NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
तालिबान ने ‘आम माफ़ी’ की घोषणा की, महिलाओं से सरकार में शामिल होने का आह्वान
अफ़ग़ानिस्तान पर कब्जा करने वाला और कई शहरों को बिना लड़ाई जीतने वाला तालिबान वर्ष 1990 के क्रूर शासन के उलट खुद को अधिक उदार दिखाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कई अफ़ग़ान अब भी आशंकित हैं।
एपी
17 Aug 2021
तालिबान ने ‘आम माफ़ी’ की घोषणा की, महिलाओं से सरकार में शामिल होने का आह्वान

काबुल: तालिबान ने मंगलवार को पूरे अफगानिस्तान में ‘आम माफी’ की घोषणा की और महिलाओं से उसकी सरकार में शामिल होने का आह्वान किया। इसके साथ ही तालिबान ने लोगों की आशंका दूर करने की कोशिश है, जो एक दिन पहले उसके शासन से बचने के लिए काबुल छोड़कर भागने की कोशिश करते दिखे थे और जिसकी वजह से हवाई अड्डे पर अफरा-तफरी का माहौल पैदा होने के बाद कई लोग मारे गए थे।

अफगानिस्तान पर कब्जा करने वाला और कई शहरों को बिना लड़ाई जीतने वाला तालिबान वर्ष 1990 के क्रूर शासन के उलट खुद को अधिक उदार दिखाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कई अफगान अब भी आशंकित हैं।

पुरानी पीढ़ी तालिबान की अति रूढ़िवादी सोच को याद कर रही है, जब 11 सितंबर 2001 को न्यूयॉर्क पर हमले के बाद अफगानिस्तान पर अमेरिकी कार्रवाई से पहले सजा के तौर पर पत्थर से मारने और सार्वजनिक तौर पर फांसी की सजा दी जाती थी।

काबुल में उत्पीड़न या लड़ाई की बड़ी घटना अब तक दर्ज नहीं की गई है और तालिबान गश्त कर रहा है। तालिबान द्वारा जेलों पर कब्जा कर कैदियों को छुड़ाने एवं हथियारों को लूटने की घटना के बाद कई शहरी घरों में मौजूद हैं, लेकिन भयभीत हैं। कई महिलाओं ने आशंका जताई है कि अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के दौरान महिलाओं को और अधिकार देने का पश्चिमी प्रयोग तालिबान के शासन में कायम नहीं रहेगा।

जर्मनी ने इस बीच अफगानिस्तान के विकास के लिए दी जाने वाली मदद तालिबान के कब्जे के बाद रोक दी है। इस तरह की मदद अफगानिस्तान के लिए अहम है। माना जा रहा है कि तालिबान द्वारा अपनी नरम छवि पेश करने की एक वजह धन की निरंतर प्राप्ति सुनिश्चित करने का प्रयास हो सकती है।

तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के सदस्य इनामुल्ला समानगनी ने आम माफी का वादा किया है। यह पहली बार है जब तालिबान की ओर से संघीय स्तर पर शासन को लेकर टिप्पणी की गई है। समानगनी की टिप्पणी अस्पष्ट है। हालांकि, अब भी तालिबान पदच्युत की गई सरकार के नेताओं से बातचीत कर रहा है और अबतक सत्ता हस्तांतरण के किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं की गई है।

समानगनी ने कहा, ‘‘ इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान ने पूरे सम्मान और ईमानदारी से पूरे अफगानिस्तान के लिए आम माफी की घोषणा की है, खासतौर पर उन लोगों के लिए जो विपक्ष में हैं या जिन्होंने वर्षों तक और हाल तक कब्जा करने वालों (अमेरिका) का साथ दिया था।’’

अन्य तालिबानी नेताओं ने कहा कि वे उन लोगों से बदला नहीं लेना चाहते हैं जो पूर्ववर्ती सरकार या विदेशों में कार्यरत थे। हालांकि, काबुल में कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि तालिबान लड़ाकों ने उन लोगों की सूची बनाई है जो सरकार का सहयोग कर रहे थे और चाहते हैं कि वे सामने आएं।

समानगनी ने 40 साल से अधिक समय से चल रहे अफगानिस्तान संकट में महिलाओं को ‘मुख्य रूप से पीड़ित’ करार दिया। उसने कहा, ‘‘ इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान महिलाओं को और पीड़ित नहीं बनाना चाहता।’’

