NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
यूपी : गन्ना किसानों का सरकार पर हल्लाबोल, पूछा- कहां हैं अच्छे दिन?
प्रदेश के गन्ना किसान तमाम समस्याओं से ग्रस्त हैं और सरकार लगातार इसकी अनदेखी कर रही है। किसान संगठनों का कहना है कि जब तक गन्ना किसानों को उनका हक़ नहीं मिल जाता तब तक यह आंदोलन क्रमवार चलता रहेगा।
सोनिया यादव
11 Dec 2019
यूपी किसान

किसान और मज़दूर हितैषी होने का दावा करने वाली बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार फ़िलहाल उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानोंं के विरोध प्रदर्शन का कारण बनी हुई है। प्रदेश सरकार द्वारा गन्ने का समर्थन मूल्य ना बढ़ाए जाने से नाराज़ किसानों ने 11 दिसंबर मंगलवार सुबह, क़रीब 4 बजे लखनऊ विधानसभा का घेराव करने की कोशिश की, साथ ही प्रदेश भर में चक्का जाम भी किया। इस दौरान पुलिस ने किसानों पर पानी की बौछार की और कई किसानों को हिरासत में भी लिया है।

इस संबंँध में भारतीय किसान यूनियन के नेता चौधरी धर्मवीर ने न्यूज़क्लिक को बताया, "सरकार हमारी मांगों को लगातार नज़रअंदाज़ कर रही है। इसलिए आज सुबह हम सरकार को जगाने के लिए विधानसभा के घेराव की मंशा से लखनऊ पहुंचे लेकिन प्रशासन ने पहले ही बैरिकेडिंग करके सड़कें बंद कर दी थी। पुलिस ने हमें पहले ही रोक कर हमारे कई साथियों को हिरासत में ले लिया है, लेकिन हम रुकने वाले नहीं हैं।"

farmers_1576031033_618x347.jpeg

बता दें कि इससे पहले 14 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बयान में कहा था, "सरकार किसानों के गन्ना बक़ाया की पाई-पाई का भुगतान करेगी। ज़रूरत पड़ी तो बकायेदार मिलों को नीलाम तक किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा था कि अगर किसी चीनी मिल ने ग़लतफ़हमी पाली होगी कि किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान रोक कर स्वयं कमाई कर लेगा, तो ऐसा नहीं होगा। गन्ना किसान बेफ़िक्र रहें।"

हालांकि मुख्यमंत्री के बयान के बाद 7 दिसंबर, शनिवार रात राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2019-20 के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) घोषित किया गया। पिछले साल की तरह ही इस साल भी अगैती प्रजाति के लिए 325, सामान्य प्रजाति के लिए 315 और अनुपयुक्त प्रजाति के लिए 310 रुपए प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य निर्धारित किया गया है। जबकि गन्ना किसानों की मांग है कि ये राशी 400 से 450 के बीच निर्धारित की जाए।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने मीडिया को बताया, "यह सरकार किसान विरोधी है। पिछले तीन वर्षों से गन्ना उत्पादन लागत में काफ़ी वृद्धि हुई है। शाहजहांपुर शुगर केन इंस्टीट्यूट ने भी उत्पादन लागत 300 प्रति क्विंटल की है। लेकिन सरकार द्वारा इस वर्ष भी कोई वृद्धि न करके किसान हितों पर कड़ा प्रहार किया है। ये किसानों को आत्महत्या के राह पर ले जाने जैसा है।"

उन्होंने आगे कहा कि शुगर मिल मालिकों को संरक्षित करने के लिए सरकार किसानों का गला घोंट रही है। पिछले तीन वर्षों में गन्ने की रिकवरी साढे आठ फ़ीसदी से बढ़कर 11.30 प्रतिशत तक हुई है, जिसका सारा लाभ मिल मालिकों को मिल रहा है। किसान ने अपने प्रयास से रिकवरी में वृद्धि की है, जिसका लाभ किसान को मिलना चाहिए था, लेकिन इसका लाभ भी सरकार द्वारा पूंजीपतियों को दिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में गन्ना समर्थन मूल्य बड़ा मुद्दा बनने की राह पर है। सरकार द्वारा लगातार दूसरे साल भी गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी न किए जाने पर नाराज़ किसानों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की बात कही है।

lko-10.jpg

गन्ना किसानों का कहना है, "सरकार अपनी बात पर क़ायम नहीं है और सिर्फ़ विकास का दावा झूठा दावा कर रही है। हमारी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है, मिल मालिकों की जेब भर रही है। हमें फसल लागत का सही मूल्य तक नहीं मिल पा रहा, ऐसा में कहां हैं सरकार के अच्छे दिन?

मुज़फ़्फ़रनगर के किसान रामलाल ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा, "हमने मंगलवार को भी गन्ने की होली जलाई थी। सरकार गन्ने के रेट में कोई बढ़ोत्तरी नहीं कर रही। हम किसान क़र्ज़दार बनते जा रहे हैं। हमें खेती की उत्पादन लागत भी नहीं मिल रही है। ऐसे में अगर हमें फसल का सही दाम ही नहीं मिलेगा तो हम क्या करेंगे, क्या खाएंगे और कैसे परिवार चलाएंगे?"

