NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
समाजसेवी संदीप पाण्डेय का मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम खुला पत्र
यदि आप अराजक लोगों को छोड़ सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल भेजेंगे तो लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीकों से व संविधान का सम्मान करने वालों के लिए अपना मतभेद व्यक्त करने की जगह समाप्त हो जाएगी व अराजक लोगों का ही बोलबाला रहेगा और आम जनता उन्हीं के प्रभाव में आकर हिंसा के रास्ते चल देगी।
संदीप पाण्डेय
26 Dec 2019
yogi adityanath

आदरणीय मुख्य मंत्री जी,

मैंने 21 दिसम्बर, 2019 को सुबह आपसे मिलने का समय मांगा था। समय न मिलने पर मैंने सोचा कि इस खुले पत्र के माध्यम से ही अपनी बातें रख दूं। लखनऊ व प्रदेश भर में नागरिकता संशोधन अधिनियम व राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और शासन-प्रशासन के रवैए के बारे में कुछ कहना चाहता हूं।

देश के दूसरे शहरों में लाखों की भीड़ एकत्र हुई और कोई हिंसा नहीं हुई तो उत्तर प्रदेश में क्यों हुई यह सोचने वाली बात है? कुछ अराजक तत्वों की हिंसा के बाद शासन-प्रशासन द्वारा निर्णय लेकर बदले की भावना से जो कार्रवाई की गई है वह तो और भी निंदनीय है क्योंकि एक लोकतंत्र में शासन-प्रशासन से धर्य व विवेक से काम करने की अपेक्षा की जाती है।

हिंसा अराजक तत्वों ने की है किंतु कार्यवाही ऐसे भी सामाजिक छवि वाले लोगों के खिलाफ की जा रही है जिन्होंने जिन्दगी भर शांतिपूर्ण तरीकों से ही काम किया है और जिनकी इस देश के संविधान में निष्ठा है।

लखनऊ में एडवोकेट मोहम्मद शोएब और सेवानिवृत आईपीएस एसआर दारापुरी जो मेरी तरह 19 दिसम्बर, 2019 को अपने अपने घरों में नजरबंद रहे को गिरफ्तार किया गया है। मो. शोएब लखनऊ विश्वविद्यालय से 1972 में एलएलबी करते समय ही सोशलिस्ट पार्टी के नगर सचिव रहे और आज सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) के राज्य अध्यक्ष हैं।

उन्होंने 14 ऐसे निर्दोष नौजवानों को न्यायालय से मुकदमा लड़ कर बरी कराया है जिन्हें विभिन्न आतंकी मामलों में आरोपी बनाया गया था। उनके ऊपर न्यायालय के अंदर वकीलों ने हमला किया लेकिन मो. शोएब ने आज तक जीवन में किसी के साथ हिंसा नहीं की है। दारापुरी जी तो मानवाधिकार व आंबेडकरवादी कार्यकर्ता हैं और इस राज्य से लोक सभा व विधान सभा के चुनाव लड़ चुके हैं।

मैंने उनके साथ 2008 में लखनऊ से जयपुर बम विस्फोट कांड में गिरफ्तार किए गए शाहबाज पर एक तथ्यान्वेषण आख्या तैयार की थी जिसमें हमने शाहबाज को निर्दोष पाया था, अभी हाल ही में न्यायालय से भी शाहबाज बरी हो गया।

मो. शोएब रिहाई मंच के भी अध्यक्ष हैं जिसके राॅबिन वर्मा, जो विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य करते हैं, की पुलिस ने काफी पिटाई भी की और फिर जेल भेजा। कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता सदफ जफर तो गिरफ्तार होने तक आस-पास हो रही हिंसा को रोकने का प्रयास करती रहीं।

इसी तरह दीपक मिश्र एक सृजनात्मक कार्यकर्ता हैं जो सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जाने जाते हैं और डाॅ. पवन राव अम्बेडकर रायबरेली में प्राध्यापक हैं। वाराणसी में मेरे जानने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं या छात्रों में अनूप श्रमिक, धनंजय त्रिपाठी, दिवाकर सिंह, राम जनम, शिवराज यादव, एकता, रवि कुमार, सान्या खान, श्रीप्रकाश राय, प्रशांत राय, सतीश सिंह, राज अभिषेक, दीपक राजगुरु, मनीष कुमार, संजीव सिंह, अर्पित गिरी, नरेन्द्र मणि त्रिपाठी, गौरव मणि त्रिपाठी, शाहिद जमाल, छेदीलाल निराला शामिल हैं जिनके बारे में मैं दावे से कह सकता हूं कि वे शांतिपूर्ण तरीकों से ही अपना प्रदर्शन कर रहे थे।

मैंने खुद नागरिकता संशोधन कानून व राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के विरोध में 14 दिसम्बर को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर व 19 दिसम्बर को नजरबंद होते हुए लखनऊ में अपने घर के बाहर प्रदर्शन किया जो शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुए।

