NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
व्यंग्य
भारत
राजनीति
कटाक्ष : बुलडोज़र के डंके में बज रहा है भारत का डंका
बताइए, बुलडोजर चला हिंदुस्तान में। और लंदन में प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन से सवाल पूछे जा रहे हैं और वह भी संसद में!
राजेंद्र शर्मा
02 May 2022
boris johnson

थैंक यू मोदी जी। आखिरकार, आपने कम से कम नये इंडिया वाले बुलडोजर का तो दुनिया भर में डंका बजवा ही दिया। बताइए, बुलडोजर चला हिंदुस्तान में। और लंदन में प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन से सवाल पूछे जा रहे हैं और वह भी संसद में! और तर्ज यह कि कौन मान सकता है कि उन्हें हाल के भारत के दौरे पर रवाना होने से पहले इतना भी पता नहीं था कि भारत में बुलडोजर कहां चल रहा है, किस पर चल रहा है और कौन चला रहा है? फिर उन्होंने अपनी भारत यात्रा के दौरान, जेसीबी उर्फ बुलडोजर पर चढक़र तस्वीर क्यों खिंचाई? और तस्वीर भी खिंचाई तो गुजरात में जाकर। वहां बुलडोजर पर सवार होकर क्या संदेश देना चाहते थे? कि ब्रिटिश सरकार इसके साथ है कि पहले मुसलमानों के घरों, मोहल्लों वगैरह पर धावे किए जाएं। फिर वे अगर इन धावों का जरा-बहुत भी विरोध करें तो उनके घरों-दुकानों पर बुलडोजर चढ़ा दिए जाएं। बोरिस जॉन्सन ने इंडिया की ऐसी बुलडोजरबाजी का समर्थन किस से पूछकर किया? ऐसा कर के उन्होंने ब्रिटेन का नाम खराब क्यों किया? उन्हें ब्रिटेन को इस तरह बदनाम कराने का अधिकार पब्लिक ने कब दिया, वगैरह, वगैरह।

बस ये समझिए कि बोरिस जॉन्सन साहब माफी मांगने पर मजबूर होने से बाल-बाल बच गए। वर्ना बुलडोजर के दुश्मनों ने तो ऐसी हालत कर दी थी कि बुलडोजर चले खरगौन, जहांगीरपुरी वगैरह में; बुलडोजर चलवाएं बाबा, मामा, शाह जी वगैरह; चुप साधकर अनुमोदन करें दुनिया की सबसे बड़ी डैमोक्रेसी के पीएम जी; और माफी मांगे इंग्लैंड का पीएम!

माना कि मोदी के नये इंडिया में सारा इतिहास बदला जा रहा है, लेकिन पचहत्तर साल से पहले वाले इतिहास की यह क्या कुछ ज्यादा ही पल्टी नहीं हो जाती? खैर! बोरिस जॉन्सन साहब माफी मांगने से बच भी गए तो क्या हुआ, नये इंडिया के बुलडोजर का तो दुनिया भर में डंका बज ही गया।

अब इंग्लेंड में डंका बजे और अमरीका में नहीं बजे, यह तो हो ही नहीं सकता। उल्टे अमरीका वाले तो इंग्लेंड वालों से दोगुना नहीं तो डेढ़ गुना तो डंका बजा ही रहे हैं। और सिर्फ मोदी सरकार के बुलडोजर का ही नहीं, उसकी भांति-भांति की करनियों-अकरनियों, सब का डंका बजा रहे हैं। यानी बुलडोजर के संग-संग हिजाब का भी, हलाल का भी, लव जेहाद से लेकर, धर्मांतरण कानूनों तक का और कौन जाने अब लाउडस्पीकर का भी। और ड्योढ़ा है, सो अमरीका में डंका संसद में इस या उस इक्का-दुक्का सांसद ने नहीं बजाया है बल्कि उनकी संसद के बनाए, अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने, नये इंडिया को ‘विशेष चिंता वाला देश’ कहकर बजाया है।

संक्षेप में इसका मतलब है, सबसे जोरों का यानी अफगानिस्तान वगैरह की टक्कर का डंका। और इस आयोग ने नये इंडिया का डंका कोई पहली बार नहीं बजाया है बल्कि पिछले तीन साल से तो लगातार ही बजा रहा है। यह दूसरी बात है कि अमरीका की सरकार ही अपने धंधे के ख्याल से बाकी दुनिया में खुद इसकी मुनादी कराने से बचती है! फिर भी इस साल इस आयोग ने डंका इसलिए कुछ और भी जोर से बजाया है कि पिछले साल मेें मोदी जी के राज ने अल्पसंख्यकों, दलितों आदि के अधिकारों पर बुलडोजर और भी जमकर चलाया है। खैर! बोरिस जॉन्सन की माफी की तरह, हमारे बुलडोजर का डंका, अमरीकी सरकार की मुनादी का मोहताज थोड़े ही है--डंका तो जोरों से बज रहा है।

और जब बाकी सारी दुनिया में हमारे बुलडोजर का डंका इतने जोरों से बज रहा है, तो स्वदेश में डंका कितने जोरों से बज रहा होगा, यह तो बताने की जरूरत ही नहीं है। नौबत ये आ गयी है कि लोगों ने बाकायदा इसकी मांग करनी शुरू कर दी है कि बुलडोजर को किसी न किसी तरह से राष्ट्रीय चिह्न का दर्जा दिया जाना चाहिए। जब बुलडोजर को राष्ट्रीय चिह्न घोषित कर दिया जाएगा, उसके बाद तो बुलडोजर कहीं भी चले, उसका चलना खुद ब खुद राष्ट्रीय कार्य हो जाएगा। और बुलडोजर के नीचे आने वाला, खुद ब खुद अपराधी मान लिया जाएगा। बुलडोजर के मामलों में कानून, अदालत, किसी का कोई लफड़ा ही नहीं रह जाएगा। गाय को तो अब तक राष्ट्रीय पशु घोषित भी नहीं किया गया है, तब भी उससे जो टकराएगा, सीधे ऊपर जाएगा वाली नौबत है।

