NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
कटाक्ष: तालिबान की शिक्षा, तालिबान की दीक्षा!
विश्व गुरु के मुंह से बरबस निकल गया--फोलो मी! फिर विश्व गुरु ने बड़े प्यार से समझाया। थैंक यू भी सुनने को मिलेगा और चाहो तो चुनाव वाला वोट भी मिलेगा, बस थोड़े धीरज की जरूरत होगी।
राजेंद्र शर्मा
11 Sep 2021
कटाक्ष: तालिबान की शिक्षा, तालिबान की दीक्षा!
कार्टून साभार: सतीश आचार्य

आखिरकार, तालिबान को राज मिल गया। पर चैन नहीं मिला। अमरीकी बोरिया-बिस्तरा समेट कर निकल लिए। अपनी सेवा करने वाले कुछ को साथ ले गए और ज्यादा को खाली-पीली दिलासा देकर छोड़ गए। उनके हवाई जहाजों के दरवाजे पकड़ कर लटकने वाले, आसमान से गिरने की तस्वीरें में निपट गए। अमरीका वालों के लिए विदाई बम धमाकों में और जवाब में अमरीकी ड्रोन हमलों में, बीसियों मौतों से विदाई की रस्में भी पूरी हो गयीं। और तो और पंजशीर वाले बागियों की भी जमीन छूट गयी, बस बगावत रह गयी। शहरों में, चौराहों पर बंदूकों के पीछे पुलिस-फौज की कलफदार वर्दी की जगह, पठानी सूट, काले जैकेट और काली पगड़ियां आ गयीं। सरकार तक बन गयी और वह भी ऐसी-वैसी नहीं, ईरानी मॉडल की--ऊपर धर्मगुरु, तालिबान। यहां तक कि बाहर के सुबह-शाम आतंकवादी-आतंकवादी का जाप करने वालों ने भी ‘वेट एंड वाच’ का रुख अपनाना शुरू कर दिया और तालिबान को क्या-क्या नहीं करना चाहिए का राग सुनाना शुरू कर दिया। यानी ऊपर देखने में तो सब कुछ ठीक-ठाक ही जा रहा था। पर राज संभालने वाले तालिबान बेचैन थे। उन्हें न इस पहलू चैन आए न उस पहलू। शुरू-शुरू में सोच रहे थे, बीस साल बाद दोबारा राज आया है। पड़ते-पड़ते राज की आदत पड़ जाएगी और आते-आते चैन भी आ जाएगा। पर चैन कहां? फिर सोचा इस बार राज करने का ट्राई करेंगे, इंशाअल्ला सब ठीक हो जाएगा। पर चैन नहीं आया।

और चैन आता भी तो आता कैसे! बाहर से गोलियां मिलनी तो बंद हो गयीं, पर तालिबान कुछ भी करें गाली ही मिले। बोले शरिया राज चलेगा--गाली। बोले, पर औरतों को काम पर जाने से नहीं रोकेंगे--भरोसा कैसे करें? बोले, औरतों को बुर्का नहीं तो नकाब तो पहनना ही पड़ेगा--देखा, हम न कहते थे। बोले, हम दूसरे किसी देश में दखल नहीं देंगे--अभी कह रहे हैं, ऐसा करेंगे क्या? बोले, पर मुसलमानों के लिए चिंता जरूर जताएंगे--आ गयी ना असली बात। बोले, इस्लामी राज होगा--चलो कह दिया, नो डैमोक्रेसी? बोले, चुनाव...--रहने ही दो। बोले मीडिया खबरें देता रह सकता है--देखते हैं। बोले पर, गड़बड़ी फैलाने की इजाजत नहीं देंगे--तो सिर पर तलवार लटका दी। यानी जो भी करें, मिले गाली ही। जाने-पहचाने दुश्मनों से ही नहीं, बिना जान-पहचान वालों तक से।

हद तो तब हो गयी जब औरतें-मर्द विरोध प्रदर्शन करते रहे, उस पर तो किसी ने एक बार थैंक यू तालिबान-2 जी तक नहीं कहा, पर आर्डर दिया कि प्रदर्शन के लिए चौबीस घंटे पहले इजाजत लेनी पड़ेगी, तो हल्ला मच गया कि डैमोक्रेसी खत्म! हर प्रदर्शन को गैर कानूनी बताने और प्रदर्शनकारियों के सिर फुड़वाने वाले तक कहें, तालिबान ने डैमोक्रेसी की हत्या कर दी। अब तालिबान ने हार मान ली और उपाय जानने के लिए धर्मगुरु के पास जा पहुंचे।

