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सूंघने, स्वाद लेने की शक्ति अचानक ख़त्म होने को कोविड-19 की जांच में शामिल करने पर विचार
वैज्ञानिक कोरोना वायरस से निपटने के लिए क्षय रोग, पोलियो टीकों और प्लाज्मा की उपयोगिता पर भी अध्ययन कर रहे हैं
एपी/भाषा
12 Jun 2020
कोरोना वायरस
Image courtesy: The New York Times

विभिन्न अध्ययनों की समीक्षा के आधार पर वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कोविड-19 से पूरी तंत्रिका तंत्र को खतरा है। इधर भारत में सरकार सूंघने या स्वाद लेने की क्षमता अचानक चली जाने को कोविड-19 की जांच में एक मानदंड के तौर पर शामिल करने पर विचार कर रही है।
इसके अलावा वैज्ञानिक कोरोना वायरस से निपटने के लिए क्षय रोग, पोलियो टीकों और प्लाज्मा की उपयोगिता पर भी अध्ययन कर रहे हैं

नयी दिल्ली से ख़बर है कि सरकार सूंघने या स्वाद लेने की क्षमता अचानक चली जाने को कोविड-19 की जांच में एक मानदंड के तौर पर शामिल करने पर विचार कर रही है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी । भारत में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और यह तीन लाख के करीब पहुंचने वाले हैं।

पिछले रविवार कोविड-19 पर हुई राष्ट्रीय कार्य बल की बैठक में इस विषय पर चर्चा की गई थी लेकिन इस पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी।

स्वास्थ्य मंत्रालय में एक सूत्र ने कहा, “बैठक में कुछ सदस्यों ने कोविड-19 की जांच में सूंघने या स्वाद ले पाने की शक्ति चले जाने को एक कसौटी के तौर पर शामिल करने का यह कहते हुए सुझाव दिया था कि कई मरीजों में इस तरह के लक्षण देखने को मिल रहे हैं।”

एक विशेषज्ञ के अनुसार, भले ही यह लक्षण विशिष्ट तौर पर कोविड-19 से जुड़े हुए नहीं हैं क्योंकि फ्लू या इंफ्लुएंजा में भी व्यक्ति की सूंघने या स्वाद ले पाने की क्षमता चली जाती है लेकिन यह बीमारी के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं और जल्द पता लगाने से जल्दी इलाज में मददगार हो सकते हैं।

अमेरिका के राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य संस्थान, रोग नियंत्रण एवं बचाव केंद्र (सीडीसी) ने मई की शुरुआत में कोविड-19 के नये लक्षणों में “सूंघने या स्वाद ले पाने की शक्ति खो जाने” को शामिल किया था।

कोविड-19 के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की 18 मई को जारी संशोधित जांच रणनीति के मुताबिक, इंफ्लुएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई) के लक्षणों के साथ अन्य राज्यों से लौटने वालों और प्रवासियों की ऐसे लक्षण नजर आने के बाद सात दिन के अंदर-अंदर जांच करनी होगी।

आईसीएमआर ने कहा था कि अस्पताल में भर्ती मरीजों और कोविड-19 की रोकथाम के लिए अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों में आईएलआई जैसे लक्षण विकसित होने पर उनकी भी आरटी-पीसीआर जांच के जरिए कोविड-19 की जांच होगी। साथ ही इसने कहा कि किसी भी संक्रमित मरीज के संपर्क में आने वाले ऐसे लोग जिनमें लक्षण नजर नहीं आते और उच्च जोखिम वाले लोगों के संपर्क में आने के बाद पांच से 10 दिन के भीतर एक बार जांच करानी ही होगी।

कोविड-19 से मरीज के पूरे तंत्रिका तंत्र को खतरा : अध्ययन

वाशिंगटन, 12 जून (भाषा) विभिन्न अध्ययनों की समीक्षा के आधार पर वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कोविड-19 से पूरी तंत्रिका तंत्र को खतरा है।

वैज्ञानिकों ने कहा कि इस जानकारी से सिरदर्द, मिर्गी और स्ट्रोक जैसे तंत्रिका तंत्र में विकार के लक्षणों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा।

