NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
समाज
भारत
निर्भया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की पुनर्विचार याचिका, डेथ वारंट पर 7 जनवरी को सुनवाई
पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया की मां की अर्जी पर सुनवाई करते हुए दोषियों के डेथ वॉरंट पर फैसला 7 जनवरी तक के लिए टाल दिया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया केस के एक दोषी अक्षय सिंह की फांसी पर दायर पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Dec 2019
Image courtsey : The Pioneer

सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्भया केस के एक दोषी अक्षय सिंह की फांसी पर दायर पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद सभी को पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले का इंतजार था। कोर्ट ने निर्भया की मां की अर्जी पर सुनवाई करते हुए दोषियों के डेथ वॉरंट पर फैसला 7 जनवरी तक के लिए टाल दिया है। निर्भया के माता-पिता ने चारों दोषियों को जल्द-से-जल्द फांस दिए जाने की मांग के साथ कोर्ट से डेथ वॉरंट जारी करने की गुहार लगाई थी।

कोर्ट ने कहा कि चारों दोषियों को जेल प्रशासन नोटिस जारी करे। पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा कि दोषी अपने बचे सभी कानूनी अधिकार इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके साथ ही अब निर्भया के दोषियों की फांसी कुछ और समय के लिए टल गई है।

क्या हुआ आज पटियाला हाउस कोर्ट में?

निर्भया की मां की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट के जज ने कहा, 'कोर्ट को प्रिंसिपल ऑफ जस्टिस के सिद्धांत को फॉलो करना होगा।' कोर्ट ने तिहाड़ प्रशासन को निर्देश दिया के वे एक सप्ताह के भीतर दोषियों को नोटिस जारी कर उनसे पूछे कि क्या वे दया याचिका दाखिल करना चाहते हैं। कोर्ट ने निर्भया की मां से कहा, 'हमें आपसे पूरी सहानुभूति है। हमें मालूम है कि किसी की मौत हुई है लेकिन यहां किसी अन्य के अधिकार की भी बात है। हम यहां आपको सुनने के लिए आए हैं लेकिन हम भी कानून से बंधे हैं।'

सरकारी वकील ने अपनी दलील में कहा था कि दया याचिका लंबित रहने या फिर दोषी दया याचिका दाखिल करना चाहते हैं, ये तथ्य कोर्ट को डेथ वॉरंट जारी करने से नहीं रोक सकते। इसपर दोषी के वकील ने कहा कि बिना सभी कानूनी विकल्प के खत्म हुए डेथ वॉरंट जारी नहीं किया जा सकता है।

बता दें कि इससे पहले निर्भया की मां ने दोषी की सुप्रिम कोर्ट द्वारा पुनर्विचार याचिका खारिज करने के फैसले का स्वागत किया था, वहीं पिता ने कहा कि पटियाला हाउस अदालत से ‘डेथ वारंट’ जारी होने तक वह संतुष्ट नहीं होंगे।

दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) प्रमुख स्वाति मालीवाल ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने ट्वीट किया,‘‘सात साल बाद निर्भया को न्याय मिलने की घड़ी पास आ रही है। उच्चतम न्यायालय से दुष्कर्मी की पुनर्विचार याचिका खारिज हुई है। आशा है कि अब तुरंत पटियाला हाउस अदालत से चारों कातिलों का डेथ वॉरंट जारी होगा। उन चारों कातिलों को तुरंत फांसी होनी चाहिए।’’

गौरतलब है कि दिल्ली में सात साल पहले 16 दिसंबर की रात को एक नाबालिग समेत छह लोगों ने एक चलती बस में 23 वर्षीय निर्भया का सामूहिक बलात्कार किया था और उसे बस से बाहर सड़क के किनारे फेंक दिया था। इस घटना की निर्ममता के बारे में जिसने भी पढ़ा-सुना उसके रोंगटे खड़े हो गए। इस घटना के बाद पूरे देश में व्यापक प्रदर्शन हुए और महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर आंदोलन शुरू हो गया था।

इस मामले के चार दोषी विनय शर्मा, मुकेश सिंह, पवन गुप्ता और अक्षय कुमार सिंह को मृत्युदंड सुनाया गया। एक अन्य दोषी राम सिंह ने 2015 में तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी और नाबालिग दोषी को सुधार गृह में तीन साल की सजा काटने के बाद 2015 में रिहा कर दिया गया था।

(समाचार एजेंसी भाषा की इनपुट के साथ)

nirbhaya case
Nirbhaya gang rape
Nirbhaya movement
patiyala house court
Supreme Court
nirbhaya parents

Related Stories

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

राजीव गांधी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पेरारिवलन की रिहाई का आदेश दिया

दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर

नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

लखीमपुर खीरी : किसान-आंदोलन की यात्रा का अहम मोड़

वाराणसी: सुप्रीम कोर्ट के सामने आत्मदाह के मामले में दो पुलिसकर्मी सस्पेंड

राजस्थान : फिर एक मॉब लिंचिंग और इंसाफ़ का लंबा इंतज़ार

"रेप एज़ सिडक्शन" : बहलाने-फुसलाने से आगे की बात

यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट का बयान दुर्भाग्यपूर्ण क्यों है?

सुप्रीम कोर्ट से डॉ. कफ़ील ख़ान मामले में योगी सरकार को झटका क्यों लगा?


बाकी खबरें

  • एपी
    क्रिस रॉक को थप्पड़ मारने को लेकर ऑस्कर ने विल स्मिथ पर 10 साल का प्रतिबंध लगाया
    09 Apr 2022
    स्मिथ की हरकत पर अकादमी के ‘बोर्ड ऑफ गवर्नर्स’ की बैठक के बाद यह फैसला किया गया है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें भविष्य में इन पुरस्कारों के लिए नामित किया जाएगा या नहीं।
  • kashmiri student
    नासीर ख़ुएहामी
    घोर ग़रीबी के चलते ज़मानत नहीं करा पाने के कारण कश्मीरी छात्र आगरा जेल में रहने के लिए मजबूर
    09 Apr 2022
    विश्वास की कमी और वित्तीय दबाव उन परिवारों के रास्ते में आड़े आ रहे हैं, जिनके बच्चों को क्रिकेट विश्व कप में पाकिस्तान के हाथों भारत की शिकस्त के बाद जेल में डाल दिया गया था, हालांकि उन्हें ज़मानत…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    फरीदाबाद : आवास के मामले में सैकड़ों मजदूर परिवारों को हाईकोर्ट से मिली राहत
    09 Apr 2022
    पिछले कुछ सालों में दिल्ली एनसीआर और उसके पास के क्षेत्रों में सरकारों ने बड़ी तेज़ी से मज़दूर बस्तियों को उजाड़ना शुरू किया। ख़ासकर कोरोना काल में सरकार ने बड़े ही चुपचाप तरीके से अपने इस अभियान को चलाया…
  • गुरसिमरन बख्शी
    मांस खाने का राजनीतिकरण करना क्या संवैधानिक रूप से सही है?
    09 Apr 2022
    मांस पर प्रतिबंध लगाना, किसी भी किस्म के व्यापार करने के मामले में मौलिक अधिकार का उल्लंघन कहलाता है और किसी वैधानिक क़ानून के समर्थन के अभाव में, यह संवैधानिक जनादेश के मामले में कम प्रभावी हो जाता…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,150 नए मामले, 83 मरीज़ों की मौत
    09 Apr 2022
    देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 98.76 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 25 लाख 1 हजार 196 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License