NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
दिल्ली में नहीं थम रही यौन हिंसा, आख़िर इस पर बात क्यों नहीं होती?
महिला सुरक्षा के तमाम वादों और दावों के बीच राजधानी में भी बच्ची हो या बुजुर्ग कोई भी सुरक्षित नहीं दिखता। हाल ही में दक्षिण-पश्चिमी इलाके में एक 86 साल की महिला के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर महिला सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 Sep 2020
दिल्ली में नहीं थम रही यौन हिंसा
Image Credit: Aasawari Kulkarni/Feminism In India

“छ: महीने की बच्ची से लेकर 90 साल की महिला तक, कोई भी दिल्ली में सुरक्षित नहीं है...।”

ये बयान दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने उस वक्त दिया जब वो 86 साल की एक दुष्कर्म पीड़ित महिला से मिलकर लौट रही थीं। डीसीडब्ल्यू प्रमुख ने आगे कहा कि वो इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एलजी को चिट्ठी लिखेंगी कि जिससे फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो और छह महीने के अंदर अभियुक्त को फ़ांसी मिले।

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली महिला आयोग के अनुसार सोमवार, 7 सितंबर की शाम बुजुर्ग महिला अपने घर के बाहर दूधवाले का इंतज़ार कर रही थी तब एक व्यक्ति उनके पास गया और उनसे कहा कि जो रोज़ दूध देने आता है वो नहीं आएगा। मैं आपको एक दूसरी जगह ले चलता हूं जहां से दूध मिल सकता है।

महिला ने उस व्यक्ति पर भरोसा किया और उसके साथ चली गईं। वो उन्हें एक पास के खेत में ले गया और फिर उनका बलात्कार किया। वो रोती रही और छोड़ देने के लिए भीख मांगती रही लेकिन उस व्यक्ति ने एक न सुनी। जब उन्होंने खुद को छुड़ाने की कोशिश की तो उन्हें मारा भी।

जब वहां से गुज़र रहे कुछ लोगों ने उनकी आवाज़ें सुनीं तो उन्हें बचाया गया। उन लोगों ने अभियुक्त को पुलिस के हवाले कर दिया।

स्वाति मालीवाल के मुताबिक बुजुर्ग महिला अभी भी सदमे में हैं। उनके चेहरे और शरीर पर निशान पड़े हैं। इस घटना के दौरान उन्हें ख़ून भी आया। वे काफ़ी डरी और घबराई हुई हैं।

पुलिस क्या कह रही है?

द्वारका के पुलिस उपायुक्त संतोष कुमार मीणा ने मीडिया को बताया कि छावला पुलिस थाने में IPC की धारा 376 (बलात्कार) के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि पीड़िता की मेडिकल जांच कराई गई और उसका बयान दर्ज किया गया है। फिलहाल महिला की हालत स्थिर है। मंगलवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

आयोग ने लिखा उपराज्यपाल को पत्र

इस संबंध में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने बुधवार,9 सितंबर को उपराज्यपाल अनिल बैजल को एक पत्र भी लिखा। पत्र के माध्यम से स्वाति से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि 12 साल की बच्ची और 86 साल की महिला के साथ बलात्कार के मामलों में पुलिस तीन दिनों के अंदर आरोपपत्र दाखिल करे। इसके साथ ही आयोग की अध्यक्ष ने दोनों मामलों में दोषियों को मौत की सजा सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया जो दूसरों के लिए मिसाल बन सके।

मालूम हो कि चार अगस्त को पश्चिम विहार के पीरागढ़ी में एक 12 साल की मासूम बच्ची के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या का प्रयास भी किया गया था। बच्ची के पूरे शरीर पर धारदार चीज से वार के निशान थे।

इस मामले पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीड़ित बच्ची के परिवार को 10 लाख की सहायता राशि देने का एलान किया था। जबकि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राजधानी में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के मद्देनजर एम्स के बाहर प्रदर्शन भी किया था।

इसे पढ़ें: दिल्ली: 12 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या की कोशिश, आख़िर क्या बदला निर्भया के बाद?

