NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
ग़ाज़ीपुर में गिरफ़्तार सत्याग्रहियों ने जेल में भूख हड़ताल शुरू की
ज़िलाधिकारी और जेल सुप्रिटेंडेंट को लिखे अपने पत्र में सभी पदयात्रियों ने रिहा होने तक इस भूख हड़ताल को जारी रखने की बात लिखी है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
13 Feb 2020
Ghazipur

ग़ाज़ीपुर में गिरफ़्तार सत्याग्रह पदयात्रियों ने जेल में आज, 13 फरवरी की शाम पांच बजे से भूख हड़ताल शुरू कर दी है। ज़िलाधिकारी और जेल सुप्रिटेंडेंट को लिखे अपने पत्र में सभी पदयात्रियों ने रिहा होने तक इस भूख हड़ताल को जारी रखने की बात लिखी है। पत्र में ये भी लिखा गया है कि 'हमें बिना किसी उचित कारण के गिरफ्तार किया गया है, जो हमारे मानवाधिकार का उल्लंघन है, इसलिए जब तक हम रिहा नहीं हो जाते हमारा ये संघर्ष जारी रहेगा।'

आपको बता दें कि चौरीचौरा गोरखपुर से राजघाट नई दिल्ली के लिए निकली ‘नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा’ लगभग 200 किलोमीटर की यात्रा करके 11 फरवरी मंगलवार को ग़ाज़ीपुर पहुंची। जहां पर पुलिस ने सत्याग्रही पदयात्रियों को शांतिभंग की धाराओं में जेल भेज दिया था।

बुधवार को जब इनकी ज़मानत की अर्जी स्थानीय एसडीएम के यहां लगायी गयी तो उन्होंने बेल बॉल्ड भरने का जो आदेश दिया, वह अपने आप में बेहद खतरनाक और चौंकाने वाला है।

ग़ाज़ीपुर के जिला कारागार में बंद 10 सत्याग्रहियों के खिलाफ़ एसडीएम (सदर) ग़ाज़ीपुर ने ज़मानत की बहुत अजीब सी शर्त रखी है। इस शर्त के मुताबिक, जमानत के लिए प्रतिव्यक्ति 2.5 लाख के दो बेल बॉन्ड भरे जाएं और साथ ही हर बंदी के लिए गारंटर के तौर पर दो राजपत्रित अधिकारी ज़मानत दें। मालूम हो कि इन दस सत्याग्रहियों को आइपीसी की धारा 107/16 और 151 के तहत गिरफ्तार किया गया था। बुधवार को जब बेल की अर्जी लगायी गयी तो एसडीएम ने इतनी सख्त शर्तें थोप दीं।

IMG-20200213-WA0002.jpg

सत्याग्रहियों द्वारा डीएम और जेल सुप्रिटेंडेंट को लिखा पत्र

वकील बताते हैं कि, 'आज सबसे पहले महिला पत्रकार प्रदीपिका की जमानत के लिए बेल पेश किया गया, लेकिन यहाँ (एसडीएम ऑफिस) के बाबू ने कहा कि हम बेल नहीं ले पाएंगे, आप पहले अधिकारी से बात करिए, अगर वो आपके कागजात लेने के लिए कहेंगे तभी हम बेल ग्रांट करेंगे।

वकील कहते हैं कि सीआरपीसी 111 में कंडीशन लगाया गया है कि, हर बंदी पर ढाई-ढाई लाख रुपए की दो श्योरिटीज और जमानत लेने वाले दो राजपत्रित अधिकारी होने चाहिए, जो कि बिलकुल इम्पॉसिबल है कि किसी भी व्यक्ति के लिए कोई राजपत्रित अधिकारी आकर उनकी जमानत ले। एसडीएम से बात करने पर एसडीएम ने कहा कि 111 सीआरपीसी को फुलफिल कर दीजिए तभी हम जमानत कर पाएंगे, जबकि 111 सीआरपीसी का फुलफिल होना संभव ही नहीं है क्योंकि कोई राजपत्रित अधिकारी जमानत देने को तैयार नहीं होगा।

गिरफ्तार किए गए लोगों में अधिकतर बीएचयू के छात्र हैं, जिनमें प्रियेश पांडे, मुरारी कुमार, राज अभिषेक, अनंत प्रकाश शुक्ल, नीरज राय, अतुल यादव शामिल हैं। इनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता मनीष शर्मा, शेष नारायण ओझा, रविंद्र कुमार रवि और जानी मानी महिला पत्रकार प्रदीपिका सारस्वत भी शामिल हैं।

