NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
साहित्य-संस्कृति
भारत
कटाक्ष: नये साल के लक्षण अच्छे नजर नहीं आ रहे हैं...
नहीं-नहीं, हम ओमिक्रॉन की बात नहीं कर रहे हैं। ओमिक्रॉन हमारे नये साल का सगुन नहीं बिगाड़ सकता। हम बात कर रहे हैं...
राजेंद्र शर्मा
02 Jan 2022
New year
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार: अमर उजाला

नये साल के लक्षण अच्छे नजर नहीं आ रहे हैं। शुरूआत ही गलत हुई है। नहीं-नहीं, हम ओमिक्रॉन की बात नहीं कर रहे हैं। और कुछ करे न करे, पट्ठे  ने नये साल के जश्नों पर तो ठंडा पानी डाल ही दिया। बेचारे बजरंगदलियों को हैप्पी न्यू ईयर कहने वालों पर लाठी चलाना तो दूर, दौड़ाने या धक्का-मुक्की करने तक का मौका नहीं मिला। कोविड के डर ने न्यू ईयर को खुशी का मौका मानने वालों को घर पर ही बैठा दिया। बची-खुची कसर, सरकारी रोक-टोक और पुलिसिया डंडों ने पूरी कर दी। फिर भी ओमिक्रॉन हमारे नये साल का सगुन नहीं बिगाड़ सकता।

ओमिक्रॉन कितना ही जोर लगा ले, 2021 में डेल्टा वेरिएंट ने ऐसे रिकार्ड बनाए हैं, ऐसे रिकार्ड बनाए हैं कि ओमिक्रॉन उनके आस-पास भी नहीं पहुंच सकता है। हां कोई सरकारी आंकड़ों को ही पकडक़र बैठा रहे तो बात दूसरी है। सरकारी आंकड़ों में तो न तो आक्सीजन की कमी से कोई मौत हुई थी और न कभी गंगा, मोक्ष-दायिनी से शव-वाहिनी बनी थी। ओमिक्रॉन चाहे डेल्टा के सरकारी आंकड़ों से ही होड़ कर के खुद को विजयी घोषित भी कर ले, उसे देश की जनता से तो चैम्पियन का सम्मान मिलने से रहा। आखिर, ये पब्लिक है, सब जानती है। यूपी की चुनावी रैलियां गवाह हैं कि छप्पन इंची छाती वालों के राज में, हमें कोई वाइरस-फाइरस डरा नहीं सकता है।

\अब आप पूछेंगे कि ओमिक्रॉन नहीं तो और क्या है जो नए साल की शुरूआत में असगुन कर रहा है? वैष्णो देवी में भगदड़, जिसमें साल के पहले ही दिन एक दर्जन से ज्यादा भक्त मारे गए और दर्जनों घायल हो गए। बेशक, वैष्णो देवी में जो हुआ दु:खद है। भक्तों के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था। साल के पहले दिन ऐसा होना तो और भी दु:खद है। पर इसके लिए मोदी जी की डबल इंजन सरकार से कोई सवाल नहीं किया जाना चाहिए। वैसे भी डबल इंजन सरकार तो इतनी मंदिर प्रेमी है कि वह तो ऐसा लगता है कि इस बार यूपी और उत्तराखंड में तो पूरा चुनाव ही अयोध्या से लेकर काशी से होकर केदारनाथ तक, मंदिर विकास की ऊंची दर की अपनी पुरानी पुश्तैनी तलवार भांजकर ही लडऩे जा रही है। वह माता भक्तों की सरकार है और माता भक्त उसके हैं, फिर उसकी किसी कोताही की बात तो कोई सोच भी कैसे सकता है। ऐसी घटनाएं क्या पहले वालों के राज में नहीं होती थीं? सचाई यह है कि ऐसी घटनाएं हमेशा से होती आयी हैं। क्या किया जाए, हमारे यहां भक्त हैं ही बहुत। भक्ति और भीड़ का चोली-दामन का संबंध है। और भीड़ जहां, दुर्घटना वहां। दो-दो मंत्रियों ने बता दिया है कि इसके लिए सिर्फ और सिर्फ पब्लिक जिम्मेदार है। लोग हैं कि मानते ही नहीं हैं! वैसे भी यह तो सीधे भक्त और उसके भगवान के बीच का मामला है, उसमें मोदी जी की या कोई भी सरकार आती ही कहां है! भगवान की मर्जी में किसी का क्या दखल? जिसकी आयी हो, उसे कोई बचा भी कैसे सकता था? खैर! हर चार-छह महीने पर होने वाली ऐसी घटनाओं से, नये इंडिया में नए साल के सगुन नहीं बिगड़ा करते।

हमारा नये साल का सगुन बिगाड़ा है चीनियों ने। हमारी डबल इंजन सरकार ने कितने शोध और प्रयोगों के बाद और दर्शन के गहन योग के बल पर, रामबाण फार्मूला ईजाद किया था--जिस चीज को न बदला जाए, उसका नाम बदल दो; कम से कम भक्त तो उसे नया कहने ही लगेंगे। पर चीनी हमारा फार्मूला चुरा ले गए। और फार्मूला चुराया तो चुराया, अब दीदादिलेरी से हमारे फार्मूले का हमारे ही खिलाफ इस्तेमाल भी कर रहे हैं। और वह भी थोक में।

