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दिल्ली में नहीं थम रही यौन हिंसा, आख़िर इस पर बात क्यों नहीं होती?
महिला सुरक्षा के तमाम वादों और दावों के बीच राजधानी में भी बच्ची हो या बुजुर्ग कोई भी सुरक्षित नहीं दिखता। हाल ही में दक्षिण-पश्चिमी इलाके में एक 86 साल की महिला के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर महिला सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 Sep 2020
दिल्ली में नहीं थम रही यौन हिंसा
Image Credit: Aasawari Kulkarni/Feminism In India

“छ: महीने की बच्ची से लेकर 90 साल की महिला तक, कोई भी दिल्ली में सुरक्षित नहीं है...।”

ये बयान दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने उस वक्त दिया जब वो 86 साल की एक दुष्कर्म पीड़ित महिला से मिलकर लौट रही थीं। डीसीडब्ल्यू प्रमुख ने आगे कहा कि वो इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एलजी को चिट्ठी लिखेंगी कि जिससे फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो और छह महीने के अंदर अभियुक्त को फ़ांसी मिले।

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली महिला आयोग के अनुसार सोमवार, 7 सितंबर की शाम बुजुर्ग महिला अपने घर के बाहर दूधवाले का इंतज़ार कर रही थी तब एक व्यक्ति उनके पास गया और उनसे कहा कि जो रोज़ दूध देने आता है वो नहीं आएगा। मैं आपको एक दूसरी जगह ले चलता हूं जहां से दूध मिल सकता है।

महिला ने उस व्यक्ति पर भरोसा किया और उसके साथ चली गईं। वो उन्हें एक पास के खेत में ले गया और फिर उनका बलात्कार किया। वो रोती रही और छोड़ देने के लिए भीख मांगती रही लेकिन उस व्यक्ति ने एक न सुनी। जब उन्होंने खुद को छुड़ाने की कोशिश की तो उन्हें मारा भी।

जब वहां से गुज़र रहे कुछ लोगों ने उनकी आवाज़ें सुनीं तो उन्हें बचाया गया। उन लोगों ने अभियुक्त को पुलिस के हवाले कर दिया।

स्वाति मालीवाल के मुताबिक बुजुर्ग महिला अभी भी सदमे में हैं। उनके चेहरे और शरीर पर निशान पड़े हैं। इस घटना के दौरान उन्हें ख़ून भी आया। वे काफ़ी डरी और घबराई हुई हैं।

पुलिस क्या कह रही है?

द्वारका के पुलिस उपायुक्त संतोष कुमार मीणा ने मीडिया को बताया कि छावला पुलिस थाने में IPC की धारा 376 (बलात्कार) के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि पीड़िता की मेडिकल जांच कराई गई और उसका बयान दर्ज किया गया है। फिलहाल महिला की हालत स्थिर है। मंगलवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

आयोग ने लिखा उपराज्यपाल को पत्र

इस संबंध में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने बुधवार,9 सितंबर को उपराज्यपाल अनिल बैजल को एक पत्र भी लिखा। पत्र के माध्यम से स्वाति से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि 12 साल की बच्ची और 86 साल की महिला के साथ बलात्कार के मामलों में पुलिस तीन दिनों के अंदर आरोपपत्र दाखिल करे। इसके साथ ही आयोग की अध्यक्ष ने दोनों मामलों में दोषियों को मौत की सजा सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया जो दूसरों के लिए मिसाल बन सके।

मालूम हो कि चार अगस्त को पश्चिम विहार के पीरागढ़ी में एक 12 साल की मासूम बच्ची के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या का प्रयास भी किया गया था। बच्ची के पूरे शरीर पर धारदार चीज से वार के निशान थे।

इस मामले पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीड़ित बच्ची के परिवार को 10 लाख की सहायता राशि देने का एलान किया था। जबकि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राजधानी में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के मद्देनजर एम्स के बाहर प्रदर्शन भी किया था।

इसे पढ़ें: दिल्ली: 12 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या की कोशिश, आख़िर क्या बदला निर्भया के बाद?

गौरतलब है कि 2014 के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से कहा था कि "जब हम इन बलात्कारों की ख़बर सुनते हैं तो हमारा सिर शर्म से झुक जाता है।" इससे पहले भी वो विपक्ष में रहते हुए अपनी कई चुनावी रैलियों में दिल्ली को 'रेप कैपिटल' कह चुके हैं। हालांकि मोदी सरकार अब अपना पहला कार्यकाल पूरा कर दूसरी बार सत्ता पर काबिज़ हैं लेकिन आज भी देश की राजधानी में महिलाओं के खिलाफ अपराध के हालात जस के तस ही बने हुए हैं। और ये हाल तब है जब दिल्ली की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी खुद केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक़ 2018 में 33,977 दुष्कर्म के  मामले पुलिस ने दर्ज किए। यानी हर 15 मिनट में एक बलात्कार हो रहा था। हालांकि महिला सुरक्षा के लिए काम करने वाली तमाम संस्थाएं इस आंकड़ें को कम मानती हैं। उनके अनुसार असल संख्या इससे कहीं ज़्यादा है क्योंकि ज़्यादातर केस तो रिपोर्ट ही नहीं किए जाते। सभी रेप केस ख़बरों में भी जगह नहीं बना पाते, सिर्फ़ वही केस ख़बर बनते हैं जो जघन्य हों या हैरान करने वाले हों।

बता दें कि 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद जन सैलाब सड़कों पर उमड़ा था। महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर बड़े-बड़े वादे हुए, कानून में संशोधन हुए, सरकार बदली लेकिन दिल्ली में महिलाओं की स्थिति जस की तस बनी रही। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में निर्भया के बाद रेप के मामलों में 176% का हुआ इजाफा हुआ है। साल 2012 में दिल्ली में रेप के 706 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2019 की 15 नवंबर तक ही 1 हजार 947 मामले दर्ज हो चुके हैं।

'पीपल्स अगेंस्ट रेप इन इंडिया' एनजीओ की महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना बीबीसी से बात करते हुए कहती हैं कि किसी भी उम्र की महिलाएं सुरक्षित नहीं है। ये हालात इसलिए नहीं बदले क्योंकि सरकार की प्राथमिकता में महिलाओं और छोटी बच्चियों की सुरक्षा होनी चाहिए लेकिन वो कहीं भी नहीं है।

योगिता के अनुसार पिछले कुछ सालों में वो 100 से भी ज़्यादा ख़त बलात्कार पीड़ितों को न्याय दिलवाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिख चुकी हैं लेकिन उन्हें कभी कोई जवाब नहीं मिला। वे पूछती हैं कि पीएम मोदी इस पर बात क्यों नहीं करते।

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