NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पर्यावरण
विज्ञान
सऊदी अरब में मिले पत्थरों के ढांचे, पिरामिडों एवं स्टोनहेंज से पूर्व की कहानी को बयां करते हैं
अरबी में आयत (रिक्टैंगल) आकार के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ये शब्द मुस्तातिल नाम का ये ढांचा 7,000 वर्षों से भी अधिक पुराना है।
संदीपन तालुकदार
07 May 2021
सऊदी अरब में मिले पत्थरों के ढांचे, पिरामिडों एवं स्टोनहेंज से पूर्व की कहानी को बयां करते हैं
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक है। स्रोत: अरबन्यूज़।

उत्तर-पश्चिम सऊदी अरब में लगभग 1000 पत्थरों के ढांचों वाला एक विशाल स्थल मौजूद है, जो 7000 सालों से भी अधिक पहले के हैं। सऊदी अरब में पाए गए इन ढांचों से पता चलता है कि ये मिश्र के पिरामिडों और ब्रिटेन के स्टोनहेंज युग से भी पहले के हैं।

इन ढांचों को मुस्तातिल नाम दिया गया है जो कि अरबी में आयत आकार के लिए कहा जाता है। 1970 के दशक में मुस्तातिल ढांचों का पता लग गया था, लेकिन उस समय के शोधकर्ताओं ने इस पर कुछ ख़ास ध्यान नहीं दिया था। वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय, पर्थ के ह्यूग थॉमस और उनके दल ने इन ढांचों के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करना शुरू की और इन पर अब तक का सबसे बड़ा जांच किया।

इस दल ने उत्तर-पश्चिमी सऊदी अरब के उपर हेलीकॉप्टरों की मदद से उड़ान भरी, जिसके बाद जमीनी सर्वेक्षण का कार्य पूरा किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि 2,00,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में 1000 से भी अधिक की संख्या में मुस्तातिल ढांचे अपने अस्तित्व में हैं। इसकी विशालता के बारे में टिप्पणी करते हुए थॉमस का कहना था “इन ढांचों के पैमानों के बारे में आप तब तक पूरी तरह से अंदाजा नहीं लगा सकते, जब तक कि आप खुद वहां पर मौजूद नहीं होते।”

थॉमस के अनुसार मुस्तातिलों को बलुआ पत्थरों के ढेर से बनाया गया है। उनमें से कुछ का वजन तो 500 किलोग्राम से भी अधिक है और उनकी लंबाई 20 मीटर से लेकर 600 मीटर तक है। हालांकि इनकी दीवारें सिर्फ 1.2 मीटर ही ऊंची हैं। थॉमस के मुताबिक इन ढांचों का उपयोग उस स्थान का सीमांकन करने के लिए किया गया था। मुस्तातिलों के भीतर कुछ भी नहीं रखा जाता था।

शोधकर्ताओं ने लंबी दीवारों के आयताकार आंगन भी पाये, जहां केन्द्रीय प्रांगण के चारों ओर को दीवारों से घेरा गया था और एक तरफ विशिष्ट खुरदुरा मंच या उसके एक मस्तक वाले सिरे के उलटी तरफ प्रवेश द्वार बना हुआ था। कुछ प्रवेश मार्गों को पत्थरों की मदद से अवरुद्ध कर दिया गया था। इस बारे में शोधकर्ताओं का मत है कि इस प्रकार के अवरोध इस बात की ओर इशारा करते हैं कि प्रवेश मार्ग का इस्तेमाल करने के बाद इन्हें उपयोग के लिए बंद कर दिया गया होगा।

उनकी खुदाई में पता चला है कि एक मुस्तातिल में शिखर के केंद्र में एक कक्ष बना हुआ था, जिसमें जानवरों के सींग और खोपड़ियों के टुकड़े पड़े हुए थे। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि पशुओं के टुकड़ों को प्रसाद के रूप में भेंटस्वरुप पेश किया गया होगा। इससे पता चलता है कि रस्म-अदायगी के लिए मुस्तातिलों को इस्तेमाल में लाया जाता रहा होगा।

