NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
महामारी के छह महीने : भारत क्यों लड़ाई हार रहा है 
11 मार्च को जबसे डब्लूएचओ ने कोविड-19 को 'महामारी' घोषित किया था, तब से अब तक मोदी सरकार ने इस पर कार्रवाई (और निष्क्रियता) की संक्षिप्त रूपरेखा पेश की है।
सुबोध वर्मा
14 Sep 2020
Translated by महेश कुमार
महामारी के छह महीने  

लगता है यह जीवन भर के लिए दिल का दर्द, चिंता, भय और अनिश्चितता बन गई है, लेकिन है यह केवल छह महीने पहले की बात जब 11 मार्च को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने घोषणा की थी कि यह नई बीमारी जिसे कोविड-19 कहा जाता है, एक 'महामारी' है। इसका मतलब है कि अज्ञात वायरल की बीमारी, जिसमें 'निमोनिया’ जैसे लक्षण पाए जाते हैं, वह बड़ी संख्या में विभिन्न देशों को प्रभावित कर रही थी और लगातार फैल रही थी।

इसकी शुरुवात के समय, 100 देशों में एक लाख से अधिक मामले फैले हुए थे। भारत में तब तक कुल 50 ही मामले रिकॉर्ड किए गए थे, जिनमें से ज्यादातर विदेश से लौटे हुए लोग थे, और उनमें भी 16 इतालवी पर्यटक थे। अगले दिन, यानि 12 मार्च को कर्नाटक में एक 76 वर्षीय भारतीय रोगी इस बीमारी का पहला शिकार बने थे।

इन छह महीनों में भारत के साथ पूरी दुनिया उलट गई। आज के समय यानि 11 सितंबर तक, भारत में कुल मामलों की संख्या लगभग 46.6 लाख हो चुकी है (जो मामलों की संख्या में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है) और करीब 77,472 मौतें हो चुकी हैं (जो दुनिया में तीसरे स्थान पर है), हालांकि ज्ञात सक्रिय मामलों की संख्या 9.58 लाख (जो दुनिया में दूसरे स्थान पर है), उपरोक्त आंकड़े स्वास्थ्य मंत्रालय और विश्व स्तर पर वरल्डोमीटर के आंकड़ों को न्यूज़क्लीक डेटा एनालिटिक्स टीम ने संग्रह कर उनका विश्लेषण किया है। 11 सितंबर को, भारत ने रिकॉर्ड 97,570 के मामले दर्ज किए थे, जो दुनिया में अब तक कि सबसे अधिक संख्या है, और इस चलाने वाले सप्ताह के अंत तक भारत में लगभग 6.37 लाख मामले पाए गए थे, जो अपने आप में दुनिया में एक रिकॉर्ड है। [नीचे चार्ट देखें]

graph_2.jpg

इस बीच, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने 11 सितंबर को जारी एक देश-व्यापी सीरो-सर्वेक्षण के नतीजों ने दिमाग हिला देने वाली संख्या का खुलासा किया: जिसमें मई की शुरुआत में ही कोरोनोवायरस से लगभग 64 लाख भारतीयों के संक्रमित होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि 5 मई को आधिकारिक तौर पर पुष्टि किए गए मामलों की संख्या लगभग 53,000 थी। सीरो-सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि उस समय मामलों की वास्तविक संख्या कम से कम 120 गुना अधिक रही होगी। कल्पना कीजिए कि अब संख्या का क्या आलम होगा।

जाहिर है, इससे टी यही लगता है कि भारत इस घातक वायरस के खिलाफ लड़ाई हार गया है। जबकि इस तथ्य में सांत्वना दी जा रही है कि भारत में दुनिया के मुक़ाबले  मौतें उतनी नहीं हुई हैं (शायद युवा आबादी के कारण) लेकिन वायरस का प्रसार किसी भी सरकारी कार्रवाई के मुक़ाबले तेजी से हुआ है, और यह कम होने का कोई संकेत भी नहीं दे रहा है। मौतें बढ़ रही हैं और सरकार की विचित्र नीतियों ने अर्थव्यवस्था को भी तबाह कर दिया है। आइए हम सरकार की प्रतिक्रिया पर अधिक करीब नज़र डालें। इसे मोटे तौर पर तीन चरणों में विभाजित किया जा सकता है।

