NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन मामले को सुनियोजित रूप से ज्ञानवापी मस्जिद-मंदिर के विवाद में बदला गयाः सीपीएम
उत्तर प्रदेश सीपीआई-एम का कहना है कि सभी सेकुलर ताकतों को ऐसी परिस्थिति में खुलकर आरएसएस, भाजपा, विहिप आदि के इस एजेंडे के खिलाफ तथा साथ ही योगी-मोदी सरकार की विफलताओं एवं जन समस्याओं जैसे महंगाई, बेरोजगारी आदि को लेकर सड़क पर उतरना जरूरी हो गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 May 2022
श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन मामले को सुनियोजित रूप से ज्ञानवापी मस्जिद-मंदिर के विवाद में बदला गयाः सीपीएम

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में कथित तौर पर शिवलिंग मिलने के दावे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उस स्थान को सुरक्षित करने का आदेश प्रशासन को दिया है। साथ ही अदालत ने नमाज जारी रखने का भी आदेश दिया है।

ज्ञानवापी मामले को लेकर उत्तर प्रदेश सीपीआई-एम ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन संबंधी मामले को सुनियोजित रूप से ज्ञानवापी मस्जिद-मंदिर के विवाद में तब्दील किया गया है। पार्टी का कहना है कि आरएसएस-भाजपा तथा अन्य हिंदू सांप्रदायिक ताकतों और तत्वों एवं मीडिया ने इसे सनसनीखेज बनाया है। साथ ही उसने कहा कि एक स्थानीय अदालत ने उपासना स्थल अधिनियम 1991 का खुला उल्लंघन किया, उसकी भूमिका सवालों के घेरे में है।

भाजपा के लिए चुनावी मुद्दा तैयार करने की कोशिश का जिक्र करते हुए प्रदेश राज्य कमेटी की सचिव डॉ. हीरालाल यादव ने बयान में कहा कि, "इस विवाद के पीछे आरएसएस-भाजपा, विहिप व अन्य हिंदुत्ववादी संगठनों और मीडिया का हाथ है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद दोनों आसपास मौजूद हैं। श्रृंगार गौरी का एक अत्यंत छोटा-सा मंदिर मस्जिद के पास भी स्थित है। सन 1991 के पूर्व मस्जिद में नमाज और श्रृंगार गौरी एवं विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन का कार्य सुचारू रूप से हुआ करता था। किसी भी तरह का विवाद नहीं था और न ही कोई वहां अतिरिक्त सुरक्षा की व्यवस्था थी। यहां तक कि मस्जिद परिसर में दिन में बच्चे जिनमें अधिकांशतः हिंदू बच्चे होते थे, वे खेला करते थे और कई हिंदुओं की दुकाने भी मस्जिद परिसर में थीं।”

उन्होंने आगे कहा कि. "आरएसएस-भाजपा-विहिप आदि के द्वारा अयोध्या की बाबरी मस्जिद और राम मंदिर विवाद पर आंदोलन शुरू करने के साथ ही काशी और मथुरा के विवाद को भी उठाने के बाद ज्ञानवापी और विश्वनाथ मंदिर के आसपास पुलिस सुरक्षा की स्थायी व्यवस्था की गयी। ज्ञानवापी में नमाज और विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन बेरोकटोक चलता रहा किंतु श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन पूजन पर सुरक्षा की दृष्टि से रोक लगायी गयी और वर्ष में केवल एक दिन चैत्र मास के चतुर्थी को श्रृंगार गौरी के दर्शन पूजन की इजाजत दी जाती रही है।"

प्रदेश सचिव ने आगे बयान में कहा कि, "राखी सिंह आदि पांच महिलाओं, जिनका किसी न किसी रूप में आरएसएस विहिप एवं विश्व सनातन संघ से संबंध है, ने वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत में 18 अगस्त 2021 को याचिका दाखिल कर 1991 से पूर्व की तरह श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन पूजन के अधिकार की मांग की। 26 अप्रैल 2022 को इस अदालत ने सर्वे करने का आदेश दिया। 6 मई को सर्वे के दौरान वादी पक्ष की ओर से कई वकील सर्वे स्थल पर उपस्थित हुए और हर-हर महादेव के नारे लगाये। इसके जवाब में शुक्रवार के दिन की नमाज अदा करने आए मुस्लिमों ने भी अल्लाह हो अकबर के नारे लगाये। माहौल तनाव पूर्ण हो गया किंतु मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ लोगों ने अपने लोगों को समझाकर शांत किया।"

