NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
तालिबान ने झंडा फहराया, क्या हैं इसके मायने?
इसमें कोई शक नहीं कि अफ़ग़ानिस्तान में झंडा फहराना तालिबान का उस सत्ता पर दावा है जिस दावे के ज़रिए उनकी सरकार को उखाड़ फेंकने के 20 साल बाद वे सत्ताधारी अभिजात वर्ग के रूप में वापस लौट आए हैं, और यह एक ऐसी वास्तविकता है जिसे अमेरिका नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता है।
एम. के. भद्रकुमार
13 Sep 2021
Translated by महेश कुमार
तालिबान ने झंडा फहराया, क्या हैं इसके मायने?
मध्य प्रांतों के अफ़ग़ान आदिवासी नेताओं और धार्मिक विद्वानों तथा युवा नेताओं ने समावेशी सरकार बनाने के लिए काबुल में 11 सितंबर, 2021 के गठन के संबंध में पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई से मुलाकात की।

क्षेत्रीय राज्यों में प्रवेश  

तालिबान ने 11 सितंबर को काबुल में राष्ट्रपति भवन पर अपना काला और सफेद झंडा फहराया दिया है, यह तारीख न्यूयॉर्क और वाशिंगटन, डीसी पर अल-कायदा के हमले की बीसवीं वर्षगांठ की तारीख है। इस तरह के प्रतीकवाद को न भूलना काफी स्पष्ट है। हालाँकि 9/11 के हमलों में तालिबान का कोई हाथ नहीं था, लेकिन बावजूद इसके अफ़ग़ानिस्तान पर आक्रमण कर अमेरिका के बदला लेने की कार्रवाई की और उसे इसका खामियाजा उठान पड़ा था। 

इसमें कोई शक नहीं कि झंडा फहराना तालिबान का उस सत्ता पर दावा है क्योंकि उसकी सरकार को उखाड़ फेंकने के 20 साल बाद वे सत्ताधारी अभिजात वर्ग के रूप में वापस लौट आए हैं, और यह एक ऐसी वास्तविकता है जिसे अमेरिका भी नजरअंदाज नहीं कर सकता है।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के दैनिक ग्लोबल टाइम्स के साथ एक विशेष साक्षात्कार में, तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने खुलासा किया कि सरकार के गठन पर बातचीत अभी भी जारी है। उन्होंने जोर देकर कहा, "हम एक समावेशी सरकार में विश्वास करते हैं।" उन्होंने कहा कि सरकार के अंतिम स्वरूप का पता सितंबर-अक्टूबर के दौरान चलेगा।

पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई सरकार गठन को लेकर विचार-विमर्श में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। करज़ई ने इस बाबत मध्य प्रांतों के कई बुजुर्गों, धार्मिक विद्वानों और युवाओं की एक सभा की अध्यक्षता भी की है।

बैठक के बारे में बाद में एक ट्वीट के माध्यम से कहा गया है कि, 'बैठक के दौरान वक्ताओं ने देश में पूर्ण शांति और स्थिरता का आह्वान किया और उम्मीद जताई कि कार्यवाहक मंत्रिमंडल जल्द से जल्द समावेशी होगा और अफ़ग़ानिस्तान के सभी लोग इसका हिस्सा बनेंगे। सभा की राय का समर्थन करते हुए, पूर्व राष्ट्रपति ने देश की सुरक्षा और स्थिरता पर जोर दिया और कहा कि सरकार का समावेशी चेहरा पूरे देश के चेहरे को प्रतिबिंबित करेगा।

हज़ारा आबादी को तालिबान सरकार में प्रतिनिधित्व की उम्मीद है। तालिबान अन्य जातीय समूहों से भी बात कर रहा है।

इस बीच, काबुल में तालिबान सरकार से जुड़े मुद्दों को संबोधित करने के लिए एक क्षेत्रीय प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इस संबंध में पाकिस्तान ने पहल की है। इस प्रकार, पड़ोसी देशों अफ़ग़ानिस्तान - पाकिस्तान, ईरान, तुर्कमेनिस्तान, उजबेकिस्तान, ताजिकिस्तान और चीन की विदेश मंत्री स्तर की बैठक 8 सितंबर को आयोजित की गई थी।

विशेष रूप से, चीनी स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री वांग यी ने पड़ोसी देशों को 'अफ़ग़ानिस्तान को अराजकता से बाहर निकालने में ‘मदद' करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए और उस पर विचार-विमर्श में सक्रिय भूमिका निभाई है; चर्चा के मुद्दों में, 'हालात पर सकारात्मक प्रभाव डालना'; और, 'सभी जातीय समूहों और गुटों एकजुट करना, एक व्यापक और समावेशी राजनीतिक संरचना का निर्माण करना, उदार और विवेकपूर्ण घरेलू और विदेशी नीतियों का पालन करना, आतंकवादी ताकतों और सरकार के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचना और मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने और क्षेत्र के विकास के लिए अफ़ग़ान तालिबान का मार्गदर्शन करने का आग्रह करना था, खासकर पड़ोसी देशों से इस तरह का आग्रह किया गया है।'

