NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सुप्रीम कोर्ट का 31 जुलाई तक ‘एक देश, एक राशन कार्ड’ योजना लागू करने का आदेश
शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रशासनों को प्रवासी मजदूरों को सूखा राशन उपलब्ध कराने की एक योजना 31 जुलाई तक लानी होगी और ऐसी योजना कोविड की स्थिति बरकरार रहने तक जारी रखनी होगी।
भाषा
29 Jun 2021
सुप्रीम कोर्ट का 31 जुलाई तक ‘एक देश, एक राशन कार्ड’ योजना लागू करने का आदेश

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 31 जुलाई तक ‘एक देश, एक राशन कार्ड योजना’ लागू करने का मंगलवार को निर्देश दिया। साथ ही केंद्र को कोविड-19 की स्थिति जारी रहने तक प्रवासी मजदूरों को नि:शुल्क वितरण के लिए सूखा राशन उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने तीन कार्यकर्ताओं की याचिका पर कई निर्देश पारित किए जिसमें केंद्रों और राज्यों को प्रवासी मजदूरों के लिए खाद्य सुरक्षा, नकदी हस्तांतरण और अन्य कल्याणकारी उपाय सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। याचिका में कहा गया कि प्रवासी मजदूर कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में कर्फ्यू और लॉकडाउन लगाए जाने के कारण संकट का सामना कर रहे हैं।

पीठ ने केंद्र को 31 जुलाई तक असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के पंजीकरण के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) की मदद से एक पोर्टल विकसित करने का निर्देश दिया ताकि कल्याण योजनाओं का लाभ उन्हें दिया जा सके।

इसने राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों को संबंधित राज्यों में वैश्विक महामारी की स्थिति जारी रहने तक प्रवासी मजदूरों के लिए सामुदायिक रसोईघरों का संचालन करने का भी निर्देश दिया।

पीठ ने महामारी की स्थिति बनी रहने तक प्रवासी मजदूरों के बीच मुफ्त वितरित करने के लिए केंद्र को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अनाज आवंटित करते रहने को कहा।

शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रशासनों को प्रवासी मजदूरों को सूखा राशन उपलब्ध कराने की एक योजना 31 जुलाई तक लानी होगी और ऐसी योजना कोविड की स्थिति बरकरार रहने तक जारी रखनी होगी।

पीठ ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अंतरराज्यीय प्रवासी कामगारों (रोजगार का नियमन एवं सेवा की शर्तें अधिनियम), 1979 के तहत सभी संस्थापनों एवं ठेकेदारों को पंजीकृत करने का निर्देश दिया।

कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज, हर्ष मंदर और जगदीप चोकड़ ने प्रवासी मजदूरों के लिए कल्याणकारी उपायों को लागू करने के अनुरोध के साथ एक याचिका दायर की थी।

नयी याचिका 2020 के स्वत: संज्ञान के मामले में दायर की गई थी जिसमें शीर्ष अदालत ने पिछले साल मई में प्रवासी मजदूरों की समस्याओं एवं दुखों का संज्ञान लिया था और कई निर्देश पारित किए थे जिसमें राज्यों से प्रवासी श्रमिकों से किराया नहीं लेने को और बसों एवं ट्रेनों में सवार होने तक नि:शुल्क भोजन उपलब्ध कराने का निर्देश भी शामिल है।

केंद्र ने कहा था कि ज्यादातर राज्य एक राष्ट्र एक राशन कार्ड योजना लागू कर रहे हैं, लेकिन चार राज्य- असम, छत्तीसगढ़, दिल्ली और पश्चिम बंगाल योजना में अभी तक एकीकृत नहीं हुए हैं और वह राशन कार्डों की सुवाह्यता को लागू करने के लिए उनकी तकनीकी तत्परता पर निर्भर करेगा।

केंद्र ने यह भी कहा कि एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना के शुरुआत से जुड़े आम आदमी पार्टी (आप) सरकार का दावा भ्रामक है क्योंकि बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर दिल्ली में रियायती राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (एनएफएसए) खाद्य अनाजों का लाभ ले पाने में अक्षम हैं क्योंकि यह पूरी तरह लागू नहीं है।

कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्यों को प्रवासी मजदूरों के लिए खाद्य सुरक्षा, नकद हस्तांतरण, परिवहन सुविधाएं और अन्य कल्याणकारी कदमों की इस आधार पर मांग की थी कि इस बार संकट बड़ा है इसलिए वे सख्त जरूरत में हैं।

इस साल 24 मई को शीर्ष अदालत ने असंगठित कामगारों के पंजीकरण की प्रक्रिया को “बहुत धीमा” करार दिया था और अधिकारियों को देशभर में कोविड-19 वैश्विक महामारी के बीच फंसे प्रवासी मजदूरों को सूखा राशन उपलब्ध कराने और सामुदायिक रसोइयों का संचालन करने का निर्देश दिया था।

Supreme Court
One Nation
one nation one ration card

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • cartoon
    सोनिया यादव
    यूपी चुनाव : क्या ग़ैर यादव ओबीसी वोट इस बार करेंगे बड़ा उलटफेर?
    14 Jan 2022
    2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लगभग 39 प्रतिशत वोट शेयर में कुर्मी और कोइरी के साथ-साथ नॉन डॉमिनेंट ओबीसी ने भी भारी संख्या योगदान दिया था। हालांकि इस बार समाजवादी पार्टी की ग़ैर यादव ओबीसी वोट…
  • North Bengal
    डॉ सुखबिलास बर्मा
    उत्तर बंगाल के राजबंशियों पर खेली गई गंदी राजनीति
    14 Jan 2022
    भाजपा और टीएमसी दोनों ही राजबंशी के उच्च मध्यम वर्ग के एक तबके की भावनाओं को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो अक्सर राजनीतिक नेताओं द्वारा निभाए गए झांसों में विश्वास करते हैं। 
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    नफरती धर्म संसद पर कार्रवाई क्यों नहीं ?
    14 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार बात कर रहे हैं कि जिस तरह धर्म संसद में नफरती बयान दिए गए और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया, सरकार ने अब तक इस मुद्दे पर चुप्पी क्यों साध रखी है ?
  • Michael Lobo Resignation
    राज कुमार
    गोवा चुनावः डेढ़ महीने में एक चौथाई विधायकों का इस्तीफ़ा
    14 Jan 2022
    गोवा में दिसंबर 2021 से लेकर अब तक 10 विधायक इस्तीफा देकर दल बदल कर चुके हैं। इस समय गोवा में क्या चुनावी हलचल है? क्या घटनाक्रम चल रहा है? आइये! नज़र डालते हैं।
  • south africa
    पवन कुलकर्णी
    श्रमिक संघों ने दक्षिण अफ्रीकी डेयरी दिग्गज पर पेट्रोल बम हमले करवाने और धमकाने के आरोप लगाये
    14 Jan 2022
    इन धमकियों और खतरों के बीच, क्लोवर में श्रमिकों की कार्यवाई को कर्मचारी एकजुटता के साथ-साथ नागरिक समाज की ओर से इसके बहिष्कार अभियान को मिलते बढ़ते समर्थन से और अधिक मजबूती प्राप्त हुई है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License