NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
शर्मनाक: वोट नहीं देने पर दलितों के साथ बर्बरता!
बिहार के औरंगाबाद में शर्मनाक मामला देखने को मिला, जहां पंचायत के मुखिया के पद पर खड़े होने वाले एक उम्मीदवार ने दो दलितों को बेहद बुरी तरह प्रताड़ित किया, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
रवि शंकर दुबे
13 Dec 2021
Dalits

‘समान अधिकार और सम्मान’ का प्रचार करने वाले नीतीश कुमार और उनकी सहयोगी सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी के वादों की रीढ़ कितनी मजबूत है ये बिहार के औरंगाबाद से आई एक वीडियो से साफ हो जाता है, इस वीडियो में हर वो हरकत की गई है जो सिर्फ मानवता के मुंह पर एक तमाचा ही नहीं जड़ती, बल्कि समानता जैसे शब्दों को और इन्हें रटने वाले नेताओं को कठघरे में भी खड़ा करती है, वीडियो में साफ दिखाई पड़ रहा है कि कैसे एक बाहुबली दो दलितों से उठक-बैठक करवा रहा है, एक युवक की गर्दन पकड़ कर उसे ज़मीन पर झुकाकर उससे थूकने को बोल रहा है, फिर गाली देकर उसे चाटने के लिए मजबूर कर रहा है।

इस वीडियो को शेयर करते हुए अंबेडकरवादी सुशील शिंदे नाम के एक शख्स ने लिखा है कि ‘’ बिहार के औरंगाबाद के सिंघना गांव में मुखिया के चुनाव में वोट नहीं देने के कारण बलवंत सिंह ने वोटरों से थूक चटवाया और कान पकड़कर उठक-बैठक लगवाई! देश आजाद होने के 75 साल बाद भी सवर्ण अब भी दलितों को अपना गुलाम समझते हैं। और थूक चटवाकर दलितों को उनकी औकात दिखा रहा हैं।‘’

दरअसल सिंघना गांव में होने वाले पंचायती चुनाव में मुखिया पद के लिए नेता बलवंत सिंह प्रत्याशी थे। आरोप है कि उन्होंने वोट के लिए लोगों को पैसे बांटे थे, इसके बावजूद उन्हें वोट नहीं दिए जाने पर वे बौखला गए और अपनी मर्यादा भूलकर दलितों के साथ अत्याचार करना शुरू कर दिया।

मामले को बढ़ता देख बलवंत सिंह ने अपनी सफाई भी पेश की, जिसमें उन्होंने कहा कि दोनों युवक शराब पीकर उपद्रव कर रहे थे, और उनके शांत होने के बाद उन्हें सजा दी गई है।

चलिए एक बार को मान लेते हैं, कि दोनों युवकों ने उपद्रव किया, लेकिन सवाल ये है कि कानून नाम की भी कोई चीज़ है या नहीं?  या फिर बलवंत सिंह खुद को कानून से ऊपर समझते हैं?, क्योंकि हमारे संविधान में कहीं नहीं लिखा कि दलितों के साथ या किसी के भी साथ ऐसी मानवता को शर्मशार कर देने वाली हरकतें की जाएं, या फिर उन्हें ऐसी सजा दी जाए।

मामले को तूल पकड़ता देख पुलिस भी हरकत में आई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया, जिला पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्र का कहना है कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दे दिए थे, इसके बाद भी लगातार जांच की जा रही है।

भले ही पुलिस कार्रवाई का दावा कर रही हो, लेकिन बिहार जैसे राज्य में, जहां भारतीय जनता पार्टी डबल इंजन सरकार का बखान करते नहीं थकती, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, प्रधानमंत्री मोदी की वाहवाही करते नहीं थकते, वहां ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदारी कौन लेगा?..  या फिर ये अत्याचार यूं ही बदस्तूर जारी रहेंगे... क्योंकि जब देश को आजाद हुए 75 साल हो चुके हैं, पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, ऐसे में सिर्फ पंचायती चुनाव में वोट नहीं डालने पर एक बाहुबली का दलितों के साथ ऐसा बरताव हमें फिर से गुलाम होने का तंज कस रहा है।

Bihar
aurangabad
viral video
Dalits
Attack on dalits
Nitish Kumar
BJP
Dalit Rights

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

विचारों की लड़ाई: पीतल से बना अंबेडकर सिक्का बनाम लोहे से बना स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बच्चों को कौन बता रहा है दलित और सवर्ण में अंतर?

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

कॉर्पोरेटी मुनाफ़े के यज्ञ कुंड में आहुति देते 'मनु' के हाथों स्वाहा होते आदिवासी

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

बागपत: भड़ल गांव में दलितों की चमड़ा इकाइयों पर चला बुलडोज़र, मुआवज़ा और कार्रवाई की मांग

मेरे लेखन का उद्देश्य मूलरूप से दलित और स्त्री विमर्श है: सुशीला टाकभौरे


बाकी खबरें

  • BJP Manifesto
    रवि शंकर दुबे
    भाजपा ने जारी किया ‘संकल्प पत्र’: पुराने वादे भुलाकर नए वादों की लिस्ट पकड़ाई
    08 Feb 2022
    पहले दौर के मतदान से दो दिन पहले भाजपा ने यूपी में अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है। साल 2017 में जारी अपने घोषणा पत्र में किए हुए ज्यादातर वादों को पार्टी धरातल पर नहीं उतार सकी, जिनमें कुछ वादे तो…
  • postal ballot
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव: बिगड़ते राजनीतिक मौसम को भाजपा पोस्टल बैलट से संभालने के जुगाड़ में
    08 Feb 2022
    इस चुनाव में पोस्टल बैलट में बड़े पैमाने के हेर फेर को लेकर लोग आशंकित हैं। बताते हैं नजदीकी लड़ाई वाली बिहार की कई सीटों पर पोस्टल बैलट के बहाने फैसला बदल दिया गया था और अंततः NDA सरकार बनने में उसकी…
  • bonda tribe
    श्याम सुंदर
    स्पेशल रिपोर्ट: पहाड़ी बोंडा; ज़िंदगी और पहचान का द्वंद्व
    08 Feb 2022
    पहाड़ी बोंडाओं की संस्कृति, भाषा और पहचान को बचाने की चिंता में डूबे लोगों को इतिहास और अनुभव से सीखने की ज़रूरत है। भाषा वही बचती है जिसे बोलने वाले लोग बचते हैं। यह बेहद ज़रूरी है कि अगर पहाड़ी…
  • Russia China
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस के लिए गेम चेंजर है चीन का समर्थन 
    08 Feb 2022
    वास्तव में मॉस्को के लिए जो सबसे ज्यादा मायने रखता है, वह यह कि पेइचिंग उसके विरुद्ध लगने वाले पश्चिम के कठोर प्रतिबंधों के दुष्प्रभावों को कई तरीकों से कम कर सकता है। 
  • Bihar Medicine
    एम.ओबैद
    बिहार की लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाः मुंगेर सदर अस्पताल से 50 लाख की दवाईयां सड़ी-गली हालत में मिली
    08 Feb 2022
    मुंगेर के सदर अस्पताल में एक्सपायर दवाईयों को लेकर घोर लापरवाही सामने आई है, जहां अस्पताल परिसर के बगल में स्थित स्टोर रूम में करीब 50 लाख रूपये से अधिक की कीमत की दवा फेंकी हुई पाई गई है, जो सड़ी-…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License