NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सुप्रीम कोर्ट ने दो ट्वीट के लिए अधिवक्ता प्रशांत भूषण को अवमाना का दोषी ठहराया
न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने प्रशांत भूषण को अवमानना का दोषी ठहराते हुये कहा कि इसकी सज़ा की मात्रा के मुद्दे पर 20 अगस्त को बहस सुनी जायेगी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
14 Aug 2020
 प्रशांत भूषण
Image courtesy: The Logical Indian

नयी दिल्ली: वरिष्ठ अधिवक्ता और नागरिक अधिकार अधिवक्ता प्रशांत भूषण को उनके दो ट्वीट के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी ठहराया है। इसके लिए सज़ा का ऐलान 20 अगस्त को होगा।

पीटीआई-भाषा की ख़बर के अनुसार शुक्रवार को न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने प्रशांत भूषण को अवमानना का दोषी ठहराते हुये कहा कि इसकी सज़ा की मात्रा के मुद्दे पर 20 अगस्त को बहस सुनी जायेगी।

शीर्ष अदालत ने पांच अगस्त को इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुये कहा था कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जायेगा।

इससे पहले, अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने उन दो ट्वीट का बचाव किया था, जिसमें कथित तौर पर अदालत की अवमानना की गई है। उन्होंने कहा था कि वे ट्वीट न्यायाधीशों के खिलाफ उनके व्यक्तिगत स्तर पर आचरण को लेकर थे और वे न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न नहीं करते।

न्यायालय ने इस मामले में एक याचिका का संज्ञान लेते हुये प्रशांत भूषण के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही के लिये उन्हें 22 जुलाई को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

आपको यह भी बता दें प्रशांत भूषण पर एक और अवमानना का केस भी चल रहा है। जिसपर सुप्रीम कोर्ट 17 अगस्त को फिर सुनवाई करेगा।

उच्चतम न्यायालय ने 10 अगस्त को उस मामले में कहा कि कार्यकर्ता-अधिवक्ता प्रशांत भूषण और पत्रकार तरुण तेजपाल के खिलाफ 2009 के आपराधिक अवमानना मामले में और सुनवाई की जरूरत है ताकि यह देखा जा सके कि न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार की टिप्पणी अवमानना है या नहीं।

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमू्र्ति कृष्ण मुरारी की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि अवमानना के मामले में आगे सुनवाई की जरूरत है। पीठ इस मामले में अब 17 अगस्त को आगे सुनवाई करेगी।

शीर्ष अदालत ने नवंबर 2009 में एक समाचार पत्रिका के साक्षात्कार में शीर्ष अदालत के कुछ मौजूदा एवं पूर्व न्यायाधीशों पर कथित तौर पर आक्षेप लगाने के लिए भूषण और तेजपाल को अवमानना नोटिस जारी किये थे। तेजपाल तब इस पत्रिका के संपादक थे।

आपको यह भी बता दें कि प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ इन दो अवमानना मामलों में सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने प्रशांत भूषण के साथ एकजुटता ज़ाहिर करते हुए एक बयान जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि न्याय और निष्पक्षता के हित में और भारत के सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा को बनाये रखने के लिए हम न्यायालय से श्री प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ स्वत:संज्ञान अवमानना कार्यवाही शुरू करने के अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करने और जल्द से जल्द इसे वापस लेने का आग्रह करते हैं।

पूरी ख़बर आप यहां पढ़ सकते हैं- ‘प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ कार्यवाही असल में आलोचना का दम घोंटने वाली एक कोशिश लगती है’

अन्य लेखकों और बौद्धिकों ने भी इस विषय में चिंताएं जताई हैं। उनके लेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ अवमानना का नोटिस हमारे लोकतंत्र का निर्णायक पल हो सकता है

लॉकडाउन में न्यायापालिका

“लोकतंत्र में किसी को इस तरह चुप कराया जा सकता है?” क्या यही सवाल सुप्रीम कोर्ट पर लागू नहीं होता

prashant bhushan
Supreme Court
Prashant Bhushan Tweets

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 15,786 नए मामले, 231 मरीज़ों की मौत
    22 Oct 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 41 लाख 43 हज़ार 236 हो गयी है।
  • coal energy
    नीलाबंरन ए
    नवीकरणीय ऊर्जा और बिजली ख़रीद पर निर्भर तमिलनाडु ने कोयले की कमी का किया मुक़ाबला 
    22 Oct 2021
    तमिलनाडु राज्य की थर्मल पावर स्टेशनों पर निर्भरता कम है, लेकिन निजी विक्रेताओं से महंगी बिजली ख़रीदने के कारण टैंजेडको 1.07 लाख करोड़ रुपये के क़र्ज़ में धस गई है।
  • Ashfaqulla Khan
    हर्षवर्धन
    विशेष: अशफ़ाक़उल्ला को याद करना उनके विचारों को भी याद करना है
    22 Oct 2021
    आज शहीद क्रांतिकारी अशफ़ाक़ का 121 जन्मदिन है। आइये, इस मौके पर हम उनकी वैचारिकी की थोड़ी चर्चा करते हैं। 
  • Adam Gondvi
    न्यूज़क्लिक टीम
    अदम गोंडवी : “धरती की सतह पर” खड़े होकर “समय से मुठभेड़” करने वाला शायर
    22 Oct 2021
    जनता के शायर अदम गोंडवी (22 अक्टूबर, 1947-18 दिसंबर, 2011) के जन्मदिन पर न्यूज़क्लिक विशेष। यह वीडियो पैकेज 2018 में तैयार किया गया था, जो आज भी प्रासंगिक है। क्योंकि आज अदम की ही तरह पुरज़ोर आवाज़…
  • ग्लोरिया ला रीवा
    आँखों देखी रिपोर्ट : क्यूबा के वैज्ञानिकों, स्वास्थ्यकर्मियों ने कोविड के ख़िलाफ़ संघर्ष तेज़ किया
    21 Oct 2021
    ग्लोरिया ला रीवा क्यूबा में थीं। वहां उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों से क्यूबा के प्रभावी टीकाकरण कार्यक्रम और डेल्टा वेरिएंट से निपटने के तरीकों पर बात की।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License