वांग ने विदेश मंत्रियों को बताया कि तालिबान ने हाल ही में सरकार बनाने, आतंकवाद से लड़ने और अपने पड़ोसियों से दोस्ती करने जैसे मुद्दों पर सकारात्मक बयान दिए हैं। "हम बयानों का स्वागत करते हैं और मुख्य काम तो उन तमाम बयानों/दावों को ठोस कार्रवाई में बदलना है।" 

वांग ने रेखांकित किया कि अफ़ग़ानिस्तान की स्थिरता और उसके पुनर्निर्माण में पड़ोसी देशों की 'एक अच्छा बाहरी वातावरण प्रदान करने के लिए बहुत ही अनूठी भूमिका' है, ताकि वे अपनी वैध चिंताओं को भी दूर कर सके। 

बैठक का एक ठोस परिणाम यह निकला है कि विदेश मंत्रियों के फोरम को संस्थागत रूप दे दिया गया है। ईरान ने एक-एक महीने में अगली बैठक की मेजबानी करने की पेशकश की है।

निश्चित रूप से, ईरान का इस खेमे में आना खेल का रुख बदल सकता है। तेहरान सही रास्ते पर चल रहा है, अगली सरकार के गठन के बारे में गलतफहमियों को व्यक्त कर रहा है, और  तालिबान से बात करते हुए सीमा को खुला रख रहा है।

अफ़ग़ान स्थिति के संबंध में गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि माजिद तख्त-रवांची ने पंजशीर पर तालिबान के हमले की निंदा की है।

उनके शब्दों में, "पंजशीर में हालिया अन्यायपूर्ण हमला निंदनीय है और वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के भाईचारे की एकजुट स्थिति के विपरीत है, उनके अनुसार अफ़ग़ानिस्तान में सत्ता में आने वाली किसी भी सरकार को बल दिखाने के माध्यम से मान्यता नहीं दी जाएगी।"

तख्त-रवांची ने कहा कि स्थिरता, स्थायी शांति और सतत विकास का मार्ग सभी जातीय, भाषाई और धार्मिक समूहों की सक्रिय भागीदारी के साथ अफ़ग़ान की भीतरी वार्ता से होकर गुजरता है, जिसका उद्देश्य संकट का निष्पक्ष और स्थायी समाधान खोजना है और राष्ट्रीय सुलह हासिल करना है। उन्होंने मतदाताओं और उम्मीदवारों दोनों के रूप में महिलाओं की भागीदारी के साथ एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के माध्यम से एक सर्व-समावेशी सरकार के गठन की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

हालांकि, ईरान बहुत संयम के साथ काम कर रहा है, इसकी सर्वोच्च प्राथमिकता अफ़ग़ानिस्तान की स्थिरता है। ईरान के कैलकुलस में सुरक्षा संबंधी विचार सबसे ऊपर हैं। पिछले हफ्ते, आईआरजीसी के कुद्स फोर्स कमांडर इस्माइल कानी ने अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा स्थिति के बारे में संवेदनशील खुफिया विवरण साझा करते हुए, बंद दरवाजे के सत्र में व्यक्तिगत रूप से मजलिस को जानकारी दी थी।

बाद में, मजलिस के एक प्रवक्ता ने मीडिया को बताया कि तेहरान को अफ़ग़ानिस्तान के घटनाक्रम के बारे में "पूरी जानकारी" है और "हम इन घटनाओं के प्रति लापरवाह नहीं हो सकते हैं।" उन्होंने कहा कि जनरल कानी ने प्रासंगिक खुफिया दस्तावेजों के साथ "सटीकता और दृढ़ता से बात की थी।“

समय-समय पर, रिपोर्टें सामने आई हैं कि जनरल कानी (जिन्होंने पिछले साल बगदाद में अमेरिकी ड्रोन हमले में जनरल कासिम सुलेमानी का स्थान लिया था) अफ़ग़ानिस्तान पर तेहरान पर बातचीत के लिए प्रमुख व्यक्ति रहे हैं और तालिबान नेता सिराजुद्दीन हक्कानी के साथ उनके अच्छे संबंध हैं।