जर्नल ‘एन्नल्स ऑफ न्यूरोलॉजी’ में प्रकाशित शोधपत्र के मुताबिक अस्पताल में भर्ती करीब 50 फीसद कोविड-19 मरीजों को सिरदर्द, चक्कर आना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, चौकसी में कमी, सूंघने और स्वाद का अनुभव नहीं होना, स्ट्रोक, कमजोरी और मांसपेशियों में दर्द जैसे तंत्रिका तंत्र में विकार के लक्षणों का सामना कर पड़ रहा है।

अमेरिका स्थित नार्थवेस्टर्न यूनवर्सिटी के प्रमुख अनुसंधानकर्ता इगोर कोरलनिक ने कहा, ‘‘यह आम लोगों और चिकित्सकों के लिए जानना जरूरी है कि कोविड-19 के संक्रमण का संकेत बुखार, खांसी और सांस संबंधी परेशानियों के लक्षण आने से पहले तंत्रिका तंत्र में विकार के रूप में सामने आते हैं। ’’

विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने कोविड-19 के मरीजों में तंत्रिका तंत्र की विभिन्न संभावित विकार, इन विकारों का कैसे इलाज किया जाए और संक्रमण की प्रक्रिया की जानकारी दी।

कोरलनिक का विश्वास है कि इस समझ से कोविड-19 मरीजों का बेहतर इलाज संभव होगा।

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस कई तरीके से तंत्रिका तंत्र में विकार उत्पन्न कर सकता है।

अध्ययन के मुताबिक बीमारी से दिमाग, मेरुदंड और मांसपेशियां सहित पूरी तंत्रिका तंत्र प्रभावित हो सकती है।

अनुसंधानकर्ताओं ने रेखांकित किया कि संक्रमित के दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है या खून का थक्का जम सकता है। इससे अंतत: मस्तिष्काघात का खतरा है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा वायरस दिमाग, मस्तिष्का आवरण को संक्रमित कर सकता है जैसे तंत्रिका तंत्र के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वाले ऊत्तकों को, सेरोब्रोस्पाइनल फ्ल्यूड (सीएसएफ) को जो मस्तिष्क को किसी झटके से बचाता है।

वैज्ञानिकों ने कहा कि वायरस प्रतिरोधक क्षमता से प्रतिक्रिया कर सकता है जिससे दिमाग में सूजन हो सकती और इससे दिमाग और नसों को नुकसान पहुंच सकता है।

हालांकि, कोविड-19 का तंत्रिका तंत्र पर पड़ने वाले असर की जानकारी सीमित है, इसलिए वैज्ञानिकों की योजना कुछ संक्रमितों की लंबे समय तक निगरानी करने की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि तंत्रिका तंत्र पर पड़ने वाला असर स्थायी है या अस्थायी।

वैज्ञानिकों ने कहा कि वायरस की वजह से दिमाग में सूजन और सीएसएफ में भी प्रतिरोधी कोशिकाओं की प्रतिक्रिया को सतर्कता से अध्ययन करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही संक्रमण की वजह से जान गंवा चुके मरीजों का पोस्टमॉर्टम कर तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियों के ऊतकों पर पड़ने वाले असर की तुरंत अध्ययन करने की जरूरत है ताकि कोविड-19 से तंत्रिका तंत्र पर पड़ने वाले असर को समझा जा सके।

उन्होंने कहा कि इस तरह के अध्ययन से कोविड-19 के तंत्रिका तंत्र संबंधी लक्षण का पता लगाने, प्रबंधन करने और इलाज करने के लिए आधार मुहैया कराएगा।

क्या स्वस्थ लोगों के प्लाज्मा से कोरोना वायरस थम सकता है? वैज्ञानिक करेंगे अध्ययन

वाशिंगटन : कोविड-19 से स्वस्थ हुए कई लोग कोरोना वायरस के अन्य रोगियों को ठीक करने में मदद के लिए अपने रक्त प्लाज्मा को दान करने की पेशकश कर रहे हैं। हालांकि इस बारे में अभी प्रामाणिक परिणाम भी नहीं आए हैं।

वैज्ञानिक अब इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या प्लाज्मा दान से किसी व्यक्ति में पहले ही संक्रमण की रोकथाम हो सकती है?

