NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कटाक्ष: मानुस ते बानर भायो, विश्व गुरु बतलाए!
ताजमहल के शहर में जब बड़े दिन पर सेंटा क्लॉज मुर्दाबाद के नारे लगे, विश्व गुरु का ताज उसी क्षण नये इंडिया के सिर पर सज गया। और जब बजरंगियों ने चौराहे पर सेंटा क्लॉज का पुतला फूंका, तब तो बाकायदा विश्व गुरु की डिग्री पर मोहर ही लग गयी।
राजेंद्र शर्मा
26 Dec 2021
Christmas
बजरंग दल ने फूंका सेंटा क्लॉज का पुतला। फोटो साभार: जनसत्ता

कहां हैं, कहां हैं, कहां हैं? जिन्हें भारत के विश्व गुरु होने पर शक था, कहां हैं? योगी जी की यूपी में आएं और मोदी जी के नये इंडिया के विश्व गुरु होने का अल्टीमेट प्रमाण, खुद अपनी आंखों से देखकर जाएं। वैसे तो प्रत्यक्ष को किम् प्रमाणम्ï। शास्त्रों की इस संस्कृत वाली सूक्ति के बाद, कम से कम प्रमाण-प्रमाण का शोर रुक जाना चाहिए था। पर मोदी विरोधियों के मन में हमारे शास्त्रों का सम्मान होता तब ना। वे तो बात-बात में प्रमाण मांगते हैं। और तो और खुद मोदी जी, स्मृति जी और उनके दूसरे कई मंत्रिमंडलीय साथियों की, शिक्षा तक के प्रमाण मांगते हैं। और राष्ट्र की सुरक्षा के हित में, विश्वविद्यालय जानकारी नहीं देते हैं, तो फर्जी डिग्री का शोर मचाते हैं। खैर! इसमें कोई विवाद नहीं, नकली-असली का कोई झगड़ा नहीं। गिनीज बुक वाले, मीडिया वाले, रेटिंग एजेंसी वाले, सब आएं और अपनी आंखों से देखकर संतुष्ट होकर जाएं। बल्कि अब तो आने की जरूरत भी नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल है; फोन-फोन पर हाजिर है, हमारे विश्व गुरु होने का अकाट्य प्रमाण।

ताजमहल के शहर में जब बड़े दिन पर सेंटा क्लॉज मुर्दाबाद के नारे लगे, विश्व गुरु का ताज उसी क्षण नये इंडिया के सिर पर सज गया। और जब बजरंगियों ने चौराहे पर सेंटा क्लॉज का पुतला फूंका, तब तो बाकायदा विश्व गुरु की डिग्री पर मोहर ही लग गयी।

साबित हो गया कि अगर कोई अब भी एकदम ऑरीजनल है, मनुष्य ने जहां से अपनी यात्रा शुरू की थी वहीं का वहीं है, तो वह हम ही हैं। हम ही हैं जो लाल रंग देखकर भडक़ते हैं और हम ही हैं जो सब को खुशी बांटने वाले सेंटा क्लॉज से भी लड़ते हैं। दुनिया ने जो भी सीखा है, हमसे ही सीखा है; बस बाकी सब सीख-सीखकर न जाने कहां-कहां निकल गए और हम ऑरीजनल के ऑरीजनल रह गए।

लेकिन, इससे कोई यह नहीं समझे कि हमें विश्व गुरु की पदवी सिर्फ एक कारनामे से मिल गयी है--सेंटा क्लॉज का पुतला जलाने से! माना विश्व गुरु के पद का मैदान हो या क्रिकेट का मैदान और चाहे डैमोक्रेसी का मैदान ही क्यों नहीं हो, हमारा असली मुकाबला पाकिस्तान से है। और वर्ल्ड कप में भले ही पाकिस्तान ने हमें हरा दिया हो, सेंटा क्लॉज वाले मामले में पाकिस्तान वाले हमारे आस-पास भी नहीं पहुंचते हैं। अपने इस्लामी राज्य के अमृत महोत्सव में पाकिस्तान से तो सेंटा क्लॉज के मुर्दाबाद के नारे तक नहीं लगवाए गए, जबकि हमने अपने धर्मनिरपेक्ष गणराज्य के अमृत महोत्सव में सेंटा क्लॉज का पुतला भी फुंकवा दिया।

मोदी जी के नये इंडिया के विश्व गुरु बनने के लिए वास्तव में इतना ही काफी था। पर भारत ने और भी बहुत कुछ कर रखा था, विश्व गुरु के पद के लिए क्वालीफाई करने के लिए। बल्कि एक किस्सा तो क्रिकेट के वर्ल्ड कप से ही जुड़ा याद आ रहा है? संयोग से इसका भी कनेक्शन ताजमहल के शहर से ही है।

पाकिस्तान ने इंडिया को विश्व कप में हरा दिया और एक इंजीनियरिंग कॉलेज के तीन कश्मीरी छात्रों ने, अपने वाट्सएप चैट में पाकिस्तान के खेल को बेहतर बता दिया। वर्ल्ड कप के बाद, क्रिकेट के मैदान में टीम इंडिया की और कई हार-जीतें भी हो चुकी हैं, पर तीनों छात्र जेल के जेल में बंद हैं! खेल के मैदान में दूसरे देश की टीम की जीत पर तालियां बजाने के लिए, नौजवानों को महीनों जेल में बंद रखने वाला जनतंत्र, दुनिया में और कहीं है क्या? हमारे पास है! ऐसे जनतंत्र के लिए भी हमारा विश्व गुरु का दावा तो बनता ही था। और अगर इन नौजवानों पर राजद्रोह का मुकद्दमा चला दिया जाता, तब तो खैर भारत को विश्व गुरु के सार्टिफिकेट के लिए सेंटा क्लॉज का पुतला जलाने वालों का इंतजार करने की भी जरूरत नहीं थी। पर नौकरशाही की धीमी चाल से, मोदी जी-योगी जी के डबल इंजन यूपी में भी हिंदुस्तान मार खा गया। सेडीशन का मुकद्दमा चलाने की पुलिस की अर्जी अब तक सरकार की हरी झंडी का इंतजार ही कर रही है!

