NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तमिलनाडु चुनाव: एआईएडीएमके की राह का रोड़ा बनते पीड़ित किसान
कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) या आधार मूल्य तय करने की लंबे समय से चली आ रही मांग जिसके लिए किसान संघर्ष कर रहे हैं, वो आज भी अनसुनी है।
नीलाम्बरन ए
26 Mar 2021
तमिलनाडु चुनाव: एआईएडीएमके की राह का रोड़ा बनते पीड़ित किसान

चुनाव से गुज़र रहे तमिलनाडु में किसानों और खेतिहर मज़दूरों के बीच ज़बरदस्त ग़ुस्सा है। राज्य और केंद्र की उन विभिन्न महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का विरोध करने को लेकर किसानों को कई दमनकारी कार्रवाइयों का सामना करना पड़ा है, जिनमें चेन्नई-सलेम आठ मार्ग ग्रीन कॉरिडोर परियोजना, डेल्टाई ज़िलों में हाइड्रोकार्बन निष्कर्षण परियोजना और हाई टेंशन इलेक्ट्रिक लाइन परियोजना शामिल हैं।

कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) या आधार मूल्य तय करने की लंबे समय से चली आ रही उस मांग में कोई कमी नहीं आयी है, जिससे किसान परेशान हैं। इस बीच, राज्य में भूमिहीन और महिला किसानों को राज्य और संघ सरकारों से शायद ही कोई समर्थन या मदद मिली हो।

संसद में तीनों कृषि कानूनों का समर्थन करने वाली ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) का इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन है। किसान इन क़ानूनों के ख़िलाफ़ राज्य भर में विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं और ये किसान एआईएडीएमके-भाजपा गठबंधन पर कृषि क्षेत्र में दाखिल होने के लिए बेचैन कॉर्पोरेट दिग्गजों के पक्ष में किसानों को धोखा देने का आरोप लगा रहे हैं।

एआईएडीएमके सरकार को भी इस चल रहे विरोध के बाद कृषक समुदाय को शांत करने के लिए कृषि ऋण माफ़ी की घोषणा करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

उत्पाद को लेकर कोई समर्थन नहीं

तमिलनाडु में साल 2020 में विभिन्न फ़सलों वाले कृषि क्षेत्र के अंतर्गत अनुमानित 1, 424.11 हज़ार हेक्टेयर भूमि है। इन फ़सलों में वृक्षारोपण वाली फसलें, फल, सब्ज़ियां, फूल, मसाले और औषधीय फ़सलें शामिल हैं। राज्य में किसान केले, नारियल, सब्ज़ियां और उन दूसरी फ़सलों की खेती करते हैं, जिनके न्यूनतम मूल्य निर्धारित नहीं है।

राज्य में किसानों के सामने जो सबसे अहम मुद्दा है, वह कृषि उत्पाद के लिए मूल्य निर्धारण को लेकर समर्थन की कमी है। धान और गन्ने को दिये जाने वाले बोनस और प्रोत्साहन के अलावा, राज्य सरकार किसानों के विभिन्न उत्पाद के लिए क़ीमत निर्धारित करने के समर्थन में नहीं रही है।

अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) के तमिलनाडु चैप्टर के महासचिव, पी.शण्मुगम कहते हैं, “किसानों के सामने अहम चुनौती उनके उत्पादों के लिए आधार मूल्य पाना है। उनके उत्पाद ज़्यादातर समय निवेश लागत के मुक़ाबले बहुत कम क़ीमत पर बेचे जाते रहे हैं। केरल में एलडीएफ़ सरकार ने इस सिलसिले में जो कुछ किया है, उसी तरह की पहल करते हुए महत्वपूर्ण कृषि उत्पादों को लेकर तमिलनाडु सरकार को भी एमएसपी सुनिश्चित करना चाहिए। ”

बढ़ती मांग के चलते सब्ज़ियों की क़ीमतों में होने वाली बढ़ोत्तरी के बावजूद किसानों की आय कम बनी हुई है। ये तीन नये कृषि क़ानून, जो एमएसपी की गारंटी नहीं देते हैं, किसानों के लिए चिंता का एक बड़ा कारण हैं।

शण्मुगम आगे कहते हैं, “एआईकेएस लंबे समय से किसानों की उपज की ख़रीद और बिक्री के लिए सहकारी ढांचे की मांग करता रहा है। नयी सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों को विलुप्त होने से बचाने के लिए इस तरह के ढांचे की स्थापना की जाएं।"

मौजूदा क़ानूनों से मिलते क़ानूनी संरक्षण के बावजूद इस राज्य में धान पैदा करने वाले किसानों और गन्ने की खेती करने वाले किसानों की दुर्गति जारी है। किसानों से धान की सरकारी ख़रीद में बड़े पैमाने पर आ रही अड़चनों ने उन्हें मुसीबत में डाल दिया है, इसकी चर्चा भी कृषक समुदाय के बीच एक अहम बात है।