पहला चरण–आत्मतुष्टि– ‘महामारी कोई समस्या नहीं है’

चीन ने डब्ल्यूएचओ को पहली बार जनवरी 2020 के पहले सप्ताह में वुहान शहर में अज्ञात वायरस के बारे में जानकारी दी थी। इसके परिणामस्वरूप एक आपातकालीन प्रतिक्रिया शुरू हुई, जिसमें सदस्य देशों (भारत सहित) को सचेत किया गया। इस बढ़ते वायरस के बारे में बहुत कुछ जानकारी नहीं थी, लेकिन वह एक चिंता का कारण था। हालाँकि, भारत ने इस बारे में बहुत कुछ नहीं किया था।

भारत ने 30 जनवरी को केरल में अपना पहला मामला दर्ज किया। अगले 54 दिनों में, नरेंद्र मोदी सरकार ने बार-बार यही कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है और हालत नियंत्रण में हैं। सरकार ने वुहान, चीन से लोगों को एयरलिफ्ट कराया। 4 फरवरी को, भारत सरकार ने उन चीनी और अन्य पर्यटकों के वीजे रद्द कर दिए थे, जो पहले दो सप्ताह में चीन गए थे। एयरपोर्ट आगमन पर स्क्रीनिंग की जा रही थी, यानी तापमान की जांच की जा रही थी। लेकिन, इससे अधिक कुछ नहीं किया गया।

3 मार्च को, प्रधानमंत्री मोदी ने अधिकारियों के साथ स्थिति की "समीक्षा" की और ट्वीट किया कि घबराने की ज़रूरत नहीं है, "आत्म-सुरक्षा के लिए छोटे लेकिन महत्वपूर्ण उपाय" सभी को करने हैं जिनकी जरूरत है। हवाई अड्डे की स्क्रीनिंग करीब-करेब सभी हवाई अड्डों के आगमन तक बढ़ा दिया गया था- लेकिन तब तक सैकड़ों लोग आ चुके थे। तब कुछ पुष्ट मामलों के संपर्क का पता लगाने का काम काफी उत्साह के साथ किया गया था, लेकिन तब तक अन्य जो गायब हो चुके थे, वे बने रहे। केरल ने इस बीमारी को राज्य आपदा ’घोषित कर दिया था और ऐसा ही ओडिशा और हरियाणा ने भी किया था।

राज्यों को इस भानकर महामारी से निपटने के लिए औपनिवेशिक काल के महामारी अधिनियम को लागू करने को कहा गया था। मोदी सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू किया, लेकिन इसे चरण दो में लागू किया गया।

15 मार्च तक, भारत में लगभग उन 500 व्यक्तियों की जांच की गई थी, जिनमें निमोनिया जैसे लक्षण पाए गए थे। केवल विदेशों से लौटे लोगों की जांच की जा रही थी। बाद में रोग के लक्षण वाले व्यक्तियों को शामिल कर इसका विस्तार किया गया था।

फिर 22 मार्च को पीएम के आह्वान पर 14 घंटे का स्वैच्छिक 'लॉकडाउन’ लगाया गया, जिसके बाद ताली-थाली बजाना और बरतनों को पीटने का कार्यक्रम चलाना शामिल था। तब तक भारत में पहला मामला पाए जाने को करीब 50 दिन बीत चुके थे और 69 दिनों के बाद इस बीमारी को 'महामारी' घोषित किया गया था।

चरण II– डराना - ‘कि महामारी क़ानून एवं व्यवस्था की समस्या है’

24 मार्च को, पीएम मोदी ने घोषणा की कि पूरे देश में तीन सप्ताह तक पूर्ण लॉकडाउन रहेगा, जो चार घंटे बाद 12 बजे शुरू होगा। यह एक नाटकीय ‘झटका और विस्मयकारी’ उपाय था, जो एक आत्मतुष्टि और निष्क्रियता से दूसरी अति को दर्शाता था- और जो विचारहीनता का प्रतीक भी था। इसमें निहित था कि यह बीमारी के संचरण की श्रृंखला को तोड़ देगा और इसलिए वायरस को नष्ट कर देगा। उस समय तक भारत में लगभग 500 पुष्ट मामले पाए जा चुके थे।