बुलडोजर को राष्ट्रीय चिह्न घोषित करने के बाद तो कुछ भी करने की जरूरत ही नहीं रहे जाएगी, न सरकार को और न संघ परिवार को। चुनाव प्रचार समेत जो भी करना होगा बुलडोजर ही करेगा। पर एक ही प्राब्लम है कि गाय के होते हुए बुलडोलर को राष्ट्रीय पशु तो बना नहीं सकते और राष्ट्रीय पक्षी को मोदी जी अपने हाथ से दाना चुगाते आ रहे हैं, तो बनाएं तो क्या? कोई वेकेंसी नजर ही नहीं आती है। कुछ लोगों का ख्याल है कि जब 2025 में भागवत जी हिंदू राष्ट्र बनाएंगे, तो उसके केसरिया झंडे पर बीच में चक्र की जगह बुलडोजर को बैठा दिया जाए। एक पंथ दो काज हो जाएंगे, नया झंडा भी मुकम्मल हो जाएगा और बुलडोजर को उसका सही मुकाम भी मिल जाएगा। पर उसमें अभी कम से कम तीन साल और एक आम चुनाव की देर है। तब तक क्यों न मोदी जी की पार्टी में ही बुलडोजर को उसका मुकाम मिल जाए। या तो बीजेपी का ही पूरा नाम बुलडोजरी झंझट पार्टी घोषित कर दिया जाए या फिर कमल को हटाकर, बुलडोजर को ही पार्टी का निशान कर दिया जाए। वैसे भी कमल के कीचड़ में ही खिलने के ताने सुन-सुनकर बेचारों के कान पक गए हैं।

बस एक ही प्राब्लम है। बोरिस जॉन्सन ने बुलडोजर की सवारी की तो थी मोदी जी को खुश करने के लिए और उससे हमारे बुलडोजर का दुनिया भर में डंका भी खूब ही बजा, पर उसके चक्कर में अपने देश में एक प्राब्लम हो गयी। सब को पता चल गया कि मोदी जी का तो बुलडोजर भी अंगरेजों वाला है। राष्ट्रीय चिह्न बनाएंगे तो मोदी जी आत्मनिर्भरता को किस पर्दे के पीछे छुपाएंगे। खैर! बुलडोजर राष्ट्रीय चिह्न न सही, सत्ताधारी पार्टी का चिह्न भी न सही, पर दुनिया भर में अपना डंका तो खूब बजवा रहा है। बुलडोजर का डंका बज रहा है, तो क्या उसमें भारत का डंका नहीं है?

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।) 

sarcasm
Boris Johnson
Boris Johnson on Bulldozer
Satire
Political satire
Bulldozer Politics

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

तिरछी नज़र: 2047 की बात है

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!

कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!

तिरछी नज़र: हम सहनशील तो हैं, पर इतने भी नहीं


बाकी खबरें

  • hum bharat ke log
    डॉ. लेनिन रघुवंशी
    एक व्यापक बहुपक्षी और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता
    22 Feb 2022
    सभी 'टूटे हुए लोगों' और प्रगतिशील लोगों, की एकता दण्डहीनता की संस्कृति व वंचितिकरण के ख़िलाफ़ लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि यह परिवर्तन उन लोगों से ही नहीं आएगा, जो इस प्रणाली से लाभ उठाते…
  • MGNREGA
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    ग्रामीण संकट को देखते हुए भारतीय कॉरपोरेट का मनरेगा में भारी धन आवंटन का आह्वान 
    22 Feb 2022
    ऐसा करते हुए कॉरपोरेट क्षेत्र ने सरकार को औद्योगिक गतिविधियों के तेजी से पटरी पर आने की उसकी उम्मीद के खिलाफ आगाह किया है क्योंकि खपत की मांग में कमी से उद्योग की क्षमता निष्क्रिय पड़ी हुई है। 
  • Ethiopia
    मारिया गर्थ
    इथियोपिया 30 साल में सबसे ख़राब सूखे से जूझ रहा है
    22 Feb 2022
    इथियोपिया के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 70 लाख लोगों को तत्काल मदद की ज़रूरत है क्योंकि लगातार तीसरी बार बरसात न होने की वजह से देहाती समुदाय तबाही झेल रहे हैं।
  • Pinarayi Vijayan
    भाषा
    किसी मुख्यमंत्री के लिए दो राज्यों की तुलना करना उचित नहीं है : विजयन
    22 Feb 2022
    विजयन ने राज्य विधानसभा में कहा, ‘‘केरल विभिन्न क्षेत्रों में कहीं आगे है और राज्य ने जो वृद्धि हासिल की है वह अद्वितीय है। उनकी टिप्पणियों को राजनीतिक हितों के साथ की गयी अनुचित टिप्पणियों के तौर पर…
  • mathura
    भाषा
    मथुरा में पार्टी विशेष को वोट न देने पर अनुसूचित जाति के लोगों की पिटाई, दस घायल
    22 Feb 2022
    आरोपियों ने रविवार की शाम को यह कहते हुए कुछ लोगों को पीटा कि उनके कहने के बावजूद उनके प्रत्याशी को वोट क्यों नहीं दिया गया। इस घटना में दस लोग घायल हुए हैं जो अनुसूचित जाति के बताए जाते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License