भूमिहीन किसान और खेतिहर मज़दूर

तमिलनाडु में एक और महत्वपूर्ण वर्ग उन भूमिहीन किसानों और खेतिहर मज़दूरों का है, जिन पर सरकार की तरफ़ से बहुत कम या नहीं के बराबर ध्यान दिया गया है। मनरेगा के लिए दिये जा रहे पैसों की कमी ने कोविड -19 के चलते लगे लॉकडाउन के दौरान भी कई ग्रामीण महिलाओं को संकट में डाल दिया है।

शण्मुगम कहते हैं, “तमिलनाडु में 1 करोड़ कृषि मज़दूर रहते हैं। नव-उदारवादी नीतियों की शुरुआत के बाद से कृषि क्षेत्र को कई झटके लगे हैं, और छोटे किसानों की अच्छी-ख़ासी संख्या के हाथों से उनकी ज़मीनें निकल गयी हैं, वे कृषि मज़दूर बनने के लिए मजबूर हो रहे हैं। उनकी इस दुर्दशा पर पिछले कुछ दशकों में शायद ही किसी का ध्यान गया हो। ”

श्रमिकों में महिला कृषि श्रमिकों की संख्या भी बहुत बड़ी है, लेकिन उन्हें अपने पुरुष समकक्षों के मुक़ाबले कम पगार मिलती है।

ऑल इंडिया एग्रीकल्चरल वर्कर्स यूनियन (AIAWU) की राज्य इकाई के महासचिव, वी अमृतालिंगम बताते हैं, “किसानों और कृषि श्रमिकों के लिए गठित कल्याण बोर्ड की अहमियत कम कर दी गयी है और इसे किसी तरह का कोई क़ानूनी समर्थन हासिस नहीं है। राज्य सरकार की तरफ़ से जिस मात्रा में फ़ंड का आवंटन किया जा रहा है, वह निराशाजनक है और इससे 25% आवेदकों को ही फ़ायदा मिल पाता है। कुल श्रमिकों की तक़रीबन 60% महिलाएं हैं और ये बेहद प्रभावित और उपेक्षित हैं।”

काश्तकार भी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बड़े पैमाने पर नुकसान उठाते हैं, क्योंकि समझौते मौखिक होते हैं और दस्तावेज़ भी नहीं होते। नुकसान उठाने वाले काश्तकार ज़्यादातर चिह्नित नहीं होते हैं, उन्हें ज़बरदस्त नुकसान के हवाले छोड़ दिया जाता है।

पश्चिमी हिस्से के किसानों का संघर्ष

चेन्नई-सलेम 8 मार्ग ग्रीन कॉरिडोर रोड और हाई टेंशन इलेक्ट्रिक लाइनों की स्थापना के रूप में पश्चिमी ज़िलों के किसानों को दोहरे हमले का सामना करना पड़ रहा है।

10 पश्चिमी ज़िलों के किसानों ने उस समय राहत की सांस ली थी, जब अदालत ने ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के लिए अधिग्रहित ज़मीन को वापस करने का आदेश दे दिया था, लेकिन यह राहत भी अल्पकालिक साबित हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2020 में भूमि अधिग्रहण के लिए 277 किलोमीटर लंबी और 10, 000 करोड़ रुपये की इस परियोजना को लेकर सहमति दे दी थी।

एआईएडीएमके और भाजपा दोनों ने इस परियोजना के पीछे अपनी पूरी ताक़त लगा दी है जिससे किसानों को इस क्षेत्र में संकट के हवाले कर दिया है।

इसके अलावा किसानों के हाथ से अपनी ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ के रायगढ़ और तमिलनाडु के पुगलुर को जोड़ने वाले 1,830 किलोमीटर लंबे अल्ट्रा-हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (UHVDC) सिस्टम के सिलसिले निकल गया है।

सलेम ज़िले के संकागिरी तालुक के किसान कार्तिकेयन कहते हैं, “हमारी उपजाऊ भूमि बहुत कम क़ीमत पर छीन ली गयी है और इन लाइनों के गुज़रने से पैदा होने वाले विकिरण के चलते बाक़ी ज़मीन पर खेती कर पाना तक़रीबन नामुमकिन हो गया है। अपने बच्चों को शिक्षा और दूसरी चीज़ों पर होने वाले ख़र्चें तभी पूरे हो सकते हैं, जब हमें ज़्यादा मुआवज़ा मिले, अन्यथा हमारे भविष्य असुरक्षित हैं। ”

इस पश्चिमी क्षेत्र को एआईएडीएमके का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन ग्रीन कॉरिडोर परियोजना और एचटी इलेक्ट्रिक लाइनों के ख़िलाफ़ हुए संघर्ष के दौरान राज्य सरकार की तरफ़ से अपनाये गये दमनकारी तौर-तरीक़े पार्टी पर भारी पड़ सकते हैं।