देशव्यापी लॉकडाउन को तीन बार बढ़ाया गया था और यह लगभग दो महीने तक चला, जिसके बाद इसे विभिन्न चरणों में ढील दी गई। आपदा प्रबंधन अधिनियम ने प्रधानमंत्री और  गृह मंत्री अमित शाह को को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की पूरी ताक़त दे दी थी।

राज्यों पर बार-बार इसके अनुपालन के लिए दादागिरी की गई, हालांकि अधिकांश राज्य सरकारों को कोई सुराग नहीं था कि वे सेंट्रल डिक्टेट्स या धमकी का पालन करने के अलावा क्या करें। लोगों की आवाजाही को रोकने के लिए पुलिस को सभी अधिकार दे दिए गए थे, ट्रेनें रद्द कर दी गईं, लाखों लोग दूरस्थ स्थानों में फंसे हुए थे, प्रवासी मजदूरों को खुद के भरोसे छोड़ दिया गया और उन्हें पैदल ही घर वापस जाने के लिए मजबूर किया गया। इस अवधि में 500 से अधिक लोगों की मौत होने का अनुमान है जो लॉकडाउन या घर वापस जाने से बचने की कोशिश कर रहे थे। 

इस अवधि को भारत की अर्थव्यवस्था को सर को धड़ से अलग करना परिभाषित किया गया था। औद्योगिक उत्पादन में लगभग 63 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, और बेरोजगारी लगभग 24 प्रतिशत तक बढ़ गई थी जिसके माध्यम से लगभग 80 प्रतिशत परिवार अपनी कमाई पूरी तरह से या आंशिक रूप से खो चुके थे, आयात और निर्यात में गिरावट आ गई, आर्थिक विकास धीमा हो गया, जैसा कि अप्रैल से जून के तिमाही में जीडीपी में लगभग 24 प्रतिशत की गिरावट ने दिखाया है। 

हालांकि, भारत के लोगों द्वारा किया गया विशाल और अनुचित बलिदान भी कोरोनावायरस के फैलाव को नहीं रोक सका। 24 मार्च को 606  मामलों से बढ़कर- 31 मई को 1.9 लाख और आगे 30 जून तक 5.86 लाख तक मामलों की वृद्धि दर्ज की गई।

चरण III –आत्मसमर्पण– ‘महामारी किसी एक अन्य समस्या की तरह है, इसके साथ ही जीना है’

मई के अंत तक आते-आते, मोदी सरकार अपनी खुद की कही बातों को लेकर दुविधा में फंस गई थी। सबसे बड़ा हथियार जो इसके पास था- वह था लॉकडाउन- जिसे वह पहले से ही इस्तेमाल कर चुकी थी। अर्थव्यवस्था जर्जर स्थिति में थी। राहत और कल्याण की की घोषणाएं भारी बदइंतजामी का शिकार बन चुकी थी। भूख और दुख जमीन को चीर दे रहे थे, लोग राहत के लिए चिल्ला रहे थे। कॉरपोरेट जगत इस बात पर जोर दे रहा था कि अर्थव्यवस्था को फिर से चालू करने की जरूरत है- वे लाभ के मार्जिन के बारे में अधिक चिंतित थे।

इसलिए, सरकार ने कलर-कोड वाला ज़ोन बनाने की रणनीति की घोषणा की, इसे लागू करने के लिए पुलिस अधिकारियों को ज़िम्मेदारी दे गई, रात का कर्फ्यू और सप्ताहांत कर्फ्यू से घिरे कुछ बाजार खोले गए, मॉल बंद रखे गए, धार्मिक स्थलों और जिमों को बंद रखा गया और राज्य को कहा गया कि वे तय करें कि वे क्या करना सही समझती हैं। इस भावना को ऊपर से नीचे तक लाया गया था, जिसमें राज्यों को जिला कलेक्टरों को यह बताना था कि वे क्या चाहते हैं, कलेक्टरों ने अपने नीचे थाना प्रभारियों और केंद्रीय दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए पुलिस थानों के प्रभारियों का हवाला दिया, और इसी तरह बात चलती रही।