गिरफ्तार होने से पहले प्रदीपिका ने 10 फरवरी को फेसबुक पर लिखा था- 'कल शाम से लोकल इंटेलीजेंस और पुलिस यात्रियों के चक्कर काट रही है, तस्वीरें खींच रही है, वीडियो उतार रही है। स्टेट इतना डरा हुआ है कि चंद लोगों को शांति और सौहार्द की बात करते हुए नहीं देख पा रहा है। यह यात्रा एक पाठशाला है, जहां महज पैदल चलते हुए हम सीखते हैं कि कोई जगह कश्मीर कैसे बनती है।

नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा की शुरुआत चौरी-चौरा के शहीद स्मारक से गत 2 फरवरी 2020 को हुई थी। यात्रा का प्रथम चरण 16 फरवरी 2020 को बनारस में सम्पन्न होना तय था। पदयात्री विकास सिंह के अनुसार, यह यात्रा चौरी-चौरा से इसलिए शुरू की गई क्योंकि ‘यह वो जगह थी जहां 1922 में यानी लगभग सौ साल पहले अंग्रेजों के खिलाफ हुई हिंसा के कारण गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था।

उस दिन ऐसे आज़ाद हिंदुस्तान की तासीर तय हो गई थी जहां हिंसा के लिए कोई जगह नहीं थी, फिर चाहे वो हमारा शोषक, हमारा दुश्मन ही क्यों न हो। विकास गिरफ्तारी से एक दिन पहले किसी जरूरी काम से यात्रा छोड़कर बनारस लौटे थे।

इसे भी पढ़ें : 
इंसाफ़ या बदला! यूपी में आंदोलनकारियों को 50-50 लाख के मुचलके के नोटिस 

Nagrik Sattyagrah
UttarPradesh
CAA
NRC
Protest against CAA
UP police
Ghazipur
yogi sarkar
Yogi Adityanath

Related Stories

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

अनुदेशकों के साथ दोहरा व्यवहार क्यों? 17 हज़ार तनख़्वाह, मिलते हैं सिर्फ़ 7000...

बलिया: पत्रकारों की रिहाई के लिए आंदोलन तेज़, कलेक्ट्रेट घेरने आज़मगढ़-बनारस तक से पहुंचे पत्रकार व समाजसेवी

पत्रकारों के समर्थन में बलिया में ऐतिहासिक बंद, पूरे ज़िले में जुलूस-प्रदर्शन

यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं


बाकी खबरें

  • farmers
    चमन लाल
    पंजाब में राजनीतिक दलदल में जाने से पहले किसानों को सावधानी बरतनी चाहिए
    10 Jan 2022
    तथ्य यह है कि मौजूदा चुनावी तंत्र, कृषि क़ानून आंदोलन में तमाम दुख-दर्दों के बाद किसानों को जो ताक़त हासिल हुई है, उसे सोख लेगा। संयुक्त समाज मोर्चा को अगर चुनावी राजनीति में जाना ही है, तो उसे विशेष…
  • Dalit Panther
    अमेय तिरोदकर
    दलित पैंथर के 50 साल: भारत का पहला आक्रामक दलित युवा आंदोलन
    10 Jan 2022
    दलित पैंथर महाराष्ट्र में दलितों पर हो रहे अत्याचारों की एक स्वाभाविक और आक्रामक प्रतिक्रिया थी। इसने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया था और भारत की दलित राजनीति पर भी इसका निर्विवाद प्रभाव…
  • Muslim Dharm Sansad
    रवि शंकर दुबे
    हिन्दू धर्म संसद बनाम मुस्लिम धर्म संसद : नफ़रत के ख़िलाफ़ एकता का संदेश
    10 Jan 2022
    पिछले कुछ वक्त से धर्म संसदों का दौर चल रहा है, पहले हरिद्वार और छत्तीसगढ़ में और अब बरेली के इस्लामिया मैदान में... इन धर्म संसदों का आखिर मकसद क्या है?, क्या ये आने वाले चुनावों की तैयारी है, या…
  • bjp punjab
    डॉ. राजू पाण्डेय
    ‘सुरक्षा संकट’: चुनावों से पहले फिर एक बार…
    10 Jan 2022
    अपने ही देश की जनता को षड्यंत्रकारी शत्रु के रूप में देखने की प्रवृत्ति अलोकप्रिय तानाशाहों का सहज गुण होती है किसी निर्वाचित प्रधानमंत्री का नहीं।
  • up vidhan sabha
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी: कई मायनों में अलग है यह विधानसभा चुनाव, नतीजे तय करेंगे हमारे लोकतंत्र का भविष्य
    10 Jan 2022
    माना जा रहा है कि इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रीय स्तर पर नए political alignments को trigger करेंगे। यह चुनाव इस मायने में भी ऐतिहासिक है कि यह देश-दुनिया का पहला चुनाव है जो महामारी के साये में डिजिटल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License