पर धर्मगुरु ने दुआ-सलाम के बाद ही कह दिया कि यह उनका डिपार्टमेंट नहीं है। बोले, तुम्हारी शिक्षा अभी अधूरी है। अमरीकियों-पाकिस्तानियों ने दूसरों का राज उखाडऩे से लेकर, राज पर कब्जा करने तक की पढ़ाई तो पढ़ा दी। पर थैंक यू तालिबान जी कहलवाने की पढ़ाई तो रह ही गयी। सो किसी सुपात्र को गुरु बनाकर अपनी शिक्षा पूरी कर के आओ। फिर चाहे करना यही सब, चैन की बंसी बजाओगे। अब तालिबानियों ने बची हुई शिक्षा के लिए गुरु की तलाश शुरू कर दी।

अमरीकियों ने साफ मना कर दिया। पाकिस्तानियों ने कहा, हमें जितनी आती थी दे दी, हम चला रहे हैं, तुम भी उसी से काम चलाओ। चीनियों से पढऩे का ख्याल उन्होंने खुद ही बदनामी के डर से छोड़ दिया। ईरान, यूएई, सऊदी, कोई जंचा ही नहीं। थक-हार कर फिर धर्मगुरु के पास पहुंचे। उपाय आपने बताया है, अब टीचर भी आप ही बताएं। धर्मगुरु ने कहा--टीचर नहीं, गुरु। बल्कि राज करने वाला गुरु। तालिबान ने खीझकर पूछा--मगर कौन? धर्मगुरु ने प्यार से चपत लगायी--पगले, बगल में छोरा और जग में ढिंढोरा। इस पढ़ाई का विश्व गुरु तो बार्डर के पार ही बैठा है?

तालिबान बिना देरी किए विश्व गुरु के आश्रम में जा पहुंचे। पर विश्व गुरु ने उन्हें आश्रम में प्रवेश देने से मना कर दिया। तालिबान रुआंसे हो गए। तब विश्व गुरु ने उन्हें धीरज बंधाते हुए कहा-- आश्रम में प्रवेश देने से इंकार किया है, पढ़ाने से नहीं। तालिबान ने पूछा--माने? विश्व गुरु ने उन्हें, आश्रम में रहकर शिक्षा और दूर शिक्षा का अंतर समझाया। बोले, दूर से मुझे देख-देखकर शिक्षा लो, तुम्हें कौन रोक रहा है? मेरा अनुकरण करो, तुम्हारी पढ़ाई खुद ब खुद हो जाएगी।

तालिबान ने पूछा--पर आश्रम में प्रवेश! विश्व गुरु ने मुस्कुरा कर कहा--प्रवेश नहीं, फिर भी दूर शिक्षा, यही तुम्हारा पहला सबक है! आश्रम में प्रवेश नहीं दिया कि खबर बनेगी, फिर तुम हर चीज में मेरा अनुकरण करो तब भी कोई शक नहीं करेगा कि तुम मुझसे पढ़ रहे हो। हां! बीच-बीच में जब-तब तुम मुझे गालियां देते रहना और मैं तुम्हें। हमारे राज सलामत रहेंगे। तालिबान ने सबक गांठ में बांध तो लिया फिर भी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हुए। तब विश्व गुरु ने कृपा कर के कहा--चलो तुम्हारी एक और शंका का समाधान किए देते हैं। तुम्हें सबसे ज्यादा परेशान क्या चीज कर रही है? तालिबान के मुंह से हठात निकल गया--थैंक यू तालिबान सुनने को कान तरस गए। कुछ भी करें, हमेशा गाली सुनने को मिलती है, थैंक यू कभी भी नहीं। ऐसा क्या करें जो हमें भी सुनने को मिले--थैंक यू तालिबान जी!

