NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में अतिक्रमण विरोधी अभियान पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, कोर्ट ने पूछे कई गंभीर सवाल
दुष्यंत दवे ने कहा कि दिल्ली में 15 लाख लोगों के साथ 731 अनधिकृत कॉलोनियां हैं। आप केवल एक इलाके को निशाना बनाते हैं क्योंकि आप (एमसीडी) केवल एक समुदाय को टारगेट करना चाहते हैं।
मुकुंद झा
21 Apr 2022
sc

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के हिंसा प्रभावित जहांगीरपुरी इलाके में अवैध कब्जों को ध्वस्त करने के मुद्दे पर अगले आदेश तक यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बीआर गवई ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य को नोटिस जारी किए। याचिका में दावा किया गया है कि हिंसा के बाद एक समुदाय को निशाना बनाते हुए ये तोड़ फोड़ की कार्रवाई की जा रही है। आज सुनवाई के दौरान पीड़ितों के वकीलों की ओर से सरकार को घेरा गया तो कोर्ट ने भी नगर निगम और दिल्ली पुलिस के रैवेय पर सवाल उठाए।  

इस बीच भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई(एम) की पोलित ब्यूरो सदस्य ने भी कोर्ट में याचिका लगाई। पीड़ितों के मुआवज़े की माँग की है। उन्होंने अपने अर्जी में इस अतिक्रमण विरोधी अभियान को अमानवीय ,अवैध और अनौतिक काम बताया। इसे उन्होंने प्राकृतिक न्याय के ख़िलाफ़ बताया। तोड़फोड़ के आदेश को रद्द करने और पीड़ितों के लिए तय समय में मुआवाज देने की बात की।

हालंकि अदालत ने कहा, 'अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखी जाए। मामले को दो हफ्ते के बाद सूचीबद्ध किया जाए। तब तक दलीलों को पूरा किया जाए।' शीर्ष अदालत ने  नगर निगम के अतिक्रमण हटाओ पर सवाल उठाए। आदेश के बाद भी जिस तरह बुल्डोज़र चलता रहा उसे लेकर एतराज़ जताया।

यह भी कहा कि वह बुधवार को की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई का गंभीर संज्ञान लेगी जो उत्तर दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) के महापौर को उसके आदेश से अवगत कराए जाने के बाद भी जारी रही थी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई तो वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, दुष्यंत दवे और संजय हेगड़े ने पीड़ित पक्षों की तरफ से दलील दी। कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के बाद एक समुदाय के लोगों की संपत्तियों को उजाड़ने के लिए बुल्डोज़र चलाया गया। कपिल सिब्बल ने बुल्डोज़र पर अधिक जोर दिया तो कोर्ट ने कहा अतिक्रमण तो बुल्डोज़र से ही चलेगा।

दुष्यंत दवे ने कहा दिल्ली में 15 लाख लोगों के साथ 731 अनधिकृत कॉलोनियां हैं। आप केवल एक इलाके को निशाना बनाते हैं क्योंकि आप (सरकार) केवल एक समुदाय को टारगेट करते हैं। कृपया धारा 2(सी) के अनुसार अतिक्रमण की परिभाषा देखें।उन्होंने कहा अगर ये अभियान चलना है तो पहले सैनिक फार्म जैसे इलाकों में चलना चाहिए। उस इलाक़े में इस  अभियान को चलाना जहाँ कुछ दिन पहले हिंसा हुई है, दिखाता है कि ये सिर्फ अतिक्रमण हटाने का अभियान नहीं था।

सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तोड़फोड़ के सवाल पर कहा कि आयुक्त भी अपने विवेक से बिना किसी नोटिस के स्टॉल, कुर्सी, मेज आदि हटा सकते हैं।

इसके बाद जस्टिस राव ने कड़ा रुख दिखाया और पूछ लिया कि क्या कल बुल्डोज़र की कार्रवाई केवल स्टॉल, कुर्सियों और मेजों को हटाने के लिए की गई? जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि इन्हें हटाने के लिए आपको बुल्डोज़र की जरूरत है?  

Supreme Court
jahangirpuri
Jahangirpuri Violence
Demolition Drive
delhi police
NDMC
Brinda Karat
Muslims
anti-encroachment

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक


बाकी खबरें

  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    मोदी सरकार कोरोना को लेकर लापरवाह तो नहीं ?
    11 Dec 2021
    वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा आज बात कर रहे हैं कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के बारे में. क्या मोदी सरकार ओमिक्रोन को ले कर कोई तैयारी कर रही है या लापरवाही से बस देश में होने वाले चुनाव में ही…
  • meter
    एम.ओबैद
    बिहारः "सबसे पहले सरकारी आवासों में प्रीपेड मीटर लगाने का काम शुरू हो'
    11 Dec 2021
    स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य किए जाने के विद्युत मंत्रालय के आदेश के बाद बिहार एक्टू के सचिव रणविजय ने कहा,'सरकार ने ग़रीब-विरोधी अपना चेहरा दिखाया है। जनता कह रही है कि सबसे पहले सचिवालय,…
  • Beti Bachao, Beti Padhao
    सोनिया यादव
    क्या सरकार वाकई बेटियों को बचाना और पढ़ाना चाहती है!
    11 Dec 2021
    एक रिपोर्ट के मुताबिक बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना का लगभग 80 फीसदी फंड सरकार ने इसके प्रचार-प्रसार पर खर्च किए हैं। यानी बेटियों के शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के पैसे प्रचार और विज्ञापनों में बहा…
  • Julian Assange
    पीपल्स डिस्पैच
    मानवाधिकार दिवस पर ब्रिटेन के कोर्ट ने जूलियन असांज के अमेरिका प्रत्यर्पण को मंज़ूरी दी
    11 Dec 2021
    ब्रिटिश हाई कोर्ट के फ़ैसले ने, इस साल जनवरी में डिस्ट्रिक्ट जज के उस फ़ैसले को पलट दिया, जिसमें असांज के प्रत्यर्पण को "दमनकारी" बताया गया था। नागरिक अधिकारों के पैरोकारों और असांज के समर्थक व…
  • Gogoi
    वी. वेंकटेशन
    क्या रंजन गोगोई ख़ुद को क्लीन चिट देने में कामयाब रहे ?
    11 Dec 2021
    भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और अब संसद सदस्य जस्टिस रंजन गोगोई की लिखी किताब, ‘जस्टिस फ़ॉर द जज: एन ऑटोबायोग्राफ़ी’ में सुप्रीम कोर्ट में उनके विवादास्पद कार्यकाल को लेकर कई ख़ुलासे हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License