दुनियाभर के अस्पतालों में हजारों कोरोना वायरस रोगियों का इलाज स्वस्थ मरीजों के प्लाज्मा से करने का दावा किया गया है जिनमें अमेरिका में 20 हजार से अधिक लोग शामिल हैं। हालांकि इस बारे में अभी बहुत ज्यादा प्रमाण नहीं मिले हैं।

चीन में हाल ही में हुए एक अध्ययन में इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली वहीं न्यूयॉर्क में हुए एक अन्य अध्ययन में लाभ का संकेत मिला।

जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के डॉ. शमुअल शोहम ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद की किरण मिली है।’’

प्लाज्मा उपचार को लेकर कई तरह के अध्ययन चल रहे हैं, इस बीच शोहम ने एक राष्ट्रीय स्तर का अध्ययन शुरू किया है जिसमें पता लगाया जा रहा है कि क्या अत्यधिक जोखिम में रहने के तत्काल बाद स्वस्थ हुए लोगों के प्लाज्मा से सामने वाले व्यक्ति में पहले ही बीमारी की आशंका की रोकथाम हो सकती है।

हॉपकिन्स एवं 15 अन्य संस्थानों के अनुसंधानकर्ता स्वास्थ्य कर्मियों, बीमार लोगों के जीवनसाथियों और नर्सिंग होम के लोगों को अध्ययन में शामिल करेंगे।

इस अध्ययन में 150 कार्यकर्ताओं को बिना किसी क्रम के कोविड-19 से स्वस्थ हुए लोगों का प्लाज्मा और सामान्य लोगों का प्लाज्मा लेने के लिए शामिल किया जाएगा।

इसके बाद वैज्ञानिक इस पहल का अध्ययन करेंगे कि प्लाज्मा देने के बाद क्या व्यक्ति में पहले ही संक्रमण की आशंका समाप्त हो सकती है।

कोरोना वायरस से निपटने के लिए क्षय रोग, पोलियो टीकों की उपयोगिता पर अध्ययन कर रहे हैं वैज्ञानिक: रिपोर्ट

वाशिंगटन: अमेरिका के अनुसंधानकर्ता घातक कोरोना वायरस से बचाव के लिए क्षय रोग और पोलियो टीकों के इस्तेमाल की संभावना के संबंध में अध्ययन कर रहे हैं।

‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ समाचार पत्र ने बृहस्पतिवार को बताया कि इस बात का पता लगाने के लिए परीक्षण किए जा रहे हैं कि क्या क्षय रोग का टीका कोरोना वायरस के प्रभाव की गति धीमी कर सकता है या नहीं।

समाचार पत्र ने ‘टेक्सास ए एंड एम हेल्थ साइंस सेंटर’ में रोग प्रतिरोधी क्षमता विज्ञान के प्रोफेसर जेफ्री डी सिरिलो के हवाले से कहा, ‘‘विश्व में यही एकमात्र टीका है जो कोरोना वायरस से निपटने लिए के फिलहाल इस्तेमाल किया जा सकता है।’’

‘जॉन हॉप्किन्स कोरोना वायरस रिसोर्स सेंटर’ के अनुसार इस संक्रमण से दुनियाभर में 75,00,000 लोग संक्रमित हो चुके हैं और 4,20,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका में दुनिया में सर्वाधिक 20 लाख 20 हजार से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं जिनमें से 1,13,000 लोगों की मौत हो चुकी है।

दुनियाभर के वैज्ञानिक इस बीमारी के उपचार के लिए टीका या दवाइयां तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।

डॉ. सिरिलो बीसीजी के नाम से प्रचलित क्षय रोग के टीके संबंधी परीक्षण का नेतृत्व कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बीसीजी को खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने पहले ही मंजूरी दी है और उसके सुरक्षित इस्तेमाल का पुराना रिकॉर्ड रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों के एक समूह ने कोविड-19 के असर को धीमा करने के लिए पोलियो के टीके का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा है।

समूह ने कहा कि करोड़ों लोगों ने टीबी और पोलियो से बचाव के टीकों का इस्तेमाल किया है और ये कोरोना वायरस से लड़ने में मददगार हो सकते हैं।

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