NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
ऑक्सीजन आपूर्ति को लेकर संघर्ष कर रहे राज्य, अदालत की केंद्र को फटकार
पीठ ने कहा, ‘‘हमारी चिंता केवल दिल्ली के लिए नहीं है। हम जानना चाहते हैं कि भारत में ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए केंद्र सरकार क्या कर रही है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर दिल्ली में ये हालात हैं तो निश्चित ही दूसरे राज्यों में भी ऐसे ही होंगे।’’
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Apr 2021
ऑक्सीजन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आज गुरुवार, 22 अप्रैल को जारी आंकड़ों के अनुसार देश में पहली बार 3 लाख से ज़्यादा यानी 3,14,835 नए मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा कोरोना से लगातार छठे दिन भी रिकॉर्ड 2,104 मरीज़ों की मौत हुई। हालांकि इसी बीच देश भर में कोरोना से पीड़ित 1,78,841 मरीज़ों को ठीक किया गया है। और एक्टिव मामलों में 1,33,890 मामलों की बढ़ोतरी हुई है। इस बीच देश के भयावह खतरे से जूझ रहा है। लगातार उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र और हरियाणा से ऑक्सीजन की कमी के मामले सामने आ रहे हैं। दिल्ली के कई अस्पतालों में कुछ घंटो की ही ऑक्सीजन बची है। इसको लेकर कल यानी बुधवार देर रात दिल्ली उच्च न्यायालय ने अर्जेन्ट सुनवाई की और इस विकट परिस्थिति के लिए केंद्र को जिम्मेदार माना और फटकार भी लगाई।

अदालत ने केंद्र को फटकारा, कहा- अस्पतालों को किसी भी हालत में तत्काल ऑक्सीजन पहुंचाई जाए

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र को निर्देश दिया कि कोविड-19 के गंभीर रोगियों का इलाज कर रहे राष्ट्रीय राजधानी के उन अस्पतालों को फौरन किसी भी तरीके से ऑक्सीजन मुहैया कराई जाए जो इस गैस की कमी से जूझ रहे हैं।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘केंद्र हालात की गंभीरता को क्यों नहीं समझ रहा? हम इस बात से स्तब्ध और निराश हैं कि अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म हो रही है लेकिन इस्पात संयंत्र चल रहे हैं।’’

उच्च न्यायालय ने कहा कि जब तक ऑक्सीजन का आयात नहीं होता तब तक अगर इस्पात और पेट्रोलियम जैसे उद्योग कम क्षमता के साथ काम करें तो कोई पहाड़ नहीं टूट पड़ेगा। लेकिन अस्पतालों को चिकित्सीय ऑक्सीजन नहीं मिली तो तबाही मच जाएगी।

अदालत ने कहा कि हम लोगों को ऑक्सीजन की कमी के कारण मरते हुए नहीं देख सकते।

उसने कहा कि आप ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए सभी संभावनाओं की तलाश नहीं कर रहे। भीख मांगें, उधार लें या चोरी करें।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने अवकाश के दिन इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह केंद्र सरकार के कंधों पर है और जरूरत पड़ी तो इस्पात और पेट्रोलियम समेत सभी उद्योगों की सारी ऑक्सीजन की आपूर्ति चिकित्सीय उपयोग के लिए की जा सकती है।’’

पीठ ने कहा, ‘‘इस्पात और पेट्रोकेमिकल उद्योग ऑक्सीजन की बहुत खपत करते हैं और वहां से ऑक्सीजन लेने से अस्पतालों की जरूरत पूरी हो सकती है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘जब टाटा अपने इस्पात संयंत्रों के लिए बनाई जा रही ऑक्सीजन को चिकित्सीय उपयोग के लिए दे सकते हैं तो दूसरे ऐसा क्यों नहीं कर सकते? यह लालच की हद है। जरा सी भी मानवता बची है या नहीं।’’

उच्च न्यायालय ने कहा कि वह ऑक्सीजन का उत्पादन करने वाले इस्पात संयंत्रों को परिचालन की अनुमति देने की केंद्र की नीति से खुश नहीं है।

