NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सुप्रीम कोर्ट की यूपी सरकार को चेतावनी; सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ वसूली नोटिस वापस लें या हम इसे रद्द कर देंगे
शीर्ष अदालत ने कहा कि दिसंबर 2019 में शुरू की गई यह कार्यवाही उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित कानून के खिलाफ है और इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Feb 2022
sc and yogi

नयी दिल्ली: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जिस मुद्दों को लेकर चुनाव में अपना बखान कर रही है, उसी मुद्दे पर उसे सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार का सामना करना पड़ा है।    

उच्चतम न्यायालय ने दिसम्बर 2019 में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ कथित तौर पर आंदोलन कर रहे लोगों को वसूली के नोटिस भेजे जाने पर उत्तर प्रदेश सरकार को शुक्रवार को आड़े हाथ लिया और उसे यह कार्यवाही वापस लेने के लिए अंतिम अवसर दिया और कहा कि अन्यथा न्यायालय कानून का उल्लंघन करने वाली इस कार्यवाही को निरस्त कर देगा।

शीर्ष अदालत ने कहा कि दिसंबर 2019 में शुरू की गई यह कार्यवाही उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित कानून के खिलाफ है और इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।

आपको बता दें कि योगी सरकार इन चुनावों में दो तीन मुद्दों को बड़े जोर-शोर से अपनी चुनावी सभाओं में उठा रही है। उनमें एक तो ‘चुंनिदा’ यानी एक वर्ग विशेष के कथित माफ़िया की संपत्ति पर बुलडोजर चलाने का दावा और दूसरी प्रदर्शनकारियों को नोटिस भेजकर सरकारी संपत्ति के कथित नुकसान की रिकवरी करने की बातें। बीजेपी की ओर से चुनावी सभाओं में कहा जा रहा है कि वे “दंगाइयों” के घर तक बिकवा देंगे।

न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आरोपियों की संपत्तियों को जब्त करने की कार्यवाही के लिए खुद ही‘‘शिकायतकर्ता, न्यायकर्ता और अभियोजक’’ की तरह काम किया है।

पीठ ने कहा, ‘‘कार्यवाही वापस लें या हम इस अदालत द्वारा निर्धारित कानून का उल्लंघन करने के लिए इसे रद्द कर देंगे।’’

उच्चतम न्यायालय परवेज आरिफ टीटू की एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उत्तर प्रदेश में सीएए आंदोलन के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए जिला प्रशासन द्वारा कथित प्रदर्शनकारियों को भेजे गए नोटिस रद्द करने का अनुरोध किया गया है और उसने इस पर राज्य से इसका जवाब मांगा है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस तरह के नोटिस ‘‘मनमाने तरीके’’ से भेजे गए हैं। यह एक ऐसे व्यक्ति को भेजा गया है जिसकी मृत्यु छह साल पहले 94 वर्ष की आयु में हुई थी और साथ ही ऐसे नोटिस 90 वर्ष से अधिक आयु के दो लोगों सहित कई अन्य लोगों को भी भेजे गये थे।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने कहा कि राज्य में 833 दंगाइयों के खिलाफ 106 प्राथमिकी दर्ज की गईं और उनके खिलाफ 274 वसूली नोटिस जारी किए गए।

उन्होंने कहा, ‘‘274 नोटिस में से, 236 में वसूली के आदेश पारित किए गए थे, जबकि 38 मामले बंद कर दिए गए थे।’’ उन्होंने कहा कि 2020 में अधिसूचित नए कानून के तहत, दावा न्यायाधिकरण का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश कर रहे हैं और पहले इसकी अध्यक्षता अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) करते थे।

पीठ ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने 2009 और 2018 में दो फैसलों में कहा है कि न्यायिक अधिकारियों को दावा न्यायाधिकरणों में नियुक्त किया जाना चाहिए लेकिन इसके बजाय आपने एडीएम नियुक्त किए हैं।’’

प्रसाद ने कहा कि सीएए के विरोध के दौरान 451 पुलिसकर्मी घायल हुए और समानांतर आपराधिक कार्रवाई और वसूली की कार्रवाई की गई।

पीठ ने कहा, ‘‘आपको कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। कृपया इसकी जांच करें, हम 18 फरवरी तक एक मौका दे रहे हैं।’’

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘मैडम प्रसाद, यह सिर्फ एक सुझाव है। यह याचिका केवल एक तरह के आंदोलन या विरोध के संबंध में दिसंबर 2019 में भेजे गए नोटिसों से संबंधित है। आप उन्हें एक झटके में वापस ले सकते हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में 236 नोटिस कोई बड़ी बात नहीं है। अगर नहीं माने तो अंजाम भुगतने को तैयार रहें। हम आपको बताएंगे कि कैसे उच्चतम न्यायालय के फैसलों का पालन किया जाना चाहिए।’’

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि जब इस अदालत ने निर्देश दिया था कि निर्णय न्यायिक अधिकारी द्वारा किया जाना है तो एडीएम कैसे कार्यवाही कर रहे हैं।

