NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गुजरात : सरदार पटेल की प्रतिमा के पास बने कार्यवाहक सेतु के धँसने से गाँव वालों का मुख्य मार्ग से टूटा नाता
तीन गांव, जो बेहद अविकसित हैं और न ही वहाँ कोई आधारभूत स्वास्थ्य सुविधा हैं, ये गाँव 3000 करोड़ रुपये की लागत से बनी “स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी” से लगभग 6 से 8 किलोमीटर की दूरी पर है। मानसून आने से पहले हर साल, ज़िला प्रशासन ग्रामीणों से कहता था कि पुल के डूबने से पहले गर्भवती महिलाओं को तालुका अस्पताल में दाख़िल करा दें।
दमयन्ती धर
25 Aug 2020
Translated by महेश कुमार
गुजरात

गुजरात के नर्मदा के डेडियापारा तालुका में मथासर गाँव की एक गर्भवती महिला को 19 अगस्त को डेडियापाड़ा तालुका के मुख्यालय में चिकित्सा सुविधा हासिल करने के लिए 70 फीट चौड़ी नदी को पार करने के लिए चार पुरुषों द्वारा कपड़े और लकड़ी से बने ढांचे या एक पालने में ले जाना पड़ा। संभवतः मथासर कांजी और वंदारी गांवों में अन्य 22 गर्भवती महिलाओं के साथ भी  कुछ ऐसा ही हुआ जब बारिश के कारण देव नदी पर बना एक कार्यवाहक पुल डूब गया और  तालुका किसी की भी पहुँच से पूरी तरह कट गया।

करोड़ों रुपए से बने प्रोजेक्ट “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” और पर्यटन स्थल से केवडिया गांव लगभग छह से आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यह गाँव मॉनसून के दौरान हर साल इस आपदा का सामना करता हैं।

“समस्या के समाधान के लिए कामचलाऊ कार्य-मार्ग या पुल के स्थान पर एक पक्का पुल होना चाहिए। वंदारी, मथासर और कांजी गाँव पहाड़ी छाया क्षेत्र में हैं और यहाँ के ग्रामीणों को नीचे स्तर के कामचलाऊ पुल की वजह से वर्षों से इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है, ”नर्मदा जिला परिषद की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष बहादुर वसावा ने उक्त बात कही।

उल्लेखनीय रूप से, वंदारी उन तीन गांवों में से एक है जो मुख्य इलाकों से कट गए है, यह वह गाँव है जिसे 2014 में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अहमद पटेल ने संसद आदर्श ग्राम योजना के तहत अपनाया था।

“मथासर, तीन गाँवों में से सबसे बड़ा गाँव है, यह केवडिया गाँव में बने सरदार पटेल की प्रतिमा से लगभग छह किलोमीटर की दूरी पर है। तीनों गाँव “स्टैचू ऑफ यूनिटी” के पास होने के बावजूद बेहद अविकसित हैं जबकि वहां के पर्यटन स्थल को विकसित करने के लिए करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं। हमने अतीत में भी स्थानीय प्रशासन को इन मुद्दों पर कई पत्र/ज्ञापन भेजे हैं। अंतत, इस साल के इलाके के विधायक महेश वसावा ने एक ऊंचे कार्यवाहक पुल के लिए बजट को मंजूरी दी थी, लेकिन महामारी के कारण अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है "स्थानीय कार्यकर्ता ने न्यूज़क्लिक को बताया।

उन्होंने कहा, ''यह मार्ग लगभग दस साल पुराना है और हर साल मानसून के दौरान यह पानी में डूब जाता है और तीन गांव लगभग दो से तीन महीने तक इससे पीड़ित रहते हैं। युवाओं को दूसरी तरफ मौजूद वाहनों का लाभ उठाने के लिए देव नदी में तैर कर किनारे जाना पड़ता है यदि उन्हें रोजार पर जाना है। महिलाओं, बच्चों और बूढ़ों के लिए ऐसा करना मुश्किल है। आजीविका, चिकित्सा देखभाल, शिक्षा सब कुछ पर इसका भारी असर पड़ता है, उनके अनुसार  जब तक पानी में कमी नहीं होती हर गतिविधि रुक सी जाती है, जैसे जीवन अचानक रुक सा गया हो। 

तीनों गांवों की आबादी लगभग 5000 से 6000 है। जिला पंचायत के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्तमान में इन तीन गांवों में 22 गर्भवती महिलाएं हैं जो प्रसव का इंतजार कर राई हैं। उल्लेखनीय रूप से, तीन गाँवों में सबसे बड़े गाँव मथासर से पीएचसी सबसे निकटतम है जो लगभग 28 किलोमीटर दूर मोसदा गाँव में स्थित है। मथासर के ग्रामीणों को देव नदी और फिर तरावली नदी पर एक पुल को मोसदा तक जाने के लिए पार करना पड़ता है। निकटतम अस्पताल जिला मुख्यालय राजपीपला में है, जो गांव से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर है।

हर साल मानसून के आने से पहले, नर्मदा जिला प्रशासन अक्सर तीन गांवों के ग्रामीणों से अपेक्षा करता है कि वे कार्यवाहक पुल के डूबने से पहले गर्भवती महिलाओं को तालुका अस्पताल में दाखिल करा दें। हालांकि, इन गांवों में वर्षों से बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल केंद्र बनाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।

Gujarat
sardar patel statue
BJP
Narmada district
VIJAY RUPANI

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • अजय कुमार
    आज़ादी के बाद पहली बार RBI पर लगा दूसरे देशों को फायदा पहुंचाने का आरोप: रिपोर्टर्स कलेक्टिव
    05 Apr 2022
    यह पहली क़िस्त है। अभी दो किस्तें आने बाकी हैं। इस क़िस्त से यह पता चला है कि कैसे नरेंद्र मोदी के काल में आजादी के बाद पहली बार आरबीआई पर विकसित देशों को फायदा पहुचाने का आरोप लगा? कैसे अरुण जेटली की…
  • international news
    न्यूज़क्लिक टीम
    पड़ताल दुनिया भर कीः पाक में सत्ता पलट, श्रीलंका में भीषण संकट, अमेरिका और IMF का खेल?
    04 Apr 2022
    पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने पाकिस्तान में सत्ता पलट और भीषण आर्थिक-राजनीतिक संकट में फंसे श्रीलंका की इस स्थिति में फंसने के पीछे की कहानी के बारे में न्यूज़क्लिक के प्रधान…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    दिल्ली में हिंदुत्व महापंचायत में ज़हरीला प्रचार! दिल्ली पुलिस नाकाम!
    04 Apr 2022
    न्यूज़चक्र के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं दिल्ली के बुरारी में हुई हिन्दू महापंचायत की। वह इस महापंचायत में यति नरसिंहानंद द्वारा दिए गए सांप्रदायिक और विवादित बयान पर…
  • सुरूर अहमद
    बिहार में शराबबंदी से क्या समस्याएं हैं 
    04 Apr 2022
    बिहार की शराबबंदी की समस्या ने मिलावटी शराब की बिक्री और उसके ताकतवर शराब माफिया का रूप ले लिया है। शराब पीने से होने वाली मृत्यु दर गैर-निषेध राज्यों की तुलना में कहीं अधिक है। 
  • शारिब अहमद खान
    पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता के पीछे क्या कारण हैं?
    04 Apr 2022
    पाकिस्तान के गठन के 75 साल के बाद भी आख़िरकार पाकिस्तान में कोई भी सरकार क्यों नहीं पूरा कर पाती है अपना कार्यकाल?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License