NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
भारत बंद की बंगाल में ज़ोरदार तैयारी, क्या बदलेगा ममता का रवैया?
देश में भाजपा के ख़िलाफ़ सियासी एकजुटता का एक स्वरूप भी इस दिन देखने को मिलेगा। इस लिहाज से नज़रें खास तौर पर पश्चिम बंगाल पर होंगी कि क्या वहां तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम अपने बीच खाई को कुछ पाट पायेंगे? क्या ममता बनर्जी के वाम विरोधी रवैये में कुछ बदलाव आयेगा?
सरोजिनी बिष्ट
06 Jan 2020
cpm bengal

श्रम कानूनों में किये जा रहे मजदूर-विरोधी बदलावों के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और राष्ट्रीय फेडरेशनों के संयुक्त मंच ने आठ जनवरी को 'भारत बंद' का आह्वान किया है। इस आम हड़ताल से केवल भाजपा-आरएसएस से जुड़ा केंद्रीय श्रमिक संगठन, भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ही अलग है। मजदूरों के साथ कंधा से कंधा मिलाते हुए अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले देश के 250 से ज्यादा किसान संगठन भी भारत बंद कराने उतरेंगे। किसानों-मजदूरों के साथ एकजुटता दिखाते हुए वामपंथी दलों और उनसे जुड़े छात्र, युवा व महिला संगठनों के लोग भी बड़ी संख्या में उस दिन सड़कों पर उतरने की तैयारी में जुटे हैं। हालांकि जिस समय इस आंदोलन की रणनीति बनी थी तब इसके केंद्र में मुख्य रूप से केंद्र सरकार की मजदूर व किसान विरोधी नीतियां थीं।

लेकिन इसी बीच सीएए और एनआरसी का मुद्दा आ गया। इसका विरोध करने पर जामिया मिल्लिया, एएमयू से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में बर्बर पुलिसिया दमन सामने आया। इससे पहले फीस वृद्धि का विरोध कर रहे विद्यार्थी भी पुलिस अत्याचार के शिकार बने। और रविवार, 5 जनवरी को जेएनयू में नकाबपोश गुंडों का हमला भी इसमें शामिल हो गया है। अब ये सभी मुद्दे आठ जनवरी के आंदोलन का हिस्सा हैं। देश में भाजपा के ख़िलाफ़ सियासी एकजुटता का एक स्वरूप भी इस दिन देखने को मिलेगा। इस लिहाज से नज़रें खास तौर पर पश्चिम बंगाल पर होंगी कि क्या वहां तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम अपने बीच खाई को कुछ पाट पायेंगे? क्या ममता बनर्जी के वाम विरोधी रवैये में कुछ बदलाव आयेगा?

बंगाल में जब से ममता सरकार आयी है उसने हमेशा ही वाम दलों के आंदोलनों को अटकाने की कोशिश की है। मजदूरों-किसानों के सवाल पर जब-जब भारत बंद बुलाया गया उसे विफल करने के लिए ममता ने एड़ी से चोटी का जोर लगा दिया। सरकारी मशीनरी के साथ-साथ तृणमूल के नेता-कार्यकर्ता भी सड़कों पर उतरकर बंद को विफल कराते दिखते थे लेकिन अब सियासी हालात बदले हुए हैं। राज्य की तृणमूल सरकार के लिए भाजपा बड़ी चुनौती बन गयी है। इसके अलावा, सीएए-एनआरसी के सवाल पर भाजपा विरोधी जनता की हमदर्दी फिर से सीपीएम और अन्य वाम दलों की ओर बढ़ी है।

ऐसे में, भाजपा-विरोधियों को अपने पक्ष में गोलबंद करने के लिए ममता बनर्जी पूरे दम-खम के साथ सीएए और एनआरसी के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई खुद सड़क पर उतरकर कर रही हैं। बंगाल के इस छोर से लेकर उस छोर तक, विभिन्न शहरों में वह सीएए और एनआरसी के खिलाफ एक के बाद एक पदयात्रा निकाल रही हैं। अब आठ जनवरी को वाम दल व संगठन इसी मुद्दे पर बंगाल में बंद कराने उतरेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस पर है कि क्या ममता मौजूदा सियासी हालात में इस बंद पर अपना रुख कुछ नरम करेंगी?

हालांकि, अतीत के अनुभवों को देखते हुए वाम खेमे ने इस बार पूरी ताकत से तैयारी की है। सीपीएम के बंगाल राज्य सचिव सूर्यकांत मिश्र ने चुनौती देने के अंदाज में कहा है कि वे लोग शांतिपूर्ण ढंग से आम हड़ताल करेंगे, लेकिन अगर जोर-जबरदस्ती से हड़ताल तोड़ने की कोशिश की गयी तो आंख से आंख मिलाकर लड़ाई होगी। दिलचस्प है कि राज्य सरकार की ओर से इसका उतना कड़ा जवाब नहीं आया है। ममत सरकार के मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा है कि वह हड़ताल के मुद्दे के समर्थन में हैं, लेकिन बंद की संस्कृति के खिलाफ हैं। बंद को वाम, कांग्रेस समेत देश के 20 राजनीतिक दलों का समर्थन है। ऐसे में तृणमूल शायद बंद के पूरी तरह खिलाफ खड़ा नहीं दिखना चाहती।