कुल मिलाकर, यह एक पराजित सेना की पूरी तरह से वापसी थी। खुद को बचाने की एक जरिया था- अर्थव्यवस्था को फिर से खोलने की जरूरत भी थी। 

इस बीच, कोविड-19 मामलों में वृद्धि जारी रही- 30 जून को 5.86 लाख मामलों से बढ़कर, जुलाई-अंत तक यह 16.96 लाख तक पजुच चुकी थी और अगस्त-अंत तक आते-आते 36.9 लाख तक पहुंच गई थी।

संक्षेप में, भारत ने सत्तारूढ़ मोदी सरकार द्वारा सबसे घातक ‘प्राकृतिक-आपदा’ से निपटने के कुप्रबंधन को देखा है। बहुत कम आश्चर्य की बात है कि इस मामले में भारत की सरकार ब्राजील के जायर बोल्सनरो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ है। ये तीन देश महामारी से सबसे अधिक पीड़ित हैं, जिसका कारण यह है कि इनका नेतृत्व उन व्यक्तियों के हाथों में है, जिन्होंने इस महामारी से निपटने के मामले में चौंका देने वाला गड़बड़झाला किया है।

[डाटा का संग्रह और विश्लेषण पीयूष शर्मा और न्यूज़क्लिक डेटा एनालिटिक्स टीम द्वारा किया गया है]

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Six Months of Pandemic: Why India Lost the Battle

COVID-19
Modi Govt
Covid Data
COVID Spread
Lockdown Impact
Unplanned Lockdown
GDP Contraction
Job Losses
India Covid tally

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी


बाकी खबरें

  • Auroville
    सत्यम श्रीवास्तव
    विकास की बलि चढ़ता एकमात्र यूटोपियन और प्रायोगिक नगर- ऑरोविले
    16 Dec 2021
    ऑरोविले एक ऐसा ही नगर है जो 1968 से धीरे-धीरे बसना शुरू हुआ। इस छोटे से नगर को पूरी दुनिया में एक प्रायोगिक शहर के तौर पर देखा जाता है। इस नगर को यूटोपियन यानी सुंदर कल्पना के तौर पर भी पूरी दुनिया…
  • Milind Naik
    राज कुमार
    यौन शोषण के आरोप में गोवा के मंत्री मिलिंद नाइक का इस्तीफ़ा
    16 Dec 2021
    महिला के यौन शोषण के आरोप के चलते भाजपा नेता और गोवा के शहरी विकास और समाज कल्याण मंत्री मिलिंद नाईक को इस्तीफा देना पड़ा है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बताया कि मिलिंद नाइक का इस्तीफा…
  • bank strike
    रूबी सरकार
    निजीकरण को लेकर 10 लाख बैंक कर्मियों की आज से दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल
    16 Dec 2021
    बैंक कर्मियों की इस हड़ताल का समर्थन बीमा कर्मचारियों ने भी किया है। किसान आंदोलन की सफलता के बाद अब श्रमिक संगठनों को भी उम्मीद जगी है।
  • Nirbhaya
    सोनिया यादव
    निर्भया कांड के नौ साल : कितनी बदली देश में महिला सुरक्षा की तस्वीर?
    16 Dec 2021
    हर 18 मिनट में बलात्कार का एक मामला, निर्भया कांड के न्यायिक नतीजे से आने वाले व्यापक सामाजिक बदलावों की उम्मीद पर कई सवाल खड़े करता है।
  • Van Gujjar community
    प्रणव मेनन, तुइशा सरकार
    उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क में वन गुर्जर महिलाओं के 'अधिकार' और उनकी नुमाइंदगी की जांच-पड़ताल
    16 Dec 2021
    वन गुर्जर समुदाय के व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार के आलोक में समुदाय की महिलाओं के अधिकार
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License