डेल्टाई ज़िले और हाईड्रोकार्बन परियोजना

उपजाऊ डेल्टाई ज़िलों के किसान अब भी अपनी कृषि भूमि को प्रभावित करने रहे हाइड्रोकार्बन निष्कर्षण परियोजना की समस्या का सामना कर रहे हैं। इस परियोजना के चलते गंभीर भूमि, जल और वायु प्रदूषण हुआ है।

हालांकि राज्य सरकार ने ऐलान किया है कि इस क्षेत्र में और ज़्यादा अन्वेषण की अनुमति नहीं दी जायेगी, लेकिन किसान एआईएडीएमके सरकार के इन वादों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। इस परियोजना पर पाबंदी की घोषणा किसानों और राजनीतिक दलों के संघर्षों के बाद की गयी थी।

डेल्टाई क्षेत्र के मछुआरे भी अपनी रोज़ी-रोटी को हो रहे नुकसान का हवाला देते हुए इस परियोजना के विरोध में किसानों के साथ हो गये थे।

इस डेल्टाई क्षेत्र को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और वाम दलों का गढ़ माना जाता है। एआईएडीएमके और भाजपा की नीतियों ने द्रमुक की अगुवाई वाले गठबंधन की संभावनाओं को और मजबूत कर दिया है।

चुनावों में होने वाले भारी नुकसान के डर से जो एआईएडीएमके सरकार कभी कृषि ऋण माफ़ करने की संभावनाओं को ख़ारिज कर दिया था उसी सरकार ने 12,110 करोड़ रुपये की माफी की घोषणा कर दी है।

राज्य में उन तीनों कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ कई विरोध हुए हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि ये किसानों के खेतों का कॉर्पोरेटकरण कर देंगे। कृषक समुदाय के बीच का यह असंतोष आख़िरी पलों में दी गयी इस राहत के बावजूद एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन की संभावनाओं पर भारी पड़ रहा है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें 

TN Elections: Aggrieved Farmers to Pose a Stumbling Block for AIADMK

Tamil Nadu Elections 2021
Three Farm Laws
Chennai Salem Green Corridor Project
High Tension Electric Line Project
Hydrocarbon Project in Delta Districts
Welfare Board for farmers and agriculture workers
MSP
farm loan waiver
AIADMK
BJP
DMK
AIKS
AIAWU

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • Ashok Gehlot and Sachin Pilot
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान: क्या एक हो गए हैं अशोक गहलोत और सचिन पायलट?
    22 Nov 2021
    नए मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों ही संतुष्ट नज़र आ रहे हैं और इसी से उम्मीद की जा रही है कि दोनों के बीच जारी अंदरूनी कलह फिलहाल शांत हो गई है।
  • Rajasthan: Rape accused along with friends attacked Dalit girl with knife
    एम.ओबैद
    राजस्थान: रेप के आरोपी ने दोस्तों के साथ मिलकर दलित लड़की पर चाकू से किया हमला
    22 Nov 2021
    अलवर में शुक्रवार की रात रेप करने वाले शख्स और उसके साथियों द्वारा कथित रूप से 20 वर्षीय दलित लड़की पर हमला किया गया। जिसमें उसकी आंख में गंभीर चोटें आईं। पीड़िता को जयपुर रेफर कर दिया गया है जहां…
  • Tribal Pride Week
    रूबी सरकार
    जनजातीय गौरव सप्ताह में करोड़ों खर्च, लेकिन आदिवासियों को क्या मिला!
    22 Nov 2021
    प्रदेश के आदिवासियों के लिए सवाल बरकरार है कि 52 करोड़, कुछ जानकारों के अनुसार 100 करोड़ सरकारी खर्च से इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर जो सम्मेलन किया गया, क्या वह भाजपा के एजेंडे का हिस्सा भर था? क्योंकि…
  • farmers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    क़ानूनों की वापसी से मृत लोग वापस नहीं आएंगे- लखीमपुर हिंसा के पीड़ित परिवार
    22 Nov 2021
    बीजेपी को क़ानूनों की वापसी से राजनीतिक फ़ायदे का अनुमान है, जबकि मूल बात यह है कि राज्य मंत्री अजय मिश्रा अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, जो आने वाले दिनों में सरकार और किसानों के बीच टकराव की वजह बन सकता…
  • South region leader
    पार्थ एस घोष
    अपने क्षेत्र में असफल हुए हैं दक्षिण एशियाई नेता
    22 Nov 2021
    क्षेत्रीय नेताओं के लिए शुरूआती बिंदु होना चाहिए कि, वे इस मूल वास्तविकता को आंतरिक करें कि दक्षिण एशिया दुनिया के सबसे असमान और संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में से एक है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License