लेकिन, इससे यह कोई नहीं समझे कि भारत को विश्व गुरु बनाने का सारा पुरुषार्थ योगी जी के राम-राज्य में ही हो रहा है। देवभूमि में भी तो चुनाव है; वहां भी इसके लिए खूब पुरुषार्थ हो रहा है बल्कि मुख्यमंत्री बदल-बदलकर विश्व गुरु बनने का पुरुषार्थ हो रहा है। सच पूछिए तो विश्व गुरु के सेंटा क्लॉज पुतला दहन सार्टिफिकेट का आइडिया तो, देव भूमि में हुई (अ)धर्म संसद से ही निकला था। वैसे धर्म संसद से विश्व गुरु बनाने वाले और भी बहुत से आइडिया निकले थे। मसलन हिंदू-सैनिकों के अपने हथियार तलवारों से अपडेट करने और संभवत: एके-47 वगैरह पर, अपडेट करने का आइडिया। इक्का-दुक्का नहीं, दसियों-बीसियों में नहीं, तीस-चालीस लाख विधर्मियों को मारने का आइडिया। इस सबके बावजूद, संख्याबल बढ़ाने के लिए हिंदू औरतें के दस-दस वीर पैदा करने का आइडिया, वगैरह। और इन सारे आइडियाज़ में कुछ बहुत नया न हो तब भी, इस सब को देखकर भी डबल इंजन सरकारों के आंखें मूंदे रहने के योग लिए तो विश्व गुरु का आसन बनता ही था। पर मोदी जी चुनाव प्रचार में व्यस्त थे सो ऑफीशियली दावा नहीं हो पाया।

खैर! हरिद्वार से ही आइडिया निकला कि हिंदू धार्मिक नगरी में, ईसाई त्योहार नहीं मनाने देंगे। आगरा के बजरंगियों ने इस आइडिया पर अमल कर के दिखा दिया और नये इंडिया को विश्व गुरु के आसन पर बैठा दिया।

लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि विश्व गुरु के आसन के हमारे दावे का, कोई आर्थिक पहलू ही नहीं है। तो गोबर, गोमूत्र के जरिए, किसानों को खुशहाल बनाने का प्रधानमंत्री का बनारस का वादा क्या है! 

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)

sarcasm
Christmas
Satire
Political satire

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

तिरछी नज़र: 2047 की बात है

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!

कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!

तिरछी नज़र: हम सहनशील तो हैं, पर इतने भी नहीं


बाकी खबरें

  • farmers
    चमन लाल
    पंजाब में राजनीतिक दलदल में जाने से पहले किसानों को सावधानी बरतनी चाहिए
    10 Jan 2022
    तथ्य यह है कि मौजूदा चुनावी तंत्र, कृषि क़ानून आंदोलन में तमाम दुख-दर्दों के बाद किसानों को जो ताक़त हासिल हुई है, उसे सोख लेगा। संयुक्त समाज मोर्चा को अगर चुनावी राजनीति में जाना ही है, तो उसे विशेष…
  • Dalit Panther
    अमेय तिरोदकर
    दलित पैंथर के 50 साल: भारत का पहला आक्रामक दलित युवा आंदोलन
    10 Jan 2022
    दलित पैंथर महाराष्ट्र में दलितों पर हो रहे अत्याचारों की एक स्वाभाविक और आक्रामक प्रतिक्रिया थी। इसने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया था और भारत की दलित राजनीति पर भी इसका निर्विवाद प्रभाव…
  • Muslim Dharm Sansad
    रवि शंकर दुबे
    हिन्दू धर्म संसद बनाम मुस्लिम धर्म संसद : नफ़रत के ख़िलाफ़ एकता का संदेश
    10 Jan 2022
    पिछले कुछ वक्त से धर्म संसदों का दौर चल रहा है, पहले हरिद्वार और छत्तीसगढ़ में और अब बरेली के इस्लामिया मैदान में... इन धर्म संसदों का आखिर मकसद क्या है?, क्या ये आने वाले चुनावों की तैयारी है, या…
  • bjp punjab
    डॉ. राजू पाण्डेय
    ‘सुरक्षा संकट’: चुनावों से पहले फिर एक बार…
    10 Jan 2022
    अपने ही देश की जनता को षड्यंत्रकारी शत्रु के रूप में देखने की प्रवृत्ति अलोकप्रिय तानाशाहों का सहज गुण होती है किसी निर्वाचित प्रधानमंत्री का नहीं।
  • up vidhan sabha
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी: कई मायनों में अलग है यह विधानसभा चुनाव, नतीजे तय करेंगे हमारे लोकतंत्र का भविष्य
    10 Jan 2022
    माना जा रहा है कि इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रीय स्तर पर नए political alignments को trigger करेंगे। यह चुनाव इस मायने में भी ऐतिहासिक है कि यह देश-दुनिया का पहला चुनाव है जो महामारी के साये में डिजिटल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License