पूर्वांचल के रसड़ा से प्रदर्शन में शामिल किसान देवराज मौर्य ने बताया, "सरकार पशुओं से फसलों को बचाने के लिए कोई क़दम नहीं उठा रही है। शुगर मिल मालिकों को सरकार फ़ायदा पहुंचा कर हम किसानों का गला घोंट रही है। क्या पिछले दो सालों में कोई मंहगाई नहीं बढ़ी, क्या सरकार हमारी समस्याओं को देख नहीं रही?"

बता दें कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी गन्ना किसानों के मुद्दे पर राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए प्रदेश की योगी सरकार को किसान विरोधी क़रार दिया है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट कर कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने के रेट में भी किसान की नहीं सुनी। किसान संगठन गन्ने के लिए चार सौ रुपए प्रति क्विंटल की मांग कर रहे थे। यूपी सरकार ने पिछले साल से एक भी रुपया नहीं बढ़ाया। किसानों का गन्ने का हज़ारों करोड़ भुगतान बक़ाया है। भाजपा सरकार पूरी तरह से किसान विरोधी है।

470287-kisan.jpg

उधर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने मीडिया को बताया कि कांग्रेस गन्ना किसानों की मांग को सड़क से लेकर सदन तक में लड़ेगी। सरकार के इस निर्णय के ख़िलाफ़ जल्द ही रणनीति बनाकर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पूंजीपतियों से सांठगांठ कर अपना स्वार्थ पूरा कर रही है। इससे स्पष्ट है कि सरकार किसान विरोधी है।

ग़ौरतलब है कि प्रदेश के गन्ना किसान तमाम समस्याओं से ग्रस्त हैं और सरकार लगातार इसकी अनदेखी कर रही है। किसान संगठनों का कहना है कि जब तक गन्ना किसानों को उनका हक़ नहीं मिल जाता तब तक यह आंदोलन क्रमवार चलता रहेगा।

Uttar pradesh
Yogi Adityanath
farmers protest
sugercane production
MSP for farmers
Lucknow
UP police
UP Government
State policy of agriculture
agricultural crisis

Related Stories

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

अनुदेशकों के साथ दोहरा व्यवहार क्यों? 17 हज़ार तनख़्वाह, मिलते हैं सिर्फ़ 7000...

लखनऊ: देशभर में मुस्लिमों पर बढ़ती हिंसा के ख़िलाफ़ नागरिक समाज का प्रदर्शन

महानगरों में बढ़ती ईंधन की क़ीमतों के ख़िलाफ़ ऑटो और कैब चालक दूसरे दिन भी हड़ताल पर


बाकी खबरें

  • इज़रायल और क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग गठित
    पीपल्स डिस्पैच
    इज़रायल और क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में मानवाधिकारों के उल्लंघन की जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग गठित
    23 Jul 2021
    तीन सदस्यीय जांच आयोग का नेतृत्व नवी पिल्ले करेंगे जो 2008-2014 के बीच यूएनएचआरसी के प्रमुख थे।
  • 400 से अधिक पूर्व राष्ट्राध्यक्षों, बुद्धिजीवियों की अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन से क्यूबा पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग
    पीपल्स डिस्पैच
    400 से अधिक पूर्व राष्ट्राध्यक्षों, बुद्धिजीवियों की अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन से क्यूबा पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग
    23 Jul 2021
    400 से अधिक हस्तियों द्वारा हस्ताक्षरित एक खुला पत्र अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान क्यूबा पर लगाए गए 243 एकतरफ़ा प्रतिबंधों को हटाने की मांग करता है जिसने इस द्वीप…
  • अध्ययन के मुताबिक भारत में कोरोनावायरस की दूसरी लहर ‘विभाजन के बाद की सबसे भयावह त्रासदी’, सरकार ने किया आंकड़े से इंकार
    दित्सा भट्टाचार्य
    अध्ययन के मुताबिक भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर ‘विभाजन के बाद सबसे बड़ी त्रासदी’, सरकार का आंकड़े से इंकार
    23 Jul 2021
    रिपोर्ट में कहा गया है, “वास्तविक मौतों का आंकड़ा कई लाखों में होने का अनुमान है, न कि कुछ लाख में, जो इसे यकीनन विभाजन और स्वतंत्रता के बाद से भारत की सबसे भयावह मानवीय त्रासदी बना देता है।” 
  • अयोध्या में बीएसपी के कार्यक्रम का पोस्टर। बीएसपी नेता सतीश चंद्र मिश्रा के ट्विटर हैंडल से साभार
    असद रिज़वी
    दलित+ब्राह्मण: क्या 2007 दोहरा पाएगी बीएसपी?
    23 Jul 2021
    पार्टी अपने 2007 के सोशल इंजीनियरिंग के प्रयोग को दोहराने की कोशिश कर रही है, लेकिन ये इस बार इतना आसान नहीं होगा। एक विश्लेषण...
  • ज़मीन और आजीविका बचाने के लिए ग्रामीणों का विरोध, गुजरात सरकार वलसाड में बंदरगाह बनाने पर आमादा
    दमयन्ती धर
    ज़मीन और आजीविका बचाने के लिए ग्रामीणों का विरोध, गुजरात सरकार वलसाड में बंदरगाह बनाने पर आमादा
    23 Jul 2021
    वलसाड में उमरागाम तालुक के स्थानीय लोग प्रस्तावित बंदरगाह के निर्माण का विरोध 1997 से ही करते आ रहे हैं, जब पहली बार इसकी घोषणा की गई थी। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License