NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कथित ज़मीन घोटाले को लेकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सवालों के घेरे में, संघ और भाजपा पर भी सवाल
आगामी विधानसभा चुनावों 2022 से पहले ट्रस्ट का तथाकथित ज़मीन घोटाला, भाजपा की चुनावी रणनीति पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है।
असद रिज़वी
14 Jun 2021
कथित ज़मीन घोटाले को लेकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सवालों के घेरे में, संघ और भाजपा पर भी सवाल

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सवालों के घेरे में आ गया है। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के नाम पर जमा फण्ड में बड़े भ्रष्टाचार की ख़बरों ने ट्रस्ट और आरएसएस दोनों को साख बचाने की चिंता में डाल दिया है।

ट्रस्ट में भ्रष्टाचार की ख़बर ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए भी राजनीतिक संकट पैदा कर दिया है।

आगामी विधानसभा चुनावों 2022 से पहले ट्रस्ट का तथाकथित ज़मीन घोटाला, भाजपा की चुनावी रणनीति पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। प्रदेश में हाल में हुए चुनावों में हुई हार और कोविड-19 की दूसरी लहर में योगी आदित्यनाथ सरकार के कुप्रबंधन ने भाजपा को ज़मीन पर काफ़ी कमज़ोर कर दिया है। संघ भी इस संकट को स्वीकार कर रहा है और अब हिंदुत्व और राम मंदिर को ही केंद्र में रखकर चुनावों की तैयारी कर रहा है।

ऐसे में राम मंदिर के निर्माण के लिए जमा किए गए धन में  वित्तीय विसंगतियां संघ और उसके राजनीतिक घटक भाजपा के राजनीतिक भविष्य के ख़तरा हो सकता है।

विपक्ष ने इस सबको लेकर ट्रस्ट और संघ दोनों पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस से जुड़ी कुछ महिलाओं ने आज मुख्यमंत्री आवास पर प्रदर्शन भी किया। महिलाएं नारे लगा रही थी “चंदा चोर-गद्दी छोड़ें”। हालांकि वहाँ मौजूद पुलिस बल ने काफ़ी मशक़्क़त के बाद, रस्सी के सहारे महिलाओं को मुख्यमंत्री आवाज़ से कुछ मीटर पहले रोक दिया।

लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस से जुड़ी महिलाओं का प्रदर्शन। फ़ोटो : आज़म हुसैन

क्या हैं आरोप?

विपक्ष का आरोप है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या में 2 करोड़ रुपये की एक जमीन को 18.5 करोड़ में ख़रीद कर भगवान श्री राम के भक्तों को धोखा दिया है।

समाजवादी पार्टी (सपा), आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर ट्रस्ट के पैसों में वित्तीय अनियमितताओं करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और सपा के पूर्व विधायक पवन पांडे ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट ने 18 मार्च 2021 को श्रीराम मंदिर परिसर के लिए 18.5 करोड़ रुपये में एक जमीन खरीदी थी। जिसकी ट्रस्ट की ख़रीद से 5 मिनट पहले तक क़ीमत केवल 2 करोड़ थी।

ज़मीन और उसका मूल्य

आप नेता संजय सिंह के अनुसार 1,2080 वर्ग मीटर, यानी 1208 हेक्टेयर में फैली एक ज़मीन, मौज़ा बागबी, हवेली अवध तहसील, सदर अयोध्या में है। जिसका गाटा संख्या 243,244 एवं 246 है। इसकी क़ीमत 5.79 करोड़ रुपये (क्षेत्र के सर्कल रेट के अनुसार) है। 18 मार्च 2021 को शाम 7:10 बजे इस ज़मीन को 2 करोड़ में बेच दिया गया। 

ज़मीन का सौदा कुसुम और ऋषि पाठक और रवि मोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी के बीच हुआ। इसी तारीख को 18 मार्च 2021 को ठीक 5 मिनट बाद शाम 7:15 बजे इस जमीन को 18.5 करोड़ रुपये में ट्रस्ट द्वारा राम मंदिर के लिए ख़रीद गया।

उत्तर प्रदेश के आप के प्रभारी संजय सिंह ने दावा किया कि दोनों लेन-देन ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इशारे पर हुए।