बेइमानों ने साल बदलते-बदलते हमारे अरुणाचल प्रदेश में एक-दो नहीं, पूरी पंद्रह जगहों के नाम बदल डाले, वह भी एक ही झटके में। चोरी भी नहीं, यह तो सरासर डकैती है। बदले हैं, हमारे डबल इंजन वालों ने भी बेशक नाम बदले हैं, चालू योजनाओं के, काम कर रही संस्थाओं के, पहले से चलती सडक़ों के, आबाद बस्तियों के और सैकड़ों साल के इतिहास वाले शहरों-कस्बों के नाम, बदले हैं। पर हम कभी किसी दूसरे देश में नाम बदलने के लिए नहीं गए। चीनी भी बदल लेते अपने शहरों-वहरों के नाम, हम कौन से उनसे अपने फार्मूले के उपयोग की रायल्टी मांगने जा रहे थे।

यह पहली बार थोड़े ही है जब दूसरे देश वालों ने हमारे ज्ञान की चोरी की है। सारी दुनिया ने हमसे ज्ञान चुराया है और हमने बिना किसी रपट या मुकद्दमे के उदारता से चुराने दिया है। इसीलिए तो हम विश्व गुरु हैं। सभी जानते हैं कि हमारे वेदों से फार्मूले चुरा-चुराकर ही यूरोप वालों ने सुई से लेकर रॉकेट तक सब कुछ बना लिया, जबकि फार्मूलों की चोरी की वजह से हम पीछे रह गए। पर इन चीनियों ने तो हद्द कर दी। हमारा फार्मूला चुराकर अपनी सीमाओं से बाहर उसको आजमा रहे हैं। और अगर उनके अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्सा मानने की बात मान भी लें, तब भी उन्होंने जो एक ही झटके में पंद्रह जगहों के नाम बदल डाले; वह तो साफ तौर पर हमारे फार्मूले को आजमा कर, हमें ही पीछे छोडऩे की कोशिश है? पहले न सही, पहली बार सही, डबल इंजन वालों को नाम बदलने के फार्मूले पर पेटेंट हासिल करना चाहिए और डब्ल्यूटीओ में चीन के खिलाफ दावा करना चाहिए। वर्ना चीनी कल को और न जाने कितने नाम बदलवाएंगे और लोग यह भूल ही जाएंगे कि नाम बदलकर, चीजों को बदलने का फार्मूला, रॉकेट वगैरह की तरह दुनिया को भारत की ही देन है।

खैर, चीनी अगर सोचते हैं कि नाम बदलकर चीजों को बदलने के हमारे फार्मूले की चोरी कर, वे हमारा विश्व गुरु का तमगा भी चुरा सकते हैं, तो वे भारी गलतफहमी में हैं। एक ही झटके में हमसे ज्यादा जगहों के नाम बदल लेने से क्या हो जाएगा? क्या वे हमारी तरह बदतर दिनों का नाम बदलकर, अच्छे दिन कर पाएंगे? हम विश्व गुरु होने का दावा यूं ही थोड़े ही करते हैं!  

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)

sarcasm
New Year 2022
COVID-19
Coronavirus
Omicron
Lockdown

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • शशि शेखर
    कांग्रेस का कार्ड, अखिलेश की तस्वीर, लेकिन लाभार्थी सिर्फ़ भाजपा के साथ?
    23 Mar 2022
    मोदी सरकार ने जिस राशन को गरीबों के लिए फ्री किया है, वह राशन पहले से लगभग न के बराबर मूल्य पर गरीबों को मिल रहा था। तो क्या वजह रही कि लाभार्थी समूह सिर्फ़ भाजपा के साथ गया।
  • bhagat singh
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    हमें ये शौक़ है देखें सितम की इंतिहा क्या है
    23 Mar 2022
    आज शहीद दिवस है। आज़ादी के मतवाले भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान का दिन। आज ही के दिन 23 मार्च 1931 को इन तीनों क्रांतिकारियों को अंग्रेज़ सरकार ने फांसी दी थी। इन क्रांतिकारियोें को याद करते…
  • नीलांजन मुखोपाध्याय
    सद्भाव बनाम ध्रुवीकरण : नेहरू और मोदी के चुनाव अभियान का फ़र्क़
    23 Mar 2022
    देश के पहले प्रधानमंत्री ने सांप्रदायिक भावनाओं को शांत करने का काम किया था जबकि मौजूदा प्रधानमंत्री धार्मिक नफ़रत को भड़का रहे हैं।
  • Mathura
    मौहम्मद अली, शिवानी
    मथुरा: गौ-रक्षा के नाम पर फिर हमले हुए तेज़, पुलिस पर भी पीड़ितों को ही परेशान करने का आरोप, कई परिवारों ने छोड़े घर
    23 Mar 2022
    मथुरा के जैंत क्षेत्र में कुछ हिंदुत्ववादियों ने एक टैंपो चालक को गोवंश का मांस ले जाने के शक में बेरहमी से पीटा। इसके अलावा मनोहरपुरा सेल्टर हाउस इलाके में आए दिन काफ़ी लोग बड़ी तादाद में इकट्ठा…
  • toffee
    भाषा
    उत्तर प्रदेश: विषाक्त टॉफी खाने से चार बच्चों की मौत
    23 Mar 2022
    ग्रामीणों के मुताबिक टॉफी के रैपर पर बैठने वाली मक्खियों की भी मौत हो गई। एक टॉफी सुरक्षित रखी गई है। पांडेय ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License