समानगनी ने कहा, ‘‘ इस्लामिक अमीरात अफगानिस्तान महिलाओं को इस्लामी कानून और हमारे मूल्यों के तहत काम करने और पढ़ने का माहौल देने और विभिन्न ढांचों (सरकार के) में उपस्थिति को तैयार है।’’

यह बयान तालिबान की पिछली सरकार की नीति से हटने का संकेत माना जा रहा है जिसमें महिलाओं को घरों में सीमित कर दिया गया था।

समानगनी ने हालांकि, यह नहीं बताया कि उनके लिए शरिया या इस्लामी कानून का क्या मतलब है। उन्होंने कहा कि ‘‘ सभी ओर के लोग’ सरकार में शामिल होंगे।

तालिबान ने अपनी नयी छवि पेश करने की कोशिश की जिसके तहत निजी टीवी चैनल टोलो की महिला प्रोस्तोता ने तालिबान अधिकारी का मंगलवार को कैमरे के सामने साक्षात्कार लिया, जिसकी पहले कल्पना तक नहीं की जा सकती थी।

वहीं , हिजाब पहनी महिलाओं ने काबुल में संक्षिप्त प्रदर्शन किया, इस दौरान उनके हाथों में तख्तियां थी जिसमें मांग की गई थी कि तालिबान महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से खत्म नहीं करे।

संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार मामलों के उच्चायुक्त के प्रवक्ता रुपर्ट कोलविले ने तालिबान शासन की प्रतिबद्धता और भय को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, ‘‘ ऐसे वादों का सम्मान किए जाने की जरूरत होगी और कुछ समय के लिए- पूर्व के इतिहास के मद्देनजर- इन घोषणाओं का आशंकाओं के साथ स्वागत किया गया है। गत दो दशक में मानवाधिकार के मोर्चे पर कई कठिन जीत हुई। सभी अफगानों के अधिकारों की रक्षा करनी होगी।’’

जर्मनी ने अफगानिस्तान के विकास के लिए दी जाने वाली मदद स्थगित कर दी है। एक अनुमान के तहत जर्मनी इस साल मदद के रूप में अफगानिस्तान को 29.4 करोड़ डॉलर की सहायता देता। जर्मन संवाद एजेंसी डीपीए ने बताया कि अफगानिस्तान एक देश के तौर पर बर्लिन से सबसे अधिक विकास के लिए सहायता प्राप्त करता है। इसके अलावा सुरक्षा सेवा एवं मानवीय सहायता के रूप में अलग से मदद दी जाती है।

स्वीडन के विकास सहायता मंत्री पेर ओल्लसन फ्रिड ने इस बीच डेगेन्स नइहतर नामक अखबार को दिए साक्षात्कार में कहा उनकी सरकार अफगानिस्तान को दी जाने वाली मदद की गति धीमी करेगी जबकि ब्रिटेन ने सहायता बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है।

ब्रिटिश विदेशमंत्री डोमिनिक राब ने कहा कि मानवीय सहायता 10 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि विकास और मानवीय कार्यों के लिए दी जाने वारी राशि को पुनर्गठित किया जाएगा और पूर्व में सुरक्षा के लिए निर्धारित कोई राशि तालिबान को नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि तालिबान शासन कैसे करेगा इस शर्त पर सहायता नहीं होगी।

अफगानिस्तान से निकलने के एकमात्र रास्ते काबुल हवाई अड्डे को मंगलवार को अमेरिकी सैनिकों की निगरानी में केवल सैन्य निकासी विमानों के लिए खोला गया। सोमवार को हजारों की संख्या में लोग देश छोड़ने के लिए हवाई अड्डे पर पहुंच गए थे जिसके बाद विमानों का परिचालन बंद कर दिया गया था, इस अफरा-तफरी में सात लोगों की मौत हुई थी।

इस बीच, मंगलवार को नाटो के अफगानिस्तान में वरिष्ठ असैन्य प्रतिनिधि स्टीफेनो पोंटेकार्वो ने वीडियो पोस्ट किया है जिसमें दिख रहा है कि हवाई अड्डे की उड़ान पट्टी खाली है और अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। तस्वीर में चेन से बनी सुरक्षा दीवार के पीछे सेना के मालवाहक विमान को देखा जा सकता है।