दल ने खोपड़ियों की रेडियोकार्बन डेटिंग परीक्षण को संचालित किया और पाया कि वे 5300 से लेकर 5000 ईसा पूर्व के हैं। यह वह समय रहा होगा जब मुस्तातिलों का निर्माण किया गया होगा। अगर यह सत्य है तो ये स्मारक विश्व में सबसे पूर्व में स्थापित किये गये विशाल पैमाने के अनुष्ठान परिदृश्य रहे होंगे। यह स्टोनहेंज युग से 2500 वर्ष पूर्व के हैं।

इन निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए शोध दल के सदस्यों में शामिल मेलिसा केनेडी, जो खुद भी वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध हैं, द्वारा इस बारे यह कहा गया था कि “यह इस समय इस क्षेत्र में धर्म के बारे में हमारी समझ को पूरी तरह से बदलकर रख देता है; दक्षिण की तरफ देखें तो धार्मिक समूह अपने घरों में केंद्रित थे, जिसमें परिवार छोटे पूजा घरों को प्रदर्शित करते दिख रहे थे, लेकिन प्राचीन सऊदी अरब में मुस्तातिलों के साथ इसका उल्टा हो रहा था।”

इस बात की भी संभावना है कि मुस्तातिलों के निर्माण और पर्यावरण के बीच में एक संबंध मौजूद है। इन ढांचों को होलोसीन ह्यूमिड चरण के दौरान निर्मित किया गया होगा। यह (8000-4000ईशा पूर्व) वह दौर है, जब अरब क्षेत्र के साथ-साथ अफ्रीका के कुछ हिस्से आदृता वाले थे। ये क्षेत्र जो अब रेगिस्तान बन चुके हैं, उस जमाने में घास के मैदान हुआ करते थे।

केनेडी के अनुसार उस समय सुखाड़ की स्थिति बनी रहती थी और इस बात की संभावना है कि उस दौर में मवेशी चराने का चलन था और जलवायु परिवर्तन से रक्षा के लिए इनमें से कुछ को ईश्वर को प्रसाद के रूप में इस्तेमाल में लाया जाता था।

दल ने यह भी पाया कि 2 से लेकर 19 के समूहों में मुस्तातिल थे, जो इस बात का इशारा करते हैं कि ये जन-समुदाय छोटे-छोटे समूहों में बंटे हुए थे।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Stone Structures Found in Saudi Arabia Predate Pyramids and Stonehenge

Mustatils
Arabian Stone Structure Predate Pyramids
Stonehenge
Pyramids
Archeology

Related Stories


बाकी खबरें

  • अजय कुमार
    दवाओं की महंगाई महंगे तेल की नहीं बल्कि बेकार सरकारी नीतियों का परिणाम है
    31 Mar 2022
    क्या दवाओं की क़ीमतें भी कच्चे तेल की क़ीमतों में इज़ाफ़े की वजह से बढ़ी हैं?
  • सुहा रफी
    आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक, 2022 के रहस्य को समझिये
    31 Mar 2022
    आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक, 2022, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नाम पर सूचीबद्ध है, लेकिन गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने सोमवार को इसे लोकसभा में पेश किया है।
  • भाषा
    महाराष्ट्र: फडणवीस के खिलाफ याचिकाएं दाखिल करने वाले वकील के आवास पर ईडी का छापा
    31 Mar 2022
    उके ने भाजपा नेताओं खासतौर पर फडणवीस के खिलाफ अदालतों में कई याचिकाएं दायर की हैं। उन्होंने अपनी एक अर्जी में फडणवीस के खिलाफ चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं करने के लिए,आपराधिक…
  • विजय विनीत
    यूपी बोर्डः पेपर लीक मामले में योगी सरकार के निशाने पर चौथा खंभा, अफ़सरों ने पत्रकारों के सिर पर फोड़ा ठीकरा
    31 Mar 2022
    "उत्तर प्रदेश में बार-बार पेपर लीक होने से ऐसा लगता है कि नकल माफ़िया सरकार की पकड़ और सख्ती से बाहर हैं। किन्तु इस प्रकार की गंभीर घटनाओं से प्रदेश की पूरे देश में होने वाली बदनामी के लिए असली…
  • लाल बहादुर सिंह
    नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें
    31 Mar 2022
    आज जब देश के छात्र-युवा जबरदस्त मानसिक दबाव और भविष्य की असुरक्षा का सामना कर रहे हैं तब चंद्रशेखर का जीवन और संघर्ष उनके लिए आशावाद और शक्ति का स्रोत हो सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License