यदि आप अराजक लोगों को छोड़ सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल भेजेंगे तो लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीकों से व संविधान का सम्मान करने वालों के लिए अपना मतभेद व्यक्त करने की जगह समाप्त हो जाएगी व अराजक लोगों का ही बोलबाला रहेगा और आम जनता उन्हीं के प्रभाव में आकर हिंसा के रास्ते चल देगी। सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है लोगों के सामने सरकार से असहमति व्यक्त करने के रचनात्मक विकल्प प्रस्तुत करना। यह तो तय है कि सामाजिक कार्यकाताओं के प्रभाव में विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण होंगे और उनकी अनुपस्थिति में ऐसे प्रदर्शनों के अराजक होने का खतरा बना रहेगा।

बाकी आप समझदार हैं। यदि अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकें तो समाज में शांति व व्यवस्था के हित में उपर्लिखित कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस ले लें और सभी निर्दोष लोगों को जेल से रिहा करें।

एक बात और कहना चाहता हूं। नागरिकता संशोधन कानून व राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के राष्ट्रव्यापी विरोध के बाद अब कई भारतीय जनता पार्टी के नेता कहने लगे हैं कि मुसलमानों को कोई चिंता करने की जरूरत नहीं हैं। लेकिन उपर्युक्त विरोध प्रदर्शनों के लिए जो मुकदमे दर्ज किए गए हैं उसमें बहुतायत मुस्लिम नामों की है, उदाहरण के लिए थाना हजरतगंज में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट सं. 600/2019 में 39 आरोपियों में 3 को छोड़ शेष मुस्लिम हैं जबकि विरोध प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में गैर-मुस्लिम भी शामिल रहे, और प्रदेश में गोली लगने से मारे गए सभी 16 नवजवान मुस्लिम हैं।

यदि शासन-प्रशासन मुसलमानों के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर कार्यवाही करेगा तो क्या मुसलमानों से अपेक्षा की जा सकती है कि वे सरकार के प्रति आश्वस्त रहें? उम्मीद है आप मेरे पत्र पर कुछ चिंतन-मनन करेंगे।                                        

संदीप पाण्डेय प्रख्यात समाजसेवी हैं और सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) के उपाध्यक्ष हैं।

Yogi Adityanath
UttarPradesh
NRC CAA protest
Violence in UP
UP police
House Arrest
Detained in UP
nrc and citizenship act

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

मलियाना नरसंहार के 35 साल, क्या मिल पाया पीड़ितों को इंसाफ?

यूपी: बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच करोड़ों की दवाएं बेकार, कौन है ज़िम्मेदार?

उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव का समीकरण


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 15,786 नए मामले, 231 मरीज़ों की मौत
    22 Oct 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 41 लाख 43 हज़ार 236 हो गयी है।
  • coal energy
    नीलाबंरन ए
    नवीकरणीय ऊर्जा और बिजली ख़रीद पर निर्भर तमिलनाडु ने कोयले की कमी का किया मुक़ाबला 
    22 Oct 2021
    तमिलनाडु राज्य की थर्मल पावर स्टेशनों पर निर्भरता कम है, लेकिन निजी विक्रेताओं से महंगी बिजली ख़रीदने के कारण टैंजेडको 1.07 लाख करोड़ रुपये के क़र्ज़ में धस गई है।
  • Ashfaqulla Khan
    हर्षवर्धन
    विशेष: अशफ़ाक़उल्ला को याद करना उनके विचारों को भी याद करना है
    22 Oct 2021
    आज शहीद क्रांतिकारी अशफ़ाक़ का 121 जन्मदिन है। आइये, इस मौके पर हम उनकी वैचारिकी की थोड़ी चर्चा करते हैं। 
  • Adam Gondvi
    न्यूज़क्लिक टीम
    अदम गोंडवी : “धरती की सतह पर” खड़े होकर “समय से मुठभेड़” करने वाला शायर
    22 Oct 2021
    जनता के शायर अदम गोंडवी (22 अक्टूबर, 1947-18 दिसंबर, 2011) के जन्मदिन पर न्यूज़क्लिक विशेष। यह वीडियो पैकेज 2018 में तैयार किया गया था, जो आज भी प्रासंगिक है। क्योंकि आज अदम की ही तरह पुरज़ोर आवाज़…
  • ग्लोरिया ला रीवा
    आँखों देखी रिपोर्ट : क्यूबा के वैज्ञानिकों, स्वास्थ्यकर्मियों ने कोविड के ख़िलाफ़ संघर्ष तेज़ किया
    21 Oct 2021
    ग्लोरिया ला रीवा क्यूबा में थीं। वहां उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों से क्यूबा के प्रभावी टीकाकरण कार्यक्रम और डेल्टा वेरिएंट से निपटने के तरीकों पर बात की।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License