फिलहाल, बंद के लिए समर्थन जुटाने में वाम खेमा दिन-रात एक किये हुए है। 12 फरवरी को सीपीएम का युवा संगठन डीवाइएफआइ दिल्ली के जंतर-मंतर में धरना-प्रदर्शन करेगा, जिसके माध्यम से एनआरसी की जगह 'एनआरबी' (नेशनल रजिस्टर ऑफ बेरोजगार) तैयार करने की मांग की जायेगी। युवाओं को दिल्ली चलने से पहले आठ जनवरी को अपने-अपने इलाके में बंद में उतरने को कहा जा रहा है। इस भारत बंद का महत्व समझाने के लिए वाम युवा संगठनों की ओर से सियालदह जैसे बड़े रेलवे स्टेशनों पर सवाल-जवाब कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। वाम छात्र संगठन कॉलेजों व अन्य स्थानों पर जागरूकता के लिए पोस्टर प्रदर्शनी लगा रहे हैं।

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें सीपीएम की एनआरसी-विरोधी सभा में एक स्थानीय तृणमूल नेता प्रबीर गराई भाषण दे रहे हैं और लाल को अपना सबसे प्रिय रंग, संघर्ष का रंग बता रहे हैं। मामला बांकुड़ा जिले के बिष्णुपुर के कोतुलपुर का है। इस घटना को स्थानीय स्तर पर तृणमूल और सीपीएम के बीच दरार कम होने के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। इस बारे में उपरोक्त तृणमूल नेता का कहना है, ''इस मुद्दे पर हमारी तरह सीपीएम भी विरोध कर रही है। ऐसे में उसकी सभा में जाने में क्या हर्ज है? अगर पार्टी को लगता है कि मैंने कुछ गलत किया है तो उसको जो करना है करे।''

एक तरफ राज्य में सीएए-एनआरसी के खिलाफ आंदोलन हो रहा है, जबकि भाजपा समर्थन में आंदोलन कर रही है। इन सबके बीच आम जनता खासकर मुसलिम समुदाय के बीच अपनी नागरिकता को लेकर भय बना हुआ है। सबसे ज्यादा मारामारी सरकारी दस्तावेजों में नाम व अन्य तथ्य ठीक कराने की देखी जा रही है। लोगों में बेचैनी की इंतहा समझने के लिए नदिया जिले का तेहट्टा सब-डिवीजन एक उदाहरण है। बीती दो जनवरी को वहां के भारतीय स्टेट बैंक के 'आधार' केंद्र में संशोधन के लिए आवेदन को लगभग 10-11 हजार लोगों की भीड़ देखी गयी। एक जनवरी की रात से ही लोग लाइनों में लगने लगे थे। किसी तरह लोगों को उनकी बारी के लिए कूपन बांटकर लौटाया गया। इतनी बड़ी संख्या अविश्वसनीय लगती है पर सच है, और एनआरसी के डर से मची अफरा-तफरी को बयान करती है। इन हालात में आठ जनवरी को भारत बंद में आम जनता की व्यापक भागीदारी दिखने की उम्मीद है।

(सरोजिनी बिष्ट स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

West Bengal
Bharat Bandh
Jan 8 Strike
TMC
CPM
mamta banerjee
BJP
Narendra modi
Amit Shah
trade unions
NRC
CAA
भारत बंद

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दक्षिण अफ्रीका में सिबन्ये स्टिलवाटर्स की सोने की खदानों में श्रमिक 70 दिनों से अधिक समय से हड़ताल पर हैं 

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • Air India sold to Tata
    वी श्रीधर
    एयर इंडिया: परिवार की चांदी को बट्टे-खाते के भाव बेचा
    16 Oct 2021
    एयर इंडिया को टाटा द्वारा अधिग्रहण करने से भारतीय विमानन बाजार में एक कुलीन वर्ग के पैदा होने का खतरा बढ़ गया है। एयर इंडिया की बिक्री के लिए उसके बढ़ते भारी नुकसान को उचित ठहराया जा रहा है, जबकि…
  • UP
    विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्टः आजमगढ़ में दलित बच्ची से रेप की घटना को दबाने में लगा पुलिसिया सिस्टम, न्याय के लिए भटकता परिवार 
    16 Oct 2021
    रेप और हत्या की शिकार बच्ची की मां कहती हैं, "रौनापार के थानेदार ने हमें बुलवाया और कहा- जो होना था हो गया। तुम लोग अपनी जुबान बंद रखो। पुलिस के साथ मिलकर रहो। पैसा दिलवा देंगे। ग्राम प्रधान से भी…
  • lakhimpur
    लाल बहादुर सिंह
    लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड, योगी-मोदी सरकार के लिए भारी पड़ सकता है
    16 Oct 2021
    किसानों को भाजपाई मंत्री की गाड़ी से कुचले जाने का जो वीडियो वायरल हुआ है, उसने हर संवेदनशील इंसान को, जिसने भी उसे देखा, वह चाहे जिस जाति-धर्म या दल का समर्थक हो, उसे हिला कर रख दिया है। वह दृश्य…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 15,981 नए मामले, 166 मरीज़ों की मौत
    16 Oct 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.59 फ़ीसदी यानी 2 लाख 1 हज़ार 632 हो गयी है।
  • mandala
    रूबी सरकार
    बार-बार विस्थापन से मानसिक, भावनात्मक व शारीरिक रूप से टूट रहे आदिवासी
    16 Oct 2021
    "जल, जंगल, जमीन ही हमारी सम्पत्ति है। सरकार हमें विस्थापित कर हमारी संस्कृति को ही खत्म कर देना चाहती है। यह तो आदिवासियों के साथ अन्याय है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License