हीरालाल ने आगे कहा कि, "वकील कमिश्नर अजय कुमार मिश्र और वादी पक्ष ने ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर सर्वे करना चाहा तो प्रतिवादी मस्जिद पक्ष के वकीलों ने विरोध किया और कहा कि सर्वे श्रृंगार गौरी का होना है न कि मस्जिद के अंदर। सर्वे रोका गया, मस्जिद पक्ष के वकील ने वकील कमिश्नर पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए उन्हें बदले जाने की अर्जी अदालत में दाखिल की। 4 दिनों की बहस के बाद सिविल जज रवि कुमार ने वकील कमिश्नर को बदलने से इंकार कर दिया और वादी पक्ष की मर्जी के अनुसार मस्जिद के अंदर कहीं भी सर्वे करने का आदेश दिया। सिविल जज ने बंद तालों को खोलकर या तोड़कर तथा बाधा पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए स्थानीय डीएम और पुलिस कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी दी।"

उन्होंने कहा कि,”इस बीच नारेबाजी करने के आरोप में एक मुस्लिम युवक अब्दुल सलाम को तो गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया लेकिन हर-हर महादेव की नारेबाजी करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी। यह मुसलमानों के खिलाफ प्रशासन द्वारा सख्ती तथा हिंदुओं के प्रति नरम रूख का संदेश था। मस्जिद के अंदर तीन दिनों तक लगातार सर्वे हुआ। उल्लेखनीय है कि इसी बीच 13 व 14 मई को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी वाराणसी में मौजूद रहे।”

हीरालाल आगे कहते हैं, “15 मई को मस्जिद के अंदर वजू करने के स्थान पर एक बेलनाकार आकृति, जिसको नमाज पढ़ने वाले फव्वारा के नाम से जानते थे, को वादी पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने शिवलिंग मानते हुए इसकी सुरक्षा और इसके आसपास के क्षेत्र को सील करने की अर्जी सिविल जज की अदालत में दी और जज ने बिना प्रतिवादी पक्ष को सुने आनन-फानन में हरिशंकर जैन की अर्जी को स्वीकार करते हुए तथाकथित शिवलिंग की सुरक्षा करने और वहां के स्थान को सील कर प्रतिबंधित करने का आदेश दे दिया। सिविल जज का यह आदेश उनकी अतिसक्रियता और न्याय प्रक्रिया का मखौल उड़ाना है और संदेह के घेरे में है।”

उल्लेखनीय है कि वादी पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने विहिप की ओर से बाबरी मस्जिद के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट में बहस में हिस्सा लिया था। यह भी उल्लेखनीय है कि अदालत ने सर्वे रिपोर्ट पेश करने की तिथि 17 मई तय की थी लेकिन बिना सर्वे रिपोर्ट देखे जज द्वारा पहले ही वजू स्थल को सील करने का आदेश दिया गया। इस आदेश के बाद नमाजियों के लिए वजू के लिए पानी की काफी दिक्कतें हो रही हैं। ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर सर्वे तथा वजूखाना को सील करने का आदेश स्पष्ट तौर पर उपासना स्थल विशेष अधिनियम 1991 का उल्लंघन है। जिसके अंतर्गत किसी भी उपासना स्थल की 15 अगस्त 1947 के पूर्व की स्थिति को परिवर्तित नहीं किया जा सकता और ऐसी कोशिश करने वालों के खिलाफ दंड का प्राविधान भी किया गया है।

प्रदेश सचिव हीरालाल ने कहा कि, "इस पूरे दौर में आरएसएस भाजपा के लोग जनता के बीच अफवाहे फैलाने और मुस्लिमों के खिलाफ प्रचार करने में लगे रहे। इन बातों का प्रचार किया गया कि ज्ञानवापी मस्जिद नहीं मंदिर है, मुस्लिम लोग ज्ञानवापी में जाने से रोक रहे हैं और अब यहां भी मंदिर बनेगा। मीडिया की भूमिका भी घोर पक्षपाती और हिंदू-मुस्लिम के बीच विभाजन पैदा कर रही। राखी सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मामले को लगातार हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष के रूप में पेश किया गया। आरएसएस भाजपा इस मुद्दे पर सनसनी फैलाकर हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण करने की कोशिश में है। इसी समय मथुरा की ईदगाह और कृष्ण जन्मभूमि के मामले को भी हिंदू सांप्रदायिक ताकतों द्वारा गर्माया जा रहा है। भाजपा इसे 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए एक एजेंडे के रूप में इस्तेमाल कर सकती है।"