गौरतलब है कि 2014 के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से कहा था कि "जब हम इन बलात्कारों की ख़बर सुनते हैं तो हमारा सिर शर्म से झुक जाता है।" इससे पहले भी वो विपक्ष में रहते हुए अपनी कई चुनावी रैलियों में दिल्ली को 'रेप कैपिटल' कह चुके हैं। हालांकि मोदी सरकार अब अपना पहला कार्यकाल पूरा कर दूसरी बार सत्ता पर काबिज़ हैं लेकिन आज भी देश की राजधानी में महिलाओं के खिलाफ अपराध के हालात जस के तस ही बने हुए हैं। और ये हाल तब है जब दिल्ली की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी खुद केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक़ 2018 में 33,977 दुष्कर्म के  मामले पुलिस ने दर्ज किए। यानी हर 15 मिनट में एक बलात्कार हो रहा था। हालांकि महिला सुरक्षा के लिए काम करने वाली तमाम संस्थाएं इस आंकड़ें को कम मानती हैं। उनके अनुसार असल संख्या इससे कहीं ज़्यादा है क्योंकि ज़्यादातर केस तो रिपोर्ट ही नहीं किए जाते। सभी रेप केस ख़बरों में भी जगह नहीं बना पाते, सिर्फ़ वही केस ख़बर बनते हैं जो जघन्य हों या हैरान करने वाले हों।

बता दें कि 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद जन सैलाब सड़कों पर उमड़ा था। महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर बड़े-बड़े वादे हुए, कानून में संशोधन हुए, सरकार बदली लेकिन दिल्ली में महिलाओं की स्थिति जस की तस बनी रही। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में निर्भया के बाद रेप के मामलों में 176% का हुआ इजाफा हुआ है। साल 2012 में दिल्ली में रेप के 706 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2019 की 15 नवंबर तक ही 1 हजार 947 मामले दर्ज हो चुके हैं।

'पीपल्स अगेंस्ट रेप इन इंडिया' एनजीओ की महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना बीबीसी से बात करते हुए कहती हैं कि किसी भी उम्र की महिलाएं सुरक्षित नहीं है। ये हालात इसलिए नहीं बदले क्योंकि सरकार की प्राथमिकता में महिलाओं और छोटी बच्चियों की सुरक्षा होनी चाहिए लेकिन वो कहीं भी नहीं है।

योगिता के अनुसार पिछले कुछ सालों में वो 100 से भी ज़्यादा ख़त बलात्कार पीड़ितों को न्याय दिलवाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिख चुकी हैं लेकिन उन्हें कभी कोई जवाब नहीं मिला। वे पूछती हैं कि पीएम मोदी इस पर बात क्यों नहीं करते।

rape case
crimes against women
violence against women
sexual harassment
sexual crimes
Crime Capital
AAP government
Arvind Kejriwal
delhi police
BJP

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

ग़ाज़ीपुर; मस्जिद पर भगवा झंडा लहराने का मामला: एक नाबालिग गिरफ़्तार, मुस्लिम समाज में डर


बाकी खबरें

  • Gujarat Riots
    बादल सरोज
    गुजरात दंगों की बीसवीं बरसी भूलने के ख़तरे अनेक
    05 Mar 2022
    इस चुनिन्दा विस्मृति के पीछे उन घपलों, घोटालों, साजिशों, चालबाजियों, न्याय प्रबंधन की तिकड़मों की याद दिलाने से बचना है जिनके जरिये इन दंगों के असली मुजरिमों को बचाया गया था।
  • US Army Invasion
    रॉजर वॉटर्स
    जंग से फ़ायदा लेने वाले गुंडों के ख़िलाफ़ एकजुट होने की ज़रूरत
    05 Mar 2022
    पश्चिमी मीडिया ने यूक्रेन विवाद को इस तरह से दिखाया है जो हमें बांटने वाले हैं। मगर क्यों न हम उन सब के ख़िलाफ़ एकजुट हो जाएं जो पूरी दुनिया में कहीं भी जंगों को अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं?
  • government schemes
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना के दौरान सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं ले पा रहें है जरूरतमंद परिवार - सर्वे
    05 Mar 2022
    कोरोना की तीसरी लहर के दौरान भारत के 5 राज्यों (दिल्ली, झारखंड, छत्तीसगढ, मध्य प्रदेश, ओडिशा) में 488 प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना हेतु पात्र महिलाओं के साथ बातचीत करने के बाद निकले नतीजे।
  • UP Elections
    इविता दास, वी.आर.श्रेया
    यूपी चुनाव: सोनभद्र और चंदौली जिलों में कोविड-19 की अनसुनी कहानियां हुईं उजागर 
    05 Mar 2022
    ये कहानियां उत्तर प्रदेश के सोनभद्र और चंदौली जिलों की हैं जिन्हे ऑल-इंडिया यूनियन ऑफ़ फ़ॉरेस्ट वर्किंग पीपल (AIUFWP) द्वारा आयोजित एक जन सुनवाई में सुनाया गया था। 
  • Modi
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव : क्या पूर्वांचल की धरती मोदी-योगी के लिए वाटरलू साबित होगी
    05 Mar 2022
    मोदी जी पिछले चुनाव के सारे नुस्खों को दुहराते हुए चुनाव नतीजों को दुहराना चाह रहे हैं, पर तब से गंगा में बहुत पानी बह चुका है और हालात बिल्कुल बदल चुके हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License