तेहरान ने चिंता व्यक्त की है कि अफ़ग़ानिस्तान में ईरान के खिलाफ सुन्नियों को खड़ा करने की बाहर से कुछ साजिशें चल रही हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह उन अरब देशों का परोक्ष संदर्भ है जो अफ़ग़ानिस्तान में एक बार फिर सक्रिय हैं, विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात (जो इज़राइल के साथ गठबंधन में है) और क़तर भी इसका हिस्सा है। ईरान को सीरिया में ऐसे क्षेत्रीय लाइन-अप का सामना करना पड़ा था जहां कतर, सऊदी अरब और यूएई ने अल-कायदा से जुड़े चरमपंथी समूहों को वित्त-पोषित और हथियारों से सुसज्जित किया था।

इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि ईरान ने आज इस्लामाबाद में रूस, चीन, ईरान और ताजिकिस्तान की खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बैठक के लिए पाकिस्तान के आईएसआई के प्रमुख जनरल फैज हमीद के निमंत्रण का जवाब दिया था।

समान रूप से, इस्लामाबाद में खुफिया प्रमुखों की बैठक में रूस की भागीदारी सुरक्षा मुद्दों पर पाकिस्तान के साथ समन्वय करने और तालिबान के साथ इस्लामाबाद के प्रभाव का लाभ उठाने के लिए मास्को के नए सिरे से रुचि को दर्शाती है, इसके बावजूद पंजशीर में विद्रोह के लिए इसका मौन राजनीतिक समर्थन है।

तालिबान सरकार को सॉफ्ट लैंडिंग कराने या बिना किसी अडचण के सरकार बनाने में पाकिस्तान कई स्तरों पर प्रयास कर रहा है। निश्चित रूप से, पाकिस्तानी उद्देश्य एक क्षेत्रीय सहमति को तेजी से विकसित करना होगा जिसमें तालिबान सरकार को मान्यता प्रदान करने पर एक सामान्य स्थिति बनाना शामिल होगा। निश्चित रूप से, चीन इन पाकिस्तानी पहलों का समर्थन कर रहा है।

एमके भद्रकुमार एक पूर्व राजनयिक हैं। वे उज़्बेकिस्तान और तुर्की में भारत के राजदूत रह चुके हैं। व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Reflections on Events in Afghanistan -15

Afghanistan
US
China
TALIBAN
Pakistan
Hamid Karzai
Suhail Shaheen

Related Stories

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

यूक्रेन में संघर्ष के चलते यूरोप में राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी

जम्मू-कश्मीर के भीतर आरक्षित सीटों का एक संक्षिप्त इतिहास

क्या दुनिया डॉलर की ग़ुलाम है?

छात्रों के ऋण को रद्द करना नस्लीय न्याय की दरकार है

सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति


बाकी खबरें

  • bhasha singh
    भाषा सिंह
    बात बोलेगी: सावित्री बाई फुले को याद करना, मतलब बुल्ली बाई की विकृत सोच पर हमला बोलना
    03 Jan 2022
    सवाल यह है कि जिन लोगों ने, सावित्री बाई फुले के ऊपर कीचड़ डाला था, उनके ख़िलाफ गंदी-अश्लील टिप्पणी की थी, वे 2022 में कहां हैं। वे पहले से अधिक खूंखार हो गये हैं, पहले से ज्यादा बड़े अपराधी—जिन्हें…
  • stop
    सोनिया यादव
    ‘बुल्ली बाई’: महिलाओं ने ‘ट्रोल’ करने के ख़िलाफ़ खोला मोर्चा
    03 Jan 2022
    मुस्लिम महिलाओं को ‘ट्रोल’ करने की कोशिश के बीच विपक्ष के साथ-साथ महिला संगठनों और आम लोगों ने सोशल मीडिया पर इस मामले में सरकार और पुलिस की सक्रियता और कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः एनएमसीएच के 84 डॉक्टर कोरोना पॉज़िटिव, मरीज़ों में कोरोना चेन बनने का ख़तरा
    03 Jan 2022
    एनएमसीएच में डॉक्टरों समेत 194 लोगों का सैंपल लिया गया था। 84 डॉक्टरों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद आशंका बढ़ गई है कि अस्पताल के कई मेडिकल स्टॉफ भी चपेट में आ सकते हैं।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : जारी है एचईसी मज़दूरों की हड़ताल, साथ आए सभी विपक्षी दल
    03 Jan 2022
    एचईसी के मज़दूरों के टूल डाउन और हड़ताल को एक महीना हो गया है और अभी भी वो जारी है, ऐसा एचईसी के इतिहास में पहली बार हुआ है।
  • covid
    ऋचा चिंतन
    नहीं पूरा हुआ वयस्कों के पूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य, केवल 63% को लगा कोरोना टीका
    03 Jan 2022
    पहले केंद्र ने दिसंबर 2021 के अंत तक भारत में सभी वयस्क आबादी के पूर्ण टीकाकरण के लक्ष्य को हासिल कर लेने का लक्ष्य घोषित किया था। जबकि हकीकत यह है कि करीब 9.73 करोड़ वयस्कों को अभी भी दोनों खुराक दी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License