NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
व्यंग्य: रे किसान! तू तो बड़ा चीटर निकला 
किसानों, अब भी घर चले जाओ, वर्ना मोदी जी को तुम्हारी आत्महत्याओं को भी, राष्ट्र विरोधी विदेशी षड्यंत्र घोषित करना पड़ेगा।
राजेंद्र शर्मा
11 Jan 2021
 किसान

देखी, देखी, किसानों की चीटरबाजी देखी। मोदी जी की सरकार का नाम बदनाम करने के लिए, सिंपल किसान आत्महत्या को, कृषि कानूनों के विरोध का मामला बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वह भी बिना किसी सबूत के।

भला बताइए, सिर्फ सिंघु बार्डर पर ही होने से या क्या कोई भी आत्महत्या, मोदी सरकार की जिद के विरोध में आत्महत्या हो जाएगी?

या आत्महत्या करने वाले के किसान होने से ही?

और वह भी तब जबकि पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के अमरिंदर सिंह की तो मरने के बाद कोई चिट्ठी तक नहीं मिली है, जिसमें झूठ-मूठ को भी इसका दावा किया गया हो कि उसको, मोदी जी के कानूनों से कोई शिकायत थी।

अगर यह भी सिंपल किसान आत्महत्या नहीं है, तो सिंपल किसान आत्महत्या क्या होती है? मरने वाले ने सल्फास खाकर अपनी जान दी है, जी हां! सल्फास खाकर। इसके सिंपल किसान आत्महत्या होने का इससे बड़ा सबूत क्या होगा?

अब क्या सरकार को इसका आंकड़ा भी देना पड़ेगा कि कितने समय से किसान आत्महत्या के लिए सल्फास का प्रयोग करते आ रहे हैं या पिछले साल कितने फीसद किसानों ने आत्महत्या के लिए सल्फास का प्रयोग किया था?

क्या पिछले साल भी मोदी जी के कृषि कानूनों से किसानों को कोई शिकायत थी!

चेन्नै के पेरुमल ने जरूर अपने सुसाइड नोट में, किसानों के समर्थन में खुदकुशी की बात कही है। लेकिन, उसने तो सिर्फ किसानों के समर्थन की बात कही है, इसमें मोदी जी के विरोध की बात क्यों जोड़ी जा रही है। फिर किसान तो यहां दिल्ली के बार्डर पर बैठे हैं, हजारों किलोमीटर दूर चेन्नै में किसी किसान की खुदकुशी को, सिर्फ मरने वाले की चिठ्ठी के आधार पर, किसानों के आंदोलन से कैसे जोड़ा जा सकता है। दूरदर्शन से हजारों किलोमीटर दूर के किसानों की दुर्दशा देखकर भी कोई अपनी जान देता है क्या? ये सब कोरी बहानेबाजी है।

खैर! मोदी जी की सरकार है, ऐसे बहानों में आने वाली नहीं है। उसे अच्छी तरह से पता है कि किसान आत्महत्या के लिए कैसे-कैसे बहाने बनाते हैं। एक मंत्री जी ने तो बाकायदा बयान देकर बताया था कि नपुंसकता से लेकर, पारिवारिक झगड़े तक, न जाने किन-किन कारणों से किसान जान देते हैं और सरकार की आंखों में धूल झोंककर घरवालों को मुआवजा दिलाने के लिए,चिठ्ठी में कर्ज के बोझ का नाम ले लेते हैं। लगता है कि अब किसान आत्महत्या के लिए कृषि कानूनों का बहाना बनाने का फैशन चल पड़ा है। चार-पांच तो दिल्ली के बार्डर पर ही इन कानूनों का बहाना बनाकर, अपनी जान ले चुके हैं। सर्दी से लेकर दुर्घटनाओं तक में साठ से ऊपर जान दे चुके हैं, सो ऊपर से। पर कृषि कानूनों का तो सिर्फ बहाना है, है तो यह सिंपल किसान आत्महत्या का ही मामला।