वहीं सपा के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने भी मंदिर के निर्माण के लिए एकत्र किए गए धन में गबन का आरोप ट्रस्ट पर लगाया है। दिलचस्प बात यह है कि कि दोनों बार बिक्री समझौतों में ऋषिकेश उपाध्याय, मेयर अयोध्या और ट्रस्ट के ट्रस्टी अनिल मिश्रा गवाह हैं।

उन्होंने कहा कि इसमें से 18.5 करोड़ रुपये की राशि में 17 करोड़ रुपये भुगतान आरटीजीएस मोड में था। इसके अलवा यह भी दिलचस्प बात है की, रजिस्ट्री के लिए ट्रस्ट ने स्टांप पेपर 5:11 बजे शाम ख़रीदे,जबकि तिवारी और अंसारी ने 5:22 पर स्टांप ख़रीदे।

इस बीच कांग्रेस ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर हिंदू संगठन विश्व हिंदू परिषद (विहिप) पर भी हमला बोला है।

पार्टी नेता सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि विहिप पर पहले भी इसी तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। राजपूत ने धार्मिक ट्रस्ट में भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच की मांग की, और कहा कि विहिप ने भक्तों को उनकी आस्था के नाम पर ठगा है।

सपा के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने मीडिया से कहा, “मंदिर निर्माण के लिए हिंदू भक्तों द्वारा एकत्र किया गए धन में धोखाधड़ी हो रही है।” “'यह बिल्कुल साफ है कि ट्रस्ट और अयोध्या के मेयर को भ्रष्टाचार की जानकारी है।” 

भाकपा, उत्तर प्रदेश के सचिव डॉ. गिरीश ने ट्रस्ट में हुए तथाकथित घोटाले पर कहा है कि यह मामला इसलिये और भी पेचीदा हो गया है कि आरोपों का सीधा जवाब देने की बजाय ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने ढिठाई के साथ कहा कि, हम आरोपों की चिन्ता नहीं करते। हम अपना काम कर रहे हैं।

डॉ. गिरीश ने सवाल किया है कि “आस्थावानों से एकत्रित इस धन को कैसे मुट्ठीभर लोग बिना दानदाताओं को विश्वास में लिये मनमाने तरीके से इधर उधर कर सकते हैं”?

सीबीआई जांच की मांग

आप नेता संजय सिंह का कहना है कि "भारत सरकार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा इस मामले की जांच करानी चाहिए।”

चंपत राय का बयान

ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर चर्चा के लिए मंदिर के ट्रस्ट द्वारा एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। बैठक में ट्रस्ट के सभी 15 सदस्यों ने भाग लिया।

बैठक के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मीडिया से कहा, “मैं पूरे मामले का अध्ययन करने के बाद गबन के आरोपों पर बोलूंगा।” उन्होंने कहा, "हम पिछले 100 वर्षों से आरोपों का सामना कर रहे हैं, हम पर महात्मा गांधी की हत्या का भी आरोप लगाया गया।”

कौन हैं चंपत राय?

उल्लेखनीय है कि, चंपत राय विहिप के वरिष्ठ नेता और उपाध्यक्ष हैं। वह वर्तमान समय में भारत सरकार द्वारा अयोध्या में श्री राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए स्थापित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव भी हैं।

विहिप ने प्राचीन शहर अयोध्या में श्री राम मंदिर के निर्माण के लिए दान संग्रह “समर्पण निधि” अभियान संचालित किया और यह 27 फरवरी को 2,100 करोड़ रुपये से अधिक के संग्रह के साथ संपन्न हुआ।

कैसे बन रहा है राम मंदिर

अयोध्या विवाद (बाबरी मस्जिद-राम जन्म भूमि) में अंतिम निर्णय भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 9 नवंबर 2019 को सुनाया गया था। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने विवादित भूमि (2.77 एकड़) को एक ट्रस्ट को सौंपने का आदेश दिया, (भारत सरकार द्वारा राम जन्मभूमि, हिंदू देवता, राम के जन्मस्थान के रूप में प्रतिष्ठित) मंदिर का निर्माण करने के लिए।

शीर्ष अदालत ने सरकार को आदेश दिया कि वह उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को भी वैकल्पिक 5 एकड़ जमीन दे। ताकि सदियों पुरानी बाबरी मस्जिद के बदले एक नई मस्जिद का निर्माण किया जा सके। बता दें कि बाबरी मस्जिद कार सेवकों द्वारा, संघ और भाजपा के नेताओ की मौजूदगी में 6 दिसंबर 1992 को ध्वस्त कर दी गई थी। 

