अंतिम संस्कार में शाहरुख़, शिवकुमार की अंत्येष्टि में ज़ाकिर की तस्वीरें, कुछ लोगों को क्यों चुभती हैं?

कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!

कटाक्ष : बुलडोज़र के डंके में बज रहा है भारत का डंका

जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र: एक कवि का बयान


बाकी खबरें

  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसान आंदोलन की वजह से घर-घर चक्कर काट रहे हैं गृह मंत्री : धर्मेंद्र मलिक
    29 Jan 2022
    जाटलैंड यानी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन ने कितनी बदली है तस्वीर, क्या चलेगा भाजपा का सांप्रदायिक कार्ड, इस पर वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बात की भारतीय किसान यूनियन के अहम चेहरे और मीडिया…
  • uttarpradesh
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: जिसके सर होगा पूर्वांचल का हाथ, वही करेगा यूपी में राज!
    29 Jan 2022
    देश का सबसे बड़ा सियासी सूबा उत्तर प्रदेश हर बार यही सोचता है कि इस बार तो विकास पर चुनाव होंगे, लेकिन गाड़ी आकर आखिरकार जातिवाद पर ही अटक जाती है, ऐसे में पूर्वांचल का जातीय समीकरण हर बार राजनीतिक…
  • chunav chakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तराखंड 2022: क्या खदबदा रहा है पहाड़ के भीतर, पहाड़ की सियासत, पहाड़ के सवाल
    29 Jan 2022
    सन् 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होकर बना उत्तराखंड राज्य आज तक अपनी तकदीर नहीं बदल पाया। हर बार इस आशा में सरकार बदलता है कि शायद इस बार अच्छा होगा...लेकिन इसके अच्छे दिन नहीं आते। भाजपा और कांग्रेस…
  • GANDHI JI
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: टीवी स्टूडियो में गांधी जी के साथ महाबहस
    29 Jan 2022
    बापू मुस्कुरा के बोले— मुझे तो इतने साल पहले मारा जा चुका है। फिर आप मुझे मारने के लिए अब क्यों परेशान हो रहे हैं?
  • Bundelkhand
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपीः योगी सरकार के 5 साल बाद भी पानी के लिए तरसता बुंदेलखंड
    29 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश को बुंदेलखंड स्पेशल पैकेज के तहत जितना पैसा दिया गया उसका 66% यानी 1445.74 करोड़ रुपये का इस्तेमाल पानी का संकट दूर करने के लिए किया गया लेकिन स्थिति नहीं बदली।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License