लेकिन, मोदी जी के विरोधी इस पर भी पॉलिटिक्स कर रहे हैं। दिल्ली के बार्डर से लेकर चेन्नै तक, सारी किसान आत्महत्याओं को उन्होंने मोदी जी के कृषि कानूनों के ही खाते में डाल दिया है। खैर! विपक्ष से तो मोदी जी और उम्मीद भी क्या कर सकते हैं, पर उनकी सरकार को इन मौतों को सिर्फ किसानों की चीटिंग का मामला मानकर नहीं छोडऩा चाहिए। दिल्ली से चेन्नै तक, किसानों की ये आत्महत्याएं यूं ही तो नहीं हो रही हैं। माना कि इसमें कृषि कानूनों के विरोध के फैशन का भी कुछ हाथ हो सकता है, लेकिन किसान अचानक इतने ज्यादा फैशनेबुल कैसे हो गए? हमें तो इसमें षडयंत्र की बू आ रही है।

भारतविरोधी ताकतें, हमारे देश की तरक्की को रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। और उन्हें अच्छी तरह से पता है कि भारत की तरक्की की जान, अंबानी-अडानी की तरक्की के तोते में है। उनकी तरक्की रुक जाएगी, तो देश की तरक्की खुद ब खुद रुक जाएगी। और अगर मोदी जी के हाथ कमजोर हो गए, तो अंबानी-अडानी की तरक्की तो खुद ही रुक जाएगी। देश के दुश्मन पहले भी तो भारत तरक्की रुकवाने के लिए आत्मघाती बमों का सहारा लेते थे; अब किसानों की आत्महत्याओं का सहारा ले रहे हैं। मकसद तो मौतों का सहारा लेकर मोदी राज को बदनाम करना है। मोदी सरकार को इस षडयंत्र की तह तक जाना चाहिए और जांच-वांच होती रहेगी, देश को आज ही इस खतरे के बारे में बताना चाहिए।

किसानों, अब भी घर चले जाओ, वर्ना मोदी जी को तुम्हारी आत्महत्याओं को भी, राष्ट्र विरोधी विदेशी षड्यंत्र घोषित करना पड़ेगा। मोदी जी तुम्हारी भोली शक्ल के धोखे में आने वाले नहीं हैं। तुम्हारी चीटिंग पकड़ी गयी है।

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक लोकलहर के संपादक हैं।)

farmers protest
Farm bills 2020
Satire
Political satire
sarcasm
Narendra modi
BJP
Modi government

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल


बाकी खबरें

  • delhi high court
    भाषा
    समलैंगिक विवाहों को मान्यता देने की याचिकाओं पर 30 नवंबर को अंतिम सुनवाई
    26 Oct 2021
    पहली याचिका में, अभिजीत अय्यर मित्रा और तीन अन्य ने तर्क दिया है कि उच्चतम न्यायालय के दो वयस्कों के बीच सहमति से अप्राकृतिक संबंध को अपराध की श्रेणी से बाहर किये जाने के बावजूद समलैंगिक विवाह संभव…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 12,428 नए मामले, 356 मरीज़ों की मौत
    26 Oct 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 42 लाख 2 हज़ार 202 हो गयी है।
  • Modi
    बी. सिवरामन
    मोदी के डिजिटल स्वास्थ्य मिशन से जनता को क्या मिलेगा? 
    26 Oct 2021
    मोदी के स्वास्थ्य मिशन का सम्पूर्ण विश्लेषण करने पर यही निष्कर्ष निकलता है कि मोदी का डिजिटल इंडिया जनता के हित के लिए नहीं, बल्कि कारपोरेट घरानों के हित में काम करेगा।
  • indo afghan
    अमिताभ रॉय चौधरी
    भारत को अफ़ग़ानिस्तान पर प्रभाव डालने के लिए स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने की ज़रूरत है
    26 Oct 2021
    मास्को में तालिबान के साथ ट्रोइका-प्लस की पहल पर हुई बैठक में नई दिल्ली की भागीदारी वांछित परिणाम हासिल करने में विफल रही है।
  • nilgai
    एम.ओबैद
    नीलगायों के आतंक से किसान परेशान, नुक़सान का नहीं मिलता मुआवज़ा
    25 Oct 2021
    "इस पर सरकार की तरफ़ से कोई पहल नहीं की गई। हमारे सारण ज़िले का क़रीब दो-तिहाई हिस्सा नीलगाय से प्रभावित है। ये किसी भी तरह की फ़सल को नहीं छोड़ती है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License