प्रसाद ने दावा न्यायाधिकरणों के गठन पर 2011 में जारी एक सरकारी आदेश का हवाला दिया और कहा कि उच्च न्यायालय ने अपने बाद के आदेशों में इसे मंजूरी दे दी थी।

न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि 2011 में उच्च न्यायालय ने सरकारी आदेश अस्वीकार कर दिया था और उस समय राज्य ने एक कानून लाने का वादा किया था, लेकिन राज्य को एक कानून लाने में 8-9 साल लग गए।

न्यायमूर्ति कांत ने कहा, ‘‘हम समझते हैं कि 2011 में आप वहां नहीं थे लेकिन आप त्रुटियों को बहुत अच्छी तरह से सुधार सकते थे।’’

प्रसाद ने कहा कि सभी आरोपी जिनके खिलाफ वसूली नोटिस जारी किए गए थे, वे अब उच्च न्यायालय के समक्ष हैं और लंबी सुनवाई हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि दंगाइयों के खिलाफ ये कार्यवाही 2011 से हो रही है और अगर अदालत इन सीएए विरोधी कार्यवाही रद्द कर देती है, तो वे सभी आकर राहत मांगेंगे।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, ‘‘हमें अन्य कार्यवाही से कोई सरोकार नहीं है। हम केवल उन नोटिसों से चिंतित हैं जो दिसंबर 2019 में सीएए के विरोध के दौरान भेजे गए हैं। आप हमारे आदेशों को दरकिनार नहीं कर सकते। आप एडीएम की नियुक्ति कैसे कर सकते हैं, जबकि हमने कहा था कि यह न्यायिक अधिकारियों द्वारा किया जाना चाहिए। दिसंबर 2019 में जो भी कार्यवाही हुई, वह इस अदालत द्वारा निर्धारित कानून के विपरीत थी।’’

प्रसाद ने कहा कि अदालत ने जो भी कहा है उस पर विचार किया जाएगा।

पिछले साल नौ जुलाई को शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा था कि वह राज्य में सीएए विरोधी आंदोलनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की वसूली के लिए जिला प्रशासन द्वारा कथित प्रदर्शनकारियों को भेजे गए पहले नोटिस पर कार्रवाई नहीं करे।

शीर्ष अदालत ने हालांकि कहा कि राज्य कानून के अनुसार और नए नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।

टीटू की दलील थी कि ये नोटिस उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले पर आधारित हैं जो शीर्ष अदालत के 2009 के निर्णय में प्रतिपादित दिशा निर्देशों का उल्लंघन है। न्यायालय ने 2009 के फैसले की 2018 में एक आदेश में भी पुष्टि की थी।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Supreme Court
Yogi Adityanath
CAA
CAA Protest

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा


बाकी खबरें

  • imf
    प्रभात पटनायक
    IMF की SDR की नयी खेप, तीसरी दुनिया के लिए कितनी फायदेमंद है?
    06 Oct 2021
    अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अगस्त के महीने से 650 अरब डालर के स्पेशल ड्राइंग राइट्स या एसडीआर की ताजा खेप जारी करने का एलान किया है। इस राशि का आइएमएफ के सदस्य देशों के बीच, आइएमएफ के उन
  • किसान
    रवि कौशल
    ‘हमें पानी दो, वरना हम यहां से नहीं हटेंगे’: राजस्थान के आंदोलनरत किसान
    06 Oct 2021
    किसानों का कहना है कि गहलोत सरकार द्वारा पानी की आपूर्ति का कुप्रबंधन दिनों-दिन उन लोगों के लिए लगातार बदतर होता जा रहा है जो अक्टूबर के मध्य में सरसों और चने की बुआई करने की उम्मीद कर रहे हैं।
  • संदीपन तालुकदार
    जलवायु परिवर्तन से 1 दशक से कम समय में नष्ट हो गए दुनिया के 14% कोरल रीफ़ : अध्ययन
    06 Oct 2021
    कोरल रीफ़(प्रवाल भित्तियाँ) केवल महासागरों की सुंदरता का विषय नहीं हैं, वे एक महत्वपूर्ण समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र भी हैं। ये पारिस्थितिक तंत्र
  • अब्दुल अलीम जाफ़री
    लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड: "मुआवज़ा हमारे मरे बच्चों को वापस नहीं लाएगा"
    06 Oct 2021
    तिकोनिया से एक ग्राउंड रिपोर्ट, जहां गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा और उनके बेटे के ख़िलाफ़ गुस्सा अभी भी उबल रहा है, शोक में डूबे परिवारों का कहना है कि मुआवज़े से भी उनके मृतक वापस नहीं आ जाएंगे।
  • UTTARAKHAND
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड: विकास के नाम पर 16 घरों पर चला दिया बुलडोजर, ग्रामीणों ने कहा- नहीं चाहिए ऐसा ‘विकास’
    06 Oct 2021
    चमोली जिले के हाट गांव में अलकनंदा नदी पर 444 मेगावाट की विष्णुगाड-पीपलकोटी नाम की एक विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा है। इसी परियोजना के लिए हाट गांव को विस्थापित किया जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License