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘रनवे खुल गया है। मैं विमानों को उड़ान भरते और उतरते देख रहा हूं।’’

फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक रात में अमेरिकी नौसेना कमान का केसी-130जे हरक्युलिस विमान काबुल हवाई अड्डे पर उतरा और इसके बाद कतर स्थित अमेरिकी ठिकाने अल उदेद के लिए रवाना हो गया। यह अमेरिकी सेना के मध्य कमान का मुख्यालय है। ब्रिटिश सेना का मालवाहक विमान दुबई से काबुल के लिए रवाना हुआ है।

हालांकि, ऐसा लगता है कि अब भी स्थिति तनावपूर्ण है। अमेरिकी दूतावास काबुल हवाई अड्डे से काम कर रहा है। अमेरिका ने आह्वान किया है कि अमेरिकी देश छोड़ने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराएं लेकिन बिना संपर्क किए हवाई अड्डे पर नहीं आए।

वहीं, जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने कहा कि पहला जर्मन सैन्य परिवहन विमान काबुल उतरा है लेकिन दोबारा उड़ान भरने से पहले वह केवल सात लोगों को ही विमान में सवार करा सका। मंत्रालय ने कहा, ‘‘ हवाई अड्डे पर अफरा-तफरी के माहौल और पिछली रात से रास्तों पर हो रही गोलीबारी की वजह से जर्मन सेना की सुरक्षा के बिना जर्मन नागरिकों और अन्य का हवाई अड्डे तक पहुंचना संभव नहीं था।’’

TALIBAN
Afghanistan
Women
Women in Politics

Related Stories

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

माहवारी अवकाश : वरदान या अभिशाप?

भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी

पिछले 5 साल में भारत में 2 करोड़ महिलाएं नौकरियों से हुईं अलग- रिपोर्ट

तालिबान को सत्ता संभाले 200 से ज़्यादा दिन लेकिन लड़कियों को नहीं मिल पा रही शिक्षा

रूस पर बाइडेन के युद्ध की एशियाई दोष रेखाएं

काबुल में आगे बढ़ने को लेकर चीन की कूटनीति

रूस और यूक्रेन: हर मोर्चे पर डटीं महिलाएं युद्ध के विरोध में

विधानसभा चुनाव 2022: पहली बार चुनावी मैदान से विधानसभा का सफ़र तय करने वाली महिलाएं


बाकी खबरें

  • Anganwadi workers
    रौनक छाबड़ा
    हरियाणा: हड़ताली आंगनवाड़ी कार्यकार्ताओं के आंदोलन में अब किसान और छात्र भी जुड़ेंगे 
    08 Mar 2022
    आने वाले दिनों में सभी महिला कार्यबलों से सम्बद्ध यूनियनों की आस ‘संयुक्त महापंचायत’ पर लगी हुई है; इस संबंध में 10 मार्च को रोहतक में एक बैठक आहूत की गई है।
  • refugee crisis
    एपी
    रूस-यूक्रेन युद्ध अपडेट: संयुक्त राष्ट्र ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इसे यूरोप का सबसे बड़ा शरणार्थी संकट बताया 
    08 Mar 2022
    अमेरीका ने रूस से आयात होने वाले तेल पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनी मुहिम शुरू की, तो दूसरी तरफ जेलेंस्की ने रूस को चिकित्सा आपूर्ति मार्ग पर हुआ समझौता याद दिलाया।
  • राज कुमार
    गोवा चुनावः कौन जीतेगा चुनाव और किसकी बनेगी सरकार?
    08 Mar 2022
    इस बार भाजपा के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है क्योंकि तमाम विपक्षी दल भाजपा को हराने के लिए लड़े हैं और ये स्थिति कांग्रेस के पक्ष में जाती है।
  • privatization of railways
    सतीश भारतीय
    निजी ट्रेनें चलने से पहले पार्किंग और किराए में छूट जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं!
    08 Mar 2022
    रेलवे का निजीकरण गरीब और मध्यम वर्ग की जेब पर वजन लादने जैसा है। क्योंकि यही वर्ग व्यवसाय और आवाजाही के लिए सबसे ज्यादा रेलवे पर आश्रित है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की घटकर 50 हज़ार से कम हुई
    08 Mar 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 3,993 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.12 फ़ीसदी यानी 49 हज़ार 948 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License