उन्होंने कहा कि, बाबरी मस्जिद के बाद अब ज्ञानवापी मस्जिद के मामले को अदालत में ले जाने और स्थानीय अदालत के रवैये से मुस्लिम जन में घोर निराशा है। संविधान, न्यायालय, सरकार से न्याय मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। वाराणसी के मुस्लिम फिलहाल शांत हैं लेकिन उनके अंदर काफी निराशा और आक्रोश भी है। इस बीच कुछ मुस्लिम अतिवादी व सांप्रदायिक ताकतें भी उनके बीच सक्रिय हैं जो उन्हें हिंदुओं से सीधे मुकाबले के लिए सड़क पर उतरने के लिए उकसा रही हैं। उत्तर प्रदेश में सभी सेकुलर ताकतों को ऐसी परिस्थिति में खुलकर आरएसएस, भाजपा, विहिप आदि के इस एजेंडे के खिलाफ तथा साथ ही योगी-मोदी सरकार की विफलताओं एवं जन समस्याओं जैसे महंगाई, बेरोजगारी आदि को लेकर सड़क पर उतरना जरूरी हो गया है। वामपंथी दलों के अलावा अन्य दलों में इस मुद्दे पर नरम रूख और हिचकिचाहट के भाव देखे जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में वामपंथी दलों को ही अपने स्तर से इस आंदोलन की शुरुआत करनी चाहिए।"

Gyanvapi mosque
varanasi
Shivling
Fountain
Hindus
Muslims
Supreme Court
CPIM
Uttar pradesh

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

ज्ञानवापी मामले में अधिवक्ताओं हरिशंकर जैन एवं विष्णु जैन को पैरवी करने से हटाया गया

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  • विक्रम और बेताल: सरकार जी और खेल में खेला
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    विक्रम और बेताल: सरकार जी और खेल में खेला
    15 Aug 2021
    सरकार जी खेलों की दुनिया को पैसे की दुनिया से अलग ही रखते थे। वे जानते थे कि खिलाड़ी अपनी नैसर्गिक प्रतिभा से ही आगे बढ़ता है न कि सरकारी सहायता से। इसीलिए उन्होंने खेल में सरकारी मदद को सिर्फ़ खेल…
  • अजय कुमार
    कभी रोज़गार और कमाई के बिंदु से भी आज़ादी के बारे में सोचिए?
    15 Aug 2021
    75 साल पहले ही गुलामी से आजादी मिल गई। लेकिन जिसे असली आजादी कहते हैं क्या उसका एहसास भारत के ज्यादातर लोगों ने किया है?
  • आज़ादी@75: आंदोलन के 74 बरस और नई उम्मीद और नया रास्ता दिखाता किसान आंदोलन
    लाल बहादुर सिंह
    आज़ादी@75: आंदोलन के 74 बरस और नई उम्मीद और नया रास्ता दिखाता किसान आंदोलन
    15 Aug 2021
    आज़ादी के अमृत महोत्सव वर्ष का सबसे पवित्र अमृत यह किसान आंदोलन ही है जो संघ-भाजपा के विषवमन का सबसे बड़ा एंटीडोट है।
  • 75वीं सालगिरह के मौके पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम। तस्वीर में अजय सिंह (दाएं) अपनी जीवन साथी शोभा सिंह (बाएं) के साथ।
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता: मर्द खेत है, औरत हल चला रही है
    15 Aug 2021
    आज आज़ादी की 74वीं सालगिरह है और हमारे कवि और पत्रकार अजय सिंह की 75वीं। 15 अगस्त, 1946 को बिहार के ज़िला बक्सर के चौगाईं गांव में अजय सिंह का जन्म हुआ। आज इतवार भी है, यानी मौका भी है और दस्तूर भी…
  • आज़ादी@75: लोकतंत्र को फिर से जीवित करने का संघर्ष हो
    अनिल सिन्हा
    आज़ादी@75: लोकतंत्र को फिर से जीवित करने का संघर्ष हो
    15 Aug 2021
    अब तक हमारी चितां देश को लोकतंत्र को बेहतर बनाने की होती थी। हमारी चिंता यह नहीं होती थी कि लोकतंत्र बचेगा या नहीं...।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License