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शिक्षक-छात्रों की जीत, हरियाणा में 1026 प्राइमरी स्कूल बंद करने का फ़ैसला वापस
हरियाणा सरकार ने कुछ महीने पहले राज्य के उन स्कूलों को बंद करने का फैसला किया था, जिसमें 25 से कम छात्र पढ़ते हैं। इसके बाद से ही शिक्षक और छात्र संगठन इसका विरोध कर रहे थे।
मुकुंद झा
09 Mar 2020
Haryana Primary school
Image courtesy: Indian express

हरियाणा के शिक्षकों के 15 मार्च के प्रदर्शन से पहले सरकार ने एक हज़ार से अधिक प्राइमरी स्कूलों को बंद करने का फ़ैसला वापस ले लिया । सरकार ने 1026 प्राइमरी स्कूलों को बंद करने का फ़ैसला लिया था। इसकी जानकरी मौलिक शिक्षा निदेशालय ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेज दी है।

इस संबंध में शुक्रवार को निदेशक मौलिक शिक्षा प्रदीप कुमार ने अध्यापक संघ के पदाधिकारियों से वार्ता भी की। उन्होंने बताया कि एक भी स्कूल बंद नहीं किया जाएगा। संघ का प्रतिनिधिमंडल राज्य अध्यक्ष सीएन भारती के नेतृत्व में प्रदीप कुमार से मिला। वार्ता के दौरान निदेशक ने आश्वासन दिया कि बिजली, वेतन व एक्स ग्रेशिया बजट एक सप्ताह में डाल दिया जाएगा। रेशनेलाइजेशन के बाद अप्रैल महीने में शिक्षकों के तबादले होंगे।

आपको बता दें कि हरियाणा सरकार ने कुछ महीने पहले राज्य के उन स्कूलों को बंद करने का फैसला किया था, जिसमें 25 से कम छात्र पढ़ते हैं। इसको लेकर सरकार ने एक सर्वे भी कराया था। इसके बाद 1026 स्कूलों की लिस्ट भी जारी की थी। जिसके बाद से ही शिक्षक और छात्र संगठन इसका विरोध कर रहे थे। इसके साथ ही शिक्षकों की कई अन्य मांगे हैं जिसको लेकर शिक्षक 15 मार्च को हरियाणा के शिक्षा मंत्री के यमुनानगर आवास और19 मार्च को दिल्ली में सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसमें देश के अन्य शिक्षक और छात्र संगठन शामिल होंगे।

शिक्षक संघ के राज्य अध्यक्ष सीएन भारती ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि वो इस सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं। लेकगिन इसके साथ ही उन्होंने इस बात की आशंका भी जताई की सरकार फिर इस तरह का प्रयास कर सकती हैं।

उन्होंने साफतौर पर कहा कि किसी भी स्कूल के बंद करने का आधार संख्या नहीं हो सकती है। सरकार को इस बात पर ध्यान देना चाहिए की बच्चे इन स्कूलों में क्यों नहीं जा रहे। उसपर ध्यान देकर उनको सुधारने की जरूरत है, न कि स्कूलों को बंद करने की, जिन स्कूलों को बंद करने की बात कही जा रही है। उनमें छोटे बच्चे पढ़ते हैं। सरकार कह रही है हम इनको कहीं और मर्ज कर देंगे लेकिन इतने छोटे बच्चो के लिए यात्रा करके दूर जाना संभव नहीं होगा।

इसके साथ ही भारती ने कहा कि हरियाणा में शिक्षा के हालत बहुत खराब है, शिक्षक छात्र अनुपात को ठीक करने की ज़रूरत है। इसके साथ ही प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती नहीं हो रही है। आखिरी भर्ती वर्ष 2012 में हुई थी जबकि इस दौरान छात्रों की संख्या लगातर बढ़ी है। इसके अलावा सरकार को आधारभूत ढांचे पर काम करने की जरूरत हैं ,जो सरकार नहीं कर रही है।

जिसको लेकर हरियाणा पंजाब हाई कोर्ट ने भी हरियाणा सरकार को फटकार लगाई और 2 जून तक शिक्षकों की भर्ती करने के आदेश दिए हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीने से स्कूलों में मूलभूत खर्चे जैसे बिजली,वेतन व एक्स ग्रेशिया बजट नहीं दिया गया है। इसके साथ ही शिक्षकों के तबादले नहीं हो रहे है। इसमें भारी भ्रष्टाचार है, पिछले तीन वर्षों से लंबित मौलिक शिक्षा फंड, वर्दी भत्ता व प्रोत्साहन राशि जारी नहीं की गई। जिससे स्कूलों के संचालन में भारी समस्या हो रही है। सरकार हर वर्ष शिक्षा के बजट में कटौती कर रही है।

भारती ने बताया कि हरियाणा में 14 हज़ार सरकारी प्राथमिक विद्धालय हैं, उनमें एक में भी कोई सफाई कर्मचारी नहीं है। इसके साथ ही क्लर्क की भी भारी कमी है जिसके कारण वो काम भी शिक्षकों को ही करना पड़ता है।

चुनाव में बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि राज्य में 10वीं तक जीरो ड्रॉप आउट रेट होने के लिए कदम उठाए जाएंगे। बीजेपी डिजिटल लिटरेसी मिशन की शुरुआत करेगी, जिसके तहत हरियाणा के प्रत्येक ब्लॉक में डिजिटल लैब नेटवर्क का निर्माण किया जाएगा।
लेकिन चुनाव के बाद यह सब दावे खोखले दिख रहे हैं, शिक्षक संघ ने इसको लेकर कहा है कि सरकार इन वादों को पूरा करने के लिए ज़मीन पर कोई काम नहीं कर रही है।उनका कहना है कि स्कूल की हकीकत वाकई में परेशान करने वाली है।

हरियाणा में लगातार खराब होती शिक्षा व्यवस्था !

अगर हम आंकड़ों को देखें तो हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर की सरकार आने के बाद से शिक्षा में किए जाने वाले खर्च में गिरावट आई है। 2010-11 में जहां हरियाणा अपने कुल बजट का 17.3 प्रतिशत खर्च शिक्षा पर कर रहा था तो 2013-14 में यह घटकर 15.4 प्रतिशत हो गया। 2014-15 में 16.9 प्रतिशत था। उसके बाद 2015-16, 2016-17, 2017-18, 2018-19 और 2019-20 में यह क्रमश: 12.3, 13.7, 13.4, 13.2, 13.0 प्रतिशत है।

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स्टेट फाइनेंस: रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया

सक्षम हरियाणा एजुकेशन पोर्टल के अनुसार पूरे राज्यभर में स्कूलों में 1 लाख 49 हजार पदों की स्वीकृति है जिसमें से 41 हजार पद रिक्त हैं। ऐसे इतनी बड़ी संख्या में पद रिक्त होने से प्रदेश के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर सीधा असर होता है।

प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन की रिपोर्ट "असर" के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में बड़ी संख्या में मिश्रित कक्षाएं चल रही, रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश के 41 प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 2 के बच्चे एक या अधिक अन्य कक्षाओं के साथ बैठ रहे है और 36 प्रतिशत विद्यालयों में कक्षा 4 के बच्चे अन्य कक्षाओं के साथ बैठ रहे है और इसके साथ ही मिश्रित कक्षाओं के मामले में उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी यही समान स्थिति है। मिश्रित कक्षाओं के यह आंकड़े बताते हैं कि स्कूलों में भारी संख्या में टीचरों की कमी के साथ साथ स्कूलों में कमरों की भी कमी है।

Haryana
Primary School
Primary education
Haryana Government
Manohar Lal khattar

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