NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
परिवारों में रह रहे बाल देखभाल संस्थाओं के बच्चों को प्रतिमाह दो हजार रुपये दें राज्य : सुप्रीम कोर्ट
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि बाल देखभाल केन्द्रों में रहने वाले बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिये राज्य सरकारों को, जिला बाल संरक्षण इकाई से सिफारिश मिलने के 30 दिन के भीतर, इन संस्थानों को किताबें और स्टेशनरी सहित बुनियादी सामग्री उपलब्ध करानी चाहिए।
भाषा
15 Dec 2020
SC

नयी दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे कोविड-19 महामारी के दौरान परिवारों को सौंपे गए, बाल देखभाल संस्थानों के बच्चों को, उनकी शिक्षा के लिये हर महीने दो-दो हजार रुपये दें।

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि बाल देखभाल केन्द्रों में रहने वाले बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिये राज्य सरकारों को, जिला बाल संरक्षण इकाई से सिफारिश मिलने के 30 दिन के भीतर, इन संस्थानों को किताबें और स्टेशनरी सहित बुनियादी सामग्री उपलब्ध करानी चाहिए।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ ने कहा कि राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बाल देखभाल संस्थानों में बच्चों को पढ़ाने के लिये जरूरी संख्या में शिक्षक उपलब्ध कराये जायें।

पीठ को बताया गया कि कोविड-19 महामारी शुरू होते वक्त बाल देखभाल संस्थानों में 2,27,518 बच्चे थे और इनमें से 1,45,788 बच्चों को उनके माता पिता या अभिभावकों को सौंपा जा चुका है।

पीठ ने कहा कि राज्य सरकारें दो हजार रुपये प्रति माह प्रत्येक बच्चे की शिक्षा के लिये देंगी और यह धनराशि बच्चे के परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिला बाल संरक्षण इकाई की सिफारिश पर दी जायेगी।

परिवारों को सौंपे गये बच्चों को शिक्षा प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर देते हुये पीठ ने जिला बाल संरक्षण इकाईयों को निर्देश दिया कि वे इस मामले में समन्वय करें और इसमें प्रगति की निगरानी करें।

न्यायालय ने निर्देश दिया कि बाल संरक्षण इकाईयां बाल देखभाल संस्थानों में बच्चों की सुविधाओं के मामले में प्रगति की जानकारी से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अवगत करायेंगी।

शीर्ष अदालत ने कहा कि शिक्षकों को इन बच्चों को पढ़ाने की अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि महामारी की वजह से मार्च से ही सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है और बच्चों को कक्षा में आने का मौका नहीं मिला है।

पीठ ने कोरोना वायरस महामारी के दौरान देश के बाल सुधार गृहों और बाल देखभाल संस्थाओं में बच्चों की स्थिति पर स्वत: संज्ञान लिये गये मामले में यह आदेश पारित किया।

इससे पहले, न्यायालय ने इन बच्चों के संरक्षण के लिये राज्य सरकारों और दूसरे प्राधिकारियों को अनेक निर्देश दिये थे।

इस मामले की वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने महामारी के दौरान बाल देखभाल संस्थानों में रह रहे बच्चों, और माता-पिता तथा अभिभावकों को सौंपे गये बच्चों की संख्या के बारे में पीठ को अवगत कराया।

उन्होंने कहा कि बाल देखभाल संस्थानों की किशोर न्याय बोर्ड को सहायता करनी चाहिए और कोविड-19 के दिशा निर्देशों का पालन करते हुये छात्रों के लिये शिक्षक उपलब्ध कराने चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘ हम उच्चतम न्यायालय से यह निर्देश चाहते हैं कि उन्हें बाल देखभाल गृहों में शिक्षा की सुविधायें उपलब्ध करानी चाहिए ओर राज्य सरकार को इसके लिये बुनियादी संरचना और उपकरण मुहैया कराने चाहिए। ’’

अग्रवाल ने कहा कि इन बाल देखभाल संस्थाओं में पिछले पांच महीने में बच्चों की शिक्षा में हुयी प्रगति की जानकारी प्राप्त करने का काम शिक्षकों को सौंपा जाये।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि न्याय मित्र के सुझावों पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) कानून के एक प्रावधान का जिक्र करते हुये मेहता ने कहा, ‘‘हम बाल देखभाल गृहों के निरीक्षण की एक व्यवस्था बना रहे है। हम यह निर्देश चाहते हैं कि राज्य सरकारें इन देखभाल गृहों के निरीक्षण के काम में आयोग के साथ सहयोग करें।’’

इस पर पीठ ने मेहता से कहा, ‘‘बाल देखभाल गृहों में बच्चों के विकास और उनके कल्याण की गतिविधियों की निगरानी का काम आप क्यों नहीं करते? आप आयोग की ओर से राज्यों को निर्देश दे सकते हैं।’’

पीठ ने मेहता से सवाल किया, ‘‘आप क्या चाहते हैं? क्या हमें निर्देश देने चाहिए या आप उन्हें निर्देश देना चाहते हैं?’’

मेहता ने कहा कि शीर्ष अदालत से जारी निर्देशों का ज्यादा महत्व होगा और आयोग इन पर अमल सुनिश्चित करने के लिये उचित कदम उठायेगा।

पीठ ने कहा कि कानून का पालन सुनिश्चित करना बाल अधिकार आयोग का कर्तव्य है।

पीठ ने कहा, ‘‘हम न्याय मित्र के सुझाव स्वीकार करेंगे और निर्देश जारी करेंगे जिनका राज्यों के बाल देखभाल गृहों में पूरी ईमानदारी से पालन करना होगा।’’ पीठ ने कहा कि इन निर्देशों को राज्यों, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य आयोगों के माध्यम से लागू करना होगा।

Supreme Court
COVID-19
child care institutions in india

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?


बाकी खबरें

  • union budget
    नेसार अहमद
    केंद्रीय बजट: SDG लक्ष्यों में पिछड़ने के बावजूद वंचित समुदायों के लिए आवंटन में कोई वृद्धि नहीं
    03 Feb 2022
    कुछ क्षेत्रों में मामूली वृद्धि को छोड़कर, कुल मिलाकर, बजट में वंचित समुदायों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित योजनाओं और व्यापक (अम्ब्रेला) कार्यक्रमों के लिए आवंटन में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं की गई है…
  • NTPC
    ओंकार सिंह
    छात्रों-युवाओं का आक्रोश : पिछले तीन दशक के छलावे-भुलावे का उबाल
    03 Feb 2022
    इस साल के बजट में बेरोजगारी के हल के लिए किसी तरह की ठोस योजना नहीं।
  • Julian Assange
    अनीश आर एम
    ज़ोर पकड़ती  रिहाई की मांग के बीच जूलियन असांज नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित
    03 Feb 2022
    संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रत्यर्पण के ख़िलाफ़ लड़ते हुए एक ब्रिटिश जेल में 1,000 से ज़्यादा दिन बिता चुके विकिलीक्स के संस्थापक को तीसरी बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है।
  • Aaj Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    बजट का संदेश: सरकार को जनता की तनिक परवाह नहीं!
    03 Feb 2022
    केंद्रीय बजट की आर्थिकी पर काफी चर्चा हो रही है. लेकिन इस बजट की हैरतंगेज राजनीति अपने ढंग की अनोखी और अविश्वसनीय है! बजट देश की आम जनता के हितों को नज़रंदाज़ करता है. किसी लोकतंत्र में ऐसा कम देखा…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1.72 लाख से ज़्यादा नए मामले, 1,008 मरीज़ों की मौत
    03 Feb 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 18 लाख 3 हज़ार 318 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License