विश्व गुरु के मुंह से बरबस निकल गया--फोलो मी! फिर विश्व गुरु ने बड़े प्यार से समझाया। थैंक यू भी सुनने को मिलेगा और चाहो तो चुनाव वाला वोट भी मिलेगा, बस थोड़े धीरज की जरूरत होगी। थैंक यू सुनने के लिए, प्रजा को समझाना पड़ेगा कि तुम ही राजा हो, तुम ही राजा रहोगे और जो करोगे, तुम ही करोगे। और तुम जो भी करोगे, उसी में उसका भला है। प्रजा को समझाने के लिए, मीडिया को समझाना होगा और मीडिया को समझाने के लिए, उसके मालिकों को दाम और दंड, दोनों से समझाना होगा कि प्रजा तक सिर्फ तुम्हारी बात पहुंचे, इसी में उनका भी फायदा है। जब प्रजा तक कोई और आवाज ही नहीं पहुंचेगी, तो उससे बात-बेबात कितना ही थैंक यू करा लेना, चाहे अनाज के खाली थैले के लिए भी। तालिबान ने डरते-डरते पूछा, ये कर लें तो क्या चुनाव वाली डैमोक्रेसी भी चला सकते हैं? विश्व गुरु ने गर्दन अकड़ाकर कहा--हम चला नहीं रहे हैं? फोलो मी। बस, प्रजा तक कोई और आवाज नहीं पहुंचे, कोई भी। बाकी सब दूर शिक्षा से देख-देखकर सीखो और कामयाब हो, मेरा आशीर्वाद है। बस मैं जरा जल्दी में हूं। एकाध न्यूज पोर्टलों पर छापे पड़वाना है। ऐसा है कि दूसरी आवाजों की रोक-थाम तो मुझे भी बराबर करनी ही पड़ती है।

चलते-चलते तालिबान को चीअर अप करने के लिए विश्व गुरु ने कहा--और हां, अपने धर्मगुरु को यह खुशखबरी जरूर देना कि आप लोगों के यहां धर्मगुरु है, तो हमारे यहां भी राजगुरु है। बल्कि टू इन वन, धर्मगुरु भी और राजगुरु भी। इसलिए, मैं तुम्हारा गुरु ही नहीं गुरुभाई भी हूं। तब से तालिबान की दूर-शिक्षा बराबर जारी है और सुनते हैं कि थैंक यू की इक्का-दुक्का चिट्ठियां तो अब तालिबान जी के पास भी आ रही हैं । तालिबान का राज भी कितना अपना-अपना सा लगने लगा है, नहीं क्या?      

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)

sarcasm
TALIBAN
Afghanistan
America

Related Stories

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी

क्या दुनिया डॉलर की ग़ुलाम है?

कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!

कटाक्ष : बुलडोज़र के डंके में बज रहा है भारत का डंका

फ़ैज़, कबीर, मीरा, मुक्तिबोध, फ़िराक़ को कोर्स-निकाला!


बाकी खबरें

  • CDSCO
    भाषा
    CDSCO ने कोवोवैक्स, कोर्बेवैक्स और मोलनुपिराविर के आपात इस्तेमाल को स्वीकृति दी
    28 Dec 2021
    सीडीएससीओ की कोविड-19 संबंधी विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने ‘कोवोवैक्स’ और ‘कोर्बेवैक्स’ को कुछ शर्तों के साथ आपात स्थिति में उपयोग की अनुमति देने की सिफारिश की है। कोविड-19 रोधी दवा ‘मोलनुपिराविर’ (…
  • sunil
    भाषा
    पेले से आगे निकले छेत्री, भारत ने आठवां सैफ ख़िताब जीता, महिला टीम भी चमकी
    28 Dec 2021
    भारतीय फुटबॉल को वर्ष 2021 में कोई बड़ी सफलता नहीं मिली । पचास और साठ के दशक का अपना खोया गौरव लौटाने की कोशिश में जुटी टीम उस पल का इंतजार ही करती रही जो देश में इस खेल की दशा और दिशा बदल सके।
  • UP Elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: किसानों की आय दोगुनी होने का टूटता वादा, आत्महत्या का सिलसिला जारी
    28 Dec 2021
    बुंदेलखंड के बाँदा ज़िले में युवा किसान राम रुचि और प्रमोद पटेल ने इसी साल क़र्ज़ के दबाव में आत्महत्या कर ली। न्यूज़क्लिक ने दोनों परिवारों से मिल कर बात की और जानने की कोशिश की कि सरकार का किसानों…
  • officers of Edu dept eating MDM with students
    राजेश डोबरियाल
    उत्तराखंड: 'अपने हक़ की' लड़ाई अंजाम तक पहुंचाने को तैयार हैं दलित भोजन माता सुनीता देवी
    28 Dec 2021
    “...चूंकि क्रिसमस की बैठक में सभी पक्ष अभी क्षेत्र का माहौल सौहार्दपूर्ण बनाए रखने पर सहमत हुए हैं इसलिए वे जांच कमेटी की रिपोर्ट आने का इंतज़ार कर रहे हैं। नियमानुसार तो सुनीता देवी की ही भोजनमाता…
  • UP Election 2022
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव 2022: बेरोज़गार युवा इस चुनाव में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं
    28 Dec 2021
    मोदी-योगी से नाउम्मीद युवाओं को विपक्ष से चाहिए रोजगार का भरोसा
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License