NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
कटाक्ष: ...पॉजिटिविटी तो आने दो
जब से कोरोना की दूसरी वाली लहर आयी है, देश में पॉजिटिविटी का बहुत भारी टोटा पड़ गया है।
राजेंद्र शर्मा
29 May 2021
cartoon
तस्वीर केवल प्रतीकात्मक प्रयोग के लिए। कार्टून : सतीश आचार्य, साभार: सोशल मीडिया

जब से कोरोना की दूसरी वाली लहर आयी है, देश में पॉजिटिविटी का बहुत भारी टोटा पड़ गया है। वैसे इस लहर में तो हरेक चीज का ही टोटा पड़ गया है। अस्पताल में बेड का; बेडों में आईसीयू का; अस्पतालों के अंदर भी और बाहर भी ऑक्सीजन का टोटा; रेमडेसिविर का टोटा; एंबुलेंस का भी टोटा; टोटा ही टोटा। और तो और श्मशानों/ कब्रिस्तानों में जगह से लेकर लकड़ी तक का टोटा। हजारों मुर्दे तो नदियों के किनारे रामनामी/चुनरी ओढ़कर रेत के नीचे सो गए या नदियों में ही तैर गए।

वैसे कहने वाले तो कहते हैं कि इंसानियत का भी भारी टोटा पड़ गया। रोजी-रोटी के टोटे की तो खैर बात करना ही बेकार है। और कुछ ऐसा ही टोटा सरकार का भी हुआ बताते हैं। सुनते हैं कि सरकार के सुनने/ देखने का टोटा था सो था, इस बार सरकार के दिखाई देने तक का टोटा पड़ गया। बस, बड़े सरकार जब-तब सुनाई जरूर देते रहे, तरह-तरह की मन की बातों में!

फिर भी अगर ये सारे टोटे वास्तविक हों तो भी, पॉजिटिविटी के टोटे के सामने ये सारे टोटे तो कुछ भी नहीं हैं। हम तो कहेंगे कि पॉजिटिविटी का टोटा ही असली टोटा है। पॉजिटिविटी का टोटा नहीं होता, तो ये वाले छोटे-मोटे टोटे भी नहीं होते। माने होते भी तो नहीं होने के बराबर ही होते--किसी के नोटिस में ही नहीं आते। न सरकार की गिनती में आते, न मीडिया की खबर में। और अपोजीशन की चिल्ला-चोंट की वजह से अगर जरा-बहुत खबर में आ भी जाते किसी किल्लत की शिकायत बनकर, तो भी डरते-डरते आते कि कहीं पॉजिटिविटी दौड़ा न ले, विश्व गुरु की छवि खराब करने की एंटीनेशनलता के चक्कर में। पॉजिटिविटी का टोटा नहीं होता, तो फिर चाहे जो भी होता, न्यू इंडिया में सब चंगा होता!

पर, होनी को कौन टाल सकता है। कोरोना की दूसरी लहर आनी थी, सो आकर रही। उसके संग लगी-लगी नेगिटिविटी चली आयी। और जैसा कि भागवत जी ने भी माना, पॉजिटिविटी का टेंडर जिनके नाम था, उनसे भी जरा सी गफलत हो गयी। चुनाव और कुंभ के जोश में, न कोरोना का होश रहा, न नेगेटिविटी का। जब तक समझ में आया, तब तक दोनों बहुत बढ़ चुके थे।

नेगेटिविटी तो इतनी बढ़ी कि चुनाव तक का नतीजा नेगेटिव हो गया। केरल में गाड़ी रिवर्स गेयर में चली गयी, तो बंगाल में कीचड़ में कमल का चक्का जाम हो गया। भागवत जी समझ गए कि अब छोटी-मोटी पॉजिटिविटी से काम चलने वाला नहीं है। अब तो पॉजिटिविटी अनलिमिटेड चाहिए। नेगेटिविटी बढ़ाने वालों को खुली चुनौती दे दी--मरने वालों का मातम मना-मनाकर नेगेटिविटी बढ़ाना बंद करो। पश्चिमी चश्मे से भारत के प्राचीन धर्म और परंपरा को देखकर, सच्चाई को विकृत करना बंद करो। वे मरे नहीं हैं, वे तो मुक्त हुए हैं। हम मुक्ति का भी मातम करेंगे तो जश्न किस का मनाएंगे! हम मौत का मातम नहीं, मुक्ति का उत्सव मनाने वाले लोग हैं। हम मातम नहीं उत्सव मनाएंगे, उत्सव से मातम को हराएंगे। नेगेटिविटी को भगाएंगे, पॉजिटिविटी अनलिमिटेड लाएंगे! बस एकदम पॉजिटिविटी का फव्वारा फूट पड़ा। पता नहीं क्यों नड्डा जी इसके बाद भी साहेब की तख्तनशीनी के सातवें बर्डे का जश्न कराने से हिचक गए। अच्छा-खासा तो अवसर था, आपदा में पॉजिटिविटी का।