उसने कहा कि केंद्र सरकार अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए तरीकों तथा संसाधनों पर विचार करेगी, चाहे विशेष कॉरिडोर बनाकर या फिर हवाई मार्ग से पहुंचाकर।

अदालत बालाजी मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर की याचिका पर सुनवाई कर रही है। यह संस्थान मैक्स नाम से अनेक अस्पतालों का संचालन करता है।

याचिका में कहा गया है कि अगर ऑक्सीजन की आपूर्ति तत्काल दुरुस्त नहीं की जाती है तो गंभीर और ऑक्सीजन सपोर्ट वाले मरीजों की जान खतरे में पड़ जाएगी।

पीठ ने कहा, ‘‘हम केंद्र को यह निर्देश देने के लिए बाध्य हैं कि इस आदेश का तत्काल पालन किया जाए और अस्पतालों को आपूर्ति के लिए इस्पात संयंत्रों की तथा जरूरत पड़ने पर पेट्रोलियम संयंत्रों की ऑक्सीजन ली जाए।’’

उसने कहा कि ऐसे उद्योगों को अस्पतालों में हालात सुधरने तक अपना उत्पादन रोकना होगा। अदालत ने उनसे कहा कि वे जिस ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं, उसे बढ़ाएं तथा दूसरे राज्यों को चिकित्सीय उपयोग के लिए केंद्र को दें।

अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल चेतन शर्मा के अनुरोध पर उच्च न्यायालय ने कुछ समय के अंतराल के बाद रात 9:20 बजे सुनवाई जारी रखने पर सहमति जताई।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारी चिंता केवल दिल्ली के लिए नहीं है। हम जानना चाहते हैं कि भारत में ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए केंद्र सरकार क्या कर रही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार क्या कर रही है। अगर दिल्ली में ये हालात हैं तो निश्चित ही दूसरे राज्यों में भी ऐसे ही होंगे।’’

देश में लगातार 43वें दिन मामलों में बढ़ोतरी से उपचाराधीन मरीजों की संख्या 22 लाख 91 हज़ार 428 हो गयी है जो कि संक्रमण के कुल मामलों का 14.38 फ़ीसदी है। राष्ट्रीय स्तर पर ठीक होने की दर भी घटकर 84.45 फ़ीसदी हो गया है ।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वी के पॉल ने संवाददाता सम्मेलन में राज्यों, अस्पतालों और कई नर्सिंग होम से अपील की कि ऑक्सीजन का समुचित उपयोग सुनिश्चित करें क्योंकि यह कोरोना वायरस संक्रमित रोगियों के लिए ‘जीवन रक्षक’ है।

केन्द्र ने कहा कि देश में 7,500 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन किया जा रहा है और 6,600 मीट्रिक टन ऑक्सीजन राज्यों को आवंटित किया जा रहा है। केन्द्र ने केन्द्र शासित प्रदेशों और राज्य सरकारों से महामारी द्वारा पेश की गईं चुनौतियों से निपटने के लिये साथ मिलकर काम करने के लिये कहा।

दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और महारष्ट्र के बीच ऑक्सीजन के वितरण को लेकर आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिल रहा है। ये सभी राज्य अपने कोटे की ऑक्सीजन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

दिल्ली में बुधवार को सर गंगाराम अस्पताल, सेंट स्टीफन अस्पताल, होली फैमिली अस्पताल जैसे कई अस्पतालों ने कहा कि उनके पास दो से पांच घंटे तक की ही ऑक्सीजन बची है। अन्य अस्पातल भी कुछ दिनों से स्टॉक की कमी से जूझ रहे हैं।

इस बीच, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को घोषणा की कि केंद्र ने दिल्ली का ऑक्सीजन कोटा बढ़ा दिया है।

केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘‘केंद्र सरकार ने दिल्ली का ऑक्सीजन का कोटा बढ़ा दिया है। हम इसके लिए केंद्र के बहुत आभारी हैं।’’

वहीं, उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार के एक अधिकारी ने फरीदाबाद के एक संयंत्र से दिल्ली के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति रोक दी।

हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने बुधवार को आरोप लगाया कि अस्पताल में भर्ती कोविड-19 के मरीजों के लिये ऑक्सीजन लेकर पानीपत से फरीदाबाद जा रहे एक टैंकर को दिल्ली सरकार द्वारा “लूट लिया गया” और कहा कि सभी ऑक्सीजन टैंकरों का आवागमन अब पुलिस सुरक्षा में होगा।

विज ने यह भी कहा कि कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ोतरी के कारण ऑक्सीजन की मांग बढ़ गई है, ऐसे में हरियाणा दूसरों को आपूर्ति तभी कर सकता है जब उसकी अपनी मांग पूरी हो जाए।

राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत ने देश में ऑक्‍सीजन व दवाओं की कमी से हो रही मौतों पर चिंता जताते हुए बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और उनसे अपील की कि वे बंगाल में चुनावी रैलियां करने बजाय देश में चिकित्‍सा व्‍यवस्‍था को ठीक करने पर ध्‍यान दें।

गहलोत ने ट्वीट किया, ‘‘भारत ऑक्सीजन, दवाई व टीका का दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक देशों में से है। फिर भी देश में ऑक्सीजन एवं दवाइयों की कमी से मौतें होना दुर्भाग्यपूर्ण है। दुनिया के अन्य देशों में कभी इसके कारण मौतें नहीं हुई हैं।’’

तमिलनाडु सरकार ने बुधवार को कहा कि वह शहर के एक संयंत्र से करीब 45 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन आंध्र प्रदेश और तेलंगाना भेजने के मुद्दे पर केन्द्र सरकरा से बात करेगी। साथ ही उसने यह भी बताया कि राज्य में ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।

राज्य के स्वास्थ्य सचिव ने पूछा कि केन्द्र सरकार को श्रीपेरुम्बदूर के निकट आपूर्तिकर्ता द्वारा तैयार की गई ऑक्सीजन को दूसरे स्थानों पर भेजने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान भी राज्य अन्य स्थानों पर भी ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कोविड-19 के मरीजों को दी जाने वाली रेमडेसिविर और फैबीफ्लू जैसी जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी रोकने के लिए एक विशेष टीम गठित कर छापामार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी ने टीम-11 की बैठक में रेमडेसिविर इंजेक्शन और फैबीफ्लू जैसी जीवनरक्षक मानी जा रही दवाओं की आपूर्ति की विस्तृत समीक्षा की।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ )

COVID-19
Coronavirus
oxygen cylinders
Lack of oxygen
medical oxygen
Oxygen shortage
BJP
Modi government
Delhi High court

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • indian freedom struggle
    आईसीएफ़
    'व्यापक आज़ादी का यह संघर्ष आज से ज़्यादा ज़रूरी कभी नहीं रहा'
    28 Jan 2022
    जानी-मानी इतिहासकार तनिका सरकार अपनी इस साक्षात्कार में उन राष्ट्रवादी नायकों की नियमित रूप से जय-जयकार किये जाने की जश्न को विडंबना बताती हैं, जो "औपनिवेशिक नीतियों की लगातार सार्वजनिक आलोचना" करते…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2.5 लाख नए मामले, 627 मरीज़ों की मौत
    28 Jan 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 6 लाख 22 हज़ार 709 हो गयी है।
  • Tata
    अमिताभ रॉय चौधरी
    एक कंगाल कंपनी की मालिक बनी है टाटा
    28 Jan 2022
    एयर इंडिया की पूर्ण बिक्री, सरकार की उदारीकरण की अपनी विफल नीतियों के कारण ही हुई है।
  • yogi adityanath
    अजय कुमार
    योगी सरकार का रिपोर्ट कार्ड: अर्थव्यवस्था की लुटिया डुबोने के पाँच साल और हिंदुत्व की ब्रांडिंग पर खर्चा करती सरकार
    28 Jan 2022
    आर्थिक मामलों के जानकार संतोष मेहरोत्रा कहते हैं कि साल 2012 से लेकर 2017 के बीच उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर हर साल तकरीबन 6 फ़ीसदी के आसपास थी। लेकिन साल 2017 से लेकर 2021 तक की कंपाउंड आर्थिक…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    रेलवे भर्ती: अध्यापकों पर FIR, समर्थन में उतरे छात्र!
    28 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License