क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक 

विश्व हिन्दू परिषद और अयोध्या आंदोलन पर कई दशकों तक नज़र रखने वाले मानते हैं, इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता कि भगवान राम के नाम का इस्तेमाल करके  भ्रष्टाचार किया जाये।

वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं कि “यह शर्म की बात है कि जो लोग श्री राम की भक्ति करने का दावा करते हैं, वह वास्तव में उनके नाम पर बनाए गए ट्रस्ट को लूटने में लगे हैं।

उन्होंने कहा कि इस लूट में शामिल सभी लोगों के लिए कठोर सज़ा होना चाहिए है। ऐसे लोग खुद को राम भक्त कैसे कह सकते हैं?, वे भक्त नहीं बल्कि भक्षक हैं। 

ट्रस्ट और संघ की साख पर सवाल 

राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि आरोप गंभीर है, और इस का राजनीतिक असर भी पड़ सकता है। वरिष्ठ राजनीतिक समीक्षक अतुल चन्द्र का कहना है, इन आरोपो की उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिए है। हालाँकि वित्तीय विसंगतियां के आरोप से ट्रस्ट और संघ दोनों की साख पर सवाल उठेंगे। 

अतुल चन्द्र जो द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया के संपादक भी रहे हैं, मानते है कि इसका राजनीतिक असर भी पड़ेगा, अगर यह मुद्दा 2022 चुनावों तक जीवित रहता है। वह आगे कहते हैं कि जाँच में जो निकले, जो पैसा गया, वह वापस नहीं आयेगा। इसके अलावा बड़ा प्रश्न यह है कि जो पैसा गया किसकी जेब में यह बड़ा प्रश्न है?

Uttar pradesh
Ram Mandir
BJP
RSS
ram janm bhoomi
Corruption
yogi government
UP ELections 2022
Religion Politics

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • working women
    सोनिया यादव
    ग़रीब कामगार महिलाएं जलवायु परिवर्तन के चलते और हो रही हैं ग़रीब
    03 Feb 2022
    सीमित संसाधनों में रहने वाली गरीब महिलाओं का जीवन जलवायु परिवर्तन से हर तरीके से प्रभावित हुआ है। उनके स्वास्थ्य पर बुरा होने के साथ ही उनकी सामाजिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है, इससे भविष्य में…
  • RTI
    अनुषा आर॰
    गुजरात में भय-त्रास और अवैधता से त्रस्त सूचना का अधिकार
    03 Feb 2022
    हाल ही में प्रदेश में एक आरटीआई आवेदक पर अवैध रूप से जुर्माना लगाया गया था। यह मामला आरटीआई अधिनियम से जुड़ी प्रक्रियात्मक बाधाओं को परिलक्षित करता है। यह भी दिखाता है कि इस कानून को नागरिकों के…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: ये दुःख ख़त्म काहे नहीं होता बे?
    03 Feb 2022
    तीन-तीन साल बीत जाने पर भी पेपर देने की तारीख़ नहीं आती। तारीख़ आ जाए तो रिज़ल्ट नहीं आता, रिज़ल्ट आ जाए तो नियुक्ति नहीं होती। कभी पेपर लीक हो जाता है तो कभी कोर्ट में चला जाता है। ऐसे लगता है जैसे…
  • Akhilesh Yadav
    भाषा
    लोकतंत्र को बचाने के लिए समाजवादियों के साथ आएं अंबेडकरवादी : अखिलेश
    03 Feb 2022
    सपा प्रमुख अखिलेश ने कहा कि, "मैं फिर अपील करता हूं कि हम सब बहुरंगी लोग हैं। लाल रंग हमारे साथ है। हरा, सफेद, नीला… हम चाहते हैं कि अंबेडकरवादी भी साथ आएं और इस लड़ाई को मजबूत करें।"
  • Rahul Gandhi
    भाषा
    मोदी सरकार ने अपनी नीतियों से देश को बड़े ख़तरे में डाला: राहुल गांधी
    03 Feb 2022
    कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि एक किंग हैं, शहंशाह हैं, शासकों के शासक हैं। राहुल गांधी ने दो उद्योगपतियों का उल्लेख करते हुए सदन में कहा कि कोरोना के समय कई…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License