खैर, तख्तनशीनी का बर्डे न सही, पर अब पॉजिटिविटी अनलिमिटेड है। बेशक, उसके लिए सरकार भी दिन-रात काम कर रही है। रेत के नीचे दबी लाशों पर से, केसरिया चादरें हटा रही है। मरने को मुक्ति की जगह मरना ही मानने वालों के रिश्ते-नातेदारों की मौतों का, आंकड़ा छुपा रही है। हरेक दुनियावी टोटे की शिकायत को झुठला रही है। सारी दुनिया को केसरिया चश्मा लगाकर न्यू इंडिया को देखने के लिए समझा रही है। फिर भी नहीं मानें तो हरेक परदेशी को नादान और हरेक देसी को एंटीनेशनल बता रही है। नेगेटिविटी के लिए विदेशी जलने वालों से लेकर, देसी टूलकिट वालों तक को जिम्मेदार ठहरा रही है। और बार-बार, जगह-जगह, हर बार, सब कुछ चंगा बता रही है। ट्विटर-विटर को धमका रही है। महामारी की मार के सामने पब्लिक को रामभरोसे छोड़, साहेब की फोटो बचाने में सारा जोर लगा रही है। उसे पता है कि महामारी के टैम में पॉजिटिविटी का एक ही सूत्र है--छवि के साधे, सब सधै, बाकी सब साधे,सब जाहि! महामारी को साधने के चक्कर में रहे तब तो सब जाएगा ही जाएगा; अंबानी जी-अडानी जी का एशिया में धनवान नंबर-1 और धनवान नंबर-2 का मैडल भी!

और हां! जब मिशन पॉजिटिविटी अनलिमिटेड का हो, तो टीके-वीके के आसरे तो नहीं ही रह सकते हैं। कम से कम सिर्फ इंजेक्शन वाले टीके के भरोसे रहने का तो कोई काम ही नहीं है। हमारे देसी टीके कोई कम हैं क्या? रामदेव के कोरोनिल से लेकर साध्वी प्रज्ञा के गोमूत्र के अर्क तक, देसी टीके ही टीके हैं, लगवा तो लें। इसके अलावा गोमूत्र और गोबर के लेप से लेकर, हनुमान चालीसा के पाठ तक, शरीर में प्रवेश किए बिना ही काम करने वाले टीके भी तो हैं। देसी दवाएं भी। रामदेव जैसे देसी डाक्टर भी। और तो और पीपल और बरगद के पेड़ जैसे, देसी ऑक्सीजन/ आईसीयू बेड भी। हर चीज का टोटा इसीलिए तो नजर आ रहा था कि हम ग्लोबल के चक्कर में, लोकल के लिए वोकल होना भूल गए। गोबर-गोमूत्र, काढ़ा, पीपल-बरगद, बाबा/ योगी, किस चीज की कमी है न्यू इंडिया में? बस हम ही ग्लोबल महामारी के लिए, ग्लोबल उपचारों के चक्कर में अटक गए और वाया लोकल आत्मनिर्भर के रास्ते से भटक गए। पर अब और नहीं। अब हम सिर्फ पॉजिटिविटी देखेंगे और दिखाएंगे। जरूरत हुई तो संघ और पुलिस ही लाठी से भी, नेगेटिविटी को भगाएंगे। मरने वालों की जगह, बचे रहने वालों की गिनती बताएंगे। ‘मूंदेहुं आंख कहूं कछु नाहीं’ का परम रामभक्त तुलसीदास जी का फार्मूला आजमाएंगे। और अगर ज्यादा ही जरूरत पड़ी तो नाम बदलकर, कोविड का नाम ही मिटाएंगे। और फिर कभी क्यों, अभी क्यों नहीं? मोविड कैसा रहेगा--पूछता है भारत!

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

sarcasm
COVID-19
Coronavirus
Coronavirus 2nd wave
Narendra modi
Modi government

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    JNUTA रिटायर्ड सदस्यों के समर्थन में, बर्ख़ास्तगी को चुनौती देंगे डॉ. कफ़ील और अन्य ख़बरें
    12 Nov 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी JNUTA ने की रिटायर्ड फ़ैकल्टी की पेंशन की मांग, डॉ कफ़ील ख़ान को योगी सरकार ने किया बर्ख़ास्त और अन्य ख़बरों पर।
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    पाकिस्तानी क्रिकेटर हसन पर हमले से भारत के लिए सबक
    12 Nov 2021
    वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा आज चर्चा कर रहे हैं T20 वर्ल्ड कप के बारे में, हार की वजह सिर्फ एक खिलाड़ी क्यों? पहले भारतीय खिलाड़ी मोहम्मद शमी, अब पाकिस्तानी खिलाड़ी हसन अली, हार के बाद इन दोनों…
  • Bihar: Minor girl gangraped, one accused in custody
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः नाबालिग लड़की से गैंगरेप, एक आरोपी हिरासत में
    12 Nov 2021
    नालंदा के हिलसा के एसडीपीओ ने न्यूज़क्लिक को बताया कि पीड़िता की मां ने घटना के संबंध में केस दर्ज कराया है। पीड़िता के पुरूष-मित्र को हिरासत में ले लिया गया है, जबकि अन्य दो आरोपियों की तलाश जारी है।
  • Central TUs
    रौनक छाबड़ा
    केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने बजट सत्र के दौरान बेरोज़गारी, मूल्य वृद्धि के ख़िलाफ़ 2-दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है
    12 Nov 2021
    सीटीयू के नेतृत्व की ओर से केंद्र सरकार द्वारा “लोगों के मानव अस्तित्व को बचाए रखने के अधिकार को कमज़ोर करने” के खिलाफ निंदा प्रस्ताव को अपनाते हुए अपनी दस मांगों को पेश किया गया है।
  • ICF
    शशि देशपांडे, गीता हरिहरन
    "लोकतंत्र यानी संवाद, बहस और चर्चा..."
    12 Nov 2021
    लोगों को विभाजनकारी विचारधारा को स्वीकार करने के लिए बरगलाया गया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License